*देश आज मना रहा अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस* लाल किले से पीएम मोदी का देश को संबोधन, आज हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा PM मोदी, स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, देश नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा देश के महान सपूतों को नमन, देश उत्साह और शौर्य के साथ आगे बढ़ रहा, लाल किला पर पहली बार वंदे मातरम गूंजा, बाढ़, भूस्खलन से कई परिवार प्रभावित हुए, पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं : PM मोदी *देश आज मना रहा अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस* लाल किले से पीएम मोदी का देश को संबोधन, आज हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा PM मोदी, स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, देश नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा देश के महान सपूतों को नमन, देश उत्साह और शौर्य के साथ आगे बढ़ रहा, लाल किला पर पहली बार वंदे मातरम गूंजा, बाढ़, भूस्खलन से कई परिवार प्रभावित हुए, पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं : PM मोदी
*देश आज मना रहा अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस* लाल किले से पीएम मोदी का देश को संबोधन, आज हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा PM मोदी, स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, देश नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा देश के महान सपूतों को नमन, देश उत्साह और शौर्य के साथ आगे बढ़ रहा, लाल किला पर पहली बार वंदे मातरम गूंजा, बाढ़, भूस्खलन से कई परिवार प्रभावित हुए, पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं : PM मोदी *देश आज मना रहा अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस* लाल किले से पीएम मोदी का देश को संबोधन, आज हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा PM मोदी, स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, देश नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा देश के महान सपूतों को नमन, देश उत्साह और शौर्य के साथ आगे बढ़ रहा, लाल किला पर पहली बार वंदे मातरम गूंजा, बाढ़, भूस्खलन से कई परिवार प्रभावित हुए, पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं : PM मोदी
- *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है? *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?1
- *प्रयागराज के कोराव थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिवार की दोपहर नदी के ऊपर बने भोगन पुल पर साइकिल चला रहा एक लड़का अचानक अनियंत्रित होकर साइकिल सहित नदी मे डूब गया। गांव के ही कुछ लोगों ने उसे डूबता देख उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी का दबाव इतना अधिक था की उसके पता नहीं चल सका। कुछ ही पलों मे पूरा गांव पुल पर इकठ्ठा हो गया। सूचना मिलते ही कोरांव थाने की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और उसके बाद NDRF की टीम भी पहुंची और लड़के की तलाश मे जुट गई।* *फिर लोगों द्वारा पता लगाया गया की जो लड़का डूबा है उसका नाम मोनू चौबे पुत्र आदित्य चौबे है और वो ग्राम पंचायत ख़िवली पोस्ट बड़ोखर थाना कोराव का रहने वाला है।* *प्रयागराज के कोराव थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिवार की दोपहर नदी के ऊपर बने भोगन पुल पर साइकिल चला रहा एक लड़का अचानक अनियंत्रित होकर साइकिल सहित नदी मे डूब गया। गांव के ही कुछ लोगों ने उसे डूबता देख उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी का दबाव इतना अधिक था की उसके पता नहीं चल सका। कुछ ही पलों मे पूरा गांव पुल पर इकठ्ठा हो गया। सूचना मिलते ही कोरांव थाने की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और उसके बाद NDRF की टीम भी पहुंची और लड़के की तलाश मे जुट गई।* *फिर लोगों द्वारा पता लगाया गया की जो लड़का डूबा है उसका नाम मोनू चौबे पुत्र आदित्य चौबे है और वो ग्राम पंचायत ख़िवली पोस्ट बड़ोखर थाना कोराव का रहने वाला है।*1
- *देश आज मना रहा अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस* लाल किले से पीएम मोदी का देश को संबोधन, आज हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा PM मोदी, स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, देश नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा देश के महान सपूतों को नमन, देश उत्साह और शौर्य के साथ आगे बढ़ रहा, लाल किला पर पहली बार वंदे मातरम गूंजा, बाढ़, भूस्खलन से कई परिवार प्रभावित हुए, पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं : PM मोदी *देश आज मना रहा अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस* लाल किले से पीएम मोदी का देश को संबोधन, आज हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा PM मोदी, स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, देश नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा देश के महान सपूतों को नमन, देश उत्साह और शौर्य के साथ आगे बढ़ रहा, लाल किला पर पहली बार वंदे मातरम गूंजा, बाढ़, भूस्खलन से कई परिवार प्रभावित हुए, पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं : PM मोदी1
- मांडा खास RSJD इंस्टीट्यूट व शक्ति डिजिटल लाइब्रेरी में बहुत ही धूमधाम से 80 वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया1
- *प्रयागराज के कोराव थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिवार की दोपहर नदी के ऊपर बने भोगन पुल पर साइकिल चला रहा एक लड़का अचानक अनियंत्रित होकर साइकिल सहित नदी मे डूब गया। *प्रयागराज के कोराव थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिवार की दोपहर नदी के ऊपर बने भोगन पुल पर साइकिल चला रहा एक लड़का अचानक अनियंत्रित होकर साइकिल सहित नदी मे डूब गया। गांव के ही कुछ लोगों ने उसे डूबता देख उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी का दबाव इतना अधिक था की उसके पता नहीं चल सका। कुछ ही पलों मे पूरा गांव पुल पर इकठ्ठा हो गया। सूचना मिलते ही कोरांव थाने की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और उसके बाद NDRF की टीम भी पहुंची और लड़के की तलाश मे जुट गई।* *फिर लोगों द्वारा पता लगाया गया की जो लड़का डूबा है उसका नाम मोनू चौबे पुत्र आदित्य चौबे है और वो ग्राम पंचायत ख़िवली पोस्ट बड़ोखर थाना कोराव का रहने वाला है।*1
- प्रयागराज के बारा तहसील के उपजिलाधिकारी के द्वारा गाया प्रयागराज के बारा तहसील के उपजिलाधिकारी के द्वारा गाया1
- नाजरेथ हॉस्पिटल में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस, SDM ने किया ध्वजारोहण। नाजरेथ हॉस्पिटल में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस, SDM ने किया ध्वजारोहण प्रयागराज शहर में नाजरेथ हॉस्पिटल* में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में हॉस्पिटल प्रशासन, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और नाजरेथ स्कूल ऑफ नर्सिंग की छात्राएँ मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत नर्सिंग स्कूल की क्वायर के प्रार्थना गीत से हुई। सहायक निदेशक रेव. फादर चिन्नप्पा ने स्वागत भाषण दिया। प्रशासक रेव. फादर इसिडोर डी सूजा ने मुख्य अतिथि SDM सदर अंकित कुमार वर्मा का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। गायन मंडली ने "वंदे मातरम्" प्रस्तुत किया। समारोह का मुख्य आकर्षण SDM अंकित कुमार वर्मा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराना रहा। उन्होंने कहा कि हर नागरिक का राष्ट्र के प्रति दायित्व है और नाजरेथ हॉस्पिटल की स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना की। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को करुणा और समर्पण से सेवा करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में मैट्रन रेव. सिस्टर प्रीमा, प्रिंसिपल सिस्टर अल्वीना, डॉ. अशोक अग्रवाल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। अंत में अन्ना मेरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।4
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।1