उमरिया जिले में अवैध शराब का कारोबार अब केवल गैरकानूनी गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक पतन की एक भयावह तस्वीर बन गया है। पाली थाना क्षेत्र सहित ग्रामीण अंचलों में दोपहिया वाहनों के जरिए गांव-गांव शराब की पैकारी होने के आरोपों ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस नशे के खुलेआम फैलते कारोबार पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी अब लोगों को खटकने लगी है, और युवाओं का भविष्य खतरे में बताया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा नई शराब नीति लागू कर सख्ती के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। बिरसिहपुर पाली के लाइसेंसी शराब ठेकेदार प्रकाश सिंह के मातहत कर्मचारियों पर गांव-गांव तक अवैध पैकारी करवाने और सोशल मीडिया पर वायरल होने के आरोप हैं। सरकारी फरमानों से भले ही कागजों में अहाते बंद हो गए हों, मगर शराब दुकानों के आसपास खुलेआम जाम छलकाए जा रहे हैं। गांवों की गलियों से लेकर कस्बों के चौक-चौराहों तक नशे का जाल तेजी से फैलता जा रहा है, जिसमें सबसे चिंताजनक रूप से युवा और विद्यार्थी भी तेजी से धंसते जा रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के गुर्गे दिन-रात गांवों और मोहल्लों तक शराब पहुंचा रहे हैं, जबकि कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है। यह सवाल भी उठ रहा है कि जब पुलिस का खुफिया तंत्र छोटी-छोटी गतिविधियों पर नजर रख सकता है, तो खुलेआम चल रही अवैध शराब की पैकारी आखिर उसे क्यों नहीं दिखाई दे रही। लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा नेटवर्क संचालित होना संभव नहीं, और सिस्टम नशे के सौदागरों पर मेहरबान है। बढ़ती नशाखोरी का असर अब समाज पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहां परिवार टूट रहे हैं, घरेलू विवाद बढ़ रहे हैं, और सड़क हादसों व अपराधों में इजाफा हो रहा है। कई घर आर्थिक बर्बादी की कगार पर पहुँच चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं। शहर से लेकर गांव तक यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा। हालांकि हाल के दिनों में कलेक्टर के निर्देश पर कुछ स्थानों पर कार्रवाई जरूर हुई थी, लेकिन लोगों का कहना है कि यह केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, और ग्रामीण इलाकों में आज भी खुलेआम शराब बिक रही है। आमजन ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से अवैध शराब कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर गांव-गांव हो रही पैकारी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदी रखीं तो यह जनाक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
उमरिया जिले में अवैध शराब का कारोबार अब केवल गैरकानूनी गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक पतन की एक भयावह तस्वीर बन गया है। पाली थाना क्षेत्र सहित ग्रामीण अंचलों में दोपहिया वाहनों के जरिए गांव-गांव शराब की पैकारी होने के आरोपों ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस नशे के खुलेआम फैलते कारोबार पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी अब लोगों को खटकने लगी है, और युवाओं का भविष्य खतरे में बताया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा नई शराब नीति लागू कर सख्ती के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। बिरसिहपुर पाली के लाइसेंसी शराब ठेकेदार प्रकाश सिंह के मातहत कर्मचारियों पर गांव-गांव तक अवैध पैकारी करवाने और सोशल मीडिया पर वायरल होने के आरोप हैं। सरकारी फरमानों से भले ही कागजों में अहाते बंद हो गए हों, मगर शराब दुकानों के आसपास खुलेआम जाम छलकाए जा रहे हैं। गांवों की गलियों से लेकर कस्बों के चौक-चौराहों तक नशे का जाल तेजी से फैलता जा रहा है, जिसमें सबसे चिंताजनक रूप से युवा और विद्यार्थी भी तेजी से धंसते जा रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के गुर्गे दिन-रात गांवों और मोहल्लों तक शराब पहुंचा रहे हैं, जबकि कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है। यह सवाल भी उठ
रहा है कि जब पुलिस का खुफिया तंत्र छोटी-छोटी गतिविधियों पर नजर रख सकता है, तो खुलेआम चल रही अवैध शराब की पैकारी आखिर उसे क्यों नहीं दिखाई दे रही। लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा नेटवर्क संचालित होना संभव नहीं, और सिस्टम नशे के सौदागरों पर मेहरबान है। बढ़ती नशाखोरी का असर अब समाज पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहां परिवार टूट रहे हैं, घरेलू विवाद बढ़ रहे हैं, और सड़क हादसों व अपराधों में इजाफा हो रहा है। कई घर आर्थिक बर्बादी की कगार पर पहुँच चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार विभाग मौन साधे हुए हैं। शहर से लेकर गांव तक यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा। हालांकि हाल के दिनों में कलेक्टर के निर्देश पर कुछ स्थानों पर कार्रवाई जरूर हुई थी, लेकिन लोगों का कहना है कि यह केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, और ग्रामीण इलाकों में आज भी खुलेआम शराब बिक रही है। आमजन ने जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से अवैध शराब कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर गांव-गांव हो रही पैकारी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदी रखीं तो यह जनाक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
- शहडोल जिले के कोतवाली थाने में मारपीट और गाली-गलौज का एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शनिवार को लगभग 1:00 बजे जानकारी देते हुए बताया कि वार्ड क्रमांक 35 के फरियादी आकाश खटीक ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। आकाश खटीक की शिकायत के अनुसार, आरोपी बहीद मुसलमान ने आपसी बात को लेकर उनसे गाली-गलौज की और मारपीट की। पुलिस ने फरियादी की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया है।1
- डिंडोरी के नर्मदा डैम घाट पर आयोजित ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर में बच्चों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम ने आपदा प्रबंधन और तैराकी का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया। टीम लीडर सब इंस्पेक्टर शिवराज पेंद्रो के नेतृत्व में, बच्चों को लाइफ जैकेट पहनने का सही तरीका सिखाया गया और नदी में सुरक्षित तैराकी का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान, प्रतिभागियों को बाढ़ और जल दुर्घटनाओं के समय बचाव के उपाय, डूबते हुए व्यक्ति की मदद करने के तरीके, और रस्सी की सहायता से लोगों को सुरक्षित निकालने की विभिन्न तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। खेल प्रशिक्षक चेतराम अहिरवार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह का प्रशिक्षण बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाता है और उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एसडीआरएफ और खेल विभाग के कई अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।1
- डिंडोरी जिले में नगरीय प्रशासन पुलिस के सहयोग से जिला मुख्यालय रानी अवंतीबाई चौराहा राज्य परिवहन बस स्टैंड प्रांगण और मुख्य मार्ग के किनारे अवैध रूप से लगाई गई दुकानों को हटाने की कार्रवाई कर रहा है। नगर परिषद डिंडोरी ने प्रतिबंधित क्षेत्र मुख्य मार्ग पर दुकान चलाने वाले अतिक्रमणकारियों को तत्काल दुकानें हटाने के निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन, पुलिस विभाग के साथ मिलकर मुख्य मार्ग के दोनों ओर तथा राज्य परिवहन बस स्टैंड प्रांगण और रानी अवंतीबाई स्मारक स्थल को अतिक्रमण मुक्त रखने का प्रयास कर रहे हैं। इन स्थानों पर बिना अनुमति दुकानें संचालित करने वाले छोटे व्यापारियों को विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। मुख्य मार्ग के किनारे चलने वाली इन दुकानों से यातायात बाधित होता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है और आवागमन में राहगीरों व वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के निवारण के लिए नगर परिषद डिंडोरी ने मुख्य मार्ग से दुकान संचालन की एक निश्चित दूरी तय की है। यदि संबंधित दुकानदार इन निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो नगरीय प्रशासन द्वारा उनकी संपत्ति और सामग्री ज़ब्त करने की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।1
- उमरिया, मध्य प्रदेश में कलेक्टर राखी सहाय ने सड़क हादसे में घायल हुए लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।1
- डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।2
- डिंडोरी जिला मुख्यालय स्थित शांति धाम में गंभीर अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं, जिसके लिए नगरीय प्रशासन की घोर लापरवाही को मुख्य कारण बताया जा रहा है। इस उपेक्षा के चलते शांति धाम में असामाजिक तत्वों का डेरा जम गया है। असामाजिक तत्वों द्वारा शांति धाम के भीतर अवैध गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं, जिससे इलाके की शांति भंग होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। देखरेख के अभाव में, यहाँ बैठक के लिए लगाई गई रेस्टिंग चेयर भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं और परिसर में भारी मात्रा में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इतना ही नहीं, छाँव के लिए बनाए गए टिन शेड से भी लगातार टिन की चादरें गायब हो रही हैं। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि जिला मुख्यालय के एकमात्र शांति धाम होने के बावजूद नगर परिषद डिंडोरी द्वारा इस पर नियमित रूप से ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है। शांति धाम में व्याप्त इन अव्यवस्थाओं के मद्देनजर, क्षेत्रीय लोगों ने सुरक्षा कारणों से यहाँ एक चौकीदार की नियुक्ति की तत्काल मांग की है।1
- डिंडौरी जिले के ग्राम घुसिया के ढीमर टोला में लंबे समय से व्याप्त पेयजल संकट का समाधान होने के बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे ग्रामीण कुएं में उतरकर कटोरी से पानी निकालने को मजबूर थे, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। यह मामला सामने आने के बाद कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया तुरंत गांव पहुंचीं और ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्या को गहराई से समझा। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि गांव की नल-जल योजना लंबे समय से बंद पड़ी थी, जिसके चलते गर्मियों में पीने के पानी की बेहद किल्लत बनी हुई थी। इस संबंध में जनसुनवाई में भी आवेदन दिया गया था। कलेक्टर के तत्काल निर्देशों पर बंद पड़ी बोरिंग में नई मोटर लगाई गई और उसे दोबारा चालू कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप ढीमर टोला में पानी की आपूर्ति फिर से शुरू हो गई। पानी की व्यवस्था बहाल होने के बाद कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मौके पर ही पानी की उपलब्धता का निरीक्षण किया और ग्रामीण बच्चों को अपने हाथों से पानी पिलाकर उन्हें स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता का संदेश दिया। पानी मिलने से ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने जिला प्रशासन के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने संतोष जताते हुए कहा कि अब उन्हें पानी के लिए कुएं में उतरने की मजबूरी नहीं होगी। उन्होंने कलेक्टर की त्वरित और प्रभावी पहल की सराहना करते हुए जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया।1
- समनापुर क्षेत्र में नौतपा के दौरान हुई बारिश ने गर्मी का असर काफी कम कर दिया है। इस बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान भी इस बारिश को फायदेमंद मान रहे हैं, क्योंकि इससे खेतों में नमी बढ़ी है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में भी मदद मिलेगी।1
- डिंडोरी जिले के शहपुरा थाना क्षेत्र में स्थित जबलपुर-अमरकंटक मार्ग पर, कृष्णा पेट्रोल पंप के पास आज एक भीषण सड़क हादसा हुआ। जानकारी के अनुसार, एक तेज रफ्तार कार ने पहले दूसरी कार को टक्कर मारी और फिर अनियंत्रित होकर सामने खड़े एक ट्रक में जा घुसी। इस जोरदार टक्कर के परिणामस्वरूप, कार में सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग मदद के लिए जमा हो गए। उन्होंने तुरंत घायलों को शहपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। चिकित्सकों ने घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए, प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना की सूचना मिलते ही शहपुरा पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और उनका कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।4