रायबरेली:नोयडा में मजदूर दमन के खिलाफ ऐक्टू ने खोला मोर्चा, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग रिपोर्ट- सागर तिवारी रायबरेली: ऑल इण्डिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने नोएडा में चल रहे मजदूर आंदोलन पर पुलिसिया दमन और श्रम अधिकारों के हनन को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया है। राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में यूनियन ने आरोप लगाया कि नोएडा की विभिन्न कंपनियों (जैसे डिक्सन, लावा, रेनबो फैबआर्ट) में न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे मजदूरों पर आरएएफ और पीएसी के जरिए लाठीचार्ज कर आंदोलन को कुचला जा रहा है। यूनियन का कहना है कि मजदूरों को मात्र ₹11,000 में 12-12 घंटे काम करने पर मजबूर किया जा रहा है और उन्हें ईएसआई, पीएफ जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। ऐक्टू ने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं: हिंसा की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग का गठन। गिरफ्तार मजदूरों और नेताओं की बिना शर्त रिहाई। प्रदेश में 8 घंटे काम की न्यूनतम मजदूरी ₹34,000 निर्धारित करना। दमन के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल हटाना और नए लेबर कोड को रद्द करना। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मजदूरों का उत्पीड़न नहीं रुका और उनकी न्यायोचित मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
रायबरेली:नोयडा में मजदूर दमन के खिलाफ ऐक्टू ने खोला मोर्चा, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग रिपोर्ट- सागर तिवारी रायबरेली: ऑल इण्डिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने नोएडा में चल रहे मजदूर आंदोलन पर पुलिसिया दमन और श्रम अधिकारों के हनन को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया है। राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में यूनियन ने आरोप लगाया कि नोएडा की विभिन्न कंपनियों (जैसे डिक्सन, लावा, रेनबो फैबआर्ट) में न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे मजदूरों पर आरएएफ और पीएसी के जरिए लाठीचार्ज कर आंदोलन को कुचला जा रहा है। यूनियन का कहना है कि मजदूरों को मात्र ₹11,000 में 12-12 घंटे काम करने पर मजबूर किया जा रहा है और उन्हें ईएसआई, पीएफ जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। ऐक्टू ने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं: हिंसा की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग का गठन। गिरफ्तार मजदूरों और नेताओं की बिना शर्त रिहाई। प्रदेश में 8 घंटे काम की न्यूनतम मजदूरी ₹34,000 निर्धारित करना। दमन के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल हटाना और नए लेबर कोड को रद्द करना। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मजदूरों का उत्पीड़न नहीं रुका और उनकी न्यायोचित मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
- ऊंचाहार (रायबरेली): तहसील क्षेत्र के चंड़रई चौराहे के पास उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक किसान के खेत में अज्ञात कारणों से भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के खेतों में खड़ी फसलों पर खतरा मंडराने लगा। घटना की सूचना मिलते ही पीआरबी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। स्थानीय ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड की टीम के साथ मिलकर पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि समय रहते सक्रियता दिखाने के कारण इस अग्निकांड में किसी भी प्रकार की जनहानि या बड़ी आर्थिक क्षति नहीं हुई है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।1
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- प्रयागराज (अरैल घाट) प्रयागराज के अरैल घाट पर आगामी दिनों में एक बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। जानकारी के अनुसार, यहां 21, 22 और 23 अप्रैल को तीन दिवसीय कथा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में “बागेश्वर धाम सरकार” के संगम की बात कही जा रही है, साथ ही एक दिन दिव्य दरबार भी लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्यक्रम को लेकर स्थल पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।1
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- रायबरेली: ऑल इण्डिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने नोएडा में चल रहे मजदूर आंदोलन पर पुलिसिया दमन और श्रम अधिकारों के हनन को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया है। राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में यूनियन ने आरोप लगाया कि नोएडा की विभिन्न कंपनियों (जैसे डिक्सन, लावा, रेनबो फैबआर्ट) में न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे मजदूरों पर आरएएफ और पीएसी के जरिए लाठीचार्ज कर आंदोलन को कुचला जा रहा है। यूनियन का कहना है कि मजदूरों को मात्र ₹11,000 में 12-12 घंटे काम करने पर मजबूर किया जा रहा है और उन्हें ईएसआई, पीएफ जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। ऐक्टू ने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं: हिंसा की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग का गठन। गिरफ्तार मजदूरों और नेताओं की बिना शर्त रिहाई। प्रदेश में 8 घंटे काम की न्यूनतम मजदूरी ₹34,000 निर्धारित करना। दमन के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल हटाना और नए लेबर कोड को रद्द करना। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मजदूरों का उत्पीड़न नहीं रुका और उनकी न्यायोचित मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।1
- Post by प्रदुम कुमार मीडिया कौशाम्बी1
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