मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हेलीकॉप्टर में बैठने के लिए राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार को सरपट दौड़ लगानी पड़ी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर जमकर चटखारे ले रहे हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव टीकमगढ़ में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, जिसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से खजुराहो के लिए रवाना होना था। मुख्यमंत्री अपने लाव-लश्कर के साथ हेलीपैड पहुंचे और हेलीकॉप्टर में सवार हो गए। रवानगी का समय होने के कारण हेलीकॉप्टर के पंखे भी घूमने शुरू हो चुके थे, लेकिन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार वीआईपी काफिले में थोड़ा पीछे छूट गए थे। जब उन्हें अहसास हुआ कि हेलीकॉप्टर उड़ान भरने ही वाला है, तो उन्होंने आव देखा न ताव और हेलीपैड की तरफ दौड़ लगा दी। सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहे इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुर्ता-पायजामा पहने राज्यमंत्री पूरी ताकत से हेलीकॉप्टर की तरफ भाग रहे हैं और उनके पीछे सुरक्षाकर्मी भी दौड़ते नजर आ रहे हैं। आमतौर पर मंत्रियों के आगे-पीछे सुरक्षाकर्मियों और अफसरों की फौज दौड़ती है, लेकिन यहां खुद मंत्री जी को दौड़ते देख वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। गनीमत रही कि मंत्री जी समय रहते हेलीकॉप्टर तक पहुंच गए और सुरक्षित सवार होकर मुख्यमंत्री के साथ रवाना हो गए।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हेलीकॉप्टर में बैठने के लिए राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार को सरपट दौड़ लगानी पड़ी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर जमकर चटखारे ले रहे हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव टीकमगढ़ में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, जिसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से खजुराहो के लिए रवाना होना था। मुख्यमंत्री अपने लाव-लश्कर के साथ हेलीपैड पहुंचे और हेलीकॉप्टर में सवार हो गए। रवानगी का समय होने के कारण हेलीकॉप्टर के पंखे भी घूमने शुरू हो चुके थे, लेकिन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार वीआईपी काफिले में थोड़ा पीछे छूट गए थे। जब उन्हें अहसास हुआ कि हेलीकॉप्टर उड़ान भरने ही वाला है, तो उन्होंने आव देखा न ताव और हेलीपैड की तरफ दौड़ लगा दी। सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहे इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुर्ता-पायजामा पहने राज्यमंत्री पूरी ताकत से हेलीकॉप्टर की तरफ भाग रहे हैं और उनके पीछे सुरक्षाकर्मी भी दौड़ते नजर आ रहे हैं। आमतौर पर मंत्रियों के आगे-पीछे सुरक्षाकर्मियों और अफसरों की फौज दौड़ती है, लेकिन यहां खुद मंत्री जी को दौड़ते देख वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। गनीमत रही कि मंत्री जी समय रहते हेलीकॉप्टर तक पहुंच गए और सुरक्षित सवार होकर मुख्यमंत्री के साथ रवाना हो गए।
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हेलीकॉप्टर में बैठने के लिए राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार को सरपट दौड़ लगानी पड़ी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर जमकर चटखारे ले रहे हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव टीकमगढ़ में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, जिसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से खजुराहो के लिए रवाना होना था। मुख्यमंत्री अपने लाव-लश्कर के साथ हेलीपैड पहुंचे और हेलीकॉप्टर में सवार हो गए। रवानगी का समय होने के कारण हेलीकॉप्टर के पंखे भी घूमने शुरू हो चुके थे, लेकिन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार वीआईपी काफिले में थोड़ा पीछे छूट गए थे। जब उन्हें अहसास हुआ कि हेलीकॉप्टर उड़ान भरने ही वाला है, तो उन्होंने आव देखा न ताव और हेलीपैड की तरफ दौड़ लगा दी। सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहे इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुर्ता-पायजामा पहने राज्यमंत्री पूरी ताकत से हेलीकॉप्टर की तरफ भाग रहे हैं और उनके पीछे सुरक्षाकर्मी भी दौड़ते नजर आ रहे हैं। आमतौर पर मंत्रियों के आगे-पीछे सुरक्षाकर्मियों और अफसरों की फौज दौड़ती है, लेकिन यहां खुद मंत्री जी को दौड़ते देख वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। गनीमत रही कि मंत्री जी समय रहते हेलीकॉप्टर तक पहुंच गए और सुरक्षित सवार होकर मुख्यमंत्री के साथ रवाना हो गए।1
- टीकमगढ़ जिले के पलेरा थाना क्षेत्र अंतर्गत बन्ने बुजुर्ग गांव में 20 दिन की एक मासूम बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना के बाद से पूरे गांव में शोक का माहौल पसरा हुआ है और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। घटना की जानकारी मिलते ही जतारा एसडीओपी अभिषेक गौतम के नेतृत्व में पुलिस बल और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ कर साक्ष्य जुटाए हैं। मृत बच्ची के शव का पोस्टमार्टम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पलेरा में कराया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।2
- टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन पर आयोजित मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने के बाद भी टीकमगढ़ के कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला को बोलने का मौका नहीं दिया गया। इस कार्यक्रम में बोलने का अवसर न मिलने पर विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने मीडिया से रूबरू होकर अपनी बात कही है।1
- ललितपुर जिले के मड़ावरा थाना कोतवाली क्षेत्र के ग्राम लुहर्रा में एक विधवा महिला के घर में घुसकर छेड़छाड़ और जबरदस्ती करने का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि शनिवार की रात करीब 12:30 बजे जब वह अपने बच्चों के साथ सो रही थी, तभी गांव का ही एक युवक उसके दरवाजे पर पहुंचा और प्यास लगने की बात कहकर पानी मांगा। मानवता के नाते महिला ने दरवाजा खोलकर उसे पानी पिला दिया। पानी पीने के बाद युवक वहां से चला गया, लेकिन थोड़ी देर बाद मौका पाकर दोबारा घर में घुस गया। महिला का आरोप है कि घर में घुसने के बाद युवक ने उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं और जबरदस्ती करने की कोशिश की। महिला के विरोध करने और शोर मचाने पर उसके बच्चे भी जाग गए और उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया। बच्चों के जागने और हल्ला होने पर आरोपी युवक महिला और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गया। इस घटना के बाद से ही आरोपी पक्ष द्वारा लगातार पीड़िता पर दबाव बनाया जा रहा है और शिकायत वापस लेने के लिए धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पीड़ित परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है। पीड़िता ने मुख्यमंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और धमकी देने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।1
- मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा नशामुक्ति के उद्देश्य से 15 जुलाई से 30 जुलाई तक "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत छतरपुर पुलिस द्वारा जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को नशे के गंभीर दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना है। अभियान के चौथे दिन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य पटले के मार्गदर्शन में जिले के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों और चिन्हित हॉटस्पॉट स्थानों पर विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के दौरान लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताकर इससे दूर रहने की अपील की गई। इसके साथ ही, नशे के आदी हो चुके व्यक्तियों और उनके परिजनों को नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की जानकारी दी गई और उन्हें नशामुक्त जीवन जीने की शपथ दिलाई गई। सामाजिक न्याय विभाग के सहयोग से नशे की लत से प्रभावित लोगों को परामर्श और जरूरी चिकित्सीय सहायता मुहैया कराने के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई। नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिए छतरपुर पुलिस आने वाले दिनों में भी पूरे जिले में विभिन्न माध्यमों से इस प्रकार के व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।1
- छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बमनोरा में ₹25 लाख की लागत से बन रहे सामुदायिक भवन के निर्माण में भारी लापरवाही और अनियमितताएं सामने आई हैं। निर्माण स्थल पर मजदूरों की जान जोखिम में डालकर काम कराया जा रहा है। यहां काम करने वाले मजदूर बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और सुरक्षा जूतों के ही ऊंचाई पर काम करने को मजबूर हैं। निर्माण कार्य के लिए बांस-बल्ली के कामचलाऊ और बेहद असुरक्षित मचान का उपयोग किया जा रहा है, जो कभी भी गिर सकता है। इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भवन निर्माण में बेहद घटिया ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और चिनाई भी टेढ़ी-मेढ़ी हो रही है। आरोप है कि टेंडर में स्वीकृत रेट की जगह बेहद घटिया स्तर के मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और टिकाऊपन खतरे में पड़ गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे निर्माण के दौरान जिम्मेदार तकनीकी अमला और ठेकेदार मौके से नदारद हैं, जिससे पूरा काम बिना किसी जांच और निगरानी के पूरी तरह 'भगवान भरोसे' चल रहा है। इस बदहाली को लेकर ग्रामवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत से पुरजोर मांग की है कि तत्काल इस साइट का निरीक्षण कर निर्माण कार्य को रुकवाया जाए। इसके साथ ही, निर्माण में इस्तेमाल हो रहे मटेरियल, माप पुस्तिका और अब तक हुए भुगतान का कड़ाई से परीक्षण कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने मजदूरों को अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है।4