Shuru
Apke Nagar Ki App…
भारत देश के एक हिस्से में एक बेकाबू बैल ने व्हीलचेयर पर बैठे एक विकलांग व्यक्ति पर हमला कर दिया। इस दौरान, घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने तुरंत साहस का प्रदर्शन करते हुए उस व्यक्ति की जान बचाई। यह घटना लोगों की निस्वार्थ भावना और बहादुरी को दर्शाती है, और ऐसे नागरिकों को सलाम किया जाता है।
Bhupendra Rai दबंग इंडिया
भारत देश के एक हिस्से में एक बेकाबू बैल ने व्हीलचेयर पर बैठे एक विकलांग व्यक्ति पर हमला कर दिया। इस दौरान, घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने तुरंत साहस का प्रदर्शन करते हुए उस व्यक्ति की जान बचाई। यह घटना लोगों की निस्वार्थ भावना और बहादुरी को दर्शाती है, और ऐसे नागरिकों को सलाम किया जाता है।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- जनपद पंचायत पटेरा की तिदनी ग्राम पंचायत में पंचायत द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से बनाई जा रही पुलियों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता नियमों को ताक पर रखकर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया निर्माण में मजबूत बेस की जगह सीधे मिट्टी भर दी गई है, और ऊपरी हिस्से में गिट्टी तथा सीमेंट की मात्रा भी बेहद कम है। आरोप है कि रेत और गुणवत्तायुक्त सामग्री के बजाय नाले से निकला बजरीनुमा मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ये पुलियाएँ शुरुआत से ही कमजोर दिख रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलियों की हालत इतनी खराब है कि अभी से ही वाहन गुजरने पर निर्माण धंसने लगा है। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि बरसात शुरू होते ही ये पुलियाएँ जवाब दे सकती हैं, जिससे गाँव का संपर्क प्रभावित होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। पुलियों के किनारों पर बनाई गई पट्टियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं; आरोप है कि कहीं पट्टी छोटी बनाई गई तो कहीं निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, और लंबाई-चौड़ाई में भी कोई एकरूपता नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के बाद नियमानुसार तराई तक नहीं की गई, जिससे सीमेंट अपनी पकड़ नहीं बना पा रहा है। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर खुलेआम गुणवत्ता विहीन काम कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है और सरपंच-सचिव अपनी मनमानी से निर्माण करा रहे हैं। इस मामले को लेकर जब उप यंत्री रोहित नायक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि यदि कुछ ऐसा है तो उन्हें समझ नहीं आया है, लेकिन वे स्वयं जाकर देखेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर इस तरह की गड़बड़ी मिली तो इन कार्यों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। पंचायत के निर्माण कार्यों पर उठे इन सवालों ने गाँव में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।1
- अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर सागर के यशोदा भवन में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'काव्यायन' ने अपने स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामयी गोष्ठी एवं विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान संस्था ने मातृशक्ति को परिवार की रीढ़ मानते हुए सर्वसम्मति से ममता भूरिया का चयन काव्य परिवार की मुखिया (अध्यक्ष) के रूप में किया। कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए संस्था के संस्थापक अध्यक्ष व अधिवक्ता राम नरेश सिंह राजपूत ने वर्तमान सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि पश्चिमी सभ्यता में एकाकी परिवारों का चलन है, जिसके कारण वहां परिजनों से मिलने के लिए साल में एक दिन (15 मई) तय करना पड़ता है, जबकि भारत की मूल संस्कृति हमेशा से संयुक्त परिवारों की रही है। राजपूत ने चिंता व्यक्त की कि आधुनिकता और वैश्विक चकाचौंध की अंधी दौड़ में आज भारत में भी एकाकी परिवार तेजी से बढ़े हैं, जिससे नई पीढ़ी को कई व्यावहारिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस कठिन परिवेश में उन्होंने संयुक्त परिवारों की महती आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य वक्ता पीआर मलैया, हर्षिता राजपूत एवं टीकाराम त्रिपाठी ने यूरोपीय और एशियन साहित्य के विभिन्न कालखंडों व साहित्यकारों की रचनाओं के उदाहरण देते हुए संयुक्त परिवार की प्रासंगिकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस साहित्यिक समागम में अंचल के लगभग 50 से अधिक रचनाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अधिवक्ता जगमोहन सिंह लोधी मुख्य अतिथि और अधिवक्ता रजनी सिंह राजपूत विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थीं, जबकि डा. गजाधर सागर, महेंद्र कौरव और वृन्दावन राय सरल ने सारस्वत अतिथि के तौर पर मंच साझा किया। कार्यक्रम का सफल एवं क्रमिक संचालन अमित आठिया, अनिल श्रीवास्तव और डा. अभय सिंह ने किया। इस अवसर पर लखन शब्दाक्षरी (नरसिंहपुर), धर्मेंद्र "आज़ाद" तिजोरी वाले (तेंदूखेड़ा), वरिष्ठ साहित्यकार देवी सिंह राजपूत, मीता कनोजिया "सिम्मी", पुष्पेंद्र दुबे, पेट्रिस फुसकेले, कोमेश विश्वकर्मा, मुकेश तिवारी, मणिदेव सिंह ठाकुर, एम. शरीफ़, सुल्तान ख़ान, मधुर गोस्वामी "राही निर्मोही", महबूब ताज, शहज़ाद सागरी, आयुष मेहरा "आदि", जमुना प्रसाद "बेताब", शहज़ाद पेन्टर, मु. इरफ़ान (मुंगावली), नीरज रैकवार और जागेश्वर कुशवाहा सहित काव्यायन संस्था के स्थाई श्रोता व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।2
- सागर स्थित पुलिस प्रशिक्षण शाला में आगामी 30 मई 2026 को एक दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम के संबंध में जानकारी पत्रकार नीरज वैद्यराज द्वारा दी गई है।1
- छत्तरपुर जिले के बमोरी में एक सरपंच पर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस घटना से व्यथित और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित पीड़ित व्यक्ति ने अब स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। पीड़ित ने प्रशासन से अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।1
- कांग्रेस नेता कमलेश तिवारी ने सागर नगर निगम से बरसात से पूर्व शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से अप्सरा रेलवे अंडर ब्रिज से होते हुए तुलसी नगर वार्ड क्षेत्र के नाले का उल्लेख किया, जो अधिकांश वर्षा जल को शहर से बाहर निकालने का मुख्य मार्ग है। हालांकि, यह नाला वर्तमान में गंदगी, मलबे और झाड़ियों से भरा हुआ है। कमलेश तिवारी के अनुसार, नाले के भीतर बड़े-बड़े पेड़-पौधे उग आए हैं और आसपास भारी मात्रा में कचरा तथा मुरम डाली गई है। यह सामग्री बरसात के दौरान बहकर नाले में पहुँच जाती है, जिससे पानी की निकासी बाधित होती है और शहर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर जलभराव की स्थिति बन जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम ने अप्सरा रेलवे अंडर ब्रिज के समीप नाले का सौंदर्यीकरण और रंग-रोगन तो कराया है, लेकिन इसके आगे की स्थिति बेहद खराब है और नाले के दोनों ओर अतिक्रमण भी बढ़ गया है, जिससे समस्या और गंभीर हो रही है। तिवारी ने आरोप लगाया कि जलभराव की समस्या के लिए अक्सर व्यापारियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि इसका मूल कारण नालों का खराब रखरखाव और निकासी व्यवस्था में खामियां हैं। उन्होंने नगर निगम आयुक्त से मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में इस क्षेत्र में पक्का नाला, बाउंड्री वॉल और रिटेनिंग वॉल का निर्माण शामिल है, ताकि वर्षा जल की सुचारु निकासी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बरसात से पहले नाले की सफाई, अतिक्रमण हटाने और एक स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की भी मांग की है। कमलेश तिवारी का कहना है कि यदि इस नाले को व्यवस्थित कर दिया जाए तो शहर में जलभराव की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण कर स्थिति को चिंताजनक पाया है और नगर निगम से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।1
- कटनी जिले के रीठी थाना क्षेत्र के ग्राम अमगवां से कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ एक अपाहिज किसान रामकिशोर पिछले दो महीनों से न्याय की गुहार लगाने के लिए रीठी थाने और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। शारीरिक रूप से अक्षम होने के कारण यह पीड़ित किसान दूसरों के कंधों पर सवार होकर पुलिस के आला अफसरों तक पहुँच रहा है, लेकिन रीठी पुलिस पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप है। शुक्रवार को पीड़ित किसान रामकिशोर एक बार फिर एसपी कार्यालय पहुँचा और अपनी आपबीती सुनाते हुए स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना है कि बीते 8 अप्रैल 2026 की रात करीब 10:30 बजे, पुरानी रंजिश और एक सोची-समझी साजिश के तहत गांव के ही 14 रसूखदार दबंग लाठी, डंडे, लोहे की रॉड और कुल्हाड़ी जैसे जानलेवा हथियारों से लैस होकर उसके घर में घुस आए और जान से मारने की नीयत से उस पर और उसके पूरे परिवार पर हमला किया। हमलावरों में मिल्लूलाल उर्फ बंधा, शंकर कुशवाहा, राघवेंद्र, सुखलाल बर्मन, राहुल बंशकार, धर्मेंद्र, एकलव्य, शनि, लक्ष्मीकांत, सुकल, वर्षा, कमलेश बाई, बल्लू और तेजीलाल शामिल थे। किसान रामकिशोर का आरोप है कि इस हमले में उसकी बेटियों के हाथ टूट गए और परिवार के कई सदस्य घायल हुए। घटना के तुरंत बाद रीठी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामले को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस ने न तो आरोपियों के खिलाफ उचित और कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और न ही उनकी गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम उठाया, जिसके चलते सभी 14 आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस न लेने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पीड़ित परिवार अब खौफ के साये में अपने ही घर में जीने को मजबूर है। स्थानीय रीठी पुलिस की इस हीलाहवाली से निराश होकर, रामकिशोर ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराई जाए और आरोपियों के खिलाफ साधारण धाराओं के बजाय 'हत्या के प्रयास' (अटेम्प्ट टू मर्डर) का मामला दर्ज किया जाए। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि यह भूमि विवाद का मामला था, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि अभी मेडिकल रिपोर्ट आनी बाकी है और डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- शुक्रवार दोपहर जबलपुर के गढ़ा थाना क्षेत्र स्थित कछपुरा ओवर ब्रिज पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार मेट्रो बस ने स्कूटी पर सवार महिलाओं को टक्कर मार दी, जिसमें संजय नगर, यादव कॉलोनी निवासी 42 वर्षीय कविता पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हुई है, जिसका मेडिकल अस्पताल में इलाज जारी है।1
- दमोह जिले में सड़क सुरक्षा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हाल ही में संपन्न हुई, जिसमें जिला कलेक्टर श्री यादव ने कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए। बैठक के दौरान, कलेक्टर ने संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे सड़क पर रोड मार्किंग, चेतावनी संकेतों की स्थापना और सुरक्षा से संबंधित अन्य सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अवश्य पूरा करें।1
- कटनी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आक्रोश चरम पर पहुँच गया है, जिसके चलते शुक्रवार को मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरप्रीत लक्की सिंह के नेतृत्व में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, कटनी ने अधीक्षक भू अभिलेख अधिकारी को कलेक्टर आशीष तिवारी के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 20 दिनों के भीतर उनकी लंबित और जायज मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के 32 हजार संविदा कर्मचारी चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। ज्ञापन सौंपते हुए संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत 32 हजार संविदा कर्मचारी मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने में रात-दिन निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन्हीं कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के कारण मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है, बावजूद इसके सरकार द्वारा लगातार उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री की उपस्थिति में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे प्रदेश भर के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री द्वारा 30 जनवरी 2026 को दशहरा मैदान (टी.टी. नगर) में आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में की गई घोषणा के अनुसार तत्काल नियमितीकरण शामिल है। इसके अतिरिक्त, वे सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत एन.पी.एस. (NPS) और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वार्षिक वेतनवृद्धि, नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता (DA), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के वेतन में पी.बी.आई. (PBI) का समायोजन और पूर्व की तरह इंडिकेटर लागू करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों ने शासन द्वारा किए गए समकक्षता (वेतन विसंगति) के गलत निर्धारण पर तुरंत पुनर्विचार कर संशोधन करने और नियमित कर्मचारियों की तरह सभी अवकाश स्वीकृत करने की भी मांग की है। साथ ही, जब तक 'समान कार्य-समान वेतन' और समान सुविधाएँ नहीं मिल जातीं, तब तक 'सार्थक ऐप' के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था बंद करने की अपील की गई है। कर्मचारियों ने बताया कि 02 जून से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और इस दिन से जिले के सभी कर्मचारी विभाग द्वारा दिए गए सभी प्रकार के ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का पूर्णतः बहिष्कार करेंगे। संघ ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण वे आंदोलन के लिए विवश हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 2 जून से स्वास्थ्य सुविधाएँ ठप होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।1