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मध्य प्रदेश में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए रीवा-सतना बाईपास की वर्तमान स्थिति पर ध्यान आकर्षित कराया गया है। यह बाईपास अपने निर्माण की उच्च लागत के बावजूद, मौजूदा समय में कैसी स्थिति में है, इसे देखने पर जोर दिया जा रहा है।
Abhishek Pandey
मध्य प्रदेश में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए रीवा-सतना बाईपास की वर्तमान स्थिति पर ध्यान आकर्षित कराया गया है। यह बाईपास अपने निर्माण की उच्च लागत के बावजूद, मौजूदा समय में कैसी स्थिति में है, इसे देखने पर जोर दिया जा रहा है।
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- मध्य प्रदेश में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए रीवा-सतना बाईपास की वर्तमान स्थिति पर ध्यान आकर्षित कराया गया है। यह बाईपास अपने निर्माण की उच्च लागत के बावजूद, मौजूदा समय में कैसी स्थिति में है, इसे देखने पर जोर दिया जा रहा है।1
- वार्ड क्रमांक 11, इटमा बकुली के हनुमान मंदिर के पास बनी अमरपाटन-रामपुर मार्ग को जोड़ने वाली सड़क के घटिया निर्माण को लेकर सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है, जो निर्माण में गंभीर लापरवाही का स्पष्ट संकेत है। हालांकि, इस पर कार्रवाई करने के बजाय, शिकायत को लोक निर्माण विभाग, नगर परिषद उचेहरा और फिर अन्य विभागों के बीच लगातार घुमाया जा रहा है, जिससे शिकायतकर्ता ने इसे विभागों का 'फाइल घुमाओ अभियान' बताया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि समस्या का समाधान करने के बजाय, उन्हें बार-बार फोन कर शिकायत वापस लेने, बंद करने और 'संतुष्ट' बताने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए, सवाल उठाया गया है कि क्या सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य जनता को न्याय दिलाना है या शिकायतों को ट्रांसफर कर-करके थका देना और अंततः फोर्स क्लोज करना है। शिकायतकर्ता ने लोक निर्माण विभाग को 'लोक लूट विभाग' तक कहा है, विशेषकर नगर परिषद रामपुर बघेलान की सड़कों के मामले में। सरकार से सीधा सवाल किया गया है कि क्या सीएम हेल्पलाइन जनता की मदद के लिए बनी है या विभागों को जवाबदेही से बचाने के लिए। जनता न्याय और समाधान चाहती है, न कि फाइलों का खेल या मानसिक उत्पीड़न। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, उनकी आवाज उठती रहेगी।1
- मैहर जिला के अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक महिला ने अपने जीवित पति को मृत घोषित करवाकर शासकीय योजना का लाभ उठाया। यह मामला 2021-2022 का है, जब दुर्गा देवी नामक महिला ने सरपंच और सचिव की कथित मिलीभगत से सरकारी योजना के तहत वित्तीय लाभ प्राप्त किया, जबकि उनके पति वीरान आज भी जीवित हैं। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि यह सरपंच और सचिव के साथ मिलीभगत का स्पष्ट मामला प्रतीत होता है। इससे यह भी उजागर होता है कि कैसे कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के चलते सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने के लिए अनैतिक मार्ग अपनाते हैं, और प्रशासनिक तंत्र की खामियों का लाभ उठाते हैं। जिला कलेक्टर के संज्ञान में यह मामला आने के बाद, जल्द ही इस पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, इस बात की आशंका भी व्यक्त की गई है कि जांच में कोई ठोस कार्यवाही न हो। अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे इस मामले की गहन जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें, ताकि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और प्रशासनिक खामियों को रोका जा सके।1
- रीवा जिले के गुढ़ नगर परिषद में एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी को बचाने या गिराने के लिए ₹10 से ₹20 लाख की कथित डील का खुलासा हुआ है। इस वायरल ऑडियो में वार्ड क्रमांक 4 के पार्षद दुर्गेश गुप्ता और नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह के निजी चालक मोले जायसवाल के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। यह घटना तब सामने आई है जब कुछ समय पहले ही गुढ़ नगर परिषद के सभी 13 पार्षदों ने अध्यक्ष अर्चना सिंह को पद से हटाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था, लेकिन यह राजनीतिक मुहिम ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। वायरल ऑडियो के अनुसार, अध्यक्ष के चालक मोले जायसवाल पार्षद दुर्गेश गुप्ता से कहते हैं कि मैडम अध्यक्ष अर्चना सिंह ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्षद को ₹10 लाख देने की बात कही है। इस पर पार्षद दुर्गेश गुप्ता ₹20 लाख की मांग करते हुए कहते हैं कि उनके साथ एक और पार्षद है और यदि दोनों साथ आ जाते हैं तो मैडम की कुर्सी सुरक्षित रहेगी और अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा। इसके बाद चालक मोले जायसवाल यह सुझाव देते हैं कि यदि पार्षद दुर्गेश गुप्ता ₹20 लाख मैडम को दे दें तो मैडम खुद इस्तीफा दे देंगी। पार्षद दुर्गेश गुप्ता इस पर तुरंत सहमत होते हुए ₹20 लाख देने की बात कहते हैं और मैडम से इस्तीफा दिलवाने के लिए कहते हैं। बातचीत के अंत में चालक मोले जायसवाल मैडम से पूछकर आगे बताने की बात करते सुनाई देते हैं। जैसे ही यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे गुढ़ नगर क्षेत्र में आग की तरह फैल गया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। गुढ़ के स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों ने इसे जनता के भरोसे और लोकतंत्र की सरेआम हत्या बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि अध्यक्ष अर्चना सिंह ईमानदार हैं तो उन्हें अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्षद को ₹10 लाख का ऑफर देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? साथ ही, पार्षदों पर भी आरोप लग रहे हैं कि वे जनता के हितों और नगर के विकास के बजाय अपनी जेब भरने की ताक में थे। इस घमासान के बीच, पार्षद दुर्गेश गुप्ता ने अपनी सफाई में एक और ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की, जिसमें वह दावा करते हैं कि उन्हें चाहे कोई ₹1 करोड़ भी दे दे तो वह बिकने के लिए तैयार नहीं हैं। हालांकि, आम जनता को पहले वायरल हुए सौदेबाजी वाले ऑडियो से इतनी गहरी चोट पहुंची कि पार्षद का यह नया बचाव वाला ऑडियो लोगों के बीच समझ से परे रहा। इससे गुढ़ नगर परिषद की छवि और धूमिल हुई है। इस 3 मिनट के वायरल ऑडियो से गुढ़ की आम जनता शर्मसार है और उसने जिला प्रशासन रीवा कलेक्टर तथा माननीय उच्च न्यायालय से इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह जांच यह स्पष्ट करेगी कि नगर परिषद में विकास के नाम पर पक्ष और विपक्ष दोनों किस प्रकार पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन का गलत तरीके से उपयोग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस ऑडियो कांड के बाद अविश्वास प्रस्ताव का क्या होता है और क्या पार्षद एकजुट रह पाएंगे या अपने पाले बदलेंगे। (नोट: इस बातचीत के ऑडियो की पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता है।)1
- सतना जिले के रामपुर बघेलान स्थित बीदा ग्राम पंचायत में गल्ला चोरी का मामला गरमा गया है, जहाँ ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन पर ठोस कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप लगाया है। स्थानीय ग्रामीण संत कुमार त्रिपाठी जी के अनुसार, बीदा पंचायत से अब तक 100 बोरी से भी अधिक गल्ला चोरी हो चुका है, लेकिन आज तक इस वारदात का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह दो महीने के भीतर दूसरी बार हुई चोरी है, जिसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। ग्राम पंचायत बीदा में पहले भी कई बार ऐसी चोरियाँ हुई हैं, और हर बार शिकायत दर्ज होने के बाद भी न तो आरोपी पकड़े गए हैं और न ही चोरी का माल बरामद हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत भवन/राशन दुकान से लगातार सरकारी गल्ले की चोरी हो रही है, जिससे गरीबों का हक मारा जा रहा है। उनकी शिकायतों के बावजूद, न तो क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई है, न सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, और न ही जांच में कोई प्रगति हुई है। संत कुमार त्रिपाठी जी ने इसे "सीधे गरीब जनता के हक पर डाका" बताते हुए प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं, पूछ रहे हैं कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने सतना के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस चोरी का खुलासा नहीं हुआ, तो वे जनपद पंचायत और कलेक्ट्रेट का घेराव करने को मजबूर होंगे।1
- मध्य प्रदेश के मैहर जिले की ग्राम पंचायत देवरा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ 2021-2022 में दुर्गा देवी नामक एक महिला ने अपने जीवित पति वीरान को मृत घोषित करवाकर एक शासकीय योजना का वित्तीय लाभ उठा लिया। यह पूरा कृत्य सरपंच और सचिव की मिलीभगत से अंजाम दिया गया, जबकि महिला के पति वीरान आज भी जीवित हैं, जो इस घटना को और भी गंभीर बना देता है। यह मामला निजी स्वार्थ के चलते सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का एक स्पष्ट उदाहरण है और इसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरपंच और सचिव की मिलीभगत ने प्रशासनिक तंत्र की खामियों को भी उजागर किया है, जो दर्शाता है कि कैसे कुछ लोग अनैतिक तरीकों से सरकारी लाभ उठाने के लिए नियमों का उल्लंघन करते हैं। यह मामला अब जिला कलेक्टर के संज्ञान में आ चुका है, और अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इसकी गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, इस बात की आशंका भी जताई जा रही है कि जांच में कोई ठोस कार्यवाही न भी हो।1
- उचेहरा पुलिस ने मंदिरों से पीतल के घंटे और अन्य सामग्री चोरी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में चोरी का सामान खरीदने वालों सहित कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है। सतना पुलिस अधीक्षक के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में उचेहरा थाना प्रभारी सतीश मिश्रा और उनकी टीम ने मिलकर मंदिरों में लगातार हो रही चोरियों के इस बड़े मामले का खुलासा किया। पुलिस की पूछताछ में, गिरफ्तार आरोपियों ने उचेहरा क्षेत्र के छह मंदिरों से चोरी की घटनाओं को स्वीकार किया। पुलिस ने इनके पास से पीतल के घंटे, कलश और अन्य सामग्री बरामद की है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 37,600 रुपये आंकी गई है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा चुका है।1
- रीवा जिले के त्योथर थाना चाकघाट क्षेत्र के ग्राम मांगी से एक जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आ गया है।1