रीवा जिले के गुढ़ नगर परिषद में एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी को बचाने या गिराने के लिए ₹10 से ₹20 लाख की कथित डील का खुलासा हुआ है। इस वायरल ऑडियो में वार्ड क्रमांक 4 के पार्षद दुर्गेश गुप्ता और नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह के निजी चालक मोले जायसवाल के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। यह घटना तब सामने आई है जब कुछ समय पहले ही गुढ़ नगर परिषद के सभी 13 पार्षदों ने अध्यक्ष अर्चना सिंह को पद से हटाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था, लेकिन यह राजनीतिक मुहिम ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। वायरल ऑडियो के अनुसार, अध्यक्ष के चालक मोले जायसवाल पार्षद दुर्गेश गुप्ता से कहते हैं कि मैडम अध्यक्ष अर्चना सिंह ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्षद को ₹10 लाख देने की बात कही है। इस पर पार्षद दुर्गेश गुप्ता ₹20 लाख की मांग करते हुए कहते हैं कि उनके साथ एक और पार्षद है और यदि दोनों साथ आ जाते हैं तो मैडम की कुर्सी सुरक्षित रहेगी और अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा। इसके बाद चालक मोले जायसवाल यह सुझाव देते हैं कि यदि पार्षद दुर्गेश गुप्ता ₹20 लाख मैडम को दे दें तो मैडम खुद इस्तीफा दे देंगी। पार्षद दुर्गेश गुप्ता इस पर तुरंत सहमत होते हुए ₹20 लाख देने की बात कहते हैं और मैडम से इस्तीफा दिलवाने के लिए कहते हैं। बातचीत के अंत में चालक मोले जायसवाल मैडम से पूछकर आगे बताने की बात करते सुनाई देते हैं। जैसे ही यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे गुढ़ नगर क्षेत्र में आग की तरह फैल गया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। गुढ़ के स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों ने इसे जनता के भरोसे और लोकतंत्र की सरेआम हत्या बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि अध्यक्ष अर्चना सिंह ईमानदार हैं तो उन्हें अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्षद को ₹10 लाख का ऑफर देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? साथ ही, पार्षदों पर भी आरोप लग रहे हैं कि वे जनता के हितों और नगर के विकास के बजाय अपनी जेब भरने की ताक में थे। इस घमासान के बीच, पार्षद दुर्गेश गुप्ता ने अपनी सफाई में एक और ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की, जिसमें वह दावा करते हैं कि उन्हें चाहे कोई ₹1 करोड़ भी दे दे तो वह बिकने के लिए तैयार नहीं हैं। हालांकि, आम जनता को पहले वायरल हुए सौदेबाजी वाले ऑडियो से इतनी गहरी चोट पहुंची कि पार्षद का यह नया बचाव वाला ऑडियो लोगों के बीच समझ से परे रहा। इससे गुढ़ नगर परिषद की छवि और धूमिल हुई है। इस 3 मिनट के वायरल ऑडियो से गुढ़ की आम जनता शर्मसार है और उसने जिला प्रशासन रीवा कलेक्टर तथा माननीय उच्च न्यायालय से इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह जांच यह स्पष्ट करेगी कि नगर परिषद में विकास के नाम पर पक्ष और विपक्ष दोनों किस प्रकार पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन का गलत तरीके से उपयोग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस ऑडियो कांड के बाद अविश्वास प्रस्ताव का क्या होता है और क्या पार्षद एकजुट रह पाएंगे या अपने पाले बदलेंगे। (नोट: इस बातचीत के ऑडियो की पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता है।)
रीवा जिले के गुढ़ नगर परिषद में एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी को बचाने या गिराने के लिए ₹10 से ₹20 लाख की कथित डील का खुलासा हुआ है। इस वायरल ऑडियो में वार्ड क्रमांक 4 के पार्षद दुर्गेश गुप्ता और नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह के निजी चालक मोले जायसवाल के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। यह घटना तब सामने आई है जब कुछ समय पहले ही गुढ़ नगर परिषद के सभी 13 पार्षदों ने अध्यक्ष अर्चना सिंह को पद से हटाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था, लेकिन यह राजनीतिक मुहिम ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। वायरल ऑडियो के अनुसार, अध्यक्ष के चालक मोले जायसवाल पार्षद दुर्गेश गुप्ता से कहते हैं कि मैडम अध्यक्ष अर्चना सिंह ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्षद को ₹10 लाख देने की बात कही है। इस पर पार्षद दुर्गेश गुप्ता ₹20 लाख की मांग करते हुए कहते हैं कि उनके साथ एक और पार्षद है और यदि दोनों साथ आ जाते हैं तो मैडम की कुर्सी सुरक्षित रहेगी और अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा। इसके बाद चालक मोले जायसवाल यह सुझाव देते हैं कि यदि पार्षद दुर्गेश गुप्ता ₹20 लाख मैडम को दे दें तो मैडम खुद इस्तीफा दे देंगी। पार्षद दुर्गेश गुप्ता इस पर तुरंत सहमत होते हुए ₹20 लाख देने की बात कहते हैं और मैडम से इस्तीफा दिलवाने के लिए कहते हैं। बातचीत के अंत में चालक मोले जायसवाल मैडम से पूछकर आगे बताने की बात करते सुनाई देते हैं। जैसे ही यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे गुढ़ नगर क्षेत्र में आग की तरह फैल गया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। गुढ़ के स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों ने इसे जनता के भरोसे और लोकतंत्र की सरेआम हत्या बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि अध्यक्ष अर्चना सिंह ईमानदार हैं तो उन्हें अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्षद को ₹10 लाख का ऑफर देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? साथ ही, पार्षदों पर भी आरोप लग रहे हैं कि वे जनता के हितों और नगर के विकास के बजाय अपनी जेब भरने की ताक में थे। इस घमासान के बीच, पार्षद दुर्गेश गुप्ता ने अपनी सफाई में एक और ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की, जिसमें वह दावा करते हैं कि उन्हें चाहे कोई ₹1 करोड़ भी दे दे तो वह बिकने के लिए तैयार नहीं हैं। हालांकि, आम जनता को पहले वायरल हुए सौदेबाजी वाले ऑडियो से इतनी गहरी चोट पहुंची कि पार्षद का यह नया बचाव वाला ऑडियो लोगों के बीच समझ से परे रहा। इससे गुढ़ नगर परिषद की छवि और धूमिल हुई है। इस 3 मिनट के वायरल ऑडियो से गुढ़ की आम जनता शर्मसार है और उसने जिला प्रशासन रीवा कलेक्टर तथा माननीय उच्च न्यायालय से इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह जांच यह स्पष्ट करेगी कि नगर परिषद में विकास के नाम पर पक्ष और विपक्ष दोनों किस प्रकार पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन का गलत तरीके से उपयोग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस ऑडियो कांड के बाद अविश्वास प्रस्ताव का क्या होता है और क्या पार्षद एकजुट रह पाएंगे या अपने पाले बदलेंगे। (नोट: इस बातचीत के ऑडियो की पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता है।)
- रीवा जिले के गुढ़ नगर परिषद में एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी को बचाने या गिराने के लिए ₹10 से ₹20 लाख की कथित डील का खुलासा हुआ है। इस वायरल ऑडियो में वार्ड क्रमांक 4 के पार्षद दुर्गेश गुप्ता और नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह के निजी चालक मोले जायसवाल के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। यह घटना तब सामने आई है जब कुछ समय पहले ही गुढ़ नगर परिषद के सभी 13 पार्षदों ने अध्यक्ष अर्चना सिंह को पद से हटाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था, लेकिन यह राजनीतिक मुहिम ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। वायरल ऑडियो के अनुसार, अध्यक्ष के चालक मोले जायसवाल पार्षद दुर्गेश गुप्ता से कहते हैं कि मैडम अध्यक्ष अर्चना सिंह ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्षद को ₹10 लाख देने की बात कही है। इस पर पार्षद दुर्गेश गुप्ता ₹20 लाख की मांग करते हुए कहते हैं कि उनके साथ एक और पार्षद है और यदि दोनों साथ आ जाते हैं तो मैडम की कुर्सी सुरक्षित रहेगी और अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा। इसके बाद चालक मोले जायसवाल यह सुझाव देते हैं कि यदि पार्षद दुर्गेश गुप्ता ₹20 लाख मैडम को दे दें तो मैडम खुद इस्तीफा दे देंगी। पार्षद दुर्गेश गुप्ता इस पर तुरंत सहमत होते हुए ₹20 लाख देने की बात कहते हैं और मैडम से इस्तीफा दिलवाने के लिए कहते हैं। बातचीत के अंत में चालक मोले जायसवाल मैडम से पूछकर आगे बताने की बात करते सुनाई देते हैं। जैसे ही यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे गुढ़ नगर क्षेत्र में आग की तरह फैल गया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। गुढ़ के स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों ने इसे जनता के भरोसे और लोकतंत्र की सरेआम हत्या बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि अध्यक्ष अर्चना सिंह ईमानदार हैं तो उन्हें अपनी कुर्सी बचाने के लिए पार्षद को ₹10 लाख का ऑफर देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? साथ ही, पार्षदों पर भी आरोप लग रहे हैं कि वे जनता के हितों और नगर के विकास के बजाय अपनी जेब भरने की ताक में थे। इस घमासान के बीच, पार्षद दुर्गेश गुप्ता ने अपनी सफाई में एक और ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की, जिसमें वह दावा करते हैं कि उन्हें चाहे कोई ₹1 करोड़ भी दे दे तो वह बिकने के लिए तैयार नहीं हैं। हालांकि, आम जनता को पहले वायरल हुए सौदेबाजी वाले ऑडियो से इतनी गहरी चोट पहुंची कि पार्षद का यह नया बचाव वाला ऑडियो लोगों के बीच समझ से परे रहा। इससे गुढ़ नगर परिषद की छवि और धूमिल हुई है। इस 3 मिनट के वायरल ऑडियो से गुढ़ की आम जनता शर्मसार है और उसने जिला प्रशासन रीवा कलेक्टर तथा माननीय उच्च न्यायालय से इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह जांच यह स्पष्ट करेगी कि नगर परिषद में विकास के नाम पर पक्ष और विपक्ष दोनों किस प्रकार पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन का गलत तरीके से उपयोग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस ऑडियो कांड के बाद अविश्वास प्रस्ताव का क्या होता है और क्या पार्षद एकजुट रह पाएंगे या अपने पाले बदलेंगे। (नोट: इस बातचीत के ऑडियो की पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता है।)1
- जनपद पंचायत गंगेव क्षेत्र के ग्राम तिवनी, रीवा में किसानों को आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कृषि अनुसंधान केंद्र, वाराणसी से आए कृषि विशेषज्ञ शैलेंद्र तिवारी और उनकी टीम ने किसानों को प्राकृतिक खेती, उन्नत सब्जी उत्पादन, फसल प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान अनुसूचित जनजाति और सामान्य वर्ग के किसानों को लगभग 10 प्रकार के उन्नत सब्जी बीज और कीटनाशकों का वितरण भी किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने, प्राकृतिक खेती के लाभ, फसल सुरक्षा के उपाय, पोषण वाटिका तैयार करने और वैज्ञानिक विधि से सब्जी उत्पादन के व्यावहारिक तरीके समझाए। किसानों ने भी अपनी कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान विशेषज्ञों से प्राप्त किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विकास तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती से जोड़ना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे खेती की लागत कम होगी, भूमि की उर्वरता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी बताया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों की रसायनों पर निर्भरता कम करके एक टिकाऊ और लाभकारी कृषि व्यवस्था को अपनाना है। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं, युवा साथी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने इस पहल की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।1
- मध्य प्रदेश में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए रीवा-सतना बाईपास की वर्तमान स्थिति पर ध्यान आकर्षित कराया गया है। यह बाईपास अपने निर्माण की उच्च लागत के बावजूद, मौजूदा समय में कैसी स्थिति में है, इसे देखने पर जोर दिया जा रहा है।1
- वार्ड क्रमांक 11, इटमा बकुली के हनुमान मंदिर के पास बनी अमरपाटन-रामपुर मार्ग को जोड़ने वाली सड़क के घटिया निर्माण को लेकर सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है, जो निर्माण में गंभीर लापरवाही का स्पष्ट संकेत है। हालांकि, इस पर कार्रवाई करने के बजाय, शिकायत को लोक निर्माण विभाग, नगर परिषद उचेहरा और फिर अन्य विभागों के बीच लगातार घुमाया जा रहा है, जिससे शिकायतकर्ता ने इसे विभागों का 'फाइल घुमाओ अभियान' बताया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि समस्या का समाधान करने के बजाय, उन्हें बार-बार फोन कर शिकायत वापस लेने, बंद करने और 'संतुष्ट' बताने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए, सवाल उठाया गया है कि क्या सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य जनता को न्याय दिलाना है या शिकायतों को ट्रांसफर कर-करके थका देना और अंततः फोर्स क्लोज करना है। शिकायतकर्ता ने लोक निर्माण विभाग को 'लोक लूट विभाग' तक कहा है, विशेषकर नगर परिषद रामपुर बघेलान की सड़कों के मामले में। सरकार से सीधा सवाल किया गया है कि क्या सीएम हेल्पलाइन जनता की मदद के लिए बनी है या विभागों को जवाबदेही से बचाने के लिए। जनता न्याय और समाधान चाहती है, न कि फाइलों का खेल या मानसिक उत्पीड़न। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, उनकी आवाज उठती रहेगी।1
- मैहर जिला के अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक महिला ने अपने जीवित पति को मृत घोषित करवाकर शासकीय योजना का लाभ उठाया। यह मामला 2021-2022 का है, जब दुर्गा देवी नामक महिला ने सरपंच और सचिव की कथित मिलीभगत से सरकारी योजना के तहत वित्तीय लाभ प्राप्त किया, जबकि उनके पति वीरान आज भी जीवित हैं। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि यह सरपंच और सचिव के साथ मिलीभगत का स्पष्ट मामला प्रतीत होता है। इससे यह भी उजागर होता है कि कैसे कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के चलते सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने के लिए अनैतिक मार्ग अपनाते हैं, और प्रशासनिक तंत्र की खामियों का लाभ उठाते हैं। जिला कलेक्टर के संज्ञान में यह मामला आने के बाद, जल्द ही इस पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, इस बात की आशंका भी व्यक्त की गई है कि जांच में कोई ठोस कार्यवाही न हो। अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे इस मामले की गहन जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें, ताकि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और प्रशासनिक खामियों को रोका जा सके।1
- हाल ही में हुए एक जातिवाद के मुद्दे से संबंधित एक वीडियो को अधिक से अधिक साझा करने की पुरज़ोर अपील की गई है। यह आग्रह किया गया है कि इस वीडियो को व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए और इसे समाचार चैनलों पर भी दिखाया जाए, ताकि यह संदेश बड़े जनसमूह तक पहुँच सके।1
- सतना जिले के रामपुर बघेलान स्थित बीदा ग्राम पंचायत में गल्ला चोरी का मामला गरमा गया है, जहाँ ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन पर ठोस कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप लगाया है। स्थानीय ग्रामीण संत कुमार त्रिपाठी जी के अनुसार, बीदा पंचायत से अब तक 100 बोरी से भी अधिक गल्ला चोरी हो चुका है, लेकिन आज तक इस वारदात का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह दो महीने के भीतर दूसरी बार हुई चोरी है, जिसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। ग्राम पंचायत बीदा में पहले भी कई बार ऐसी चोरियाँ हुई हैं, और हर बार शिकायत दर्ज होने के बाद भी न तो आरोपी पकड़े गए हैं और न ही चोरी का माल बरामद हुआ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत भवन/राशन दुकान से लगातार सरकारी गल्ले की चोरी हो रही है, जिससे गरीबों का हक मारा जा रहा है। उनकी शिकायतों के बावजूद, न तो क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई है, न सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, और न ही जांच में कोई प्रगति हुई है। संत कुमार त्रिपाठी जी ने इसे "सीधे गरीब जनता के हक पर डाका" बताते हुए प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं, पूछ रहे हैं कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने सतना के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस चोरी का खुलासा नहीं हुआ, तो वे जनपद पंचायत और कलेक्ट्रेट का घेराव करने को मजबूर होंगे।1
- जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से पवित्र अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को आधिकारिक तौर पर रवाना किया। 'बम-बम भोले' के जयघोष से गुंजायमान माहौल के बीच, श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए कश्मीर घाटी की ओर उत्साहपूर्वक रवाना हुए, जिनमें यात्रा को लेकर भारी जोश देखा जा रहा है। इस साल प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद कड़े इंतजाम किए हैं। इनमें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं और वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था शामिल है। इसके अतिरिक्त, पूरे यात्रा मार्ग पर आरएफआईडी (RFID) ट्रैकिंग और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि भक्तों की यात्रा सुरक्षित और सुगम बन सके।1