राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम बना दिखावा, आमजन से रहा कोसों दूर पलेरा। नगर की रामराज ग्राउंड पर आयोजित हुए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम जमीनी हकीकत से पूरी तरह उलट होने का मामला सामने आया है। जिस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाना था, वही कार्यक्रम कर्मचारियों तक ही सीमित होकर रह गया।कार्यक्रम स्थल पर न आमजन की मौजूदगी दिखी, न ही किसी प्रकार की जन-जागरूकता। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों के लिए तक पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे पूरा आयोजन अव्यवस्थित और खानापूर्ति वाला नजर आया।स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे सरकारी कार्यक्रम केवल फाइलों और फोटो तक सिमटकर रह जाते हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर न दवा सही से पहुंचती है और न ही बीमारी से बचाव की जानकारी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कार्यक्रम की सफलता के दावे तो करते हैं, लेकिन हकीकत में यह कार्यक्रम जनता की बजाय सरकारी औपचारिकताओं का शिकार बन गया है। सवाल यह है कि जब कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों की भी व्यवस्था नहीं हो पा रही, तो आम जनता तक इस योजना का लाभ कैसे पहुंचेगा यह कार्यक्रम उन्मूलन नहीं, बल्कि अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा वही मीडिया कर्मियों के द्वारा स्वास्थ्य केंद्र पलेरा में फैली अव्यवस्थाओं के संबंध में जिला सीएमएचओ से बात की गई तो कम ह जिम्मेदारी से अपनी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देते हुए नजर नहीं आए जिससे यह साफ प्रतीत हो रहा है कि कहीं ना कहीं आला अधिकारियों की मिली भगत से यह सिर्फ दिखावे तक इसी में रह गए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम बना दिखावा, आमजन से रहा कोसों दूर पलेरा। नगर की रामराज ग्राउंड पर आयोजित हुए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम जमीनी हकीकत से पूरी तरह उलट होने का मामला सामने आया है। जिस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाना था, वही कार्यक्रम कर्मचारियों तक ही सीमित होकर रह गया।कार्यक्रम स्थल पर न आमजन की मौजूदगी दिखी, न ही किसी प्रकार की जन-जागरूकता। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों के लिए तक पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे पूरा आयोजन अव्यवस्थित और खानापूर्ति वाला नजर आया।स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे सरकारी कार्यक्रम केवल फाइलों और फोटो तक सिमटकर रह जाते हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर न दवा सही से पहुंचती है और न ही बीमारी से बचाव की जानकारी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कार्यक्रम की सफलता के दावे तो करते हैं, लेकिन हकीकत में यह कार्यक्रम जनता की बजाय सरकारी औपचारिकताओं का शिकार बन गया है। सवाल यह है कि जब कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों की भी व्यवस्था नहीं हो पा रही, तो आम जनता तक इस योजना का लाभ कैसे पहुंचेगा यह कार्यक्रम उन्मूलन नहीं, बल्कि अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा वही मीडिया कर्मियों के द्वारा स्वास्थ्य केंद्र पलेरा में फैली अव्यवस्थाओं के संबंध में जिला सीएमएचओ से बात की गई तो कम ह जिम्मेदारी से अपनी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देते हुए नजर नहीं आए जिससे यह साफ प्रतीत हो रहा है कि कहीं ना कहीं आला अधिकारियों की मिली भगत से यह सिर्फ दिखावे तक इसी में रह गए
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम बना दिखावा, आमजन से रहा कोसों दूर पलेरा। नगर की रामराज ग्राउंड पर आयोजित हुए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम जमीनी हकीकत से पूरी तरह उलट होने का मामला सामने आया है। जिस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाना था, वही कार्यक्रम कर्मचारियों तक ही सीमित होकर रह गया।कार्यक्रम स्थल पर न आमजन की मौजूदगी दिखी, न ही किसी प्रकार की जन-जागरूकता। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों के लिए तक पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे पूरा आयोजन अव्यवस्थित और खानापूर्ति वाला नजर आया।स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे सरकारी कार्यक्रम केवल फाइलों और फोटो तक सिमटकर रह जाते हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर न दवा सही से पहुंचती है और न ही बीमारी से बचाव की जानकारी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कार्यक्रम की सफलता के दावे तो करते हैं, लेकिन हकीकत में यह कार्यक्रम जनता की बजाय सरकारी औपचारिकताओं का शिकार बन गया है। सवाल यह है कि जब कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों की भी व्यवस्था नहीं हो पा रही, तो आम जनता तक इस योजना का लाभ कैसे पहुंचेगा यह कार्यक्रम उन्मूलन नहीं, बल्कि अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा वही मीडिया कर्मियों के द्वारा स्वास्थ्य केंद्र पलेरा में फैली अव्यवस्थाओं के संबंध में जिला सीएमएचओ से बात की गई तो कम ह जिम्मेदारी से अपनी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देते हुए नजर नहीं आए जिससे यह साफ प्रतीत हो रहा है कि कहीं ना कहीं आला अधिकारियों की मिली भगत से यह सिर्फ दिखावे तक इसी में रह गए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम बना दिखावा, आमजन से रहा कोसों दूर पलेरा। नगर की रामराज ग्राउंड पर आयोजित हुए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम जमीनी हकीकत से पूरी तरह उलट होने का मामला सामने आया है। जिस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाना था, वही कार्यक्रम कर्मचारियों तक ही सीमित होकर रह गया।कार्यक्रम स्थल पर न आमजन की मौजूदगी दिखी, न ही किसी प्रकार की जन-जागरूकता। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों के लिए तक पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे पूरा आयोजन अव्यवस्थित और खानापूर्ति वाला नजर आया।स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे सरकारी कार्यक्रम केवल फाइलों और फोटो तक सिमटकर रह जाते हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर न दवा सही से पहुंचती है और न ही बीमारी से बचाव की जानकारी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कार्यक्रम की सफलता के दावे तो करते हैं, लेकिन हकीकत में यह कार्यक्रम जनता की बजाय सरकारी औपचारिकताओं का शिकार बन गया है। सवाल यह है कि जब कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों की भी व्यवस्था नहीं हो पा रही, तो आम जनता तक इस योजना का लाभ कैसे पहुंचेगा यह कार्यक्रम उन्मूलन नहीं, बल्कि अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा वही मीडिया कर्मियों के द्वारा स्वास्थ्य केंद्र पलेरा में फैली अव्यवस्थाओं के संबंध में जिला सीएमएचओ से बात की गई तो कम ह जिम्मेदारी से अपनी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देते हुए नजर नहीं आए जिससे यह साफ प्रतीत हो रहा है कि कहीं ना कहीं आला अधिकारियों की मिली भगत से यह सिर्फ दिखावे तक इसी में रह गए
- राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम बना दिखावा, आमजन से रहा कोसों दूर पलेरा। नगर की रामराज ग्राउंड पर आयोजित हुए राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम जमीनी हकीकत से पूरी तरह उलट होने का मामला सामने आया है। जिस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाना था, वही कार्यक्रम कर्मचारियों तक ही सीमित होकर रह गया।कार्यक्रम स्थल पर न आमजन की मौजूदगी दिखी, न ही किसी प्रकार की जन-जागरूकता। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों के लिए तक पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे पूरा आयोजन अव्यवस्थित और खानापूर्ति वाला नजर आया।स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे सरकारी कार्यक्रम केवल फाइलों और फोटो तक सिमटकर रह जाते हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर न दवा सही से पहुंचती है और न ही बीमारी से बचाव की जानकारी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कार्यक्रम की सफलता के दावे तो करते हैं, लेकिन हकीकत में यह कार्यक्रम जनता की बजाय सरकारी औपचारिकताओं का शिकार बन गया है। सवाल यह है कि जब कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों की भी व्यवस्था नहीं हो पा रही, तो आम जनता तक इस योजना का लाभ कैसे पहुंचेगा यह कार्यक्रम उन्मूलन नहीं, बल्कि अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा वही मीडिया कर्मियों के द्वारा स्वास्थ्य केंद्र पलेरा में फैली अव्यवस्थाओं के संबंध में जिला सीएमएचओ से बात की गई तो कम ह जिम्मेदारी से अपनी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देते हुए नजर नहीं आए जिससे यह साफ प्रतीत हो रहा है कि कहीं ना कहीं आला अधिकारियों की मिली भगत से यह सिर्फ दिखावे तक इसी में रह गए1
- टीकमगढ़ जिले के दिगौड़ा रोड पर हुआ टैक्सी से एक्सीडेंट 6लोग हुए घायल देखिए खास रिपोर्ट2
- घटना का विवरण (मामला): ग्राम बेला, तहसील पलेरा, जिला टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश) में बीएसपी के नेतृत्व में रमाबाई जयंती एवं संत रविदास जयंती के अवसर पर एक शांतिपूर्ण जुलूस एवं समारोह आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम कजरी तिगेला के पास स्थित शासकीय (सरकारी) भूमि पर विधिवत रूप से संपन्न हो रहा था, जहाँ समाज के लोग संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं संत रविदास के विचारों को याद करने के लिए एकत्रित हुए थे। उसी दौरान कुशवाहा समाज के कुछ लोग, जिनमें मुख्य रूप से पुन्नू कुशवाहा एवं उनके परिवार की एक महिला (चाची) शामिल थीं, मौके पर पहुँचे और कार्यक्रम में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न किया। उनके द्वारा खुलेआम यह कहा गया कि “तुम लोग यहाँ मूर्तियाँ रखने के लिए इकट्ठा हुए हो, मैं यह नहीं होने दूँगा। न रविदास की मूर्ति लगेगी, न अंबेडकर की—किसी की भी मूर्ति यहाँ नहीं लग सकती।” इस प्रकार के बयान देकर उन्होंने न केवल कार्यक्रम की शांति भंग करने का प्रयास किया, बल्कि महापुरुषों का अपमान, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति एवं शांतिपूर्ण आयोजन के अधिकार का उल्लंघन किया। यह घटना दलित समाज की धार्मिक-सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली है और इससे क्षेत्र में तनाव का माहौल उत्पन्न हुआ। यदि समय रहते उपस्थित लोगों ने संयम न बरता होता, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। अतः यह मामला सामाजिक विद्वेष फैलाने, शांति भंग करने तथा संविधानिक मूल्यों का अपमान करने से संबंधित है, जिस पर प्रशासन द्वारा उचित संज्ञान लिया जाना आवश्यक है।1
- छतरपुर के हमा गांव में रात के अंधेरे में संत रविदास जी की मूर्ति को किया खंडित, कोतवाली पुलिस मौजूद और ग्राम वासियों में आक्रोश पुलिस जांच में जुटी1
- छतरपुर के हमा गांव में रात के अंधेरे में संत रविदास जी की मूर्ति को किया खंडित, कोतवाली पुलिस मौजूद और ग्राम वासियों में आक्रोश पुलिस जांच में जुटी1
- चौकी घुवारा अंतर्गत कस्बा घुवारा में गल्ला व्यापारी अभिषेक उर्फ राजू जैन की दुकान से हुई चोरी की घटना पर थाना भगवा में भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। उक्त घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। घटनास्थल पर सीसीटीवी कैमरे संचालित होने के कारण पुलिस को जांच में महत्वपूर्ण सफलता मिली। पुलिस द्वारा “चक्षु अभियान” के अंतर्गत अपराध नियंत्रण एवं आरोपियों की शीघ्र पहचान व गिरफ्तारी हेतु नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जन-सहयोग से सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं, जो इस प्रकरण में अत्यंत सहायक सिद्ध हुए। पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल एवं आसपास के मार्गों के सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए गए। एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान कर महरौनी जिला ललितपुर (उ.प्र.) सहित विभिन्न स्थानों पर दबिश दी गई। पुलिस टीम ने चोरी की घटना को अंजाम देने वाले आरोपी मल्लू उर्फ मलखान पिता नाथूराम कुशवाहा, निवासी ग्राम खिरिया, थाना महरौनी, जिला ललितपुर को महरौनी से गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से चोरी की गई नगद राशि एवं बिना सिम का मोबाइल फोन बरामद किया गया है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि गल्ला व्यापारी के दुकान से बाहर जाने पर मौका देखकर काउंटर से पैसे निकालकर चोरी की गई। बिना सिम के मोबाइल का उपयोग वह केवल दिखावटी बातचीत कर व्यस्तता दर्शाने के लिए कर रहा था। उल्लेखनीय है कि आरोपी पूर्व से अवैध हथियार, जुआ सहित 5 से अधिक आपराधिक प्रकरणों में लिप्त रहा है। अभियुक्त को न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है, विवेचना कार्यवाही जारी है।1
- Post by ललित दुबे (न्यूज दिगौड़ा)1
- बुंदेली माटी कला व लोक विधाएं हमारी विरासत हैं – विधायक चंदा सुरेंद्र सिंह गौर पलेरा: नगर के एक गार्डन में शनिवार को बुंदेली प्रतिभा सम्मान समारोह 2026 का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय विधायक चंदा सुरेंद्र सिंह गौर के मुख्य आतिथ्य एवं नगर परिषद अध्यक्ष गायत्री विनोद वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में बुंदेलखंड से आए कलाकारों, साहित्यकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का जमावड़ा लगा। कार्यक्रम के संरक्षक दिग्विजय सिंह गौर अम्मूराजा की देखरेख और मुकेश राज बुंदेली संसार के संयोजन में आयोजित इस समारोह का उद्देश्य विलुप्त होती बुंदेली संस्कृति को नई पहचान देना था। विधायक ने बुंदेली कलाकारों का सम्मान किया और सोशल मीडिया के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है जो गर्व का विषय है। समारोह में उभरते सुप्रसिद्ध कलाकारों सहित कई प्रतिभाओं को स्मृति चिन्ह एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। बुंदेली लोक गायक बलराम यादव, राजू कुशवाहा सहित विभिन्न कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। इस अवसर पर नगर के विनोद वर्मा, राजू राय, ओम तिवारी, विश्वदीप सिंह चौहान, रुस्तम खान, नरेश तिवारी, ठाकुरदास राय, केपी राजा बुंदेला विशेष रूप से उपस्थित रहे। विधायक चंदा गौर ने अपने संबोधन में कहा कि बुंदेली माटी की कला और लोक विधाएं हमारी विरासत हैं। आज के डिजिटल युग में बुंदेली कलाकारों ने कार्यक्रम के अंत में कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर शाम तक बांधे रखा।4