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बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने टीईटी लागू होने के पूर्व से सेवारत शिक्षकों पर जबरन टीईटी अनिवार्यता थोपने के विरोध में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के आवाहन पर, संगठन ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी बांदा को सौंपा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 और पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय से देश के लगभग 30 लाख शिक्षकों में गहरी चिंता, पीड़ा और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गई है, जिससे उनका भविष्य अंधकार में है। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था का यह स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम या नीति उसके प्रवर्तन की तिथि से प्रभावी होती है, न कि पूर्व की तिथि से। पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों और अर्जित सेवा अधिकारों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदंडों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ सदैव शिक्षक, शिक्षा और समाज के हितों के लिए काम करता है, और वर्तमान समय में शिक्षकों पर टीईटी थोपकर एक गंभीर समस्या उत्पन्न की गई है। इसके निराकरण हेतु महासंघ ने समाधान न होने तक आंदोलन की रणनीति बनाई है। आंदोलन के प्रथम चरण में देशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और संबंधित प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजा जा रहा है। यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन किया जाएगा, पर किसी भी शिक्षक की नौकरी पर आँच नहीं आने दी जाएगी। इसी प्रथम चरण के क्रम में आज, 18 जून 2026 को दोपहर 3:30 बजे, जिलाधिकारी कार्यालय पर सैकड़ों शिक्षकों की उपस्थिति में यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन के माध्यम से भारत सरकार से संवेदनशीलता, दूरदर्शिता एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का परिचय देते हुए संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर शिक्षकों को स्थाई राहत प्रदान करने की मांग की गई है। साथ ही, सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस एवं सुरक्षा की स्थिति का तत्काल निराकरण करने की मांग भी उठाई गई। इस ज्ञापन कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सभी जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारियों सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे, जिन्होंने पूर्व से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में बिगुल फूंका।

2 hrs ago
user_Surash Sahu
Surash Sahu
बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने टीईटी लागू होने के पूर्व से सेवारत शिक्षकों पर जबरन टीईटी अनिवार्यता थोपने के विरोध में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के आवाहन पर, संगठन ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी बांदा को सौंपा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 और पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय से देश के लगभग 30 लाख शिक्षकों में गहरी चिंता, पीड़ा और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गई है, जिससे उनका भविष्य अंधकार में है। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था का यह स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम या नीति उसके प्रवर्तन की तिथि से प्रभावी होती है, न कि पूर्व की तिथि से। पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों और अर्जित सेवा अधिकारों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदंडों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ सदैव शिक्षक, शिक्षा और समाज के हितों के लिए काम करता है, और वर्तमान समय में शिक्षकों पर टीईटी थोपकर एक गंभीर समस्या उत्पन्न की गई

है। इसके निराकरण हेतु महासंघ ने समाधान न होने तक आंदोलन की रणनीति बनाई है। आंदोलन के प्रथम चरण में देशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और संबंधित प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजा जा रहा है। यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन किया जाएगा, पर किसी भी शिक्षक की नौकरी पर आँच नहीं आने दी जाएगी। इसी प्रथम चरण के क्रम में आज, 18 जून 2026 को दोपहर 3:30 बजे, जिलाधिकारी कार्यालय पर सैकड़ों शिक्षकों की उपस्थिति में यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन के माध्यम से भारत सरकार से संवेदनशीलता, दूरदर्शिता एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का परिचय देते हुए संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर शिक्षकों को स्थाई राहत प्रदान करने की मांग की गई है। साथ ही, सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस एवं सुरक्षा की स्थिति का तत्काल निराकरण करने की मांग भी उठाई गई। इस ज्ञापन कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सभी जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारियों सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे, जिन्होंने पूर्व से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में बिगुल फूंका।

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  • उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के तिंदवारा गाँव में ग्रामीण पिछले 105 घंटे से बिजली कटौती से जूझ रहे हैं, जो केवल बिजली की मांग नहीं बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता के खिलाफ एक तीव्र विरोध है। सरकार द्वारा 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावों के विपरीत, गाँव में महीनों से टूटे बिजली के खंभे प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बने हुए हैं, और अधिकारी जनता के फोन भी नहीं उठाते। बिजली की अनुपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई, किसानों की उम्मीदें, बुजुर्गों की राहत और घरों की सामान्य दिनचर्या प्रभावित हो रही है। भीषण गर्मी में 10 से 12 घंटे की कटौती और फिर लगातार कई दिनों तक अंधेरा किसी तकनीकी खराबी से अधिक प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। शिकायतें और ज्ञापन ऊपर तक पहुँचने के बावजूद कार्रवाई धीमी रहती है। गाँव के लोगों ने अब सड़क पर उतरकर चक्का जाम करने की चेतावनी दी है, जो उनके आक्रोश और धैर्य की सीमा को दर्शाता है। ग्रामीणों का कहना है कि लोकतंत्र में जनता केवल वोट देने वाली नहीं, बल्कि व्यवस्था की असली मालिक है। तिंदवारा का यह सवाल सिर्फ बिजली का नहीं, बल्कि सरकारी मशीनरी की जवाबदेही का है कि क्या उसका दायित्व केवल योजनाओं की घोषणा करना है या लोगों के जीवन में वास्तविक राहत पहुँचाना भी। यदि जिम्मेदार लोग अब भी नहीं चेतते, तो यह अंधेरा केवल गाँव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी खत्म कर देगा, क्योंकि अनदेखी की गई समस्याएँ आंदोलनों का रूप ले लेती हैं।
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    उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के तिंदवारा गाँव में ग्रामीण पिछले 105 घंटे से बिजली कटौती से जूझ रहे हैं, जो केवल बिजली की मांग नहीं बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता के खिलाफ एक तीव्र विरोध है। सरकार द्वारा 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावों के विपरीत, गाँव में महीनों से टूटे बिजली के खंभे प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बने हुए हैं, और अधिकारी जनता के फोन भी नहीं उठाते।

बिजली की अनुपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई, किसानों की उम्मीदें, बुजुर्गों की राहत और घरों की सामान्य दिनचर्या प्रभावित हो रही है। भीषण गर्मी में 10 से 12 घंटे की कटौती और फिर लगातार कई दिनों तक अंधेरा किसी तकनीकी खराबी से अधिक प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। शिकायतें और ज्ञापन ऊपर तक पहुँचने के बावजूद कार्रवाई धीमी रहती है। गाँव के लोगों ने अब सड़क पर उतरकर चक्का जाम करने की चेतावनी दी है, जो उनके आक्रोश और धैर्य की सीमा को दर्शाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि लोकतंत्र में जनता केवल वोट देने वाली नहीं, बल्कि व्यवस्था की असली मालिक है। तिंदवारा का यह सवाल सिर्फ बिजली का नहीं, बल्कि सरकारी मशीनरी की जवाबदेही का है कि क्या उसका दायित्व केवल योजनाओं की घोषणा करना है या लोगों के जीवन में वास्तविक राहत पहुँचाना भी। यदि जिम्मेदार लोग अब भी नहीं चेतते, तो यह अंधेरा केवल गाँव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी खत्म कर देगा, क्योंकि अनदेखी की गई समस्याएँ आंदोलनों का रूप ले लेती हैं।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • बांदा ज़िले के नरैनी तहसील अंतर्गत कबरा पूर्वा अंशु महूटा में ग्राम सभा की ज़मीन पर कब्ज़ा करने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोग ग्राम सभा की भूमि पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर रहे हैं।
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    बांदा ज़िले के नरैनी तहसील अंतर्गत कबरा पूर्वा अंशु महूटा में ग्राम सभा की ज़मीन पर कब्ज़ा करने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोग ग्राम सभा की भूमि पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर रहे हैं।
    user_Buddhvilas Yadav
    Buddhvilas Yadav
    नरैनी, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • देशभर में युवाओं के लिए ऑनलाइन रोजगार पोर्टल एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए नौकरी से संबंधित जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और रोजगार से जुड़ी ताजा अपडेट्स आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं। डिजिटल माध्यम से रोजगार सेवाओं की बढ़ती पहुंच के कारण युवाओं को नए अवसर मिल रहे हैं, जिससे भर्ती प्रक्रियाएं भी अधिक सुलभ और पारदर्शी बन रही हैं।
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    देशभर में युवाओं के लिए ऑनलाइन रोजगार पोर्टल एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उभर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए नौकरी से संबंधित जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और रोजगार से जुड़ी ताजा अपडेट्स आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं।

डिजिटल माध्यम से रोजगार सेवाओं की बढ़ती पहुंच के कारण युवाओं को नए अवसर मिल रहे हैं, जिससे भर्ती प्रक्रियाएं भी अधिक सुलभ और पारदर्शी बन रही हैं।
    user_Dilip Kumar Bharti
    Dilip Kumar Bharti
    Local News Reporter नरैनी, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • हमीरपुर के मौदहा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा क्लेम न मिलने और पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई न होने से नाराज किसानों ने 'जय जवान जय किसान एसोसिएशन' के बैनर तले एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा। किसानों का आरोप है कि 6 जून 2026 को एसोसिएशन की ओर से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित फसल क्षति, असफल बुवाई, मध्यावधि प्रतिकूलता (मिड-सीजन एडवर्सिटी) और फसल कटाई प्रयोगों से जुड़े अभिलेखों को सार्वजनिक करने और प्रभावित किसानों को नियमानुसार बीमा क्लेम दिलाने की मांग को लेकर एक प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। धरना प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व में उठाए गए बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पात्र किसानों को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक और वैधानिक तरीके से आगे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में गुलाब सिंह, रामफल कुशवाहा, सुनील कुमार, सुदेश चंद, तेजप्रताप सिंह, अमर सिंह, कमल सिंह, विनय राजपूत, अनिल कुमार सहित जय जवान जय किसान एसोसिएशन के पदाधिकारी और कई किसान शामिल थे।
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    हमीरपुर के मौदहा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा क्लेम न मिलने और पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई न होने से नाराज किसानों ने 'जय जवान जय किसान एसोसिएशन' के बैनर तले एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा।

किसानों का आरोप है कि 6 जून 2026 को एसोसिएशन की ओर से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित फसल क्षति, असफल बुवाई, मध्यावधि प्रतिकूलता (मिड-सीजन एडवर्सिटी) और फसल कटाई प्रयोगों से जुड़े अभिलेखों को सार्वजनिक करने और प्रभावित किसानों को नियमानुसार बीमा क्लेम दिलाने की मांग को लेकर एक प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

धरना प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व में उठाए गए बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पात्र किसानों को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक और वैधानिक तरीके से आगे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में गुलाब सिंह, रामफल कुशवाहा, सुनील कुमार, सुदेश चंद, तेजप्रताप सिंह, अमर सिंह, कमल सिंह, विनय राजपूत, अनिल कुमार सहित जय जवान जय किसान एसोसिएशन के पदाधिकारी और कई किसान शामिल थे।
    user_ISLAM
    ISLAM
    Local News Reporter मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • बांदा शहर में मुहर्रम के अवसर पर हुसैनी 72 वेलफेयर सोसायटी ने एक सबील का आयोजन कर राहगीरों और आम नागरिकों को शरबत और ठंडा पानी वितरित किया। इस आयोजन के माध्यम से हिंदू, मुस्लिम, शिया और सुन्नी सहित सभी समुदायों के लोगों को समान रूप से शरबत पिलाकर आपसी भाईचारे, प्रेम और इंसानियत का संदेश दिया गया। सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में लगाई गई इस सबील का मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना और समाज में एकता एवं सद्भाव को बढ़ावा देना था। बड़ी संख्या में लोगों ने सबील पर पहुंचकर शरबत ग्रहण किया और इस पहल की सराहना की। हुसैनी 72 वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद साद हुसैन ने बताया कि इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाएं इंसानियत, न्याय, त्याग और भाईचारे का संदेश देती हैं, जिसे समाज तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले डॉ. शोएब नियाज़ी उर्फ शिबू भाई, अरशद निजामी, राजेश दीक्षित, एडवोकेट इदरीस ख़ान, निज़ामउद्दीन फ़ारूक़ी, आरिफ निजामी, सीमा ख़ान, आरिफ नियाज़ी, अतीक अली फरहान, हमज़ा, फ़ैज़ान रब्बानी, लब्बैक रब्बानी, आसिफ अली, अली सादात खान, अफ़नान हुसैन, शोएब रिजवी, दानिश मजीद, दानिश नियाज़ी, सोएब रिज़वी, समीर अहमद और साकिब अहमद सहित सभी सहयोगियों, नगरवासियों एवं उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन शहर में कौमी एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।
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    बांदा शहर में मुहर्रम के अवसर पर हुसैनी 72 वेलफेयर सोसायटी ने एक सबील का आयोजन कर राहगीरों और आम नागरिकों को शरबत और ठंडा पानी वितरित किया। इस आयोजन के माध्यम से हिंदू, मुस्लिम, शिया और सुन्नी सहित सभी समुदायों के लोगों को समान रूप से शरबत पिलाकर आपसी भाईचारे, प्रेम और इंसानियत का संदेश दिया गया। सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में लगाई गई इस सबील का मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना और समाज में एकता एवं सद्भाव को बढ़ावा देना था। बड़ी संख्या में लोगों ने सबील पर पहुंचकर शरबत ग्रहण किया और इस पहल की सराहना की।

हुसैनी 72 वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद साद हुसैन ने बताया कि इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाएं इंसानियत, न्याय, त्याग और भाईचारे का संदेश देती हैं, जिसे समाज तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले डॉ. शोएब नियाज़ी उर्फ शिबू भाई, अरशद निजामी, राजेश दीक्षित, एडवोकेट इदरीस ख़ान, निज़ामउद्दीन फ़ारूक़ी, आरिफ निजामी, सीमा ख़ान, आरिफ नियाज़ी, अतीक अली फरहान, हमज़ा, फ़ैज़ान रब्बानी, लब्बैक रब्बानी, आसिफ अली, अली सादात खान, अफ़नान हुसैन, शोएब रिजवी, दानिश मजीद, दानिश नियाज़ी, सोएब रिज़वी, समीर अहमद और साकिब अहमद सहित सभी सहयोगियों, नगरवासियों एवं उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन शहर में कौमी एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हमीरपुर जिले के सुमेरपुर कस्बे के नेहा चौराहा पर बुधवार सुबह करीब 6 बजे हड़कंप मच गया, जब एसडीएम न्यायिक केडी शर्मा द्वारा रोकने का प्रयास किए जाने पर बालू लदे एक ट्रैक्टर का चालक चलते वाहन से कूदकर फरार हो गया। चालक के कूदते ही ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक खड्ड में पलट गया। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई और कई लोग बाल-बाल बच गए। जानकारी के अनुसार, क्षेत्र की विभिन्न बालू खदानों से ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू की सप्लाई की जा रही है। इसी क्रम में एसडीएम न्यायिक ने एक बालू लदे ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक वाहन छोड़कर भाग निकला। चालक के फरार होते ही ट्रैक्टर ने अपना नियंत्रण खो दिया और वह खड्ड में पलट गया। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और ट्रैक्टर को कब्जे में लेकर फैक्टरी एरिया पुलिस चौकी में खड़ा कराया। थानाध्यक्ष पवन कुमार पटेल ने बताया कि ट्रैक्टर को जब्त कर लिया गया है और आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए खनिज विभाग को पत्र भेजा गया है। मामले की जांच जारी है।
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    हमीरपुर जिले के सुमेरपुर कस्बे के नेहा चौराहा पर बुधवार सुबह करीब 6 बजे हड़कंप मच गया, जब एसडीएम न्यायिक केडी शर्मा द्वारा रोकने का प्रयास किए जाने पर बालू लदे एक ट्रैक्टर का चालक चलते वाहन से कूदकर फरार हो गया। चालक के कूदते ही ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक खड्ड में पलट गया। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई और कई लोग बाल-बाल बच गए।

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र की विभिन्न बालू खदानों से ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू की सप्लाई की जा रही है। इसी क्रम में एसडीएम न्यायिक ने एक बालू लदे ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक वाहन छोड़कर भाग निकला। चालक के फरार होते ही ट्रैक्टर ने अपना नियंत्रण खो दिया और वह खड्ड में पलट गया।

सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और ट्रैक्टर को कब्जे में लेकर फैक्टरी एरिया पुलिस चौकी में खड़ा कराया। थानाध्यक्ष पवन कुमार पटेल ने बताया कि ट्रैक्टर को जब्त कर लिया गया है और आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए खनिज विभाग को पत्र भेजा गया है। मामले की जांच जारी है।
    user_ISLAM
    ISLAM
    Local News Reporter मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • हमीरपुर जिले के मौदहा कोतवाली क्षेत्र स्थित गुरदहा गांव में गुरुवार सुबह एक युवक करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया, जिसके चलते युवक को तुरंत मौदहा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। जानकारी के अनुसार, गुरदहा गांव निवासी विजय पुत्र राजेश सिंह (20 वर्ष) सुबह स्नान करने के बाद घर से बाहर निकला था। इसी दौरान वह अचानक विद्युत करंट की चपेट में आ गया और बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। यह देखकर परिजनों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों का कहना है कि घर के पास से गुजर रही विद्युत केबल कहीं से कटी हुई थी, जिससे करंट फैलने की आशंका है। लोगों ने युवक को तत्काल उठाकर मौदहा के सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहाँ चिकित्सक उसका उपचार कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, फिलहाल युवक की हालत स्थिर बनी हुई है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है और इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।
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    हमीरपुर जिले के मौदहा कोतवाली क्षेत्र स्थित गुरदहा गांव में गुरुवार सुबह एक युवक करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया, जिसके चलते युवक को तुरंत मौदहा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है।

जानकारी के अनुसार, गुरदहा गांव निवासी विजय पुत्र राजेश सिंह (20 वर्ष) सुबह स्नान करने के बाद घर से बाहर निकला था। इसी दौरान वह अचानक विद्युत करंट की चपेट में आ गया और बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। यह देखकर परिजनों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों का कहना है कि घर के पास से गुजर रही विद्युत केबल कहीं से कटी हुई थी, जिससे करंट फैलने की आशंका है।

लोगों ने युवक को तत्काल उठाकर मौदहा के सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहाँ चिकित्सक उसका उपचार कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, फिलहाल युवक की हालत स्थिर बनी हुई है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है और इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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