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गांव के सरपंच ने आज तक कोई विकास नहीं करवाया सभी ने अपना-अपना घर बनाया है हमारे गांव के सरपंच विकास के नाम पर एक कलंक इस कलंक को अगर गांव वाले मिलकर मिटाना चाहे मिट्टी भी सकता है एकता ही संगठन है संगठन ही एकता है
Nand lal Labana
गांव के सरपंच ने आज तक कोई विकास नहीं करवाया सभी ने अपना-अपना घर बनाया है हमारे गांव के सरपंच विकास के नाम पर एक कलंक इस कलंक को अगर गांव वाले मिलकर मिटाना चाहे मिट्टी भी सकता है एकता ही संगठन है संगठन ही एकता है
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- प्रभु तारा छै हजार की गूंज के बीच निकली आदिनाथ की पालकी पर्यूषण महापर्व की धून थमी *प्रभु तारा नाम छै हजार की गूंज के बीच निकली आदिनाथ की पालकी*। *आसपुर में पर्यूषण महापर्व की धुन थमी* *सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से रथोत्सव संहित क्षेत्र के समस्त जैन बाहुल्य गांवों मे चल रहे दस लक्षण पर्युषण महापर्व का समापन किया। बिसा नरसिंहपुरा दिगम्बर समाज की ओर से शांतिनाथ* - *दिगम्बर जैन मंदिर एवं नागदा समाज की ओर से आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से निकली रथयात्रा के दौरान गणेश चौक, तहसील चौराया, पुराना बस स्टैंड एवं* *होली चौक में युवक युवतियों नें भक्ति गीतों की धुन पर सुंदर डांडिया रास प्रस्तुत कर महोत्सव के आनंद को* *बहुगुणित किया। रथोत्सव का नजारा देखने आस पास के गांवों से लोग उमड़े। रात्रि में रथ भंडारण की रस्म अदायगी के साथ तीर्थकर भगवंत एवं* *जिनवाणी मां की मंगल आराधना कर विश्व शांति एवं लोक मंगल की कामना की। चंपालाल भूखिया, सेठ शांतिलाल सिंघवी, अध्यक्ष भगवती लाल भूखिया, धनपाल नेतावत, शंकरलाल कुंडलिया, सेठ लक्ष्मीचंद किकावत, व्यापार संघ अध्यक्ष सुशील जैन, नरेंद्र जैन, कारुलाल रायकीया, प्रकाश नागदा एवं पुलक मंच के अनिल चंदावत आदि उपस्थित रहे*।1
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- संगेसरा गांव के टीचर श्रीमान जगदीश जी अग्रवाल को श्रीमती कलेक्टर साहिब ने स्वागत करके सम्मान दिया था उसमें श्रीमान जगदीश जी अग्रवाल ने संगेसरा गांव का नाम रोशन किया1
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- जोधपुर केमिकल फैक्ट्री ब्लास्ट में डूंगरपुर के फायरकर्मी प्रीतेश परमार की मौत डूंगरपुर/जोधपुर। जोधपुर के बासनी क्षेत्र की केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान हुए भीषण ब्लास्ट में गंभीर रूप से झुलसे फायरकर्मी प्रीतेश परमार की शनिवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे में प्रीतेश करीब 90 फीसदी तक झुलस गए थे और पिछले दो दिनों से वेंटिलेटर पर उनका इलाज चल रहा था। प्रीतेश डूंगरपुर जिले के रहने वाले थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। प्रीतेश के परिवार का अग्निशमन सेवा से भी गहरा जुड़ाव है। उनके पिता धुलेश्वर परमार डूंगरपुर नगर परिषद की फायर ब्रिगेड में लीडिंग फायरमैन हैं और करीब 25 वर्षों से अधिक समय से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। आग बुझाने के दौरान हुआ था जोरदार ब्लास्ट हादसा 23 सितंबर की शाम जोधपुर के बासनी स्थित गणेश नगर क्षेत्र की एक हैंडीक्राफ्ट/केमिकल फैक्ट्री में हुआ था। शाम करीब 5:30 बजे फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिली। आग पर काबू पाने के लिए अलग-अलग फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों के अनुसार करीब 10 दमकल गाड़ियां ऑपरेशन में लगाई गई थीं। दमकलकर्मी आग बुझाने में जुटे थे, तभी फैक्ट्री में रखे ज्वलनशील केमिकल से भरे ड्रमों में अचानक विस्फोट होने लगे। एक रिपोर्ट के अनुसार छत से पत्थर गिरने के बाद फिनोल से भरे ड्रम में विस्फोट होने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों की जांच जारी है। विस्फोट इतना तेज था कि आग बुझाने में जुटे 14 फायरकर्मी झुलस गए, जिनमें कई की हालत गंभीर थी। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर हालत में जयपुर किया गया था रेफर हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल फायरकर्मियों को बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर किया गया था। कुछ घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जयपुर के एसएमएस अस्पताल पहुंचाया गया। प्रीतेश की हालत भी बेहद गंभीर थी और करीब 90 फीसदी तक झुलसने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। इलाज के दौरान शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। पिता भी फायर ब्रिगेड में, बेटे ने भी चुनी अग्निशमन सेवा की राह प्रीतेश के परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी बेहद दर्दनाक है क्योंकि उनके पिता धुलेश्वर परमार खुद लंबे समय से फायर ब्रिगेड में सेवाएं दे रहे हैं। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए प्रीतेश भी अग्निशमन सेवा से जुड़े थे। ड्यूटी के दौरान हादसे में बेटे की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हादसे ने खड़े किए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जोधपुर की इस घटना में बड़ी संख्या में दमकलकर्मियों के झुलसने के बाद फैक्ट्री में रखे ज्वलनशील केमिकल और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने फैक्ट्री संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। प्रीतेश परमार की मौत ने उस अग्निशमनकर्मी की जिम्मेदारी और जोखिम को एक बार फिर सामने ला दिया है, जो दूसरों की जान और संपत्ति बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर आग की लपटों के बीच पहुंचता है।1