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वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र में एक ज़मीनी विवाद का मामला सुर्खियों में है, जहाँ एक परिवार ने अपने पड़ोसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि उनके बच्चों को ज़मीनी विवाद के चलते एक रेप केस के मुक़दमे में फँसाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में मंगलवार को परिवार के सदस्यों ने चौबेपुर थाने का घेराव किया। थाना प्रभारी वीरेंद्र सोनकर ने परिवार को आश्वस्त किया कि मामले में 'सिडियार' निकालकर पूरी जाँच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह हाजी हफीजुल्ला वारसी की एक खास रिपोर्ट है।
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वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र में एक ज़मीनी विवाद का मामला सुर्खियों में है, जहाँ एक परिवार ने अपने पड़ोसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि उनके बच्चों को ज़मीनी विवाद के चलते एक रेप केस के मुक़दमे में फँसाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में मंगलवार को परिवार के सदस्यों ने चौबेपुर थाने का घेराव किया। थाना प्रभारी वीरेंद्र सोनकर ने परिवार को आश्वस्त किया कि मामले में 'सिडियार' निकालकर पूरी जाँच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह हाजी हफीजुल्ला वारसी की एक खास रिपोर्ट है।
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- सोलर की अर्थिंग में केमिकल भरने की एक विशिष्ट प्रक्रिया होती है, जिसकी शुरुआत 4 इंच के ड्रिल से की जाती है। यह ड्रिल अर्थिंग रॉड की लंबाई के बराबर, यानी जितने फिट की अर्थिंग है, उतना गहरा किया जाता है। ड्रिल पूरा हो जाने के बाद, अर्थिंग रॉड को उसमें डाला जाता है और फिर पूरे छेद को अर्थिंग के विशेष केमिकल या सामग्री से भर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अर्थिंग की कंडक्टिविटी लंबे समय तक उच्च गुणवत्ता वाली बनी रहे।1
- बनारस के भेलूपुरा इलाके में शराब के नशे में धुत एक युवक ने अपनी थार गाड़ी को डिवाइडर पर चढ़ा दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बनारस में आए दिन शराब के नशे में होने वाले सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे पहले भी, बिहार नंबर की एक जीप में सवार युवकों ने शराब पीकर एक एक्सीडेंट को अंजाम दिया था।1
- विद्युत विभाग ने सभी विद्युत कर्मियों को सुरक्षा के महत्व पर बल देते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि विद्युत पोल और लाइन पर कोई भी कार्य शुरू करने से पहले नियमित और सुरक्षित तरीके से शटडाउन प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। विभाग ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि सभी विद्युत कर्मी, विद्युत विभाग और अपने परिवार दोनों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं। यह भी रेखांकित किया गया है कि सुरक्षा की भूमिका बेहद अहम है, क्योंकि जीवन बहुत अनमोल है।1
- एक कार्यक्रम में क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर को भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति भेंट की जा रही थी। इस दौरान, सचिन तेंदुलकर ने मूर्ति लेने से पहले सम्मानपूर्वक अपने जूते उतारे। जूते उतारने के बाद ही वह मूर्ति लेने के लिए आगे बढ़े।1
- जनगणना के संबंध में सकलडीहा तहसील में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में SDM कुंदन राज कपूर और तहसीलदार अनुराग सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे। उनके साथ अन्य अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।1
- चंदौली जिले के खड़ान गांव में पिछले दो से तीन साल से एक नाली का निर्माण हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, इस नाली पर अभी तक ढक्कन नहीं रखा गया है, जिसके कारण यह अधूरी पड़ी है।1
- भारत में अब नॉन-डीसीआर पैनल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप इन पर नेट मीटरिंग की सुविधा नहीं मिलेगी। इस नई व्यवस्था के तहत, नेट मीटरिंग की सुविधा अब केवल डीसीआर पैनल पर ही उपलब्ध होगी।1
- आज बनारस के लंका थाना पर अधिवक्ताओं ने जमकर हंगामा किया। अधिवक्ता इस बात से नाराज़ थे कि एक आरोपी को थाने के अंदर कुर्सी देकर उसकी 'सेवा' की जा रही थी। इसी नाराजगी के चलते अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई।1
- चंदौली जिले के चहनिया विकास खंड के नादी गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, जहाँ गलियों, नालियों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नियुक्त सफाईकर्मी लंबे समय से गांव में दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे ग्रामीण और छोटे बच्चे स्वयं झाड़ू उठाकर सफाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाईकर्मी केवल कागजों में उपस्थिति दर्ज कराकर वेतन उठा रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई कार्य नहीं दिख रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि सफाई कर्मचारी कभी-कभार आते भी हैं तो केवल ग्राम प्रधान या प्रभावशाली लोगों के आसपास ही नजर आते हैं, बाकी पूरे गांव की सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। ग्रामीणों ने चहनिया ब्लॉक प्रशासन, खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), सहायक विकास अधिकारी पंचायत (एडीओ पंचायत), जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) और जनपद के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, पूछ रहे हैं कि जब महीनों से सफाई नहीं हो रही तो ये अधिकारी क्या कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नादी गांव की स्थिति दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं केवल फाइलों और फोटो सेशन तक सीमित रह गई हैं, और प्रभावी निरीक्षण तथा जवाबदेही की कमी के कारण यह दुर्दशा हुई है। आरोप है कि चहनिया ब्लॉक के कई गांवों में यही हाल है, जहाँ सफाईकर्मी काम नहीं कर रहे लेकिन उनके वेतन पर कोई रोक नहीं। यह स्थिति निगरानी व्यवस्था की पूर्ण विफलता को दर्शाती है। बरसात का मौसम निकट होने से गंदगी और जाम नालियों के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिसे अगर जल्द ठीक नहीं किया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है। इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार होंगे। आक्रोशित ग्रामीणों ने 'नो वर्क नो पे' नीति लागू करने की मांग की है, उनका कहना है कि काम न करने वाले कर्मचारियों को जनता के पैसे से वेतन देना अनुचित है। उन्होंने जिलाधिकारी चंदौली से नादी गांव सहित चहनिया ब्लॉक के सभी गांवों की सफाई व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच, लापरवाह सफाईकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि केवल कागजी रिपोर्ट और बैठकों से गांव साफ नहीं होंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर ईमानदारी से कार्य करने की आवश्यकता है। नादी गांव की यह गंभीर तस्वीर स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और स्वच्छ भारत मिशन के दावों की पोल खोलती है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीणों को गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।1