भितरवार नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 5 के पार्षद जितेंद्र सिंह परिहार पर 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे' वाली कहावत सटीक बैठ रही है, क्योंकि नगर के मुख्य तिराहे पर महिला सम्मान की दुहाई देकर धरना-प्रदर्शन करने वाले इस पार्षद के अपने ही वार्ड में महिलाएं असुरक्षित हैं। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाया गया महिला व पुरुष यात्री प्रतीक्षालय वर्तमान में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का गढ़ बन चुका है। देखरेख के अभाव में यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह बर्बाद हो रही है, और जिम्मेदार अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। सर्दी, गर्मी और बरसात से बचने के लिए बनाया गया यह यात्री प्रतीक्षालय अब महिलाओं के लिए खौफ का कारण बन गया है। बसों और वाहनों के इंतजार में आने वाली ग्रामीण व स्थानीय महिलाएं नशेड़ियों के डर से इसके अंदर कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं और उन्हें तपती धूप तथा खुले आसमान के नीचे खड़े होकर गाड़ियों का इंतजार करना पड़ता है। इस बदहाली का मुख्य कारण प्रतीक्षालय के समीप स्थित शराब की दुकान है, जहाँ दिन-रात शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। यात्री प्रतीक्षालय के अंदर अवैध रूप से लगने वाले कबाब, बिरयानी और अंडे के ठेलों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जहाँ लोग शराब दुकान से बोतलें लेकर सीधे इन्हीं ठेलों पर आकर प्रतीक्षालय को अपना 'मयखाना' बना लेते हैं। दिनदहाड़े होने वाली इस अराजकता से यहाँ का माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे महिलाओं और संभ्रांत नागरिकों का यहाँ से गुजरना भी मुश्किल हो गया है। इस बदहाली ने पार्षद जितेंद्र सिंह परिहार की कथनी और करनी को सरेआम बेनकाब कर दिया है। नगर में तीखी चर्चा है कि पार्षद ने पहले मुख्य तिराहे पर शौचालय के बाहर फल का ठेला लगाने वालों को हटाने के लिए 'महिला सम्मान' का कार्ड खेलकर खूब सियासत चमकाई थी। लेकिन अब जब उनके अपने ही वार्ड क्रमांक 5 में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की धज्जियां उड़ रही हैं, तो पार्षद महोदय ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दूसरों को नसीहत देने वाले जनप्रतिनिधि का अपने ही क्षेत्र की समस्याओं से मुंह मोड़ना यह साबित करता है कि उनके लिए महिला सम्मान सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट था। जनता अब खुले तौर पर सवाल उठा रही है कि मुख्य तिराहे पर फल के ठेले हटवाने के लिए धरना देने वाले पार्षद को अपने वार्ड में यात्री प्रतीक्षालय के अंदर लगने वाले कबाब, बिरयानी और अंडे के अवैध ठेले क्यों नहीं दिखाई देते? वे पूछ रहे हैं कि 'महिला सम्मान' की परिभाषा सिर्फ दूसरे वार्डों के लिए है, और अपने वार्ड में खुले आसमान के नीचे खड़ी रहने को मजबूर महिलाओं की लाचारी पर पार्षद की अंतरात्मा क्यों सो रही है? जनता यह भी जानना चाहती है कि शराब के पियक्कड़ और चखने के ठेलों के कारण प्रतीक्षालय को 'मयखाना' बनाने वाले उपद्रवियों पर पार्षद ने आज तक पुलिस या प्रशासन से कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की। नागरिक सवाल कर रहे हैं कि क्या वार्ड क्रमांक 5 की जनता ने उन्हें केवल चुनावी भाषणों और दोहरी राजनीति के लिए चुना था, या फिर सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और विकास उनकी जिम्मेदारी नहीं है? वे पार्षद से इस 'नशे के अड्डे' पर कभी औचक निरीक्षण करने की हिम्मत दिखाने की चुनौती भी दे रहे हैं।
भितरवार नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 5 के पार्षद जितेंद्र सिंह परिहार पर 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे' वाली कहावत सटीक बैठ रही है, क्योंकि नगर के मुख्य तिराहे पर महिला सम्मान की दुहाई देकर धरना-प्रदर्शन करने वाले इस पार्षद के अपने ही वार्ड में महिलाएं असुरक्षित हैं। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाया गया महिला व पुरुष यात्री प्रतीक्षालय वर्तमान में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का गढ़ बन चुका है। देखरेख के अभाव में यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह बर्बाद हो रही है, और जिम्मेदार अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। सर्दी, गर्मी और बरसात से बचने के लिए बनाया गया यह यात्री प्रतीक्षालय अब महिलाओं के लिए खौफ का कारण बन गया है। बसों और वाहनों के इंतजार में आने वाली ग्रामीण व स्थानीय महिलाएं नशेड़ियों के डर से इसके अंदर कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं और उन्हें तपती धूप तथा खुले आसमान के नीचे खड़े होकर गाड़ियों का इंतजार करना पड़ता है। इस बदहाली का मुख्य कारण प्रतीक्षालय के समीप स्थित शराब की दुकान है, जहाँ दिन-रात शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। यात्री प्रतीक्षालय के अंदर अवैध रूप से लगने वाले कबाब, बिरयानी और अंडे के ठेलों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जहाँ लोग शराब दुकान से बोतलें लेकर सीधे इन्हीं ठेलों पर आकर प्रतीक्षालय को अपना 'मयखाना' बना लेते हैं। दिनदहाड़े होने वाली इस अराजकता से यहाँ का माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे महिलाओं और संभ्रांत नागरिकों का यहाँ से गुजरना भी मुश्किल हो गया है। इस बदहाली ने पार्षद जितेंद्र सिंह परिहार की कथनी और करनी को सरेआम बेनकाब कर दिया है। नगर में
तीखी चर्चा है कि पार्षद ने पहले मुख्य तिराहे पर शौचालय के बाहर फल का ठेला लगाने वालों को हटाने के लिए 'महिला सम्मान' का कार्ड खेलकर खूब सियासत चमकाई थी। लेकिन अब जब उनके अपने ही वार्ड क्रमांक 5 में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की धज्जियां उड़ रही हैं, तो पार्षद महोदय ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दूसरों को नसीहत देने वाले जनप्रतिनिधि का अपने ही क्षेत्र की समस्याओं से मुंह मोड़ना यह साबित करता है कि उनके लिए महिला सम्मान सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट था। जनता अब खुले तौर पर सवाल उठा रही है कि मुख्य तिराहे पर फल के ठेले हटवाने के लिए धरना देने वाले पार्षद को अपने वार्ड में यात्री प्रतीक्षालय के अंदर लगने वाले कबाब, बिरयानी और अंडे के अवैध ठेले क्यों नहीं दिखाई देते? वे पूछ रहे हैं कि 'महिला सम्मान' की परिभाषा सिर्फ दूसरे वार्डों के लिए है, और अपने वार्ड में खुले आसमान के नीचे खड़ी रहने को मजबूर महिलाओं की लाचारी पर पार्षद की अंतरात्मा क्यों सो रही है? जनता यह भी जानना चाहती है कि शराब के पियक्कड़ और चखने के ठेलों के कारण प्रतीक्षालय को 'मयखाना' बनाने वाले उपद्रवियों पर पार्षद ने आज तक पुलिस या प्रशासन से कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की। नागरिक सवाल कर रहे हैं कि क्या वार्ड क्रमांक 5 की जनता ने उन्हें केवल चुनावी भाषणों और दोहरी राजनीति के लिए चुना था, या फिर सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और विकास उनकी जिम्मेदारी नहीं है? वे पार्षद से इस 'नशे के अड्डे' पर कभी औचक निरीक्षण करने की हिम्मत दिखाने की चुनौती भी दे रहे हैं।
- भितरवार नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 5 के पार्षद जितेंद्र सिंह परिहार पर 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे' वाली कहावत सटीक बैठ रही है, क्योंकि नगर के मुख्य तिराहे पर महिला सम्मान की दुहाई देकर धरना-प्रदर्शन करने वाले इस पार्षद के अपने ही वार्ड में महिलाएं असुरक्षित हैं। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाया गया महिला व पुरुष यात्री प्रतीक्षालय वर्तमान में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का गढ़ बन चुका है। देखरेख के अभाव में यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह बर्बाद हो रही है, और जिम्मेदार अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। सर्दी, गर्मी और बरसात से बचने के लिए बनाया गया यह यात्री प्रतीक्षालय अब महिलाओं के लिए खौफ का कारण बन गया है। बसों और वाहनों के इंतजार में आने वाली ग्रामीण व स्थानीय महिलाएं नशेड़ियों के डर से इसके अंदर कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं और उन्हें तपती धूप तथा खुले आसमान के नीचे खड़े होकर गाड़ियों का इंतजार करना पड़ता है। इस बदहाली का मुख्य कारण प्रतीक्षालय के समीप स्थित शराब की दुकान है, जहाँ दिन-रात शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। यात्री प्रतीक्षालय के अंदर अवैध रूप से लगने वाले कबाब, बिरयानी और अंडे के ठेलों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जहाँ लोग शराब दुकान से बोतलें लेकर सीधे इन्हीं ठेलों पर आकर प्रतीक्षालय को अपना 'मयखाना' बना लेते हैं। दिनदहाड़े होने वाली इस अराजकता से यहाँ का माहौल पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे महिलाओं और संभ्रांत नागरिकों का यहाँ से गुजरना भी मुश्किल हो गया है। इस बदहाली ने पार्षद जितेंद्र सिंह परिहार की कथनी और करनी को सरेआम बेनकाब कर दिया है। नगर में तीखी चर्चा है कि पार्षद ने पहले मुख्य तिराहे पर शौचालय के बाहर फल का ठेला लगाने वालों को हटाने के लिए 'महिला सम्मान' का कार्ड खेलकर खूब सियासत चमकाई थी। लेकिन अब जब उनके अपने ही वार्ड क्रमांक 5 में महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की धज्जियां उड़ रही हैं, तो पार्षद महोदय ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दूसरों को नसीहत देने वाले जनप्रतिनिधि का अपने ही क्षेत्र की समस्याओं से मुंह मोड़ना यह साबित करता है कि उनके लिए महिला सम्मान सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट था। जनता अब खुले तौर पर सवाल उठा रही है कि मुख्य तिराहे पर फल के ठेले हटवाने के लिए धरना देने वाले पार्षद को अपने वार्ड में यात्री प्रतीक्षालय के अंदर लगने वाले कबाब, बिरयानी और अंडे के अवैध ठेले क्यों नहीं दिखाई देते? वे पूछ रहे हैं कि 'महिला सम्मान' की परिभाषा सिर्फ दूसरे वार्डों के लिए है, और अपने वार्ड में खुले आसमान के नीचे खड़ी रहने को मजबूर महिलाओं की लाचारी पर पार्षद की अंतरात्मा क्यों सो रही है? जनता यह भी जानना चाहती है कि शराब के पियक्कड़ और चखने के ठेलों के कारण प्रतीक्षालय को 'मयखाना' बनाने वाले उपद्रवियों पर पार्षद ने आज तक पुलिस या प्रशासन से कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की। नागरिक सवाल कर रहे हैं कि क्या वार्ड क्रमांक 5 की जनता ने उन्हें केवल चुनावी भाषणों और दोहरी राजनीति के लिए चुना था, या फिर सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और विकास उनकी जिम्मेदारी नहीं है? वे पार्षद से इस 'नशे के अड्डे' पर कभी औचक निरीक्षण करने की हिम्मत दिखाने की चुनौती भी दे रहे हैं।2
- मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के माता बसैया थाना क्षेत्र के ग्राम किशनपुर में शनिवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। यहां एक व्यक्ति ने कथित रूप से अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी। इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी शिकारपुर रेलवे फाटक के पास पहुँचा और ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही माता बसैया थाना पुलिस, वरिष्ठ अधिकारी और एफएसएल टीम तुरंत मौके पर पहुँची। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, रेलवे ट्रैक से बरामद आरोपी के शव को पोस्टमार्टम के लिए मुरैना के जिला अस्पताल भेज दिया गया है।1
- पारस जैन ने अपने सबसे बड़े प्लान का खुलासा कर दिया है। इस घोषणा के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस योजना से व्यापारियों की सुरक्षा में कोई बदलाव आएगा।1
- करैरा क्षेत्र के दिनारा कस्बे में पोस्टमार्टम हाउस (शवगृह) की सुविधा न होने के कारण करीब 70 गांवों के लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। समाजसेवी एवं गौ सेवक कल्लू महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्वास्थ्य मंत्री और जिला प्रशासन से जनहित में दिनारा में एक आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस के निर्माण की तत्काल मांग उठाई है। उनका कहना है कि यह सुविधा लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकता बनी हुई है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कल्लू महाराज ने बताया कि दिनारा में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं मौजूद होने के बावजूद पोस्टमार्टम हाउस उपलब्ध नहीं है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि वर्षों पहले स्कूल के पीछे एक शवगृह बनाया गया था, जो लगभग 30 वर्षों से बंद पड़ा है और उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। इस कारण सड़क दुर्घटनाओं, करंट लगने, सांप काटने, आत्महत्या या अन्य किसी कारण से मृत्यु होने पर शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए परिजनों को करैरा ले जाना पड़ता है। इससे मृतक के परिवार को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों से जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दिनारा क्षेत्र करीब 70 गांवों का प्रमुख केंद्र है, और यदि यहां यह सुविधा मिलती है तो ग्रामीणों को समय पर प्रक्रियाएं पूरी करने में आसानी होगी तथा अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी। कल्लू महाराज ने प्रस्तावित पोस्टमार्टम हाउस को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने का सुझाव दिया है। इसमें परिसर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, चारदीवारी का निर्माण और छायादार व पर्यावरण अनुकूल पौधारोपण शामिल होना चाहिए, ताकि परिसर सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपील की है कि दिनारा क्षेत्र की इस वर्षों पुरानी मांग को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उनका मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पताल भवनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पोस्टमार्टम जैसी आवश्यक सुविधाएं भी प्रत्येक बड़े क्षेत्र में उपलब्ध होनी चाहिए। इस महत्वपूर्ण मांग का समर्थन दीपक तिवारी, जितेंद्र लोधी, पंजाब लोधी, अजय लोधी, पुष्पेंद्र लोधी, जयराम लोधी, राजू लोधी एवं मैथिली शरण गुप्ता सहित कई स्थानीय नागरिकों ने भी किया है। सभी ने शासन और प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए दिनारा में शीघ्र आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस के निर्माण और वर्षों से बंद पड़े पुराने शवगृह के पुनर्विकास की मांग की है, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिल सके।3
- मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित नरवर के लोडी माता मंदिर के पास एक वाइन शॉप से चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक मोटरसाइकिल पर लोडिंग गाड़ी की तरह भारी मात्रा में शराब ले जाई जा रही है, जिसने क्षेत्र में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में वाइन शॉप संचालकों की मनमानी लगातार बढ़ रही है, जहाँ दुकान पर शराब एमआरपी (MRP) से अधिक कीमत पर बेची जा रही है। लोगों का कहना है कि खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है, लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए कोई जिम्मेदार नजर नहीं आ रहा है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने बताया कि संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, और वे जानना चाहते हैं कि आखिर किसके संरक्षण में यह मनमानी चल रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को इस परेशानी से राहत मिल सके।1
- दतिया पुलिस ने रतनगढ़ मेले में सक्रिय जेबकतरों के एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक माँ-बेटे की जोड़ी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह बड़ी कार्रवाई अतरेटा पुलिस थाना द्वारा की गई, जिससे श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है। पुलिस को यह सफलता दिनांक 29 जून 2026 को मिली, जब मेले में सक्रिय दो शातिर जेबकतरों को दबोच लिया गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान रवि (पुत्र संजय सिंह परिहार) और रानी (पत्नी संजय सिंह परिहार) के रूप में हुई है। ये दोनों मूलतः कानपुर देहात (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं और वर्तमान में भिंड के आर्या नगर में रह रहे थे। पुलिस ने इनके पास से ₹70,500 नकद और एक टीवीएस अपाचे मोटरसाइकिल, जिसकी कीमत लगभग ₹1,20,000 है, बरामद की है। पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने स्वीकार किया कि बरामद नकदी में पूर्व में की गई चोरियों की रकम भी शामिल है। पुलिस उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि उनकी अन्य वारदातों का भी खुलासा किया जा सके। दतिया पुलिस ने मेले में आए सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि यदि उनके साथ भी चोरी या जेबकटाई की कोई घटना हुई है, तो वे तुरंत थाना अतरेटा से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र सिंह राजपूत, चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक ब्रजेश मिश्रा सहित उनकी पूरी टीम (आरक्षक शुभांशु चौबे, नीतू परिहार, प्रधान आरक्षक सीतासरण, प्रमोद यादव, आरक्षक परमल, जगेंद्र, संजय सोलंकी एवं प्रदीप) की सराहनीय भूमिका रही।1
- ग्वालियर की एक महिला ने ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान से अपनी गुहार लगाई है।1
- सतना के पाठक अस्पताल में इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही का एक आरोप सामने आया है। परिजनों का दावा है कि रवि रजक नामक मरीज को पथरी के ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, सर्जरी के बाद परिजनों का कहना है कि गलती से उनकी किडनी निकाल दी गई। इस घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल में भारी हंगामा मच गया।1