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लेखपाल की खानापूर्ति के बाद तलाबी नंबर पर निर्माण में पड़ गई छत 👉फतेहपुर ब्रेकिंग लेखपाल की खानापूर्ति के बाद तलाबी नंबर पर निर्माण में पड़ गई छत! 👉शिकायतें होती रहीं. निर्माण चलता रहा. अब बुलडोजर का इंतजार 👉बहरामपुर में सरकारी तालाब पर कथित अवैध निर्माण, राजस्व विभाग की कार्रवाई पर सवाल यूपी के फतेहपुर से सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहरामपुर गांव में तलाबी नंबर की जमीन पर कथित अवैध निर्माण की शिकायतें होती रहीं.कार्रवाई की बात भी सामने आई.लेकिन देखते ही देखते निर्माण की छत पड़ गई। एक तरफ अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, तो दूसरी तरफ बहरामपुर में सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण कैसे आगे बढ़ता रहा, यही सबसे बड़ा सवाल है। मामला बहरामपुर गांव के गाटा संख्या 219 क, ख से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण कराया जा रहा था। मामले की शिकायतें जिम्मेदारों तक पहुंचीं। लेखपाल की ओर से कार्रवाई किए जाने और थाना थरियांव को सूचना दिए जाने की बात भी सामने आई। लेकिन इसके बावजूद...निर्माण रुका नहीं! बल्कि निर्माण कार्य आगे बढ़ा और अब छत डाल दिए जाने का आरोप सामने आया है।यानी सवाल सिर्फ अतिक्रमण का नहीं...सवाल कार्रवाई की टाइमिंग का है। बताया जा रहा है कि 19 सितंबर को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मौके पर बड़ी मात्रा में मोरंग और गिट्टी एकत्र होने और निर्माण को आगे बढ़ाने की तैयारी का दावा किया गया था। वीडियो सामने आने के बाद भी अगर मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और शटरिंग लगी रही, तो सवाल उठना लाजिमी है— जब छत पड़ने की आशंका पहले से थी, तो शटरिंग क्यों नहीं हटाई गई?अगर निर्माण रोकने की कार्रवाई की गई थी, तो फिर निर्माणकर्ता दोबारा निर्माण तक कैसे पहुंच गए स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।इसी वजह से निर्माण करने वालों के हौसले बढ़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं।स्थानीय स्तर पर निर्माणकर्ताओं द्वारा पैसे देने और निर्माण करा लेने जैसी बातें कहे जाने के आरोप भी सामने आए हैं। अगर ऐसे दावे किए गए हैं तो यह जांच का विषय है कि— पैसा किसे दिया गया? किस काम के लिए दिया गया? और सबसे बड़ा सवाल— क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी? सरकारी जमीन पर निर्माण कोई पलक झपकते नहीं होता।पहले जमीन पर सामग्री पहुंचती है... फिर नींव पड़ती है... दीवारें उठती हैं... शटरिंग लगती है... और उसके बाद छत पड़ती है। तो फिर सवाल— राजस्व विभाग को जानकारी कब हुई? लेखपाल ने उच्च अधिकारियों को कब अवगत कराया? मौके पर कार्रवाई कब हुई? और अगर कार्रवाई पहले ही कर दी गई थी तो— फिर छत कैसे पड़ गई? वीओ-5 — पुराने मामलों का सवाल स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि इसी गांव में पूर्व में सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण के मामले सामने आए, लेकिन उन मामलों में भी कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं। इन आरोपों की भी प्रशासनिक स्तर पर जांच जरूरी है। क्योंकि अगर सरकारी जमीन पर लगातार निर्माण के आरोप सामने आते हैं, तो यह सिर्फ कब्जे का मामला नहीं... यह निगरानी व्यवस्था की परीक्षा भी है। सबसे बड़ा सवाल— बुलडोजर कब? अब बहरामपुर के इस मामले में निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग पर हैं। क्या मौके पर पहुंचकर सरकारी भूमि की पैमाइश होगी? क्या राजस्व अभिलेखों से स्थिति स्पष्ट की जाएगी? क्या निर्माण अवैध पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी? और अगर कार्रवाई होगी तो— क्या सिर्फ निर्माण पर होगी या लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय होगी? क्योंकि... “दूध का दूध और पानी का पानी” तभी होगा, जब जमीन की पैमाइश के साथ जिम्मेदारी भी तय होगी। क्लोजिंग बहरामपुर में सवालों का अंबार है— सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण शुरू कैसे हुआ? शिकायतों के बावजूद निर्माण आगे कैसे बढ़ा? कार्रवाई की सूचना के बाद भी छत कैसे पड़ गई? शटरिंग समय रहते क्यों नहीं हटाई गई? और अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो— जिम्मेदार कौन? कहते हैं “आंखों में धूल झोंकना आसान है, लेकिन सरकारी जमीन का हिसाब कागजों में दर्ज होता है।” अब देखना होगा कि बहरामपुर के तलाबी नंबर 219 क, ख के मामले में प्रशासन सिर्फ नोटिस और रिपोर्ट तक सीमित रहता है... या फिर मौके पर बुलडोजर के साथ जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी दिखाई देती है। कैमरे की नजर बहरामपुर पर है... सवाल कई हैं... अब जवाब जिला प्रशासन को देना है।

1 hr ago
user_Mohd Asif patrkaar
Mohd Asif patrkaar
Local News Reporter Fatehpur, Uttar Pradesh•
1 hr ago

लेखपाल की खानापूर्ति के बाद तलाबी नंबर पर निर्माण में पड़ गई छत 👉फतेहपुर ब्रेकिंग लेखपाल की खानापूर्ति के बाद तलाबी नंबर पर निर्माण में पड़ गई छत! 👉शिकायतें होती रहीं. निर्माण चलता रहा. अब बुलडोजर का इंतजार 👉बहरामपुर में सरकारी तालाब पर कथित अवैध निर्माण, राजस्व विभाग की कार्रवाई पर सवाल यूपी के फतेहपुर से सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहरामपुर गांव में तलाबी नंबर की जमीन पर कथित अवैध निर्माण की शिकायतें होती रहीं.कार्रवाई की बात भी सामने आई.लेकिन देखते ही देखते निर्माण की छत पड़ गई। एक तरफ अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, तो दूसरी तरफ बहरामपुर में सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण कैसे आगे बढ़ता रहा, यही सबसे बड़ा सवाल है। मामला बहरामपुर गांव के गाटा संख्या 219 क, ख से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण कराया जा रहा था। मामले की शिकायतें जिम्मेदारों तक पहुंचीं। लेखपाल की ओर से कार्रवाई किए जाने और थाना थरियांव को सूचना दिए जाने की बात भी सामने आई। लेकिन इसके बावजूद...निर्माण रुका नहीं! बल्कि निर्माण कार्य आगे बढ़ा और अब छत डाल दिए जाने का आरोप सामने आया है।यानी सवाल सिर्फ अतिक्रमण का नहीं...सवाल कार्रवाई की टाइमिंग का है। बताया जा रहा है कि 19 सितंबर को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मौके पर बड़ी मात्रा में मोरंग और गिट्टी एकत्र होने और निर्माण को आगे बढ़ाने की तैयारी का दावा किया गया था। वीडियो सामने आने के बाद भी अगर मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और शटरिंग लगी रही, तो सवाल उठना लाजिमी है— जब छत पड़ने की आशंका पहले से थी, तो शटरिंग क्यों नहीं हटाई गई?अगर निर्माण रोकने की कार्रवाई की गई थी, तो फिर निर्माणकर्ता दोबारा निर्माण तक कैसे पहुंच गए स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।इसी वजह से निर्माण करने वालों के हौसले बढ़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं।स्थानीय स्तर पर निर्माणकर्ताओं द्वारा पैसे देने और निर्माण करा लेने जैसी बातें कहे जाने के आरोप भी सामने आए हैं। अगर ऐसे दावे किए गए हैं तो यह जांच का विषय है कि— पैसा किसे दिया गया? किस काम के लिए दिया गया? और सबसे बड़ा सवाल— क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी? सरकारी जमीन पर निर्माण कोई पलक झपकते नहीं होता।पहले जमीन पर सामग्री पहुंचती है... फिर नींव पड़ती है... दीवारें उठती हैं... शटरिंग लगती है... और उसके बाद छत पड़ती है। तो फिर सवाल— राजस्व विभाग को जानकारी कब हुई? लेखपाल ने उच्च अधिकारियों को कब अवगत कराया? मौके पर कार्रवाई कब हुई? और अगर कार्रवाई पहले ही कर दी गई थी तो— फिर छत कैसे पड़ गई? वीओ-5 — पुराने मामलों का सवाल स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि इसी गांव में पूर्व में सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण के मामले सामने आए, लेकिन उन मामलों में भी कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं। इन आरोपों की भी प्रशासनिक स्तर पर जांच जरूरी है। क्योंकि अगर सरकारी जमीन पर लगातार निर्माण के आरोप सामने आते हैं, तो यह सिर्फ कब्जे का मामला नहीं... यह निगरानी व्यवस्था की परीक्षा भी है। सबसे बड़ा सवाल— बुलडोजर कब? अब बहरामपुर के इस मामले में निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग पर हैं। क्या मौके पर पहुंचकर सरकारी भूमि की पैमाइश होगी? क्या राजस्व अभिलेखों से स्थिति स्पष्ट की जाएगी? क्या निर्माण अवैध पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी? और अगर कार्रवाई होगी तो— क्या सिर्फ निर्माण पर होगी या लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय होगी? क्योंकि... “दूध का दूध और पानी का पानी” तभी होगा, जब जमीन की पैमाइश के साथ जिम्मेदारी भी तय होगी। क्लोजिंग बहरामपुर में सवालों का अंबार है— सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण शुरू कैसे हुआ? शिकायतों के बावजूद निर्माण आगे कैसे बढ़ा? कार्रवाई की सूचना के बाद भी छत कैसे पड़ गई? शटरिंग समय रहते क्यों नहीं हटाई गई? और अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो— जिम्मेदार कौन? कहते हैं “आंखों में धूल झोंकना आसान है, लेकिन सरकारी जमीन का हिसाब कागजों में दर्ज होता है।” अब देखना होगा कि बहरामपुर के तलाबी नंबर 219 क, ख के मामले में प्रशासन सिर्फ नोटिस और रिपोर्ट तक सीमित रहता है... या फिर मौके पर बुलडोजर के साथ जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी दिखाई देती है। कैमरे की नजर बहरामपुर पर है... सवाल कई हैं... अब जवाब जिला प्रशासन को देना है।

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  • लेखपाल की खानापूर्ति के बाद तलाबी नंबर पर निर्माण में पड़ गई छत 👉फतेहपुर ब्रेकिंग लेखपाल की खानापूर्ति के बाद तलाबी नंबर पर निर्माण में पड़ गई छत! 👉शिकायतें होती रहीं. निर्माण चलता रहा. अब बुलडोजर का इंतजार 👉बहरामपुर में सरकारी तालाब पर कथित अवैध निर्माण, राजस्व विभाग की कार्रवाई पर सवाल यूपी के फतेहपुर से सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहरामपुर गांव में तलाबी नंबर की जमीन पर कथित अवैध निर्माण की शिकायतें होती रहीं.कार्रवाई की बात भी सामने आई.लेकिन देखते ही देखते निर्माण की छत पड़ गई। एक तरफ अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, तो दूसरी तरफ बहरामपुर में सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण कैसे आगे बढ़ता रहा, यही सबसे बड़ा सवाल है। मामला बहरामपुर गांव के गाटा संख्या 219 क, ख से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण कराया जा रहा था। मामले की शिकायतें जिम्मेदारों तक पहुंचीं। लेखपाल की ओर से कार्रवाई किए जाने और थाना थरियांव को सूचना दिए जाने की बात भी सामने आई। लेकिन इसके बावजूद...निर्माण रुका नहीं! बल्कि निर्माण कार्य आगे बढ़ा और अब छत डाल दिए जाने का आरोप सामने आया है।यानी सवाल सिर्फ अतिक्रमण का नहीं...सवाल कार्रवाई की टाइमिंग का है। बताया जा रहा है कि 19 सितंबर को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मौके पर बड़ी मात्रा में मोरंग और गिट्टी एकत्र होने और निर्माण को आगे बढ़ाने की तैयारी का दावा किया गया था। वीडियो सामने आने के बाद भी अगर मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और शटरिंग लगी रही, तो सवाल उठना लाजिमी है— जब छत पड़ने की आशंका पहले से थी, तो शटरिंग क्यों नहीं हटाई गई?अगर निर्माण रोकने की कार्रवाई की गई थी, तो फिर निर्माणकर्ता दोबारा निर्माण तक कैसे पहुंच गए स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।इसी वजह से निर्माण करने वालों के हौसले बढ़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं।स्थानीय स्तर पर निर्माणकर्ताओं द्वारा पैसे देने और निर्माण करा लेने जैसी बातें कहे जाने के आरोप भी सामने आए हैं। अगर ऐसे दावे किए गए हैं तो यह जांच का विषय है कि— पैसा किसे दिया गया? किस काम के लिए दिया गया? और सबसे बड़ा सवाल— क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी? सरकारी जमीन पर निर्माण कोई पलक झपकते नहीं होता।पहले जमीन पर सामग्री पहुंचती है... फिर नींव पड़ती है... दीवारें उठती हैं... शटरिंग लगती है... और उसके बाद छत पड़ती है। तो फिर सवाल— राजस्व विभाग को जानकारी कब हुई? लेखपाल ने उच्च अधिकारियों को कब अवगत कराया? मौके पर कार्रवाई कब हुई? और अगर कार्रवाई पहले ही कर दी गई थी तो— फिर छत कैसे पड़ गई? वीओ-5 — पुराने मामलों का सवाल स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि इसी गांव में पूर्व में सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण के मामले सामने आए, लेकिन उन मामलों में भी कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं। इन आरोपों की भी प्रशासनिक स्तर पर जांच जरूरी है। क्योंकि अगर सरकारी जमीन पर लगातार निर्माण के आरोप सामने आते हैं, तो यह सिर्फ कब्जे का मामला नहीं... यह निगरानी व्यवस्था की परीक्षा भी है। सबसे बड़ा सवाल— बुलडोजर कब? अब बहरामपुर के इस मामले में निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग पर हैं। क्या मौके पर पहुंचकर सरकारी भूमि की पैमाइश होगी? क्या राजस्व अभिलेखों से स्थिति स्पष्ट की जाएगी? क्या निर्माण अवैध पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी? और अगर कार्रवाई होगी तो— क्या सिर्फ निर्माण पर होगी या लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय होगी? क्योंकि... “दूध का दूध और पानी का पानी” तभी होगा, जब जमीन की पैमाइश के साथ जिम्मेदारी भी तय होगी। क्लोजिंग बहरामपुर में सवालों का अंबार है— सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण शुरू कैसे हुआ? शिकायतों के बावजूद निर्माण आगे कैसे बढ़ा? कार्रवाई की सूचना के बाद भी छत कैसे पड़ गई? शटरिंग समय रहते क्यों नहीं हटाई गई? और अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो— जिम्मेदार कौन? कहते हैं “आंखों में धूल झोंकना आसान है, लेकिन सरकारी जमीन का हिसाब कागजों में दर्ज होता है।” अब देखना होगा कि बहरामपुर के तलाबी नंबर 219 क, ख के मामले में प्रशासन सिर्फ नोटिस और रिपोर्ट तक सीमित रहता है... या फिर मौके पर बुलडोजर के साथ जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी दिखाई देती है। कैमरे की नजर बहरामपुर पर है... सवाल कई हैं... अब जवाब जिला प्रशासन को देना है।
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    लेखपाल की खानापूर्ति के बाद तलाबी नंबर पर निर्माण में  पड़ गई छत
👉फतेहपुर ब्रेकिंग
लेखपाल की खानापूर्ति के बाद तलाबी नंबर पर निर्माण में  पड़ गई छत!
👉शिकायतें होती रहीं. निर्माण चलता रहा. अब बुलडोजर का इंतजार
👉बहरामपुर में सरकारी तालाब पर कथित अवैध निर्माण, राजस्व विभाग की कार्रवाई पर सवाल
यूपी के फतेहपुर से सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बहरामपुर गांव में तलाबी नंबर की जमीन पर कथित अवैध निर्माण की शिकायतें होती रहीं.कार्रवाई की बात भी सामने आई.लेकिन देखते ही देखते निर्माण की छत पड़ गई। एक तरफ अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, तो दूसरी तरफ बहरामपुर में सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण कैसे आगे बढ़ता रहा, यही सबसे बड़ा सवाल है।
मामला बहरामपुर गांव के गाटा संख्या 219 क, ख से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण कराया जा रहा था। मामले की शिकायतें जिम्मेदारों तक पहुंचीं।
लेखपाल की ओर से कार्रवाई किए जाने और थाना थरियांव को सूचना दिए जाने की बात भी सामने आई। लेकिन इसके बावजूद...निर्माण रुका नहीं!
बल्कि निर्माण कार्य आगे बढ़ा और अब छत डाल दिए जाने का आरोप सामने आया है।यानी सवाल सिर्फ अतिक्रमण का नहीं...सवाल कार्रवाई की टाइमिंग का है।
बताया जा रहा है कि 19 सितंबर को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मौके पर बड़ी मात्रा में मोरंग और गिट्टी एकत्र होने और निर्माण को आगे बढ़ाने की तैयारी का दावा किया गया था।
वीडियो सामने आने के बाद भी अगर मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और शटरिंग लगी रही, तो सवाल उठना लाजिमी है—
जब छत पड़ने की आशंका पहले से थी, तो शटरिंग क्यों नहीं हटाई गई?अगर निर्माण रोकने की कार्रवाई की गई थी, तो फिर निर्माणकर्ता दोबारा निर्माण तक कैसे पहुंच गए
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।इसी वजह से निर्माण करने वालों के हौसले बढ़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं।स्थानीय स्तर पर निर्माणकर्ताओं द्वारा पैसे देने और निर्माण करा लेने जैसी बातें कहे जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
अगर ऐसे दावे किए गए हैं तो यह जांच का विषय है कि—
पैसा किसे दिया गया?
किस काम के लिए दिया गया?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी?
सरकारी जमीन पर निर्माण कोई पलक झपकते नहीं होता।पहले जमीन पर सामग्री पहुंचती है...
फिर नींव पड़ती है...
दीवारें उठती हैं...
शटरिंग लगती है...
और उसके बाद छत पड़ती है।
तो फिर सवाल—
राजस्व विभाग को जानकारी कब हुई?
लेखपाल ने उच्च अधिकारियों को कब अवगत कराया?
मौके पर कार्रवाई कब हुई?
और अगर कार्रवाई पहले ही कर दी गई थी तो—
फिर छत कैसे पड़ गई?
वीओ-5 — पुराने मामलों का सवाल
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि इसी गांव में पूर्व में सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण के मामले सामने आए, लेकिन उन मामलों में भी कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं।
इन आरोपों की भी प्रशासनिक स्तर पर जांच जरूरी है।
क्योंकि अगर सरकारी जमीन पर लगातार निर्माण के आरोप सामने आते हैं, तो यह सिर्फ कब्जे का मामला नहीं...
यह निगरानी व्यवस्था की परीक्षा भी है।
सबसे बड़ा सवाल— बुलडोजर कब?
अब बहरामपुर के इस मामले में निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग पर हैं।
क्या मौके पर पहुंचकर सरकारी भूमि की पैमाइश होगी?
क्या राजस्व अभिलेखों से स्थिति स्पष्ट की जाएगी?
क्या निर्माण अवैध पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी?
और अगर कार्रवाई होगी तो—
क्या सिर्फ निर्माण पर होगी या लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय होगी?
क्योंकि...
“दूध का दूध और पानी का पानी” तभी होगा, जब जमीन की पैमाइश के साथ जिम्मेदारी भी तय होगी।
क्लोजिंग
बहरामपुर में सवालों का अंबार है—
सरकारी तालाब की जमीन पर निर्माण शुरू कैसे हुआ?
शिकायतों के बावजूद निर्माण आगे कैसे बढ़ा?
कार्रवाई की सूचना के बाद भी छत कैसे पड़ गई?
शटरिंग समय रहते क्यों नहीं हटाई गई?
और अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो—
जिम्मेदार कौन?
कहते हैं “आंखों में धूल झोंकना आसान है, लेकिन सरकारी जमीन का हिसाब कागजों में दर्ज होता है।”
अब देखना होगा कि बहरामपुर के तलाबी नंबर 219 क, ख के मामले में प्रशासन सिर्फ नोटिस और रिपोर्ट तक सीमित रहता है...
या फिर मौके पर बुलडोजर के साथ जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी दिखाई देती है।
कैमरे की नजर बहरामपुर पर है...
सवाल कई हैं... अब जवाब जिला प्रशासन को देना है।
    user_Mohd Asif patrkaar
    Mohd Asif patrkaar
    Local News Reporter Fatehpur, Uttar Pradesh•
    1 hr ago
  • विकास इंसाफ़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार मिले किसानों से मिले जहां उनकी डीएम ने नहीं ली माग पत्र राजकुमार ने कहा एसे जिलाधिकारी को तुरंत जिले बाहर का रास्ता दिखना चाहिए बोले विकास इंसाफ़ पार्टी की सरकार बनी तो किसानों के 5 बीघा खेत का सिचाई खाद बीज फ्री होगा
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    विकास इंसाफ़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार मिले   किसानों से  मिले  जहां उनकी डीएम ने नहीं ली माग पत्र 
राजकुमार ने कहा एसे जिलाधिकारी को तुरंत जिले बाहर का रास्ता दिखना चाहिए  बोले विकास इंसाफ़ पार्टी की सरकार बनी तो  किसानों के 5 बीघा खेत का  सिचाई  खाद  बीज फ्री होगा
    user_User3428 BHARAT  CRIME NEWS
    User3428 BHARAT CRIME NEWS
    Classified ads newspaper publisher फतेहपुर, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • बबेरू मे गणेश महोत्सव की धूम, तिन्दवारी रोड समिति के द्वारा जागरण कार्यक्रम का आयोजन
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    बबेरू मे गणेश महोत्सव की धूम, तिन्दवारी रोड समिति के द्वारा जागरण कार्यक्रम का आयोजन
    user_JSB NEWS UP
    JSB NEWS UP
    पत्रकारिता बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • आदर्श ग्राम पंचायत कमासिन में कामेश्वर तालाब मानसरोवर पांच वर्ष बीत फिर भी पूर्ण नहीं सचिव प्रधान प्रतिनिधि किया धन का बंदरबांट
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    आदर्श ग्राम पंचायत कमासिन में कामेश्वर तालाब मानसरोवर पांच वर्ष बीत फिर भी पूर्ण नहीं सचिव प्रधान प्रतिनिधि किया धन का बंदरबांट
    user_राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे
    राधेश्याम गुप्ता जय मां दुर्गे
    बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • श्री शनि देव दरबार , सेवा ही संकल्प है भावी जिला पंचायत सदस्य शैलेन्द्र गुप्ता ऊंचाहार तृतीय पुत्र श्री प्रमोद गुप्ता पूर्व चेयरमैन ऊंचाहार रायबरेली #viral #reels #instagood #trending #nonfollowers
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    श्री शनि देव दरबार , सेवा ही संकल्प है 
भावी जिला पंचायत सदस्य शैलेन्द्र गुप्ता ऊंचाहार तृतीय पुत्र श्री प्रमोद गुप्ता पूर्व चेयरमैन ऊंचाहार रायबरेली
#viral #reels #instagood #trending #nonfollowers
    user_ललित अपराध लाइव न्यूज़ चैनल उत्तर प्रदेश
    ललित अपराध लाइव न्यूज़ चैनल उत्तर प्रदेश
    Advertising Photographer ऊंचाहार, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • अंतरजनपदीय चोर गिरोह का फतेहपुर पुलिस ने किया पर्दाफाश, 7 शातिर गिरफ्तार, लाखों का चोरी का माल बरामद फतेहपुर। जनपद में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के सफल खुलासे में फतेहपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना कोतवाली पुलिस, सर्विलांस सेल और क्राइम डिटेक्शन टीम की संयुक्त कार्रवाई में एक संगठित अंतरजनपदीय चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी के सोने-चांदी के आभूषण, नगदी, आठ एंड्रॉयड मोबाइल फोन, चोरी में प्रयुक्त औजार तथा एक KIA CARENS कार बरामद की गई है। इस उल्लेखनीय सफलता पर पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने गिरफ्तारी करने वाली टीम को ₹25,000 के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। पुलिस के अनुसार, 4 और 16 सितंबर 2026 को कोतवाली क्षेत्र के साई बिहार कॉलोनी और शेखपुर उनवा में बंद मकानों में हुई चोरी की घटनाओं के संबंध में मुकदमे दर्ज किए गए थे। दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर 22 सितंबर को सात आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे गिरोह का खुलासा किया गया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों में विकास नागर, अनमोल सिंह, जयशिव गुप्ता, विकास निषाद, राहुल गुप्ता, मिथुन सिंह तथा दीपक उर्फ अंशू शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वे चारपहिया वाहन से विभिन्न शहरों में जाकर बंद मकानों की रेकी करते थे और मौका मिलने पर ताला तोड़कर चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। चोरी के बाद नकदी और जेवरात आपस में बांट लेते थे तथा कुछ सामान कम कीमत पर बेच देते थे। पुलिस के अनुसार गिरोह द्वारा मध्य प्रदेश सहित अन्य स्थानों पर भी चोरी की घटनाओं को अंजाम देने की जानकारी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। बरामदगी में सोने की चेन, महाराजा हार, अंगूठियां, झुमके, झाला, चांदी की बिछिया, ब्रेसलेट, गणेश-लक्ष्मी का सिक्का, ₹34,400 नकद, आठ एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा घटना में प्रयुक्त KIA CARENS कार से पाइप रिंच, प्लास, कटर, पेचकश और सब्बल जैसे औजार बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बरामदगी के आधार पर संबंधित धाराओं में बढ़ोतरी करते हुए आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।
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    अंतरजनपदीय चोर गिरोह का फतेहपुर पुलिस ने किया पर्दाफाश, 7 शातिर गिरफ्तार, लाखों का चोरी का माल बरामद

फतेहपुर। जनपद में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के सफल खुलासे में फतेहपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना कोतवाली पुलिस, सर्विलांस सेल और क्राइम डिटेक्शन टीम की संयुक्त कार्रवाई में एक संगठित अंतरजनपदीय चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी के सोने-चांदी के आभूषण, नगदी, आठ एंड्रॉयड मोबाइल फोन, चोरी में प्रयुक्त औजार तथा एक KIA CARENS कार बरामद की गई है। इस उल्लेखनीय सफलता पर पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने गिरफ्तारी करने वाली टीम को ₹25,000 के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है।
पुलिस के अनुसार, 4 और 16 सितंबर 2026 को कोतवाली क्षेत्र के साई बिहार कॉलोनी और शेखपुर उनवा में बंद मकानों में हुई चोरी की घटनाओं के संबंध में मुकदमे दर्ज किए गए थे। दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर 22 सितंबर को सात आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे गिरोह का खुलासा किया गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों में विकास नागर, अनमोल सिंह, जयशिव गुप्ता, विकास निषाद, राहुल गुप्ता, मिथुन सिंह तथा दीपक उर्फ अंशू शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वे चारपहिया वाहन से विभिन्न शहरों में जाकर बंद मकानों की रेकी करते थे और मौका मिलने पर ताला तोड़कर चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। चोरी के बाद नकदी और जेवरात आपस में बांट लेते थे तथा कुछ सामान कम कीमत पर बेच देते थे। पुलिस के अनुसार गिरोह द्वारा मध्य प्रदेश सहित अन्य स्थानों पर भी चोरी की घटनाओं को अंजाम देने की जानकारी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है।
बरामदगी में सोने की चेन, महाराजा हार, अंगूठियां, झुमके, झाला, चांदी की बिछिया, ब्रेसलेट, गणेश-लक्ष्मी का सिक्का, ₹34,400 नकद, आठ एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा घटना में प्रयुक्त KIA CARENS कार से पाइप रिंच, प्लास, कटर, पेचकश और सब्बल जैसे औजार बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बरामदगी के आधार पर संबंधित धाराओं में बढ़ोतरी करते हुए आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।
    user_ज्योति गुप्ता न्यूज
    ज्योति गुप्ता न्यूज
    Local News Reporter फतेहपुर, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने व दुष्कर्म के आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार जगतपुर, रायबरेली। थाना जगतपुर पुलिस ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार पीड़िता के परिजन ने थाने में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि आरोपी अरविंद पटेल पुत्र दिनेश निवासी पूरे लालजी का पुरवा, मजरे खेरहनी पहाड़गढ़, थाना जगतपुर ने शादी का झांसा देकर नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा लिया था। प्रार्थना पत्र मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी थी। पुलिस अधीक्षक रायबरेली रवि कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत जगतपुर पुलिस टीम ने 22 सितंबर 2026 को मुखबिर की सूचना पर शारदा नहर पुलिया के पास से आरोपी अरविंद पटेल को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता के बयान के आधार पर मामले में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से संबंधित धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की कार्रवाई की है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक गुलाम गौस खां और मुख्य आरक्षी विक्रमजीत यादव शामिल रहे।
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    नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने व दुष्कर्म के आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
जगतपुर, रायबरेली। थाना जगतपुर पुलिस ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार पीड़िता के परिजन ने थाने में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि आरोपी अरविंद पटेल पुत्र दिनेश निवासी पूरे लालजी का पुरवा, मजरे खेरहनी पहाड़गढ़, थाना जगतपुर ने शादी का झांसा देकर नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा लिया था।
प्रार्थना पत्र मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी थी। पुलिस अधीक्षक रायबरेली रवि कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत जगतपुर पुलिस टीम ने 22 सितंबर 2026 को मुखबिर की सूचना पर शारदा नहर पुलिया के पास से आरोपी अरविंद पटेल को गिरफ्तार कर लिया।
पीड़िता के बयान के आधार पर मामले में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से संबंधित धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की कार्रवाई की है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक गुलाम गौस खां और मुख्य आरक्षी विक्रमजीत यादव शामिल रहे।
    user_Deepak Kumar
    Deepak Kumar
    Local News Reporter ऊंचाहार, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • ब्रेकिंग खागा सर्विस लेन पर मोटरसाइकिल का डिवाइडर से तकराकर हुआ भयंकर एक्सीडेंट एक की मौके पर मौत दूसरा गंभीर रूप से घायल
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    ब्रेकिंग 
खागा सर्विस लेन पर मोटरसाइकिल का डिवाइडर से तकराकर हुआ भयंकर एक्सीडेंट एक की मौके पर मौत दूसरा गंभीर रूप से घायल
    user_ज्योति गुप्ता न्यूज
    ज्योति गुप्ता न्यूज
    Local News Reporter फतेहपुर, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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