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Ramdas Kushvah
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- Post by Ramdas Kushvah1
- Post by Arjun Gurjar Press nev bhart1
- करैरा विधानसभा के अंतर्गत ग्राम पंचायत हाजीनगर के पास पहाड़िया पर स्थित प्राचीन सिद्ध बाबा के यहां पर कुछ ऐसा चमत्कार हुआ जिसको देखने के लिए उमड़ने लगी सैकड़ो की भीड देखें इस वीडियो में संवाददाता जिला क्राइम रिपोर्टर गजेन्द्र सिंह कुशवाह के साथ खास रिपोर्ट1
- ग्वालियर संभाग में अनिल मिश्रा बाबा साहब को अपमानित कर रहा है वकीलों में विवाद होते दिख रहा है दिल्ली के हाई कोर्ट वकील ने अनिल मिश्रा को चुनौती दी अनिल मिश्रा पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की जा रही स की नस लगना चाहिए उसे पर अनिल मिश्रा पर1
- शाहाबाद में निकली पर्यावरण बचाओ रैली शाहाबाद। कस्बे में सोमवार को पर्यावरण प्राणियों द्वारा पर्यावरण बचाओ रैली निकाली गई जिसको लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों के विरोध की आशंका के चलते मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तनाव किया गया था सोमवार को रैली स्थानीय नगरकोट माताजी से प्रारंभ होकर बस स्टैंड होते हुए उपखंड अधिकारी कार्यालय तक पहुंची जहां राज्यपाल के नाम का ज्ञापन उपखंड अधिकारी को सोपा गया इस अवसर पर काफी संख्या में पर्यावरण संरक्षण बचाओ समिति के पदाधिकारी तथा पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे। ज्ञापन के अनुसार।शाहाबाद (बारा) के सघन बनों में प्रस्तावित हाइड्रो प्रोजेक्ट हेतु होने वाले व्यापक बन-विनाश को रोकने के संबंध में ज्ञापन में कहा गया है कि शाहाबाद क्षेत्र के समस्त निवासी और पर्यावरण प्रेमी इस ज्ञापन के माध्यम से आपका ध्यान राजस्थान के 'फेफड़ों' कहे जाने वाले शाहाबाद के जंगलों पर मंडरा रहे अस्तित्व के संकट की और दिलाना चाहते हैं। यहाँ प्रस्तावित हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए जिस स्तर पर पेड़ों की कटाई की योजना है, वह आने वाली पीड़ियों के लिए एक पर्यावरणीय त्रासदी सिद्ध होगी। इस संदर्भ में इन बिंदुओं पर आपका ध्यान आकर्षित करने की बात कही है वृक्षों की अपूरणीय क्षतिः सरकारी आकड़ों में 1,19,000 पेड़ों की कटाई का उल्लेख है, किंतु 'भारत के जल पुरुष' और पर्यावरण विशेषज्ञों का अनुमान है कि वास्तव में यह संख्या लगभग 25 से 28 लाख के बीच है। इतनी विशाल संख्या में वृक्षों का उन्मूलन प्राकृतिक संतुलन को पूरी तरह नष्ट कर देगा। पारिस्थितिक असंतुलन, शाहाबाद का यह क्षेत्र सघन बनों और दुर्लभ जैव-विविधता से परिपूर्ण है। इन बनों का विनाश न केवल वन्यजीवों के आवास छीनेगा, बल्कि पूरे हाड़ौती क्षेत्र में सूखे, बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के संकट को निमंत्रण देगा। जल सुरक्षा पर प्रहारः जैसा कि पर्यावरण विशेषज्ञों ने आगाह किया है, इन पेड़ों के कटने में भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की प्रक्रिया रुक जाएगी। यह क्षेत्र के जल स्रोतों के सूखने का मुख्य कारण बनेगा, जिससे भविष्य में भीषण पेयजल संकट उत्पन होगा। जन-आक्रोश और संरक्षणः स्थानीय जनता और आदिवासी समुदाय इस वन-विनाश के विरुद्ध एकजुट है। हमारा मानना है। कि पर्यावरण की कीमत पर किया गया कोई भी विकास 'टिकाऊ' नहीं हो सकता। प्रदर्शन करियों की मांग है किः इस गंभीर विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए आप अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग कर इसमें हस्तक्षेप करें। पर्यावरण के हित में पेड़ों की इस भारी कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए। प्रोजेक्ट के लिए किसी अन्य विकल्प या बंजर भूमि का बयन करने हेतु संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाए। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप राजस्थान की इस प्राकृतिक विरासत और भविष्य की सुरक्षा हेतु उचित निर्णय लेंगे।4
- Post by राजू काँकोरिया खण्डार1
- Post by Ajit Meena1
- ग्राम पंचायत कलमी कक्करदा ग्राम कलमी शरण गांव वालों का कहना है कि हमने सचिवऔर रोजगार को बार-बार आवेदन कर रहे हैं कि हमारे गांव में इस कचरा की सफाई कराई जाए सचिव द्वारा और रोजगार सहायक द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है इससे कलमी में काफी समस्या हो रही है1