नगर पालिका परिषद मंडला खुद गंदगी के ढेर में, कैसे पूरा होगा स्वच्छ मंडला का सपना साकार मंडला में स्वच्छता अभियान को लेकर नगर पालिका परिषद के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ शहर को स्वच्छ रखने के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये का ठेका दिया गया है, तो वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका परिषद का अपना परिसर ही कचरे के ढेर में तब्दील नजर आ रहा है। तस्वीरें मंडला नगर पालिका परिषद के परिसर की हैं, जहां रोजाना कचरे का अंबार लगा नजर आता है। परिसर में खड़ी कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियों में भी कचरा भरा हुआ दिखाई देता है। ऐसे में सवाल यह है कि जब नगर पालिका परिषद अपने ही परिसर को साफ और व्यवस्थित नहीं रख पा रही है, तो पूरे नगर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी किस तरह निभाई जा रही है? जानकारी के मुताबिक नगर पालिका क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए करीब 15 से 16 लाख रुपये का ठेका हुआ है। बताया जा रहा है कि लगभग 14 से 15 सफाई वाहनों के संचालन का प्रावधान था, लेकिन जमीनी स्थिति में महज 7 से 8 वाहन ही संचालित होते नजर आ रहे हैं। अगर ठेके में निर्धारित संख्या में वाहन नहीं चल रहे हैं, तो क्या नगर पालिका परिषद द्वारा इसकी नियमित निगरानी की जा रही है? और अगर निगरानी हो रही है, तो फिर व्यवस्था में यह कमी आखिर क्यों बनी हुई है? नगर पालिका परिसर में जमा कचरा न केवल स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि लंबे समय तक कचरा जमा रहने से संक्रमण और दुर्गंध का खतरा भी बढ़ सकता है। स्वच्छता अभियान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन नगर पालिका के अपने परिसर की ये तस्वीरें उन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका परिषद का अपना परिसर ही कचरे के ढेर से अटा पड़ा है। अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस अव्यवस्था पर कब तक संज्ञान लेते हैं और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल सवाल कई हैं— क्या ठेकेदार की लापरवाही के चलते व्यवस्था बदहाल है? क्या निर्धारित संख्या में वाहन वास्तव में संचालित हो रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल—क्या जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और संरक्षण के अभाव में स्वच्छता व्यवस्था इस हालत में पहुंची है? अब जरूरत है कि नगर पालिका परिषद मंडला इन सवालों का जवाब दे और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर ठोस कार्रवाई करे।
नगर पालिका परिषद मंडला खुद गंदगी के ढेर में, कैसे पूरा होगा स्वच्छ मंडला का सपना साकार मंडला में स्वच्छता अभियान को लेकर नगर पालिका परिषद के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ शहर को स्वच्छ रखने के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये का ठेका दिया गया है, तो वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका परिषद का अपना परिसर ही कचरे के ढेर में तब्दील नजर आ रहा है। तस्वीरें मंडला नगर पालिका परिषद के परिसर की हैं, जहां रोजाना कचरे का अंबार लगा नजर आता है। परिसर में खड़ी कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियों में भी कचरा भरा हुआ दिखाई देता है। ऐसे में सवाल यह है कि जब नगर पालिका परिषद अपने ही परिसर को साफ और व्यवस्थित नहीं रख पा रही है, तो पूरे नगर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी किस तरह निभाई जा रही है? जानकारी के मुताबिक नगर पालिका क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए करीब 15 से 16 लाख रुपये का ठेका हुआ है। बताया जा रहा है कि लगभग 14 से 15 सफाई वाहनों के संचालन का प्रावधान था, लेकिन जमीनी स्थिति में महज 7 से 8 वाहन ही संचालित होते नजर आ रहे हैं। अगर ठेके में निर्धारित संख्या में वाहन नहीं चल रहे हैं, तो क्या नगर पालिका परिषद द्वारा इसकी नियमित निगरानी की जा रही है? और अगर निगरानी हो रही है, तो फिर व्यवस्था में यह कमी आखिर क्यों बनी हुई है? नगर पालिका परिसर में जमा कचरा न केवल स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि लंबे समय तक कचरा जमा रहने से संक्रमण और दुर्गंध का खतरा भी बढ़ सकता है। स्वच्छता अभियान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन नगर पालिका के अपने परिसर की ये तस्वीरें उन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका परिषद का अपना परिसर ही कचरे के ढेर से अटा पड़ा है। अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस अव्यवस्था पर कब तक संज्ञान लेते हैं और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल सवाल कई हैं— क्या ठेकेदार की लापरवाही के चलते व्यवस्था बदहाल है? क्या निर्धारित संख्या में वाहन वास्तव में संचालित हो रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल—क्या जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और संरक्षण के अभाव में स्वच्छता व्यवस्था इस हालत में पहुंची है? अब जरूरत है कि नगर पालिका परिषद मंडला इन सवालों का जवाब दे और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर ठोस कार्रवाई करे।
- नगर पालिका परिषद मंडला खुद गंदगी के ढेर में, कैसे पूरा होगा स्वच्छ मंडला का सपना साकार मंडला में स्वच्छता अभियान को लेकर नगर पालिका परिषद के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ शहर को स्वच्छ रखने के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये का ठेका दिया गया है, तो वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका परिषद का अपना परिसर ही कचरे के ढेर में तब्दील नजर आ रहा है। तस्वीरें मंडला नगर पालिका परिषद के परिसर की हैं, जहां रोजाना कचरे का अंबार लगा नजर आता है। परिसर में खड़ी कचरा संग्रहण करने वाली गाड़ियों में भी कचरा भरा हुआ दिखाई देता है। ऐसे में सवाल यह है कि जब नगर पालिका परिषद अपने ही परिसर को साफ और व्यवस्थित नहीं रख पा रही है, तो पूरे नगर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी किस तरह निभाई जा रही है? जानकारी के मुताबिक नगर पालिका क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए करीब 15 से 16 लाख रुपये का ठेका हुआ है। बताया जा रहा है कि लगभग 14 से 15 सफाई वाहनों के संचालन का प्रावधान था, लेकिन जमीनी स्थिति में महज 7 से 8 वाहन ही संचालित होते नजर आ रहे हैं। अगर ठेके में निर्धारित संख्या में वाहन नहीं चल रहे हैं, तो क्या नगर पालिका परिषद द्वारा इसकी नियमित निगरानी की जा रही है? और अगर निगरानी हो रही है, तो फिर व्यवस्था में यह कमी आखिर क्यों बनी हुई है? नगर पालिका परिसर में जमा कचरा न केवल स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि लंबे समय तक कचरा जमा रहने से संक्रमण और दुर्गंध का खतरा भी बढ़ सकता है। स्वच्छता अभियान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन नगर पालिका के अपने परिसर की ये तस्वीरें उन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका परिषद का अपना परिसर ही कचरे के ढेर से अटा पड़ा है। अब देखने वाली बात होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस अव्यवस्था पर कब तक संज्ञान लेते हैं और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल सवाल कई हैं— क्या ठेकेदार की लापरवाही के चलते व्यवस्था बदहाल है? क्या निर्धारित संख्या में वाहन वास्तव में संचालित हो रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल—क्या जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और संरक्षण के अभाव में स्वच्छता व्यवस्था इस हालत में पहुंची है? अब जरूरत है कि नगर पालिका परिषद मंडला इन सवालों का जवाब दे और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर ठोस कार्रवाई करे।1
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- डिप्टी कलेक्टर श्री बैधनाथ वासनिक ने जिले के सभी किसान भाइयों से अपील की है *फार्मर आईडी बनवाने के लिए डिप्टी कलेक्टर बैधनाथ वासनिक ने की किसानों से अपील* *डिंडौरी01सितंबर2026* डिप्टी कलेक्टर श्री बैधनाथ वासनिक ने जिले के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, वे जल्द से जल्द अपनी फार्मर आईडी बनवा लें। जिले में कुल 4 लाख 1 हजार 321 किसानों में से 1 लाख 50 हजार 297 किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है, जबकि 2 लाख 51 हजार 24 किसानों की फार्मर आईडी बनना अभी शेष है। उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए जिले में विभिन्न स्थानों पर फार्मर आईडी बनाने हेतु कैंप लगाए जा रहे हैं। साथ ही राजस्व अधिकारी एवं संबंधित अमला घर-घर पहुंचकर भी किसानों की फार्मर आईडी बनाने का कार्य कर रहा है, ताकि कोई भी पात्र किसान इस सुविधा से वंचित न रहे। डिप्टी कलेक्टर श्री वासनिक ने बताया कि फार्मर आईडी बनने से किसानों को शासन की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, अनुदान एवं अन्य किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। उन्होंने सभी किसान भाइयों से आग्रह किया है कि वे अपने नजदीकी कैंप, निर्धारित केंद्र अथवा घर पहुंचने वाले राजस्व अमले के सहयोग से समय पर अपनी फार्मर आईडी अवश्य बनवाएं, ताकि भविष्य में शासन की किसान हितैषी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।1
- मंडला- उत्तराखंड में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में मंडला में कांग्रेस ने सांकेतिक प्रदर्शन किया कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नेहरू स्मारक चौक पर प्रदर्शन कर राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और कथित मामले में दोषी भाजपा कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।1