चंपारण में होमियोपैथ का जलवा बिखेर रहे डॉ. घनश्याम चंपारण में होमियोपैथ का जलवा बिखेर रहे डॉ. घनश्याम बेतिया।इस समय शरीर के विभिन्न अंगों में जोड़ों, घुटनों, एड़ियों के दर्द, गैस, थकान, अनिद्रा, चर्म रोग से हर तीसरा आदमी जूझ रहा है। स्थिति ये है कि रोगी चिकित्सक पर चिकित्सक बदल रहे और रोग है कि ठीक होने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में होमियोपैथिक दवा किसी वरदान से कम नहीं है। ये बातें बेतिया के नया बाजार चौक स्थित सविता होमियो क्लीनिक एंड रिसर्च सेंटर के संचालक चर्चित होमियोपैथिक डॉक्टर घनश्याम ने कही। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में रोगी भूंजा की तरह अंग्रेजी दवाएं फांकते हुए असमय लिवर, किडनी, हृदय खराब कर लेते हैं। विशेषकर दर्द निवारक, इम्यून सप्रेस्ड व एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध सेवन के दुष्प्रभाव बहुत खतरनाक हैं। लेकिन विकल्प के रूप में होमियोपैथ की शरण में जाकर इन दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। दुर्घटना, सर्जरी या संक्रमण जैसी आपातकालीन स्थिति को छोड़ दें तो होमियोपैथ पद्धति हानिरहित इलाज का श्रेष्ठ विकल्प है। इसमें केस टेकिंग कर सही दवा का चुनाव, फॉलो अप और रोगी का फीडबैक बहुत मायने रखता है। उन्होंने कहा कि साइटिका, गठिया, फैटी लिवर, एंजाइटी, डिप्रेशन, अनिद्रा, एक्जिमा, सफेद दाग, सोरियासिस, पाइल्स, मुंहासे, हेयर फॉल, सिफलिस, चकत्ते, दाद, एलर्जी, अस्थमा, कई प्रकार के घावों व चर्म रोग आदि अनगिनत रोगों के इलाज में सफलता मिली है। यदि अनुभवी और डिग्रीधारी चिकित्सकों से इलाज कराने पर यह पैथ बहुत सुरक्षित है। रोगी चिकित्सक पर विश्वास कर सम्पर्क नियमित सम्पर्क में रहे तो लाइलाज रोगों में भी जादुई असर मिलते देखा गया है। रोग के हिसाब से 15 दिनों से लेकर एक वर्ष तक इलाज चलता है। उन्होंने बताया कि बीएचएमएस करने के बाद मैं बड़े शहरों में जा सकता था। वहां शिक्षित समाज होने के कारण इसकी खूब मांग है। लेकिन मैंने बेतिया को कर्म भूमि बनाना पसंद किया। भौगोलिक दृष्टिकोण से सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला जिला बेतिया नेपाल, उत्तर प्रदेश, रक्सौल और मोतिहारी से सटा हुआ है। एक करोड़ से ज्यादा संख्या में ग्रामीण आबादी यहां निवास करती है। मैंने चंपारण को रोगमुक्त बनाने की मुहिम छेड़ रखी है। आम ग्रामीणों की इस पैथ के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। वे दवा का महत्व समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा देखा जाता है कि सब तरफ से हार-थककर अंतिम अवस्था में रोगी होमियोपैथ उपचार अपनाते हैं। इसीलिए परिणाम धीमा मिलता है। यदि रोग की शुरूआत में इस पद्धति से इलाज कराए तो बहुत जल्द परिणाम मिलते हैं। कोई भी रोगी यदि किसी जटिल रोग से परेशान है तो निराश होने की जरूरत नहीं। वे एक बार मेरे क्लीनिक पर आकर मिले, दवा की कुछ दिनों की खुराक में ही फर्क साफ-साफ नजर आएगा। बता दें कि डॉ. घनश्याम को पिछले वर्ष सिंगापुर में एक कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय होमियो रत्न के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। सौजन्य से - डॉ. घनश्याम, B.H.M.S (B.U), P.G.H.M (Tamilnadu) सविता होमियो क्लीनिक एन्ड रिसर्च सेंटर ब्रांच 1-नया बाजार चौक, बेतिया ब्रांच 2-बानूछापर(56 भोग स्वीट्स के सामने),बेतिया (सोमवार से शनिवार) Mob-9097668301
चंपारण में होमियोपैथ का जलवा बिखेर रहे डॉ. घनश्याम चंपारण में होमियोपैथ का जलवा बिखेर रहे डॉ. घनश्याम बेतिया।इस समय शरीर के विभिन्न अंगों में जोड़ों, घुटनों, एड़ियों के दर्द, गैस, थकान, अनिद्रा, चर्म रोग से हर तीसरा आदमी जूझ रहा है। स्थिति ये है कि रोगी चिकित्सक पर चिकित्सक बदल रहे और रोग है कि ठीक होने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में होमियोपैथिक दवा किसी वरदान से कम नहीं है। ये बातें बेतिया के नया बाजार चौक स्थित सविता होमियो क्लीनिक एंड रिसर्च सेंटर के संचालक चर्चित होमियोपैथिक डॉक्टर घनश्याम ने कही। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में रोगी भूंजा की तरह अंग्रेजी दवाएं फांकते हुए असमय लिवर, किडनी, हृदय खराब कर लेते हैं। विशेषकर दर्द निवारक, इम्यून सप्रेस्ड व एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध सेवन के दुष्प्रभाव बहुत खतरनाक हैं। लेकिन विकल्प के रूप में होमियोपैथ की शरण में जाकर इन दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। दुर्घटना, सर्जरी या संक्रमण जैसी आपातकालीन स्थिति को छोड़ दें तो होमियोपैथ पद्धति हानिरहित इलाज का श्रेष्ठ विकल्प है। इसमें केस टेकिंग कर सही दवा का चुनाव, फॉलो अप और रोगी का फीडबैक बहुत मायने रखता है। उन्होंने कहा कि साइटिका, गठिया, फैटी लिवर, एंजाइटी, डिप्रेशन, अनिद्रा, एक्जिमा, सफेद दाग, सोरियासिस, पाइल्स, मुंहासे, हेयर फॉल, सिफलिस, चकत्ते, दाद, एलर्जी, अस्थमा, कई प्रकार के घावों व चर्म रोग आदि अनगिनत रोगों के इलाज में सफलता मिली है। यदि अनुभवी और डिग्रीधारी चिकित्सकों से इलाज कराने पर यह पैथ बहुत सुरक्षित है। रोगी चिकित्सक पर विश्वास कर सम्पर्क नियमित सम्पर्क में रहे तो लाइलाज रोगों में भी जादुई असर मिलते देखा गया है। रोग के हिसाब से 15 दिनों से लेकर एक वर्ष तक इलाज चलता है। उन्होंने बताया कि बीएचएमएस करने के बाद मैं बड़े शहरों में जा सकता था। वहां शिक्षित समाज होने के कारण इसकी खूब मांग है। लेकिन मैंने बेतिया को कर्म भूमि बनाना पसंद किया। भौगोलिक दृष्टिकोण से सबसे बड़ा क्षेत्रफल वाला जिला बेतिया नेपाल, उत्तर प्रदेश, रक्सौल और मोतिहारी से सटा हुआ है। एक करोड़ से ज्यादा संख्या में ग्रामीण आबादी यहां निवास करती है। मैंने चंपारण को रोगमुक्त बनाने की मुहिम छेड़ रखी है। आम ग्रामीणों की इस पैथ के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। वे दवा का महत्व समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा देखा जाता है कि सब तरफ से हार-थककर अंतिम अवस्था में रोगी होमियोपैथ उपचार अपनाते हैं। इसीलिए परिणाम धीमा मिलता है। यदि रोग की शुरूआत में इस पद्धति से इलाज कराए तो बहुत जल्द परिणाम मिलते हैं। कोई भी रोगी यदि किसी जटिल रोग से परेशान है तो निराश होने की जरूरत नहीं। वे एक बार मेरे क्लीनिक पर आकर मिले, दवा की कुछ दिनों की खुराक में ही फर्क साफ-साफ नजर आएगा। बता दें कि डॉ. घनश्याम को पिछले वर्ष सिंगापुर में एक कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय होमियो रत्न के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। सौजन्य से - डॉ. घनश्याम, B.H.M.S (B.U), P.G.H.M (Tamilnadu) सविता होमियो क्लीनिक एन्ड रिसर्च सेंटर ब्रांच 1-नया बाजार चौक, बेतिया ब्रांच 2-बानूछापर(56 भोग स्वीट्स के सामने),बेतिया (सोमवार से शनिवार) Mob-9097668301
- बेतिया में सड़क हादसा: दवा लेकर लौट रहे युवक की मौत, घर में शादी की खुशियाँ मातम में बदलीं1
- 09.02.2026. महानगनी पोखर में एक व्यक्ति की लाश मिली थी। पुलिस द्वारा इस कांड का उद्भेदन किया गया। ट्राफिक डीएसपी श्री अतनु दत्ता ने प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया प्रतिनिधियों को दी जानकारी। 12.02.2026.1
- Post by Manish Kumar Social Worker1
- ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) के जिला कमिटी की ओर से शहीद स्मारक से एक विशाल जुलूस, चार लेबर कोड के विरोध में निकाला गया। जुलूस समाहरणालय के गेट के पास एक सभा में तब्दील हो गया।सभा स्थल पर चार संहिता काला कानून की प्रतियाँ जलाई गयी। सभा को संबोधित करते हुये टीयूसीआई के केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह भाकपा (माले) रेड फ्लैग के राज्य सचिव कॉमरेड रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दावा कि श्रम संहिताएँ सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, पूरी तरह बेबुनियाद है। आगे उन्होंने कहा कि 90% से अधिक मजदूर जो असंगठित क्षेत्र में हैं, श्रम संहिताओं के दायरे से बाहर हैं। अब श्रम संहिताओं ने संगठित क्षेत्र के 90% मजदूरों को भी कानूनी संरक्षण से बाहर कर दिया है। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड अब 300 से कम श्रमिकों वाले यूनिट्स को छंटनी, सेवा समाप्ति और बंदी के लिए पहले से सरकारी अनुमति लेने से सामान्यतः मुक्त कर देता है। जबकि पहले यह सीमा 100 श्रमिक थी। इसी तरह 20 या 40 से कम श्रमिकों वाले (बिजली उपयोग के आधार पर) उद्योग व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ (OSHWC) कोड के कई प्रावधानों एवं कारखाने के रूप में पंजीकरण से मुक्त हैं, जो पहले 10 और 20 थें। वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2021–22 के आंकड़ों के अनुसार 100 से कम श्रमिकों को रोजगार देने वाले कारखाने सभी कारखानों का 79.2% हिस्सा हैं।असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन या सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रवर्तन तंत्र मौजूद नहीं है। केंद्र सरकार ट्रेड यूनियनों की ₹26,000 प्रति माह न्यूनतम वेतन की मांग स्वीकार करने को तैयार नहीं है। टीयूसीआई यह मांग करता है कि सरकार स्पष्ट करे कि वर्तमान में न्यूनतम वेतन क्या है ? कितने श्रमिकों को मिलता है, और देश भर में इसके प्रवर्तन की क्या व्यवस्था है? आगे रवीन्द्र कुमार 'रवि' ने कहा श्रम संहिताएँ मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार को भी नकार देती हैं। 60 दिन पहले अनिवार्य नोटिस की शर्त और समझौता प्रक्रिया चलने के दौरान हड़ताल पर प्रतिबंध मिलकर हड़ताल को लगभग असंभव कर देते हैं और संघ बनाने की स्वतंत्रता छीन लेते हैं। आगे रवीन्द्र ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार की कॉरपोरेट वर्ग के आगे पूर्ण सरेंडर है और श्रमिकों के विधिक अधिकारों के विरुद्ध है। देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।भाजपा, RSS के नेतृत्व को स्पष्ट करना होगा कि वे कॉरपोरेट के साथ खड़े हैं या भारत की जनता के साथ ? मोदी सरकार ने कॉरपोरेट एकाधिकारों के दबाव में कामकाजी जनता और नौजवान पीढ़ी के साथ धोखा किया है। श्रम संहिताओं ने स्थायी रोजगार और सुरक्षा के अधिकार की जगह नियत अवधि रोजगार को वैध बना दिया है और 1970 के ठेका श्रम उन्मूलन अधिनियम को अप्रभावी कर दिया है। टीयूसीआई के जिला संयोजक हरिशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने 8 घंटे के कार्यदिवस जो श्रमिकों का सार्वभौमिक अधिकार है को खत्म कर 12 घंटे के कार्यदिवस को वैध कर दिया है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 42 में उल्लेखित न्यायपूर्ण और मानवीय कार्य परिस्थितियों के विपरीत है। भाकपा (माले) रेड फ्लैग के जिला कमिटी सदस्य व पूर्व निगम पार्षद रीता रवि ने कहा कि श्रम संहिताएँ मजदूरों को पूँजी के गुलाम बनाने, युवाओं का भविष्य नष्ट करने और बुज़ुर्ग मजदूरों को सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित कर दुखद जीवन की ओर धकेल देने के लिए बनाई गई हैं। इन्हें रद्द करना ही होगा। आगे उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं को अंतिम रूप देने से पहले ट्रेड यूनियनों के सुझाव और सिफारिशें बिल्कुल नहीं मानी गईं।आगे उन्होंने कहा कि कामकाजी जनता पर कॉरपोरेट वर्चस्व थोपने का यह बेहद अलोकतांत्रिक तरीका कभी भी स्वीकार्य नहीं है। सभा को अवधेश राम, रसुल मियां, राजू राम, भगेलू राम,महंथ राम,चंदा देवी, आदि नेताओं ने भी संबोधित कियें।3
- डुमरिया के विधालय में निकासी के बाद भी विकास राशि खर्च नहीं, एक भवन में तीन स्कूल संचालित एक ही कमरे में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाई, किचन शेड का अभाव बैरिया। राजकीय प्राथमिक विद्यालय नया टोला डुमरिया की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है। छह कमरों वाले इस भवन में तीन विद्यालयों और एक आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है। तीनों स्कूलों को मर्ज कर एक साथ चलाया जा रहा है, जबकि दो विद्यालयों का कार्यालय भी इसी परिसर में संचालित है। कुल 153 छात्र नामांकित हैं और 15 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में एक ही कमरे में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई कराई जा रही है। किचन शेड नहीं होने से मध्यान्ह भोजन व्यवस्था भी प्रभावित है। बुधवार के दोपहर करीब तीन बजे प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उपेंद्र कुमार सिंह बताया की प्रधानाध्यापक द्वारा विकास मद की राशि की निकासी तो कर ली गई, पर खर्च नहीं की गई। उन्होंने प्रधानाध्यापक अरुण कुमार को 10 दिनों में आय-व्यय विवरण देने का निर्देश दिया है, अन्यथा कार्रवाई की चेतावनी दी है।1
- इरफान आलम हत्या कांड का प्रशासन ने महज 6 घंटे के भीतर ही किया खुलासा, प्रेम प्रसंग में हुई थी हत्या, दो गिरफ़्तार आज दिनांक 12 फरवरी 2026 को यातायात डीएसपी अतनु दत्ता ने बेतिया मुफस्सिल थाना में प्रेस कॉन्डेंस कर बताया कि 9 फरवरी को सूचना मिली थी कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मझौलिया स्थित महना नहर के समीप पोखर में एक युवक का शव मिला है। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम का गठन कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 6 घंटे के अंदर सफीना खातून को गिरफ्तार कर कर लिया गया घटना स्थल से बरामद चप्पल की पहचान के आधार पर वसी अहमद के गिरफ्तारी हेतु लगातार छापे मारी की जा रही थी वही आज वसी अहमद ने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि प्रेम प्रसंग को लेकर युवक इरफान आलम की हत्या की गई थी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से महना नहर के समीप स्थित पोखरा में फेंक दिया गया था। फिलहाल पुलिस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।1
- केंद्र सरकार के द्वारा लागू चार श्रम कानून सहित अन्य के विरोध में केंद्रीय श्रम संगठन और स्थानीय सीपीएम ने उच्च पथ को घंटे भर किया जाम।1
- बेतिया समाहरणालय गेट पर प्रदर्शन, पुतला दहन; राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हजारों श्रमिक-किसान शामिल1