चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित श्री कालिका मंदिर परिसर में 19 जुलाई को 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के अंतर्गत एक हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया। श्री कालिका गौशाला, नेतावलगढ़ पाछली की टीम द्वारा आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गौ माता को सम्मान दिलाना और उन्हें राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने की जनभावना को मजबूत करना था। इस अभियान के दौरान मंदिर में दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं और गौभक्तों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया और हस्ताक्षर करके गौ संरक्षण व संवर्धन के प्रति अपना समर्थन जताया। इस अवसर पर गौशाला की टीम ने उपस्थित लोगों को गौ सेवा, गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति में गौ माता के महत्व के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया। इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिसके बाद गौशाला परिवार ने सभी श्रद्धालुओं, गौभक्तों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित श्री कालिका मंदिर परिसर में 19 जुलाई को 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के अंतर्गत एक हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया। श्री कालिका गौशाला, नेतावलगढ़ पाछली की टीम द्वारा आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गौ माता को सम्मान दिलाना और उन्हें राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने की जनभावना को मजबूत करना था। इस अभियान के दौरान मंदिर में दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं और गौभक्तों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया और हस्ताक्षर करके गौ संरक्षण व संवर्धन के प्रति अपना समर्थन जताया। इस अवसर पर गौशाला की टीम ने उपस्थित लोगों को गौ सेवा, गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति में गौ माता के महत्व के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया। इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिसके बाद गौशाला परिवार ने सभी श्रद्धालुओं, गौभक्तों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
- चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी में किन्नर अखाड़ा गादीपति आरती बुआ जी की मौजूदगी में गौ रक्षा अभियान समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान गौ माता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की मांग उठाई गई।1
- चित्तौड़गढ़ में 19 जुलाई 2026 को जादूगर कन्हैया के अति मनमोहक दर्शन कराए गए हैं। कान्हा के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति भाव को दर्शाते हुए कहा गया है कि जब तक हम बिके नहीं थे, तब तक कोई पूछता नहीं था, लेकिन हे मेरे कान्हा, तुमने खरीद कर हमें अनमोल कर दिया है।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर उपखंड क्षेत्र में पीपलवास ग्राम पंचायत मुख्यालय स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के मुख्य द्वार पर ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं ने तालाबंदी कर दी है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई स्थानांतरण सूची के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और छात्रों ने स्कूल के शिक्षकों को भी परिसर के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इस स्कूल में कक्षा 1 से 12 तक कुल 350 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इस वर्ष यहां कार्यरत तीन लेक्चरर और तीन सेकंड ग्रेड अध्यापकों का तबादला हो गया है, जबकि एक सेकंड ग्रेड अध्यापक का पद पहले से ही रिक्त था। इस तरह विद्यालय में कुल सात शिक्षकों के पद खाली हो गए हैं, जिससे शैक्षणिक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके अतिरिक्त भदेसर उपखंड मुख्यालय के मॉडल स्कूल और घनेत विद्यालय सहित क्षेत्र के कई अन्य स्कूलों में भी शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक रिक्त पदों पर शिक्षकों की तुरंत नियुक्ति नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस समस्या को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए जल्द नियुक्ति की मांग की है। ग्रामीणों ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, संस्था प्रधान और अन्य जनप्रतिनिधियों से इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है।1
- मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में सरकारी शिक्षकों के प्रमोशन का नया फॉर्मूला तैयार किया है। इस नए नियम के तहत विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया पहले ही आयोजित कर ली जाएगी, लेकिन शिक्षकों को पदोन्नति का वास्तविक लाभ शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करने के बाद ही मिलेगा। हालांकि, जैसे ही संबंधित शिक्षक टीईटी परीक्षा पास करेगा, उसे उसकी डीपीसी की प्रभावी तिथि से ही पदोन्नति का लाभ दे दिया जाएगा, जिससे उसकी वरिष्ठता, वेतन निर्धारण और अन्य सेवा संबंधी अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। इस नए बदलाव का सबसे बड़ा असर वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए करीब 1.5 लाख प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब प्रमोशन पाने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। मध्य प्रदेश में कुल प्राथमिक शिक्षकों की संख्या लगभग 1.70 लाख और माध्यमिक शिक्षकों की संख्या लगभग 1.45 लाख है। नियमों के अनुसार, वर्ष 2016 से पहले नियमित प्रमोशन पाकर हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में पहुंच चुके शिक्षकों को टीईटी नहीं देनी होगी। वहीं, जो शिक्षक वर्तमान में केवल उच्च पद प्रभार पर कार्यरत हैं और उनका मूल पद माध्यमिक शिक्षक है, उन्हें नियमित प्रमोशन के लिए टीईटी पास करना ही होगा। व्यापम के माध्यम से वर्ष 2005 से पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर नियुक्त हुए शिक्षकों को भी प्रमोशन के लिए अलग से टीईटी पास करनी होगी, हालांकि सरकार इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में राहत मांगने की तैयारी कर रही है। इसके अतिरिक्त, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष या उससे कम का समय बचा है (ऐसे करीब 17 हजार शिक्षक हैं), उन्हें सामान्य रूप से छूट है, लेकिन यदि वे पदोन्नति का लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें भी टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि संचालनालय विधिक रूप से संपूर्ण प्रक्रिया का परीक्षण कर रहा है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।1
- चित्तौड़गढ़ के बेगू में हल्की-हल्की बारिश का दौर शुरू हो गया है। इस साल अब तक यहां पर इतनी बारिश नहीं हुई थी, जिसके बाद अब जाकर यह बदलाव देखने को मिल रहा है।1
- मन्दसौर की जनपद पंचायत सीतामऊ के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लावरी में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। इस बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन पर घोर लापरवाही बरतने का सीधा आरोप लगाया है।1
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में श्री सांवलिया सेठ के आज के शृंगार और मंगला आरती के लाइव दर्शन उपलब्ध हैं। भक्त आज श्री सांवलिया सेठ के इस पावन शृंगार और मंगला आरती के सीधे दर्शन का लाभ उठा सकते हैं।2
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित श्री कालिका मंदिर परिसर में 19 जुलाई को 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के अंतर्गत एक हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया। श्री कालिका गौशाला, नेतावलगढ़ पाछली की टीम द्वारा आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गौ माता को सम्मान दिलाना और उन्हें राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने की जनभावना को मजबूत करना था। इस अभियान के दौरान मंदिर में दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं और गौभक्तों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया और हस्ताक्षर करके गौ संरक्षण व संवर्धन के प्रति अपना समर्थन जताया। इस अवसर पर गौशाला की टीम ने उपस्थित लोगों को गौ सेवा, गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति में गौ माता के महत्व के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया। इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिसके बाद गौशाला परिवार ने सभी श्रद्धालुओं, गौभक्तों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।3
- संसद के मानसून सत्र का पहला दिन भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा बुलाए गए 'संसद मार्च' ने भारी बवाल खड़ा कर दिया। प्रदर्शनकारियों को संसद भवन की ओर बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान शास्त्री भवन और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की गई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की। हालात इस कदर बिगड़ गए कि सुरक्षा के मद्देनजर संसद भवन के मुख्य गेट सहित कई द्वारों को थोड़ी देर के लिए बंद करना पड़ा और दिल्ली पुलिस कमिश्नर खुद संसद मार्ग थाने पहुंचे। इस झड़प में दिल्ली पुलिस के कई जवान भी घायल हो गए हैं। इस भारी हंगामे के बीच पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए जंतर-मंतर पर लगाए गए सीजेपी के धरना स्थल और मंच को जबरन खाली करा दिया, जिसे प्रदर्शनकारियों ने अपनी लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कोशिश बताया। पुलिस ने आरबीआई के पास से सीजेपी के कम से कम सात प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जबकि सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर ले जाया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था और तनाव को देखते हुए जनपथ, पटेल चौक, राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ जैसे प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद कर दिए गए, जिससे कई यात्री अंदर ही फंसे रहे और ब्लूलाइन पर मेट्रो ट्रेनें लेट चलने लगीं। इस बीच, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव, इकरा हसन और प्रिया सरोज सहित कई सपा सांसदों ने संसद से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च निकाला। डिंपल यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे देश के इतिहास की सबसे अहंकारी, बेरहम और संवेदनहीन सरकार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वर्दी के आए कुछ पुलिसकर्मियों ने गुंडों जैसा व्यवहार करते हुए छात्रों को बेरहमी से पीटा, बिजली के झटके दिए और बेटियों के कपड़े तक फाड़ दिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग करते हुए सरकार पर देश को संविधान के बजाय आरएसएस की विचारधारा से चलाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, सांसद चंद्रशेखर आजाद और शबाना आजमी केरल भवन के पास धरने पर बैठ गए, जिन्हें रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने दोनों तरफ से घेर लिया। धरने के दौरान शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ गई और चंद्रशेखर को वहां से उठाने की तैयारी की जाने लगी। इस हंगामे के बीच राजनीतिक हलचल भी तेज रही, जहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की, वहीं सीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल जेपी नड्डा से मिलने पहुंचा। सीजेपी ने दावा किया है कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है। इसके अलावा, भूख हड़ताल पर बैठे अभिजीत दिपके ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी, जबकि सोनम वांगचुक ने अस्पताल प्रशासन से उन्हें संसद मार्च में शामिल होने देने की मांग की।1