झारखंड में नोकरी चाहिए तो, पैशा लाओ नोकरी पांव , सभी नोकरी का अलग-अलग भाव l मोलाई का गुंजाईश नहीं है, सरकार घाटे में चल रही है l झारखंड में सरकारी नौकरियों और नीतियों को लेकर यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है। इसका मुख्य कारण संवैधानिक प्रावधान (कानून), अदालती फैसले, और खुली भर्ती नीतियां हैं, जिनके तहत किसी भी राज्य का कानून देश के अन्य नागरिकों को पूरी तरह बाहर नहीं कर सकता। [1] संवैधानिक और कानूनी कारण समानता का अधिकार: भारत के संविधान का अनुच्छेद 16 देश के सभी नागरिकों को सरकारी नौकरियों में समान अवसर देता है। इसके अनुसार, केवल निवास स्थान (Domicile) के आधार पर देश के नागरिकों को सभी सरकारी नौकरियों से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। अदालती फैसले (कोर्ट के आदेश): झारखंड सरकार ने पहले स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में 100% या भारी मात्रा में आरक्षण (जैसे स्थानीय नीति या 75% निजी क्षेत्र का कानून) लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन झारखंड उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें संविधान के खिलाफ और भेदभावपूर्ण बताकर रद्द कर दिया। [1, 2, 3] खुली श्रेणी (Open Category): सरकार की मौजूदा भर्ती नियमावली (जैसे 60:40 का अनुपात या सामान्य श्रेणियां) के तहत एक निश्चित प्रतिशत सीटें अन्य राज्यों या गैर-स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए खुली रखनी पड़ती हैं, ताकि कानूनी बाधाओं से बचा जा सके। [1, 2] तकनीकी और योग्यता आधारित पहलू योग्यता और चयन: खुली प्रतिस्पर्धा वाली परीक्षाओं में जो अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता, कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया को पार करते हैं, उन्हें मेरिट के आधार पर नौकरी मिलती है, चाहे वे राज्य के भीतर के हों या बाहर के। विशेष और तकनीकी पद: उच्च शिक्षा (जैसे आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल संस्थान) या विशेष तकनीकी क्षेत्रों में कई बार राज्य के भीतर योग्य स्थानीय उम्मीदवारों की कमी के कारण खुले बाजार से चयन किया जाता है।
झारखंड में नोकरी चाहिए तो, पैशा लाओ नोकरी पांव , सभी नोकरी का अलग-अलग भाव l मोलाई का गुंजाईश नहीं है, सरकार घाटे में चल रही है l झारखंड में सरकारी नौकरियों और नीतियों को लेकर यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है। इसका मुख्य कारण संवैधानिक प्रावधान (कानून), अदालती फैसले, और खुली भर्ती नीतियां हैं, जिनके तहत किसी भी राज्य का कानून देश के अन्य नागरिकों को पूरी तरह बाहर नहीं कर सकता। [1] संवैधानिक और कानूनी कारण समानता का अधिकार: भारत के संविधान का अनुच्छेद 16 देश के सभी नागरिकों को सरकारी नौकरियों में समान अवसर देता है। इसके अनुसार, केवल निवास स्थान (Domicile) के आधार पर देश के नागरिकों को सभी सरकारी नौकरियों से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। अदालती फैसले (कोर्ट के आदेश): झारखंड सरकार ने पहले स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में 100% या भारी मात्रा में आरक्षण (जैसे स्थानीय नीति या 75% निजी क्षेत्र का कानून) लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन झारखंड उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें संविधान के खिलाफ और भेदभावपूर्ण बताकर रद्द कर दिया। [1, 2, 3] खुली श्रेणी (Open Category): सरकार की मौजूदा भर्ती नियमावली (जैसे 60:40 का अनुपात या सामान्य श्रेणियां) के तहत एक निश्चित प्रतिशत सीटें अन्य राज्यों या गैर-स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए खुली रखनी पड़ती हैं, ताकि कानूनी बाधाओं से बचा जा सके। [1, 2] तकनीकी और योग्यता आधारित पहलू योग्यता और चयन: खुली प्रतिस्पर्धा वाली परीक्षाओं में जो अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता, कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया को पार करते हैं, उन्हें मेरिट के आधार पर नौकरी मिलती है, चाहे वे राज्य के भीतर के हों या बाहर के। विशेष और तकनीकी पद: उच्च शिक्षा (जैसे आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल संस्थान) या विशेष तकनीकी क्षेत्रों में कई बार राज्य के भीतर योग्य स्थानीय उम्मीदवारों की कमी के कारण खुले बाजार से चयन किया जाता है।
- पप्पू यादव (राजेश रंजन) का समाज और राजनीति के बीच का इतिहास एक विवादास्पद और जन-समर्थक छवि का मिश्रण रहा है। उन्होंने 1990 में एक निर्दलीय विधायक के रूप में शुरुआत की और छह बार लोकसभा सांसद रहे, जहाँ उन्हें एक ओर गरीबों के मसीहा और संकटमोचक के रूप में देखा गया, वहीं दूसरी ओर उनके शुरुआती करियर पर आपराधिक मुकदमों के आरोप भी रहे। [1, 2, 3, 4, 5] राजनीतिक और सामाजिक सफर शुरुआत (1990 का दशक): 1990 में सिंगेश्वर से निर्दलीय विधायक बने और 1991 में पहली बार पूर्णिया से सांसद चुने गए। [1, 2] विवाद और कानूनी मामले: उनके शुरुआती राजनीतिक सफर में कई आपराधिक और हत्या के आरोप जुड़े, जिसमें 1998 में सीपीआई (एम) नेता अजीत सरकार की हत्या का चर्चित मामला भी शामिल था, हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। [1, 2] जनता के बीच छवि: बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र में आपदा, बाढ़, या कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जमीन पर उतरकर लोगों की मदद की, जिससे उन्हें "गरीबों का मसीहा" या "रॉबिनहुड" की छवि मिली। [1, 2, 3] दल-बदल और हालिया स्थिति: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़ने और निकाले जाने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और बाद में 2024 के आम चुनाव में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद के रूप में बड़ी जीत हासिल की। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर बिहार में संगठित अपराध के दर्जनों आरोप लगे. अभी भी उनके ऊपर 2024 के हलफनामे के मुताबिक 41 मामले पेंडिंग हैं. आज वो संसद भवन के अंदर भगवा कपड़े पहनकर अयोध्या में चढ़ावा चोरी की एक्टिंग कर रहे थे. जब उनके आपराधिक इतिहास के बारे में उनसे सवाल पूछा गया तो पप्पू यादव भड़क गए. इसे कहते हैं "उल्टा चोर कोतवाल को डांटे"...1
- गढ़वा के विधायक जी चुनाव जीत कर भाग जाते है? अब होगा खेला? गढ़वा की राजनीति में विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज है। चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच उनकी सक्रियता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। आखिर जनता क्या सोचती है, और क्या आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे? इसी मुद्दे पर होगी विस्तृत चर्चा।1
- कंधे पर मगरमच्छ रख पहुंचे थाना बिहार के सुपौल जिला का मामला कंधे पर मगरमच्छ रख पहुंचे थाना बिहार के बेख़ौफ़ युवाओं ने कर दिया कुछ ऐसा हो रही है सब ओर चर्चा आपको बता दें कि बिहार के सुपौल जिला में धान रोपते समय खेत में मगरमच्छ दिखा। गौरतलब है कि सुपौल जिला कोसी नदी के किनारे स्थित है , ऐसे में बरसात में जलस्तर बढ़ने से कोसी नदी से बहता हुआ मगरमच्छ धान के खेत में आ गया होगा। मगरमच्छ को देखते ही आसपास के लोग अलर्ट हो गए और समझदारी और हिम्मत से काम लेते हुए कुछ युवाओं ने मिलकर मगरमच्छ को पकड़ लिया, उसके मुंह पर मोटा रस्सी बांध दिया और कंधे पर लाद कर जश्न मनाते हुए थाने में पहुंचकर मगरमच्छ को जमा कर दिया।1
- रंका के चौधरी मोहल्ला में जल संकट गहराया, दूषित आयरनयुक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीण इस संबंध में आज रविवार शाम साढ़े पांच बजे राजेश कुमार चौधरी ने बताया कि रंका प्रखंड के चौधरी मोहल्ला, कुर्मी टोला, भुईया टोला और गढ़देवी टोला में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के तहत स्थापित पाइपलाइन जलापूर्ति योजना से नियमित और शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। कई घरों में महीनों से जलापूर्ति बंद है, जबकि जिन स्थानों पर पानी पहुंच रहा है वहां भी गुणवत्ता खराब बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें चापाकल का आयरनयुक्त और बदबूदार पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार पूर्व एवं वर्तमान जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। आरोप है कि पाइपलाइन मरम्मत और विस्तार कार्य में लापरवाही बरती गई, जिससे मुख्य सप्लाई पाइप क्षतिग्रस्त हो गया और करीब 60 घरों की जलापूर्ति ठप हो गई। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मोटर या पाइप खराब होने पर मरम्मत के लिए उन्हें स्वयं चंदा जुटाना पड़ता है। चौधरी मोहल्ला के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द जलापूर्ति बहाल नहीं की गई और शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे उग्र आंदोलन कर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का घेराव करेंगे। आईं चौधरी मोहल्ला के ग्रामीण के बीच ले चलते हैं1
- पंडवा। पलामू। पंडवा प्रखंड परिसर के बॉउंड्री से हजारोंसाल पुराना रास्ता बंद, जन प्रतिनिधि मौन। पंडवा। पलामू। पंडवा प्रखंड परिसर के बॉउंड्री से हजारोंसाल पुराना रास्ता बंद, जन प्रतिनिधि मौन।1
- सोनभद्र जिला दुध्दी ब्लाक के गुरुभाई-बहनों ने ग्राम सभा पोलवा में जाकर फटाफट सेसन में बातचीत करते हुए क्रम में जुड़ाव कि स्थिति, सोनभद्र जिला के दुध्दी ब्लाक के ग्राम सभा पोलवा में गुरुभाई-बहनों ने बड़े हर्ष उत्साह के साथ निकले घर घर फटाफट सेसन में शिव गुरु कार्य करते हुए क्रम में पोलवा के भाई-बहनें लोगों ने शिव गुरु से जुड़ाव कि स्थिति बनी।वहां के लोगों ने कहा कि यहां पर 2021 से पहले शिव गुरु चर्चा में तेज गति रहा है गांव में जनसैलाब बनता रहा।जब कोरौना काल महामारी आई तो उसी समय से शिव गुरु कार्य करने से जहां तहा बंचित रह गए। उसके बाद लोगों ने शिव गुरु कार्य में आने जाने से आवागमन बंद हुई।इसके बीच एक बुजुर्ग बहन शीला के यहां पहुंचे शिवकुमार गुरुभाई जी वहां पर शिव गुरु कार्य के बारे में जानकारी ली। तो हम लोगों ने घर-घर जाकर लोगों को बुलाये।शिला गुरुबहन के निवास स्थान पर बैठक की।संचालन कर्ता देवी गुरुबहन ने कि।लोगों से तीन सुत्र पर पुछताछ कि गई।चर्चा के दौरान अगिले आने वाले दिन को हर मंगलवार को साप्ताहिक शिव गुरु चर्चा केन्द्र स्थापित करने कि तैयारी बनी।हम सब मिलकर साहब दिदी के बताए हुए मार्ग पर चलने के लिए अग्रसर होंगे। आगे महादेव कि दया और साहब दिदी कि आशीर्वाद कि कामना करते हैं।इस आयोजन के दौरान शामिल रहे संजू गुरुबहना रीता,उदया,आरती एवं सहयोगी विकास गुरुभाई जी साथ रहे।2
- झारखंड में नोकरी चाहिए तो, पैशा लाओ नोकरी पांव , सभी नोकरी का अलग-अलग भाव l मोलाई का गुंजाईश नहीं है, सरकार घाटे में चल रही है l झारखंड में सरकारी नौकरियों और नीतियों को लेकर यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है। इसका मुख्य कारण संवैधानिक प्रावधान (कानून), अदालती फैसले, और खुली भर्ती नीतियां हैं, जिनके तहत किसी भी राज्य का कानून देश के अन्य नागरिकों को पूरी तरह बाहर नहीं कर सकता। [1] संवैधानिक और कानूनी कारण समानता का अधिकार: भारत के संविधान का अनुच्छेद 16 देश के सभी नागरिकों को सरकारी नौकरियों में समान अवसर देता है। इसके अनुसार, केवल निवास स्थान (Domicile) के आधार पर देश के नागरिकों को सभी सरकारी नौकरियों से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। अदालती फैसले (कोर्ट के आदेश): झारखंड सरकार ने पहले स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों में 100% या भारी मात्रा में आरक्षण (जैसे स्थानीय नीति या 75% निजी क्षेत्र का कानून) लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन झारखंड उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें संविधान के खिलाफ और भेदभावपूर्ण बताकर रद्द कर दिया। [1, 2, 3] खुली श्रेणी (Open Category): सरकार की मौजूदा भर्ती नियमावली (जैसे 60:40 का अनुपात या सामान्य श्रेणियां) के तहत एक निश्चित प्रतिशत सीटें अन्य राज्यों या गैर-स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए खुली रखनी पड़ती हैं, ताकि कानूनी बाधाओं से बचा जा सके। [1, 2] तकनीकी और योग्यता आधारित पहलू योग्यता और चयन: खुली प्रतिस्पर्धा वाली परीक्षाओं में जो अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता, कट-ऑफ और चयन प्रक्रिया को पार करते हैं, उन्हें मेरिट के आधार पर नौकरी मिलती है, चाहे वे राज्य के भीतर के हों या बाहर के। विशेष और तकनीकी पद: उच्च शिक्षा (जैसे आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल संस्थान) या विशेष तकनीकी क्षेत्रों में कई बार राज्य के भीतर योग्य स्थानीय उम्मीदवारों की कमी के कारण खुले बाजार से चयन किया जाता है।1
- प्राइम मिनिस्टर श्री दामोदरदास नरेंद्र मोदी दिलीप प्रोटेस्ट को लेकर बच्चों के साथ एक वीडियो पोस्ट किया जिसे बताया कि पेपर लीक होने के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है इसलिए धर्मेंद्र प्रधान जी कोइस्तीफा दिया जाए1