जनपद संभल में 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 38 बीघा ग्रामसभा की सरकारी जमीन अवैध रूप से निजी भू-स्वामियों के नाम दर्ज कर बेचने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। इस प्रकरण में पूर्व ईओ (पालिका) और डीडीसी चकबंदी सहित 31 नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह बेशकीमती 'नवीन परती' भूमि संभल-मुरादाबाद हाईवे पर स्थित है, जिसके चार प्लॉट नंबर एक साथ जुड़े हुए हैं। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि इस पूरे मामले में गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। यह भूमि वर्ष 1954 में नगर पालिका परिषद संभल को प्रबंधन के लिए सौंपी गई थी। हालांकि, 13 साल बाद, वर्ष 1967 में, नगर पालिका परिषद ने कथित तौर पर कुछ पट्टेदारों को इस जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया, जबकि पालिका को प्रबंधन के लिए मिली जमीन का पट्टा करने का अधिकार नहीं था, जिसके चलते यह पट्टा शुरू से ही शून्य था। इसके बाद यह जमीन पट्टेदारों के कब्जे में आ गई। वर्ष 1991 में, अपर तहसीलदार कोर्ट ने सईदउल्लाह सहित इन अवैध कब्जाधारियों को अवैध घोषित करते हुए उनकी बेदखली का आदेश दिया था। इसके खिलाफ की गई अपील वर्ष 1992 में अपर जिलाधिकारी कोर्ट में भी खारिज हो गई और कोर्ट ने इसे सरकारी जमीन घोषित किया था। बाद में, कब्जाधारियों द्वारा चकबंदी कोर्ट में वाद दायर किया गया, जहां डीडीसी के स्तर से उन्हें पुनः सुनवाई का अवसर दिया गया। वर्ष 2005 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई के बाद इसे ग्राम सभा की भूमि के रूप में यथावत रखने का आदेश दिया। इस आदेश के विरुद्ध की गई अपील भी खारिज हो गई और एक बार फिर इसे सरकारी जमीन मानते हुए राज्य सरकार की भूमि बताया गया। लेकिन, वर्ष 2008 में तत्कालीन डीडीसी प्रेम सिंह खड़क ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर और गलत तथ्यों के आधार पर इस जमीन को निजी खातेदारों का बता दिया तथा उन्हें कब्जा दिए जाने के आदेश भी जारी कर दिए। इस आदेश के खिलाफ नगर पालिका प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील दायर करने का प्रयास किया, लेकिन वर्ष 2013 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है, जिसके बाद यह मामला कई स्तरों पर जांच के दायरे में आ गया था। अब, 60 साल बाद डीडीसी कोर्ट के आदेश पर खतौनी से निजी खातेदारों के नाम हटा दिए गए हैं और भूमि को राज्य सरकार तथा ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है। रविवार को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने तहसील संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं का दौरा कर गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 में लगभग डेढ़ घंटे तक जांच की थी। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के अनुसार, संभल से मुरादाबाद की ओर जाने वाले हाईवे पर स्थित 101 करोड़ रुपये की 38 बीघा ग्राम समाज की जमीन को नगर पालिका और चकबंदी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से खुर्दबुर्द कर दिया गया था, जबकि ग्राम समाज की सरकारी जमीन को बेचने या किसी व्यक्ति को देने का अधिकार न तो नगर पालिका को है और न ही चकबंदी को। यह पूरी कार्रवाई चकबंदी न्यायालय से विधिवत सुनवाई कराकर की गई है और अब आगे की कार्रवाई के साथ-साथ आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
जनपद संभल में 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 38 बीघा ग्रामसभा की सरकारी जमीन अवैध रूप से निजी भू-स्वामियों के नाम दर्ज कर बेचने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। इस प्रकरण में पूर्व ईओ (पालिका) और डीडीसी चकबंदी सहित 31 नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह बेशकीमती 'नवीन परती' भूमि संभल-मुरादाबाद हाईवे पर स्थित है, जिसके चार प्लॉट नंबर एक साथ जुड़े हुए हैं। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि इस पूरे मामले में गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। यह भूमि वर्ष 1954 में नगर पालिका परिषद संभल को प्रबंधन के लिए सौंपी गई थी। हालांकि, 13 साल बाद, वर्ष 1967 में, नगर पालिका परिषद ने कथित तौर पर कुछ पट्टेदारों को इस जमीन का पट्टा आवंटित कर दिया, जबकि पालिका को प्रबंधन
के लिए मिली जमीन का पट्टा करने का अधिकार नहीं था, जिसके चलते यह पट्टा शुरू से ही शून्य था। इसके बाद यह जमीन पट्टेदारों के कब्जे में आ गई। वर्ष 1991 में, अपर तहसीलदार कोर्ट ने सईदउल्लाह सहित इन अवैध कब्जाधारियों को अवैध घोषित करते हुए उनकी बेदखली का आदेश दिया था। इसके खिलाफ की गई अपील वर्ष 1992 में अपर जिलाधिकारी कोर्ट में भी खारिज हो गई और कोर्ट ने इसे सरकारी जमीन घोषित किया था। बाद में, कब्जाधारियों द्वारा चकबंदी कोर्ट में वाद दायर किया गया, जहां डीडीसी के स्तर से उन्हें पुनः सुनवाई का अवसर दिया गया। वर्ष 2005 में चकबंदी अधिकारी ने सुनवाई के बाद इसे ग्राम सभा की भूमि के रूप में यथावत रखने का आदेश दिया। इस आदेश के विरुद्ध की गई अपील भी खारिज हो गई और एक बार फिर इसे सरकारी
जमीन मानते हुए राज्य सरकार की भूमि बताया गया। लेकिन, वर्ष 2008 में तत्कालीन डीडीसी प्रेम सिंह खड़क ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर और गलत तथ्यों के आधार पर इस जमीन को निजी खातेदारों का बता दिया तथा उन्हें कब्जा दिए जाने के आदेश भी जारी कर दिए। इस आदेश के खिलाफ नगर पालिका प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील दायर करने का प्रयास किया, लेकिन वर्ष 2013 में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर कहा कि नगर पालिका इस मामले में पैरवी करने की इच्छुक नहीं है, जिसके बाद यह मामला कई स्तरों पर जांच के दायरे में आ गया था। अब, 60 साल बाद डीडीसी कोर्ट के आदेश पर खतौनी से निजी खातेदारों के नाम हटा दिए गए हैं और भूमि को राज्य सरकार तथा ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया है।
रविवार को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने तहसील संभल के थाना रायसत्ती क्षेत्र के गांव तख्त गोसाईं का दौरा कर गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 में लगभग डेढ़ घंटे तक जांच की थी। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के अनुसार, संभल से मुरादाबाद की ओर जाने वाले हाईवे पर स्थित 101 करोड़ रुपये की 38 बीघा ग्राम समाज की जमीन को नगर पालिका और चकबंदी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से खुर्दबुर्द कर दिया गया था, जबकि ग्राम समाज की सरकारी जमीन को बेचने या किसी व्यक्ति को देने का अधिकार न तो नगर पालिका को है और न ही चकबंदी को। यह पूरी कार्रवाई चकबंदी न्यायालय से विधिवत सुनवाई कराकर की गई है और अब आगे की कार्रवाई के साथ-साथ आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
- हाल ही में ओवैसी के पंडित ने एक दमदार भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि अयोध्या राम मंदिर के 'चंदा चोरों' के घरों पर आखिर बुलडोजर क्यों नहीं चलाए गए और उनके खिलाफ गोलियां क्यों नहीं चलाई गईं। उनके इस भाषण ने उन लोगों के प्रति तीखा आक्रोश व्यक्त किया, जिन्हें 'चंदा चोर' बताया गया है, और इस बात पर जोर दिया कि ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, जबकि अन्य मामलों में बुलडोजर और गोलियों का इस्तेमाल देखा जाता है।1
- संभल के नगला गाँव में सरकारी बंजर भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जहाँ महबूल्ला शाह की मजार और सरकारी धन से बना एक शौचालय पाया गया है। कल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चंद्र त्यागी एडवोकेट ने जिलाधिकारी से इस संबंध में शिकायत की थी, जिसके बाद तहसील प्रशासन ने मौके पर पैमाइश (माप) कराई। इस पैमाइश में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गई है। मौके पर मौजूद लेखपाल रोहित कुमार ने पुष्टि की कि गाटा संख्या 68/3 की 0.117 हेक्टेयर बंजर भूमि की माप की गई है और यह सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला प्रतीत होता है। वहीं, स्थानीय निवासी हाजी नूर मौहम्मद ने बताया कि यह मजार उनके होश संभालने से पहले से मौजूद है। उन्होंने पहले इसे मजार की जमीन बताया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि इसका कुछ हिस्सा ग्राम सभा की जमीन भी है। पैमाइश पूरी होने के बाद रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंप दी गई है। अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुसार होगी। यदि कोर्ट अवैध कब्जे की पुष्टि करता है, तो सरकारी बंजर भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की जा सकती है।4
- सम्भल जिले में जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) चंद्रभूषण यादव पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप मुख्य विकास अधिकारी (CDO) गोरखनाथ भट्ट की विस्तृत जांच में प्रथमदृष्टया सही पाए गए हैं। CDO ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल को सौंप दी है, जिसमें DPO चंद्रभूषण यादव और उनके संबद्ध लिपिक मोहित कुमार के खिलाफ कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मिशन वात्सल्य, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, चाइल्ड हेल्पलाइन, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और विधवा पेंशन योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। आरोप है कि GeM पोर्टल पर फर्जी फर्मों के माध्यम से अनुबंध कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया, जहाँ एक ही मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी से कई फर्मों का संचालन दिखाकर भुगतान किए गए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत बेबी किट बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदी गईं, जबकि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर लैपटॉप खरीदे गए। चाइल्ड हेल्पलाइन और मिशन वात्सल्य में लगभग 60 लाख रुपये के सरकारी बजट के कथित गबन का मामला भी उजागर हुआ है। CDO की जांच में यह भी पाया गया कि डिप्टी कलेक्टर की तीन सदस्यीय जांच समिति को आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए, जांच में सहयोग नहीं किया गया और कई सरकारी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसे गंभीर प्रशासनिक अनुशासनहीनता माना गया है। CDO की जांच रिपोर्ट में गबन की धनराशि की वसूली, दोषियों पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत प्रतिदिन 250 रुपये का जुर्माना लगाने, विभागीय कार्रवाई शुरू करने और चंद्रभूषण यादव को DPO पद से तत्काल हटाने की सिफारिश की गई है। गौरतलब है कि इससे पहले भी डिप्टी कलेक्टर की एक तीन सदस्यीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट में DPO के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि कर चुकी थी। अब CDO की रिपोर्ट सामने आने के बाद सम्भल का यह मामला जिले के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में शामिल हो गया है।5
- एक गांव में पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव के सभी लोग इस समस्या से बहुत परेशान हैं क्योंकि उनके पास पानी निकालने का कोई रास्ता नहीं है। समस्त गांव वालों की ओर से सरकार से हाथ जोड़कर विनती की गई है कि उनकी पानी निकासी की इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए।4
- बदायूं जिले के हैदलपुर गांव में ग्रामीणों ने साल 2012 से खराब पड़ी सड़क की समस्या पर ध्यान देने की अपील माननीय योगी आदित्यनाथ जी से की है। बिल्सी थाना क्षेत्र के रिसौली पोस्ट स्थित हैदलपुर गांव की यह सड़क एक दशक से भी अधिक समय से बदहाल स्थिति में है। स्थानीय लोगों ने माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अनुरोध किया है कि वे इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर थोड़ा ध्यान दें।3
- 'पीके सिलेंडर' को हर घर की एक बड़ी परेशानी बताया गया है। इस परेशानी को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।1
- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का 53वां जन्मदिन मुरादाबाद में अत्यंत उत्साह और संकल्पों के साथ मनाया गया। बुधवार, 01 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि ठीक 12:01 बजे सिविल लाइन्स स्थित मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा के आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर अपने नेता का जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ सेलिब्रेट किया। इस विशेष अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य आयोजक सांसद रुचि वीरा ने 53 फीट लंबा केक काटकर अखिलेश यादव के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। इस आयोजन को केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि 'समता मूलक समाज' और 'सामाजिक न्याय' के संकल्पों के साथ जोड़ा गया। सांसद रुचि वीरा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुँचाना है। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रेम, दया और अपनापन के भाव के साथ पीड़ित, दुःखी और समाज में अपमानित महसूस करने वाले परिवारों से सीधे जुड़ें। रुचि वीरा ने जोर देकर कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा संविधान में निहित एकता, समता और बंधुत्व के मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस आयोजन में पर्यावरण संरक्षण को भी प्रमुखता दी गई, जहाँ कार्यकर्ताओं ने 'प्रदूषण मुक्त भारत' का संकल्प लेते हुए पर्यावरण की रक्षा को सामाजिक न्याय के साथ जोड़ा। सांसद ने कहा कि जैसे बाबा साहेब ने संविधान की प्राणवायु से वंचितों को अधिकार दिए, वैसे ही हम सभी को स्वस्थ पर्यावरण के साथ-साथ सामाजिक न्याय की रक्षा करनी है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी समाजवादियों ने एक स्वर में अखिलेश यादव को 2027 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लिए जी-जान से जुटने का संकल्प लिया। इस अवसर पर खुशनुद खान, शाने अली शानू, कुलदीप तुरैहा एड., तुंगीश यादव, शीरीगुल, वदूद खां, विजयवीर यादव, फरीद मलिक, कमर परवेज, चन्द्रपाल सिंह दिवाकर, इस्माइल खान, मैथ्यूज आर. मैसी, रहीस सैफी, एड. फहीम, सलामत जान, शरिक कुरैशी, फाजिल मलिक, तौकीर सिद्दीकी, मौ. नूर उर्फ शेरू, फाखरा लईक, याकूब मलिक, मौ. अजीम सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।4
- बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने राम मंदिर के लिए इकट्ठा किए गए चंदे में कथित चोरी के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार को इस मामले में घेरा है।1