यंहा हार्ट का इलाज नहीं, मौत का इंतज़ार:बाराबंकी अस्पताल की बदहाल हकीकत कंधाईपुर गांव का गरीब तड़प कर हुआ मौत का शिकार हार्ट के मरीज दूर रहे जिला अस्पताल से तो ही बेहतर बाराबंकी जिला अस्पताल की इमरजेंसी एक बार फिर सवालों के घेरे में है, जहां कंधईपुर रसौली गांव निवासी जुबेर की हार्ट अटैक से दर्दनाक मौत हो गई। बताया जाता है कि जुबेर पहले भी गंभीर रूप से बीमार हुए थे और उनका इलाज लखनऊ के लारी अस्पताल में कराया गया था, लेकिन इस बार किस्मत और व्यवस्था दोनों ने साथ नहीं दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्षों से जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती क्यों नहीं हो पाई? क्या गरीबों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं? जिनके पास बड़े शहरों में इलाज कराने के साधन नहीं हैं, उनके लिए जिला अस्पताल ही अंतिम सहारा होता है, लेकिन जब वहीं जरूरी डॉक्टर न हों तो यह सहारा भी टूट जाता है। यह केवल एक मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही की कहानी है। हर बार एक नई मौत के बाद वही सवाल उठते हैं, लेकिन जवाब कहीं खो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जिला अस्पताल में हार्ट स्पेशलिस्ट की नियुक्ति नहीं होती, तब तक हार्ट अटैक के मरीजों को यहां लाना उनकी जान के साथ जोखिम लेने जैसा है। *निष्कर्ष* : अगर समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरी, तो ऐसे जुबेर हर दिन सिस्टम की खामियों के शिकार होते रहेंगे—और गरीब सिर्फ खबर बनकर रह जाएंगे।
यंहा हार्ट का इलाज नहीं, मौत का इंतज़ार:बाराबंकी अस्पताल की बदहाल हकीकत कंधाईपुर गांव का गरीब तड़प कर हुआ मौत का शिकार हार्ट के मरीज दूर रहे जिला अस्पताल से तो ही बेहतर बाराबंकी जिला अस्पताल की इमरजेंसी एक बार फिर सवालों के घेरे में है, जहां कंधईपुर रसौली गांव निवासी जुबेर की हार्ट अटैक से दर्दनाक मौत हो गई। बताया जाता है कि जुबेर पहले भी गंभीर रूप से बीमार हुए थे और उनका इलाज लखनऊ के लारी अस्पताल में कराया गया था, लेकिन इस बार किस्मत और व्यवस्था दोनों ने साथ नहीं दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्षों से जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती क्यों नहीं हो पाई? क्या गरीबों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं? जिनके पास बड़े शहरों में इलाज कराने के साधन नहीं हैं, उनके लिए जिला अस्पताल ही अंतिम सहारा होता है, लेकिन जब वहीं जरूरी डॉक्टर न हों तो यह सहारा भी टूट जाता है। यह केवल एक मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही की कहानी है। हर बार एक नई मौत के बाद वही सवाल उठते हैं, लेकिन जवाब कहीं खो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जिला अस्पताल में हार्ट स्पेशलिस्ट की नियुक्ति नहीं होती, तब तक हार्ट अटैक के मरीजों को यहां लाना उनकी जान के साथ जोखिम लेने जैसा है। *निष्कर्ष* : अगर समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरी, तो ऐसे जुबेर हर दिन सिस्टम की खामियों के शिकार होते रहेंगे—और गरीब सिर्फ खबर बनकर रह जाएंगे।
- बाराबंकी गोंडा में सरयू नदी पर बने 44 साल पुराने जर्जर संजय सेतु की मरम्मत 16 अप्रैल से शुरू हो रही है। इसके चलते करीब 2 महीने तक इस पुल से वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। छोटे वाहन पांटून पुल से गुजरेंगे बसों और भारी वाहनों को अब अयोध्या होकर जाना होगा इसका सीधा असर दूरी 114 किमी से बढ़कर लगभग 191 किमी यानी 77 किमी ज्यादा सफर साधारण बस किराया: ₹162 ➝ ₹294 एसी बस किराया: ₹206 ➝ ₹431 इस बदलाव से रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोग, छात्र और व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे, जिससे आम जनता की परेशानी बढ़ना तय है। आपकी क्या राय है क्या प्रशासन को कोई बेहतर विकल्प देना चाहिए था ब्यूरो चीफ रामानंद सागर1
- कंधाईपुर गांव का गरीब तड़प कर हुआ मौत का शिकार हार्ट के मरीज दूर रहे जिला अस्पताल से तो ही बेहतर बाराबंकी जिला अस्पताल की इमरजेंसी एक बार फिर सवालों के घेरे में है, जहां कंधईपुर रसौली गांव निवासी जुबेर की हार्ट अटैक से दर्दनाक मौत हो गई। बताया जाता है कि जुबेर पहले भी गंभीर रूप से बीमार हुए थे और उनका इलाज लखनऊ के लारी अस्पताल में कराया गया था, लेकिन इस बार किस्मत और व्यवस्था दोनों ने साथ नहीं दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्षों से जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती क्यों नहीं हो पाई? क्या गरीबों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं? जिनके पास बड़े शहरों में इलाज कराने के साधन नहीं हैं, उनके लिए जिला अस्पताल ही अंतिम सहारा होता है, लेकिन जब वहीं जरूरी डॉक्टर न हों तो यह सहारा भी टूट जाता है। यह केवल एक मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही की कहानी है। हर बार एक नई मौत के बाद वही सवाल उठते हैं, लेकिन जवाब कहीं खो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जिला अस्पताल में हार्ट स्पेशलिस्ट की नियुक्ति नहीं होती, तब तक हार्ट अटैक के मरीजों को यहां लाना उनकी जान के साथ जोखिम लेने जैसा है। *निष्कर्ष* : अगर समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरी, तो ऐसे जुबेर हर दिन सिस्टम की खामियों के शिकार होते रहेंगे—और गरीब सिर्फ खबर बनकर रह जाएंगे।1
- Post by Mohd zaid2
- बताते चले की 16 वर्षीय बेटी से छेड़छाड़ का विरोध करने पर आरोपियों के परिजनों ने किया हमला—24 घंटे बाद भी पुलिस कार्रवाई शून्य सरकार जहां एक ओर मिशन शक्ति के तहत महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। मामला नगर कोतवाली क्षेत्र की सिटी चौकी अंतर्गत नई बस्ती नबीगंज का है, जहां रहने वाली सोफिया पत्नी कुन्नू ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी 16 वर्षीय बेटी जैनब के साथ उस वक्त छेड़छाड़ की गई, जब वह शाम करीब 7 बजे काम से घर लौट रही थी।आरोप है कि बाबा पंचम दास कुटिया के पास मोहल्ले के ही दो युवकों ने रास्ता रोककर न केवल अभद्रता की, बल्कि उसका हाथ पकड़कर जबरदस्ती करने की कोशिश की। शोर मचाने पर आसपास के लोग इकट्ठा हुए, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।पीड़िता ने जब पूरी घटना अपनी मां को बताई, तो युवती की माँ सोफिया शिकायत लेकर आरोपियों के घर पहुंची। लेकिन वहां न्याय मिलने के बजाय आरोप है कि आरोपियों के परिजनों ने ही महिला की बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और कई जगह टांके लगाने पड़े।पीड़िता ने नगर कोतवाली में लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बावजूद भी पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है ।एक तरफ जनपद के पुलिस अधीक्षक की कार्यशैली की सराहना की जाती है, तो वहीं नगर कोतवाली और सिटी चौकी क्षेत्र में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और उसके बाद शिकायत करने पर मारपीट जैसी गंभीर घटनाओं में भी अगर समय रहते कार्रवाई न हो, तो यह न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल है, बल्कि मिशन शक्ति जैसे अभियानों की प्रभावशीलता पर भी सीधा प्रहार है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कब तक संज्ञान लेकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है1
- नगर पंचायत बेलहरा वार्ड नंबर 2 शलारी कुआं का ढकने के लिए कई वर्षों से मांग कर रहे हैं इस पर अधिशासी अधिकारी ना चेरमैन ना सभासद मैंने लिखित में भी एप्लीकेशन दिया था 2023 में आए दिन जानवर गिरने का खतरा बना रहता है इसमें कई बार जानवर गिर गए हैं बच्चों को गिरने खतरा बना रहता है2
- यूपी के जालौन के माधौगढ़ में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों ग्रामीणों और महिलाओं ने बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया और घरों में लगे स्मार्ट मीटर उखाड़कर सड़क पर धरना दिया। भारी विरोध देखने को मिला।1
- रवि रावत की रिपोर्ट लोकेशन फतेहपुर फतेहपुर में दो बाइकों की टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में घायलों के साथ पहुंचे लोगों ने हंगामा किया और चिकित्सकों व कर्मचारियों से अभद्रता का प्रयास किया। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम हसनपुर टांडा निवासी ज्ञानवेंद्र उर्फ शुभम वर्मा (25) बुधवार देर रात ग्राम मिठवारा से एक शादी समारोह से लौट रहे थे। वह अपने रिश्तेदार आशुतोष और नैंसी के साथ बाइक पर थे। मिठवारा-बिहुरा मार्ग पर ग्राम खैरातपुर के पास सामने से आ रही एक अन्य बाइक से उनकी टक्कर हो गई। इस हादसे में ज्ञानवेंद्र और दूसरी बाइक पर सवार इमलीपुर निवासी सचिन व राजा गंभीर रूप से घायल हो गए। आशुतोष और नैंसी को मामूली चोटें आईं। सभी घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने ज्ञानवेंद्र को मृत घोषित कर दिया, वहीं सचिन की हालत गंभीर बनी हुई है। एंबुलेंस समय पर न मिलने से आक्रोशित ज्ञानवेंद्र के साथियों और परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. समीर सिन्हा, फार्मासिस्ट हरगोविंद बैसवार और वार्ड ब्वाय आकाश के साथ गाली-गलौज की। उन पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और मारपीट का प्रयास करने का आरोप है। हंगामा करने वालों ने अस्पताल में आग लगाने की धमकी भी दी और बीच-बचाव करने वालों से भी अभद्रता कर धमकाया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, जहां हंगामा कर रहे लोगों ने पुलिसकर्मियों से भी धक्का-मुक्की की। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। मृतक ज्ञानवेंद्र अपने परिवार का इकलौता पुत्र था। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। उसकी दो बहनों की शादी हो चुकी है। सीएचसी प्रभारी डॉ. अवनीश चौधरी ने बताया कि हंगामा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को तहरीर दी गई है।1
- भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती मीतपुर की ग्राम पंचायत निजामुद्दीन पुर में किया गया जिसमें सैकड़ो की संख्या में महिलाएं पुरुष व बच्चे बाबा साहब की कथा सुनने पहुंचे लोक गायक जमुना प्रसाद कनौजिया के द्वारा एक सांस्कृतिक मंच का आयोजन किया गया बाबा साहब के नाम प्रोग्राम किया गया जिसका उद्देश्य समाज में पहले अंधविश्वास वह बाबा साहब का जीवन कैसा रहा उन्होंने इस देश में महिलाओं के जीवन के उत्थान के बारे में क्या-क्या कार्य किया यह जमुना प्रसाद कनौजिया के द्वारा बताया गया ब्यूरो चीफ रामानंद सागर4