सीजेएम के खिलाफ शिकायत के बाद दर्ज अपराध की विवेचना रोकने की मांग भिंड। जिला अधिवक्ता संघ भिंड के अध्यक्ष ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर थाना देहात में दर्ज अपराध क्रमांक 536/26 की विवेचना वरिष्ठ न्यायालय से दिशा-निर्देश मिलने तक रोकने की मांग की है। अध्यक्ष विनीत मिश्रा नें बताया कि सीजेएम श्रीमती निधि नीलेश श्रीवास्तव और जेएमएफसी श्रीमती मुनमुन सिंह शर्मा के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि दर्ज अपराध को झूठा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।आवेदन में कहा गया है कि सीजेएम के रूप में पदस्थ श्रीमती निधि नीलेश श्रीवास्तव तथा तत्कालीन बाबू सुवीर जोशी के संबंध में भ्रष्टाचार एवं दलाली से जुड़ी शिकायतें प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष पूर्व में की जा चुकी हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन्हीं शिकायतों से क्षुब्ध होकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ बिना जांच के अपराध दर्ज कराया गया है। उन्होंने घटना से स्वयं तथा अन्य अधिवक्ताओं का कोई संबंध नहीं होने की बात कही है।अध्यक्ष विनीत मिश्रा ने आशंका जताई कि मामले की फरियादी न्यायिक अधिकारी होने के कारण विवेचना प्रभावित हो सकती है तथा पुलिस पर दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उच्च न्यायालय जबलपुर और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी पत्र दिया गया है।आवेदन में पुलिस अधीक्षक से मांग की गई है कि उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश अथवा संबंधित न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण तक अपराध क्रमांक 536/26 की विवेचना रोक दी जाए। अधिवक्ता संघ द्वारा इस संबंध में ठहराव प्रस्ताव पारित किए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।
सीजेएम के खिलाफ शिकायत के बाद दर्ज अपराध की विवेचना रोकने की मांग भिंड। जिला अधिवक्ता संघ भिंड के अध्यक्ष ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर थाना देहात में दर्ज अपराध क्रमांक 536/26 की विवेचना वरिष्ठ न्यायालय से दिशा-निर्देश मिलने तक रोकने की मांग की है। अध्यक्ष विनीत मिश्रा नें बताया कि सीजेएम श्रीमती निधि नीलेश श्रीवास्तव और जेएमएफसी श्रीमती मुनमुन सिंह शर्मा के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि दर्ज अपराध को झूठा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।आवेदन में कहा गया है कि सीजेएम के रूप में पदस्थ श्रीमती निधि नीलेश श्रीवास्तव तथा तत्कालीन बाबू सुवीर जोशी के संबंध में भ्रष्टाचार एवं दलाली से जुड़ी शिकायतें प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष पूर्व में की जा चुकी हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन्हीं शिकायतों से क्षुब्ध होकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ बिना जांच के अपराध दर्ज कराया गया है। उन्होंने घटना से स्वयं तथा अन्य अधिवक्ताओं का कोई संबंध नहीं होने की बात कही है।अध्यक्ष विनीत मिश्रा ने आशंका जताई कि मामले की फरियादी न्यायिक अधिकारी होने के कारण विवेचना प्रभावित हो सकती है तथा पुलिस पर दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उच्च न्यायालय जबलपुर और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी पत्र दिया गया है।आवेदन में पुलिस अधीक्षक से मांग की गई है कि उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश अथवा संबंधित न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण तक अपराध क्रमांक 536/26 की विवेचना रोक दी जाए। अधिवक्ता संघ द्वारा इस संबंध में ठहराव प्रस्ताव पारित किए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।
- ऊमरी के पास प्रस्तावित नए टोल पर कांग्रेस का सवाल,जनता पर दोहरा आर्थिक बोझ क्यों : रामशेष बघेल* ऊमरी के पास प्रस्तावित नए टोल पर कांग्रेस का सवाल,जनता पर दोहरा आर्थिक बोझ क्यों : रामशेष बघेल* *सात दिन में जांच और कार्रवाई की मांग,आंदोलन की चेतावनी* भिण्ड । ऊमरी के पास प्रस्तावित नए टोल बूथ को लेकर ग्रामीण कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष रामशेष बघेल ने शासन - प्रशासन और मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) से पूरे मामले की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है । बघेल ने कहा कि जब इसी मार्ग पर पहले से टोल शुल्क लिया जा रहा है,तो उसी क्षेत्र में नया टोल लगाने का औचित्य क्या है । उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित टोल की परियोजना,सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति,टोल वसूली का वैधानिक आधार और शुल्क निर्धारण से संबंधित दस्तावेज जनता के सामने रखे जाएं। उन्होंने कहा कि उमरी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को नियमित आवागमन करना पड़ता है। इसलिए स्थानीय ग्रामीणों,किसानों, विद्यार्थियों,कर्मचारियों और नियमित यात्रियों के लिए प्रस्तावित टोल में छूट अथवा राहत का क्या प्रावधान है,यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कलेक्टर से मांग की कि संबंधित विभाग से प्रस्तावित टोल की वैधानिकता,स्वीकृति, परियोजना दस्तावेज और शुल्क निर्धारण के आधार की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि सात दिन के भीतर नियमानुसार कार्रवाई कर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) जनता के हित में शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ स्वीकार नहीं किया जाएगा। भिण्ड की जनता पर दोहरा टोल भार किसी भी कीमत पर उचित नहीं है। जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ के खिलाफ कांग्रेस पूरी मजबूती से जनता के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ेगी।1
- सीजेएम के खिलाफ शिकायत के बाद दर्ज अपराध की विवेचना रोकने की मांग भिंड। जिला अधिवक्ता संघ भिंड के अध्यक्ष ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर थाना देहात में दर्ज अपराध क्रमांक 536/26 की विवेचना वरिष्ठ न्यायालय से दिशा-निर्देश मिलने तक रोकने की मांग की है। अध्यक्ष विनीत मिश्रा नें बताया कि सीजेएम श्रीमती निधि नीलेश श्रीवास्तव और जेएमएफसी श्रीमती मुनमुन सिंह शर्मा के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि दर्ज अपराध को झूठा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।आवेदन में कहा गया है कि सीजेएम के रूप में पदस्थ श्रीमती निधि नीलेश श्रीवास्तव तथा तत्कालीन बाबू सुवीर जोशी के संबंध में भ्रष्टाचार एवं दलाली से जुड़ी शिकायतें प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष पूर्व में की जा चुकी हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन्हीं शिकायतों से क्षुब्ध होकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ बिना जांच के अपराध दर्ज कराया गया है। उन्होंने घटना से स्वयं तथा अन्य अधिवक्ताओं का कोई संबंध नहीं होने की बात कही है।अध्यक्ष विनीत मिश्रा ने आशंका जताई कि मामले की फरियादी न्यायिक अधिकारी होने के कारण विवेचना प्रभावित हो सकती है तथा पुलिस पर दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उच्च न्यायालय जबलपुर और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी पत्र दिया गया है।आवेदन में पुलिस अधीक्षक से मांग की गई है कि उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश अथवा संबंधित न्यायिक अधिकारियों के स्थानांतरण तक अपराध क्रमांक 536/26 की विवेचना रोक दी जाए। अधिवक्ता संघ द्वारा इस संबंध में ठहराव प्रस्ताव पारित किए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।1
- ब्रेकिंग जालौन जालौन में युवती ने प्रेम विवाह कर वीडियो किया वायरल, युवती हिना ने मोहल्ले के ही रहने वाले जीत से किया प्रेम विवाह, प्रेमी जोड़े ने प्रयागराज के आर्य समाज मंदिर में रचाई शादी, प्रेमी जोड़े ने अपनी मर्जी से एक-दूजे को माला पहनाकर लिए साथ फेरे, युवती ने वीडियो वायरल कर बिना किसी के दबाव में अपनी मर्जी से शादी का किया दावा, युवती ने वीडियो में परिजनों पर लगाए गंभीर आरोप, अपने भाई पर दोनों को जान से मारने की धमकी का लगाया आरोप, युवती ने कहा किसी भी अनहोनी के माता-पिता और भाई होंगे जिम्मेदार, जालौन के कोंच कोतवाली क्षेत्र के गांधी नगर के एक ही समाज के हैं दोनों निवासी।2
- school ke liye rasta kaccha Pani bhara hua H Gram jeesakpura tehsil mehgaon district Bhind Madhya Pradesh.... raste par pani or school Jane me samsiya3
- जसवंतनगर। कस्बा जसवंतनगर की चर्चित शिव गौर क्लीनिक एक बार फिर विवादों में घिर गई है। ग्राम सिसहाट निवासी अरविंद यादव पुत्र सुदामा सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने क्लीनिक के डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही और गलत उपचार का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों के अनुसार अरविंद यादव की तबीयत खराब होने पर उन्हें जसवंतनगर स्थित शिव गौर क्लीनिक ले जाया गया था। वहां इलाज के दौरान उन्हें इंजेक्शन लगाए गए। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान ही मरीज की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। जब परिजनों ने डॉक्टर से लगाए गए इंजेक्शन और दवाओं के बारे में जानकारी मांगी तो कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि इंजेक्शन और अन्य सामग्री कचरे में फेंक दी गई है और संभवतः पानी में बह गई होगी। परिजन मरीज को लेकर सैफई पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने करीब एक घंटे पहले ही मौत होने की बात बताई। परिजनों का आरोप है कि क्लीनिक पर डॉक्टर के पिता ने भी उनसे मरीज को वहां से ले जाने की बात कही और कहा कि उन्हें जो करना है, कर लें। मृतक के परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका यह भी आरोप है कि शिव गौर क्लीनिक को लेकर पूर्व में भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। परिजनों का दावा है कि इस वर्ष क्लीनिक के खिलाफ यह छठा-सातवां मामला है। लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बाद अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर है। सवाल उठ रहा है कि यदि क्लीनिक के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो विभाग द्वारा अब तक क्या कार्रवाई की गई। फिलहाल पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।1
- रांची में छात्र प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा पर फेंकी स्याही, कहा इसी स्याही से लिखेंगे इंकलाब रांची में छात्र प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा पर स्याही फेंकने का मामला सामने आया। घटना के बाद नेहा बोरा ने कहा कि उनके ऊपर फेंकी गई स्याही उन्हें रोक नहीं सकती। उन्होंने कहा, “इसी स्याही से हम इंकलाब लिखेंगे। नेहा ने कहा कि झारखंड के छात्र अभी भी एकजुट होकर अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिशों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी छात्रों के मुद्दों और उनके जीवन से जुड़े सवालों को गंभीरता से नहीं लेते थे, उन्हें अब छात्रों की एकजुटता और संघर्ष की ताकत दिखाई दे रही है।प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। नेहा बोरा ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन तमाम छात्रों की है जो अपने भविष्य, रोजगार और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरोध और दबाव के बावजूद छात्र पीछे हटने वाले नहीं हैं।1
- ट्रांसफार्मर में फंसा मोर, करंट लगने से मौत: ग्रामीणों ने बचाने का प्रयास किया, बिजली चालू होने से गई जान। ट्रांसफार्मर में फंसा मोर, करंट लगने से मौत: ग्रामीणों ने बचाने का प्रयास किया, बिजली चालू होने से गई जान जसवंतनगर के नगला भदोरिया मलाजनी गांव में रविवार सुबह एक मोर की करंट लगने से मौत हो गई। मोर खेत में लगे ट्यूबवेल के ट्रांसफार्मर में फंस गया था। ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति बंद कराकर उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन बिजली दोबारा चालू होने से उसकी जान चली गई। यह घटना गांव निवासी प्रदीप कुमार के खेत के पास सुबह करीब सात बजे हुई। प्रदीप कुमार ने मोर को ट्रांसफार्मर में फंसा और तड़पता देखा। उन्होंने तुरंत बिजली आपूर्ति बंद कराने का प्रयास किया। बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद ग्रामीण मोर को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे थे। प्रदीप कुमार ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान ट्रांसफार्मर की बिजली दोबारा चालू कर दी गई, जिससे मोर करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत से ग्रामीणों में दुख है। ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति बंद और चालू करने में बरती गई लापरवाही की जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना की जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।1