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शहरवासियों को पुलिस का उपहार—121 खोए मोबाइल बरामद कर लौटाए शहरवासियों को पुलिस का उपहार—121 खोए मोबाइल बरामद कर लौटाए कानपुर नगर। कमिश्नरेट कानपुर नगर पुलिस ने नागरिकों के खोए और गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को वापस किए हैं। पुलिस के मुताबिक विभिन्न राज्यों और जनपदों में लगातार प्रयास करते हुए कुल 121 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 24 लाख रुपये है। मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरे पर खुशी नजर आई। नागरिकों ने पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि मोबाइल मिलने से आर्थिक नुकसान से राहत मिली है और निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर भी चिंता कम हुई। पुलिस की इस कार्रवाई से नागरिकों में पुलिस के प्रति भरोसा और मजबूत होने की बात सामने आई है। 🎥 हमारे सहयोगी गरिमा वाजपेई की खास रिपोर्ट
Aman kesharwani
शहरवासियों को पुलिस का उपहार—121 खोए मोबाइल बरामद कर लौटाए शहरवासियों को पुलिस का उपहार—121 खोए मोबाइल बरामद कर लौटाए कानपुर नगर। कमिश्नरेट कानपुर नगर पुलिस ने नागरिकों के खोए और गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को वापस किए हैं। पुलिस के मुताबिक विभिन्न राज्यों और जनपदों में लगातार प्रयास करते हुए कुल 121 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 24 लाख रुपये है। मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरे पर खुशी नजर आई। नागरिकों ने पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि मोबाइल मिलने से आर्थिक नुकसान से राहत मिली है और निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर भी चिंता कम हुई। पुलिस की इस कार्रवाई से नागरिकों में पुलिस के प्रति भरोसा और मजबूत होने की बात सामने आई है। 🎥 हमारे सहयोगी गरिमा वाजपेई की खास रिपोर्ट
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- विष्णु कांत पाण्डेय ने जन्मदिन पर सेवा संकल्प करते हुए वृद्धाश्रम में स्वास्थ्य जांच और भोजन का आयोजन किया प्रयागराज नैनी में में सामाजिक कार्यकर्ता और पावन प्रयाग फाउंडेशन के डायरेक्टर विष्णुकांत पांडेय ने अपने जन्मदिन को सेवा दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। 21 सितंबर को नैनी स्थित आधारशिला वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के लिए विशेष सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सुबह 10 बजे से वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के लिए बीपी, शुगर, वजन और थायराइड की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की गई। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सभी बुजुर्गों को भोजन कराया गया और उनके साथ आत्मीय समय बिताया गया। पावन प्रयाग फाउंडेशन के डायरेक्टर विष्णुकांत पांडेय गरीब असहाय जरूरतमंद लोगों की सदैव मदद के लिए काम करते हैं। जब जब प्रयागराज में आपत स्थिती बनती है कोरोना काल रहा हो या बाढ़ के हालात बनने पर समाजसेवी विष्णु कांत पाण्डेय लोगों के लिए पहुंचते हैं एवं इलाज में सहयोग,सर्दियों में कंबल-कपड़ा वितरण और जरूरतमंद परिवारों की देखभाल उनके सामाजिक कार्यों का हिस्सा है। उनका कहना है कि जन्मदिन जैसे विशेष अवसर को समाजसेवा के लिए समर्पित करना ही सबसे सार्थक पहल है। उन्होंने आज अपने जन्मदिन के मौके पर आधारशिला वृद्धाश्रम में रहने वाले सभी लोगों से इस सेवा कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। बाइट:विष्णुकांत पांडेय,डायरेक्टर, पावन प्रयाग फाउंडेशन, प्रयागराज। पवनदेव,संवाददाता,प्रयागराज।1
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- मेजा तहसील परिसर में जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर में दिनदहाड़े तोड़फोड़ दस्तावेज फाड़ने और चैंबर में बैठे मुवक्किलों से मारपीट का भी आरोप, पुलिस जांच में जुटी मेजा, प्रयागराज। मेजा तहसील परिसर में मंगलवार को जूनियर अधिवक्ताओं के चैंबर को लेकर विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि कुछ अधिवक्ता सैकड़ों लोगों के साथ तहसील परिसर पहुंचे और जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा बनाए गए चैंबर को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान चैंबर में रखे बैग से जरूरी दस्तावेज निकालकर फाड़ने और फेंकने तथा चैंबर में बैठे मुवक्किलों के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेजा तहसील परिसर में पिछड़े एवं दलित वर्ग के जूनियर अधिवक्ताओं द्वारा विधि व्यवसाय करने के लिए चैंबर बनाया गया था। इस चैंबर को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष एवं मंत्री की ओर से चैंबर को अवैध बताते हुए उसे हटाने के लिए नोटिस दिया गया था। बताया गया कि जूनियर अधिवक्ताओं ने पूर्व में समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले से अवगत कराया था। प्रार्थना पत्र में कथित तौर पर आशंका जताई गई थी कि उनके चैंबर को क्षतिग्रस्त करने की धमकी दी जा रही है। जूनियर अधिवक्ताओं का आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। मंगलवार को चैंबर क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना के बाद तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना को लेकर अधिवक्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बताई जा रही है। जूनियर अधिवक्ताओं का आरोप है कि यदि उनकी पूर्व शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो शायद विवाद को इस स्तर तक पहुंचने से रोका जा सकता था। हालांकि, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल घटना की सूचना पुलिस को दी गई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। चैंबर किस परिस्थिति में क्षतिग्रस्त हुआ, दस्तावेज फाड़े जाने तथा मारपीट के लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।1
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- मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का धरना स्थगित मुख्यमंत्री के आश्वासन पर टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का धरना स्थगित लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर फिर आंदोलन की चेतावनी, शिक्षा निदेशालय के बाहर जुटे रहे हजारों अभ्यर्थी प्रयागराज। टीजीटी-पीजीटी शिक्षक भर्ती समेत विभिन्न मांगों और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रयागराज में कई दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद बुधवार को स्थगित कर दिया गया। हजारों की संख्या में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से शिक्षा निदेशालय का घेराव कर रहे थे। बीते दो दिनों से अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय के अंदर और बाहर धरने पर बैठे हुए थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती से जुड़े मामलों के समाधान और उनकी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से आश्वासन दिया गया है। इसी आश्वासन के बाद फिलहाल धरना स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों के संबंध में लिखित प्रमाण या ठोस आदेश नहीं मिलता, तब तक आंदोलन को केवल स्थगित माना जाएगा। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय में लिखित आश्वासन नहीं मिलता है अथवा उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया को लेकर वे संघर्ष कर रहे हैं और सरकार से पारदर्शी एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बताया गया कि शिक्षक भर्ती से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर अभ्यर्थी करीब 20 दिनों से प्रयागराज के गिरजाघर के समीप भी धरने पर बैठे थे। इसके बाद आंदोलन ने शिक्षा निदेशालय का रुख किया, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे और लगातार धरना-प्रदर्शन किया। मंगलवार देर रात समाजवादी पार्टी के युवा सांसद पुष्पेंद्र सरोज भी आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात करने पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से मिले आश्वासन के बाद बुधवार को शिक्षा निदेशालय के सामने चल रहा धरना फिलहाल स्थगित कर दिया गया। अभ्यर्थियों ने कहा कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि मांगों के लिखित समाधान तक इसे स्थगित किया गया है। लिखित प्रमाण नहीं मिलने पर वे पुनः शिक्षा निदेशालय के सामने धरना शुरू करेंगे।2
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