बस्ती जनपद के मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ग्राम पारसी में इन दिनों कानून का राज नहीं, बल्कि 'मिट्टी माफिया' का जंगलराज चल रहा है। दिन-दहाड़े जेसीबी मशीनों से अवैध मिट्टी का खनन किया जा रहा है और सड़कों पर ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेतहाशा दौड़ रही हैं। यह स्थिति इस बात की गवाह है कि जिले के जिम्मेदार महकमे या तो गहरी नींद में हैं या फिर माफियाओं की सेवा में नतमस्तक हैं, जिससे प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस पूरे अवैध कारोबार में विभागीय मिलीभगत की बू आ रही है, क्योंकि हर रोज सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी निकाले जाने के बावजूद जिम्मेदारों की नजर पारसी गांव की इन जमीनों पर नहीं पड़ती। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन की कार्रवाई का खौफ। यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किसके इशारे पर यह अवैध कारोबार बेखौफ जारी है और क्या प्रशासन की चुप्पी किसी बड़ी 'डील' का नतीजा है? इस धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन के कारण सड़कें जर्जर हो रही हैं, और ओवरलोड वाहनों से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए ये वाहन किसी मौत के साए से कम नहीं हैं। यह अवैध धंधा न केवल किसी बड़े हादसे और पर्यावरणीय आपदा को निमंत्रण दे रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी चूना लग रहा है और भविष्य में भूजल स्तर व कृषि योग्य भूमि के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। मुंडेरवा क्षेत्र में यह अवैध धंधा अब आम चर्चा का विषय बन चुका है, और हर जुबान पर यह सवाल है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा। जनता जानना चाहती है कि 'मिट्टी चोरों' को किसका संरक्षण प्राप्त है। अब देखना यह होगा कि बस्ती प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस और नजीर पेश करने वाली कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबकर दम तोड़ देगा।
बस्ती जनपद के मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ग्राम पारसी में इन दिनों कानून का राज नहीं, बल्कि 'मिट्टी माफिया' का जंगलराज चल रहा है। दिन-दहाड़े जेसीबी मशीनों से अवैध मिट्टी का खनन किया जा रहा है और सड़कों पर ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेतहाशा दौड़ रही हैं। यह स्थिति इस बात की गवाह है कि जिले के जिम्मेदार महकमे या तो गहरी नींद में हैं या फिर माफियाओं की सेवा में नतमस्तक हैं, जिससे प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस पूरे अवैध कारोबार में विभागीय मिलीभगत की बू आ रही है, क्योंकि हर रोज सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी निकाले जाने के बावजूद जिम्मेदारों की नजर पारसी गांव की इन जमीनों पर नहीं पड़ती। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन की कार्रवाई का खौफ। यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किसके इशारे पर यह अवैध कारोबार बेखौफ जारी है और क्या प्रशासन की चुप्पी
किसी बड़ी 'डील' का नतीजा है? इस धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन के कारण सड़कें जर्जर हो रही हैं, और ओवरलोड वाहनों से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए ये वाहन किसी मौत के साए से कम नहीं हैं। यह अवैध धंधा न केवल किसी बड़े हादसे और पर्यावरणीय आपदा को निमंत्रण दे रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी चूना लग रहा है और भविष्य में भूजल स्तर व कृषि योग्य भूमि के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। मुंडेरवा क्षेत्र में यह अवैध धंधा अब आम चर्चा का विषय बन चुका है, और हर जुबान पर यह सवाल है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा। जनता जानना चाहती है कि 'मिट्टी चोरों' को किसका संरक्षण प्राप्त है। अब देखना यह होगा कि बस्ती प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस और नजीर पेश करने वाली कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबकर दम तोड़ देगा।
- उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहाँ नगर थाना क्षेत्र के बक्सर गांव में एक परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन पर निर्माण कार्य करने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। दबंगों की धमकियों से सहमा यह परिवार अब पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगा रहा है, जबकि स्थानीय नगर थाने की कार्यप्रणाली पर पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भूस्वामी बृजेश पाण्डेय का आरोप है कि 22 मई को दिन-दहाड़े गांव के घनश्याम पाण्डेय, प्रशांत पाण्डेय, अमित पाण्डेय और रमेश पाण्डेय ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर उन पर और उनके पिता पर जानलेवा हमला किया। लाठी-डंडों से लैस इन दबंगों ने न केवल मारपीट की, बल्कि चल रहे निर्माण कार्य को भी ध्वस्त कर दिया। जब पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में नगर थाने पहुंचा, तो थानाध्यक्ष ने कथित तौर पर मामले से पल्ला झाड़ते हुए इसे एसडीएम का मामला बताकर उन्हें भगा दिया। पीड़ित का आरोप है कि थानेदार ने ऐसा रुख अपनाया जो किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के लिए शर्मनाक है, जिससे नगर पुलिस की दबंगों के संरक्षक बनने पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला गाटा संख्या 534 (रकबा 174 एअर) की जमीन से जुड़ा है, जो अभिलेखों में बृजेश के बड़े पिता जनार्दन के नाम दर्ज है, जिससे इस पर उनका कानूनी अधिकार सिद्ध होता है। पीड़ित परिवार ने बताया कि 10 दिनों तक शांतिपूर्ण तरीके से निर्माण कार्य चला, लेकिन फिर दबंगों ने मजदूरों को डरा-धमकाकर भगा दिया और निर्माण को क्षतिग्रस्त कर दिया। इन दबंगों की खुली धमकियों से बृजेश पाण्डेय का पूरा परिवार अब दहशत में जीने को मजबूर है, वे घर से बाहर निकलने तक में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पीड़ित ने अब पुलिस अधीक्षक से अपनी जान-माल की सुरक्षा और न्याय की मांग की है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस अधीक्षक इस मामले का संज्ञान लेकर दबंगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हैं, या फिर नगर पुलिस की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते इन दबंगों पर लगाम नहीं कसी गई, तो बक्सर गांव में किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे सवाल उठता है कि क्या बस्ती में वर्दी का सम्मान दबंगों के दबाव में गिरवी रख दिया गया है और कानून का शासन समाप्त हो गया है।2
- उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक लड़की अचानक एक टावर पर चढ़ गई। इस अप्रत्याशित नजारे को देखने के लिए पूरा मोहल्ला अपने घरों से बाहर निकल आया, और लोग इस पूरी घटना का वीडियो देखने के लिए उत्सुक दिखे।1
- लखनऊ की थाना कैसरबाग पुलिस ने सार्वजनिक स्थलों से हो रही चोरी की घटनाओं का खुलासा करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने सआदत अली मकबरा परिसर से फसाड लाइटें चोरी करने वाले दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई 10 फसाड लाइटें और तीन स्टील की जालियां बरामद हुई हैं। सआदत अली मकबरा परिसर से लगातार फसाड लाइटें चोरी होने की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद पुलिस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मुखबिरों को सक्रिय किया। जांच के दौरान मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने अल्तमश खान और सोहेल नामक दोनों आरोपियों को दबोच लिया। पूछताछ में सामने आया कि ये आरोपी शहर के पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाते थे और वहां से फसाड लाइटें तथा लोहे का सामान चोरी कर कबाड़ियों के माध्यम से बेचकर आर्थिक लाभ कमाते थे। कैसरबाग पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसी घटनाओं में शामिल अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- बहुजन मुक्ति पार्टी ने खलीलाबाद के दुधारा थाना क्षेत्र के SHO अरविंद शर्मा पर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। इस मामले में दुधारा थाना पुलिस सवालों के घेरे में आ गई है। बहुजन मुक्ति युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव आनंद कुमार ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है। पार्टी का कहना है कि SHO अरविंद शर्मा पर करोड़ों की अवैध वसूली और भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगा है, जिसके बाद उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा गया है, जिसमें मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की गई है।1
- संतकबीरनगर में एक उपभोक्ता ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, आरोप है कि उनका बिजली मीटर खराब होने के बावजूद विभाग ने उन्हें अचानक भारी-भरकम बिजली बिल भेज दिया है। शिकायत पत्र के माध्यम से उपभोक्ता ने दावा किया है कि इस अप्रत्याशित बिल से उनके और उनके परिवार की चिंता काफी बढ़ गई है। उनका कहना है कि पहले सामान्य बिल ही आ रहा था, लेकिन हाल में बिल की राशि में अचानक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया है, जहाँ उन्होंने एक निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। उपभोक्ता ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आगे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि बिजली विभाग इस पूरे प्रकरण पर क्या प्रतिक्रिया देता है और जांच के बाद क्या कदम उठाता है।1
- संतकबीरनगर के पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने सोमवार को पुलिस कार्यालय में थाना कोतवाली खलीलाबाद, दुधारा, धनघटा, मेहदावल, बखिरा और बेलहरकला के प्रभारी निरीक्षकों, थानाध्यक्षों व विवेचकों के साथ महिला अपराध से संबंधित लंबित विवेचनाओं की समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान एसपी ने लंबे समय से लंबित महिला अपराध संबंधी मामलों की विस्तृत समीक्षा की और अकारण लंबित प्रकरणों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी विवेचकों को निर्देश दिए कि विवेचनाओं का समयबद्ध, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। एसपी ने जनशिकायतों की सुनवाई कर त्वरित जांच एवं विधिक कार्रवाई करने तथा क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने पर भी जोर दिया। उन्होंने विवेचना कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता न बरतने की चेतावनी दी, और कहा कि भविष्य में दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, प्रभारी निरीक्षकों एवं थानाध्यक्षों को अपने अधीनस्थ विवेचकों के कार्यों की नियमित समीक्षा कर लंबित मामलों का समय से निस्तारण कराने के निर्देश भी दिए गए। एसपी ने विवेचनाओं में आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों जैसे यक्ष ऐप, ई-समन एवं एस-आईडी प्रणाली का अधिकतम उपयोग कर कार्यों को पारदर्शी एवं त्वरित रूप से संपादित करने पर भी विशेष जोर दिया।1
- संतकबीरनगर के विकास खंड बेलहर कला सभागार में सोमवार को क्षेत्र पंचायत की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹9 करोड़ 75 लाख रुपये के अनुमानित बजट को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख डॉ. भूपेंद्र सिंह ने की, जिसमें क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए पेयजल, खड़ंजा निर्माण, नाली और इंटरलॉकिंग सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दी गई। एडीओ पंचायत पंकज सिंह ने एजेंडा पढ़कर सुनाया, जिस पर सभी सदस्यों ने अपनी सहमति व्यक्त की। ब्लॉक प्रमुख डॉ. भूपेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि क्षेत्र का समग्र और संतुलित विकास उनकी मुख्य प्राथमिकता है। उन्होंने शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक गांव तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने का संकल्प दोहराया और बताया कि स्वीकृत बजट से सड़क, पानी और स्वच्छता से जुड़े कार्यों को युद्धस्तर पर कराया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के सख्त निर्देश दिए, साथ ही क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम प्रधानों से तालमेल बिठाकर विकास कार्यों में पूरी पारदर्शिता बरतने की अपील भी की। ब्लॉक प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र और प्रदेश सरकारें ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन प्रधानों के हकों को काटा जा रहा है। इस मुद्दे पर रणनीति तैयार करने के लिए एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी। इस दौरान पिछली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि के साथ-साथ क्षेत्र में चल रही अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैठक में एमएलसी प्रतिनिधि सुरेंद्र नाथ चौबे, बीडीओ श्वेता वर्मा, एडीओ पंचायत पंकज सिंह, एकाउंटेंट प्रवीण कुमार यादव, बेलहर सीडीपीओ रीमा चौधरी, खंड शिक्षा अधिकारी अनीता त्रिपाठी, एडीओ एजी सुभाष चंद्र, एडीओ एसबी सुनीता मिश्रा, बीपीएम अन्नाद कुमार मौर्या, पशु चिकित्सा अधिकारी दिनकर, अवधेश कुमार, मंडल अध्यक्ष लालबहादुर चौहान, ग्राम प्रधान एवं प्रतिनिधि विश्वनाथ मौर्या, श्याम जी यादव, राजनारायण सिंह उर्फ डिंपल सिंह, राजेश्वर उर्फ राजू चौधरी, महेश लोधी, बीपीन सिंह, रजनीश यादव, डिंपल सिंह, विनय दूबे, लालचन्द्र चौहान, राजिन्द्र यादव, क्षेत्र पंचायत सदस्य नरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, सत्यनारायण, रिंकू पासवान, सचिन कुमार सहित तमाम क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- बस्ती जनपद के मुंडेरवा थाना क्षेत्र के ग्राम पारसी में इन दिनों कानून का राज नहीं, बल्कि 'मिट्टी माफिया' का जंगलराज चल रहा है। दिन-दहाड़े जेसीबी मशीनों से अवैध मिट्टी का खनन किया जा रहा है और सड़कों पर ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेतहाशा दौड़ रही हैं। यह स्थिति इस बात की गवाह है कि जिले के जिम्मेदार महकमे या तो गहरी नींद में हैं या फिर माफियाओं की सेवा में नतमस्तक हैं, जिससे प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस पूरे अवैध कारोबार में विभागीय मिलीभगत की बू आ रही है, क्योंकि हर रोज सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी निकाले जाने के बावजूद जिम्मेदारों की नजर पारसी गांव की इन जमीनों पर नहीं पड़ती। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन की कार्रवाई का खौफ। यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर किसके इशारे पर यह अवैध कारोबार बेखौफ जारी है और क्या प्रशासन की चुप्पी किसी बड़ी 'डील' का नतीजा है? इस धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन के कारण सड़कें जर्जर हो रही हैं, और ओवरलोड वाहनों से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए ये वाहन किसी मौत के साए से कम नहीं हैं। यह अवैध धंधा न केवल किसी बड़े हादसे और पर्यावरणीय आपदा को निमंत्रण दे रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी चूना लग रहा है और भविष्य में भूजल स्तर व कृषि योग्य भूमि के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। मुंडेरवा क्षेत्र में यह अवैध धंधा अब आम चर्चा का विषय बन चुका है, और हर जुबान पर यह सवाल है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा। जनता जानना चाहती है कि 'मिट्टी चोरों' को किसका संरक्षण प्राप्त है। अब देखना यह होगा कि बस्ती प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस और नजीर पेश करने वाली कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबकर दम तोड़ देगा।2