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on 16 December
user_User5482
User5482
Ballia, Uttar Pradesh•
on 16 December
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More news from बिहार and nearby areas
  • baccho ko rakhe savdhan........ Dumraon me huaa bachha chori . thatheri bazar Dumraon
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    baccho ko rakhe savdhan........ Dumraon me huaa bachha chori .
thatheri bazar Dumraon
    user_Ajay yadav
    Ajay yadav
    Video Creator डुमरांव, बक्सर, बिहार•
    2 hrs ago
  • Post by जनसत्ता NEWS@
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    Post by जनसत्ता NEWS@
    user_जनसत्ता NEWS@
    जनसत्ता NEWS@
    दरौंधा, सीवान, बिहार•
    12 hrs ago
  • महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ भारतीय कॉल : 9931481554 व्हाट्सप्प : +91-6202433405 मोहनजोदड़ो सभ्यता के विकास पर विशेष लेख भूमिका मानव इतिहास की प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में सिंधु घाटी सभ्यता का विशेष स्थान है। इसी महान सभ्यता का एक प्रमुख और विकसित नगर था मोहनजोदड़ो, जिसका अर्थ है – “मृतकों का टीला”। यह नगर आज के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के किनारे स्थित था। लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच यह नगर अपने चरम विकास पर था। 1. खोज और महत्व मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ई. में प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् राखालदास बनर्जी ने की थी। इसके बाद जॉन मार्शल के नेतृत्व में विस्तृत खुदाई कराई गई। इस खोज से यह सिद्ध हुआ कि भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्ष पहले ही अत्यंत उन्नत शहरी सभ्यता विकसित हो चुकी थी। 2. नगर नियोजन (City Planning) मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी विशेषता उसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन था। सड़कों का निर्माण सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटने वाली ग्रिड प्रणाली में किया गया था। घर पक्की ईंटों से बने होते थे और अधिकतर घरों में आंगन, स्नानघर और कुएँ होते थे। शहर में नालियों की उत्कृष्ट जल निकासी व्यवस्था थी, जो ढकी हुई होती थी। नगर को मुख्य रूप से ऊपरी नगर (दुर्ग क्षेत्र) और निचला नगर में विभाजित किया गया था। यह नगर नियोजन उस समय की अत्यंत उन्नत तकनीकी समझ को दर्शाता है। 3. सामाजिक और आर्थिक जीवन मोहनजोदड़ो के लोग मुख्यतः कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प से जुड़े थे। गेहूँ, जौ और कपास की खेती की जाती थी। मिट्टी के बर्तन, मनके, धातु के औजार और आभूषण बनाए जाते थे। व्यापार के लिए तौल-माप की मानकीकृत प्रणाली का प्रयोग होता था। इस सभ्यता का व्यापार दूर-दूर तक, यहाँ तक कि मेसोपोटामिया तक होता था। 4. महान स्नानागार (Great Bath) मोहनजोदड़ो का सबसे प्रसिद्ध निर्माण महान स्नानागार है। यह एक विशाल जलकुंड था, जिसके चारों ओर कमरे बने हुए थे। इसे पक्की ईंटों और जलरोधी पदार्थों से बनाया गया था। माना जाता है कि इसका उपयोग धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था। 5. धर्म और संस्कृति मोहनजोदड़ो के लोगों के धार्मिक विश्वासों के बारे में जानकारी मुख्यतः मूर्तियों और मुहरों से मिलती है। मातृ देवी (Mother Goddess) की पूजा के प्रमाण मिलते हैं। पशु आकृतियों वाली मुहरें भी मिली हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि एक मुहर पर दिखाई देने वाली आकृति बाद में भगवान शिव के पशुपति रूप से मिलती-जुलती है। 6. लिपि और कला मोहनजोदड़ो की लिपि आज भी अपूर्ण रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है। इस सभ्यता की कला अत्यंत उत्कृष्ट थी। प्रसिद्ध कांस्य की “नर्तकी” की मूर्ति दाढ़ी वाले पुजारी की मूर्ति सुंदर मुहरें और मिट्टी के खिलौने ये सभी उस समय की उच्च कला और शिल्पकला को दर्शाते हैं। 7. पतन के कारण लगभग 1900 ईसा पूर्व के आसपास मोहनजोदड़ो सभ्यता का पतन शुरू हो गया। इसके संभावित कारणों में शामिल हैं: प्राकृतिक आपदाएँ और बाढ़ जलवायु परिवर्तन व्यापार का पतन नदी के मार्ग में परिवर्तन हालाँकि इसके पतन का सटीक कारण आज भी इतिहासकारों के लिए शोध का विषय है। निष्कर्ष मोहनजोदड़ो सभ्यता मानव इतिहास की सबसे उन्नत प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक थी। इसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन, विकसित व्यापार प्रणाली, उत्कृष्ट कला और वैज्ञानिक सोच यह दर्शाती है कि हजारों वर्ष पहले भी मानव समाज अत्यंत संगठित और विकसित था। आज मोहनजोदड़ो के अवशेष हमें यह सिखाते हैं कि सभ्यता का विकास केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति और ज्ञान से भी होता है।
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    महाराजगंज, सिवान, बिहार 
JHVP BHARAT NEWS 
EDITED BY : परवेज़ भारतीय 
कॉल : 9931481554
व्हाट्सप्प : +91-6202433405
मोहनजोदड़ो सभ्यता के विकास पर विशेष लेख
भूमिका
मानव इतिहास की प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में सिंधु घाटी सभ्यता का विशेष स्थान है। इसी महान सभ्यता का एक प्रमुख और विकसित नगर था मोहनजोदड़ो, जिसका अर्थ है – “मृतकों का टीला”। यह नगर आज के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के किनारे स्थित था। लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच यह नगर अपने चरम विकास पर था।
1. खोज और महत्व
मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ई. में प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् राखालदास बनर्जी ने की थी। इसके बाद जॉन मार्शल के नेतृत्व में विस्तृत खुदाई कराई गई। इस खोज से यह सिद्ध हुआ कि भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्ष पहले ही अत्यंत उन्नत शहरी सभ्यता विकसित हो चुकी थी।
2. नगर नियोजन (City Planning)
मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी विशेषता उसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन था।
सड़कों का निर्माण सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटने वाली ग्रिड प्रणाली में किया गया था।
घर पक्की ईंटों से बने होते थे और अधिकतर घरों में आंगन, स्नानघर और कुएँ होते थे।
शहर में नालियों की उत्कृष्ट जल निकासी व्यवस्था थी, जो ढकी हुई होती थी।
नगर को मुख्य रूप से ऊपरी नगर (दुर्ग क्षेत्र) और निचला नगर में विभाजित किया गया था।
यह नगर नियोजन उस समय की अत्यंत उन्नत तकनीकी समझ को दर्शाता है।
3. सामाजिक और आर्थिक जीवन
मोहनजोदड़ो के लोग मुख्यतः कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प से जुड़े थे।
गेहूँ, जौ और कपास की खेती की जाती थी।
मिट्टी के बर्तन, मनके, धातु के औजार और आभूषण बनाए जाते थे।
व्यापार के लिए तौल-माप की मानकीकृत प्रणाली का प्रयोग होता था।
इस सभ्यता का व्यापार दूर-दूर तक, यहाँ तक कि मेसोपोटामिया तक होता था।
4. महान स्नानागार (Great Bath)
मोहनजोदड़ो का सबसे प्रसिद्ध निर्माण महान स्नानागार है।
यह एक विशाल जलकुंड था, जिसके चारों ओर कमरे बने हुए थे।
इसे पक्की ईंटों और जलरोधी पदार्थों से बनाया गया था।
माना जाता है कि इसका उपयोग धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था।
5. धर्म और संस्कृति
मोहनजोदड़ो के लोगों के धार्मिक विश्वासों के बारे में जानकारी मुख्यतः मूर्तियों और मुहरों से मिलती है।
मातृ देवी (Mother Goddess) की पूजा के प्रमाण मिलते हैं।
पशु आकृतियों वाली मुहरें भी मिली हैं।
कुछ विद्वान मानते हैं कि एक मुहर पर दिखाई देने वाली आकृति बाद में भगवान शिव के पशुपति रूप से मिलती-जुलती है।
6. लिपि और कला
मोहनजोदड़ो की लिपि आज भी अपूर्ण रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है।
इस सभ्यता की कला अत्यंत उत्कृष्ट थी।
प्रसिद्ध कांस्य की “नर्तकी” की मूर्ति
दाढ़ी वाले पुजारी की मूर्ति
सुंदर मुहरें और मिट्टी के खिलौने
ये सभी उस समय की उच्च कला और शिल्पकला को दर्शाते हैं।
7. पतन के कारण
लगभग 1900 ईसा पूर्व के आसपास मोहनजोदड़ो सभ्यता का पतन शुरू हो गया। इसके संभावित कारणों में शामिल हैं:
प्राकृतिक आपदाएँ और बाढ़
जलवायु परिवर्तन
व्यापार का पतन
नदी के मार्ग में परिवर्तन
हालाँकि इसके पतन का सटीक कारण आज भी इतिहासकारों के लिए शोध का विषय है।
निष्कर्ष
मोहनजोदड़ो सभ्यता मानव इतिहास की सबसे उन्नत प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक थी। इसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन, विकसित व्यापार प्रणाली, उत्कृष्ट कला और वैज्ञानिक सोच यह दर्शाती है कि हजारों वर्ष पहले भी मानव समाज अत्यंत संगठित और विकसित था।
आज मोहनजोदड़ो के अवशेष हमें यह सिखाते हैं कि सभ्यता का विकास केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति और ज्ञान से भी होता है।
    user_JHVP BHARAT NEWS
    JHVP BHARAT NEWS
    Local News Reporter महाराजगंज, सीवान, बिहार•
    3 hrs ago
  • प्रसूता व जुड़वा नवजात की मौत मामले में पुलिस जांच शुरू। जनपद बलिया के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत एक निजी अस्पताल में प्रसूता व उसके दो नवजात शिशुओं की मौत के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार 13 मार्च 2026 को एक महिला को प्रसव के लिए पूर्वांचल नामक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां प्रसव के दौरान दो मृत बच्चियों का जन्म हुआ। कुछ समय बाद महिला की भी मृत्यु हो गई। घटना के बाद परिजनों ने मामले को लेकर थाना कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया, जिसके आधार पर पुलिस द्वारा वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) बलिया कृपा शंकर ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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    प्रसूता व जुड़वा नवजात की मौत मामले में पुलिस जांच शुरू।
जनपद बलिया के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत एक निजी अस्पताल में प्रसूता व उसके दो नवजात शिशुओं की मौत के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार 13 मार्च 2026 को एक महिला को प्रसव के लिए पूर्वांचल नामक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां प्रसव के दौरान दो मृत बच्चियों का जन्म हुआ। कुछ समय बाद महिला की भी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने मामले को लेकर थाना कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया, जिसके आधार पर पुलिस द्वारा वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) बलिया कृपा शंकर ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    user_धीरज कुमार गुप्ता / पत्रकार
    धीरज कुमार गुप्ता / पत्रकार
    Food Manufacturing Company Belthara Road, Ballia•
    5 hrs ago
  • आरा में होमियोपैथी का बढ़ता भरोसा, डॉ० आशुतोष त्रिपाठी से खास बातचीत – कम खर्च में बेहतर इलाज बिहार के आरा शहर में इन दिनों होमियोपैथिक इलाज के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। कम खर्च, बिना साइड इफेक्ट और जड़ से इलाज की वजह से मरीज बड़ी संख्या में होमियोपैथी की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में आरा के प्रसिद्ध होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ० आशुतोष त्रिपाठी से खास बातचीत की गई।
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    आरा में होमियोपैथी का बढ़ता भरोसा, डॉ० आशुतोष त्रिपाठी से खास बातचीत – कम खर्च में बेहतर इलाज
बिहार के आरा शहर में इन दिनों होमियोपैथिक इलाज के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। कम खर्च, बिना साइड इफेक्ट और जड़ से इलाज की वजह से मरीज बड़ी संख्या में होमियोपैथी की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में आरा के प्रसिद्ध होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ० आशुतोष त्रिपाठी से खास बातचीत की गई।
    user_जनता की आवाज
    जनता की आवाज
    Arrah, Bhojpur•
    5 hrs ago
  • आरा। आरा रोटी बैंक के तत्वाधान में स्थानीय रेडक्रॉस सोसायटी में 8वाँ रक्तदान महोत्सव शिविर का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन आरा मेयर इंदु देवी,जिला स्वास्थ्य समिति के डॉ रवि रंजन, जिला लेखा प्रबंधक अश्वनी कुमार, मेजर राणा प्रताप सिंह व आरा रोटी बैंक की अध्यक्षा सोनाली देवी ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर आरा मेयर इंदु देवी ने कहा आरा रोटी बैंक शहर के लिए गौरव है। आज रक्तदान को जिले के प्रखंड स्तर के हर पंचायत तक ले जाने की जरूरत है।शहर के युवाओं से अपील है कि रक्तदान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले। जिला स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक डॉ रवि रंजन ने बतलाया रक्तदान करना सबसे बड़ा पुण्य है साथ ही समाज को कुछ वापस करने का सबसे बेहतर तरीका है।आरा रोटी बैंक की कार्यप्रणाली वाकई काबिले तारीफ है जहां समाज के अंतिम पायदान के तबके के लिए बेहतर कार्य किया जा रहा है। रक्तदान के लिए जिले में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है फिर भी बहुत सारे लोगों को डर लगता है तो हमारा कर्तव्य है कि हमलोग उन्हें जागरूक करे। आरा रोटी बैंक के संतोष सिंह भारद्वाज ने बतलाया विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा 14जून 1997 से विश्व रक्तदान दिवस मनाने की शुरुआत की गई जिससे समाज में रक्तदान को लेकर नई चेतना आ सके और उसी का परिणाम है कि आज समाज के हर वर्ग के लोग बढ़ चढ़ कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे है। उन्होंने कहा संस्था के सदस्यों के द्वारा हर वर्ष की 13 मार्च को रक्तदान महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। जैसा कि विदित हो आरा रोटी बैंक विगत 8वर्षों से समाज में जरूरतमंदों को मुख्यधारा में जोड़ते आ रहा है साथ ही आने वाले समय में सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दे पर भी काम किया जाएगा।
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    आरा। आरा रोटी बैंक के तत्वाधान में स्थानीय रेडक्रॉस सोसायटी में 8वाँ रक्तदान महोत्सव शिविर का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन आरा मेयर इंदु देवी,जिला स्वास्थ्य समिति के डॉ रवि रंजन, जिला लेखा प्रबंधक अश्वनी कुमार, मेजर राणा प्रताप सिंह व आरा रोटी बैंक की अध्यक्षा सोनाली देवी ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर आरा मेयर इंदु देवी ने कहा आरा रोटी बैंक शहर के लिए गौरव है। आज रक्तदान को जिले के प्रखंड स्तर के हर पंचायत तक ले जाने की जरूरत है।शहर के युवाओं से अपील है कि रक्तदान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले। जिला स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक डॉ रवि रंजन ने बतलाया रक्तदान करना सबसे बड़ा पुण्य है साथ ही समाज को कुछ वापस करने का सबसे बेहतर तरीका है।आरा रोटी बैंक की कार्यप्रणाली वाकई काबिले तारीफ है जहां समाज के अंतिम पायदान के तबके के लिए बेहतर कार्य किया जा रहा है। रक्तदान के लिए जिले में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है फिर भी बहुत सारे लोगों को डर लगता है तो हमारा कर्तव्य है कि हमलोग उन्हें जागरूक करे। आरा रोटी बैंक के संतोष सिंह भारद्वाज ने बतलाया विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा 14जून 1997 से विश्व रक्तदान दिवस मनाने की शुरुआत की गई जिससे समाज में रक्तदान को लेकर नई चेतना आ सके और उसी का परिणाम है कि आज समाज के हर वर्ग के लोग बढ़ चढ़ कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे है। उन्होंने कहा संस्था के सदस्यों के द्वारा हर वर्ष की 13 मार्च को रक्तदान महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। जैसा कि विदित हो आरा रोटी बैंक विगत 8वर्षों से समाज में जरूरतमंदों को मुख्यधारा में जोड़ते आ रहा है साथ ही आने वाले समय में सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दे पर भी काम किया जाएगा।
    user_Jitendra Kumar
    Jitendra Kumar
    Photographer आरा, भोजपुर, बिहार•
    11 hrs ago
  • Post by Ashutosh Tiwari
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    Post by Ashutosh Tiwari
    user_Ashutosh Tiwari
    Ashutosh Tiwari
    Computer Programmer Ballia, Uttar Pradesh•
    14 hrs ago
  • महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ आलम भारतीय दुनिया अक्सर कहती है..... पढ़ोगे.. लिखोगे तो... बनोगे नवाब सिर्फ खेलोगे बेमतलब तो... होओगे ख़राब लेकिन, सच कुछ दूसरा ही है... ज़िद्द चाहिए. जी हाँ, आसमान में सुराख़ करने के लिए इरादा फौलादी होना चाहिए... मानने से हार.. और ठानने से सिर्फ जीत मिलती है... और हाँ, जितने वाले हमलोगों के बीच में से ही कोई होता है... जो लगातार चलता रहा.. सही दिशा में, सकारात्मक सोच रखा,, साहस नहीं खोया... बाकी सब.. इस वीडियो में समझा जा सकता है.... धन्यवाद
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    महाराजगंज, सिवान, बिहार 
JHVP BHARAT NEWS 
EDITED BY : परवेज़ आलम भारतीय 
दुनिया अक्सर कहती है.....
पढ़ोगे.. लिखोगे तो... बनोगे नवाब 
सिर्फ खेलोगे बेमतलब तो... होओगे ख़राब 
लेकिन, सच कुछ दूसरा ही है... ज़िद्द चाहिए.
जी हाँ, आसमान में सुराख़ करने के लिए इरादा फौलादी होना चाहिए... मानने से हार.. और ठानने से सिर्फ जीत मिलती है...
और हाँ, जितने वाले हमलोगों के बीच में से ही कोई होता है... जो लगातार चलता रहा.. सही दिशा में, सकारात्मक सोच रखा,, साहस नहीं खोया... बाकी सब.. इस वीडियो में समझा जा सकता है.... धन्यवाद
    user_JHVP BHARAT NEWS
    JHVP BHARAT NEWS
    Local News Reporter महाराजगंज, सीवान, बिहार•
    3 hrs ago
  • बिल्थरारोड उभांव थाना क्षेत्र अंतर्गत चौकिया मोड़ पर चौराहे पर कहासुनी, पुलिस ने दोनों पक्षों को चौकी ले जाकर कराया शांत।
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    बिल्थरारोड उभांव थाना क्षेत्र अंतर्गत चौकिया मोड़ पर चौराहे पर कहासुनी, पुलिस ने दोनों पक्षों को चौकी ले जाकर कराया शांत।
    user_धीरज कुमार गुप्ता / पत्रकार
    धीरज कुमार गुप्ता / पत्रकार
    Food Manufacturing Company Belthara Road, Ballia•
    6 hrs ago
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