डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायत माथुगामडा पाल के वार्ड नंबर 6 'हरियात फला' में ग्रामीण सालों से एक अदद श्मशान घाट और उस तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क की कमी से जूझ रहे हैं। करीब 550 से अधिक की आबादी वाली इस बस्ती की यह दर्दनाक हकीकत प्रशासन की घोर उदासीनता का परिणाम है, जिसके कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। हालात ऐसे हैं कि कागजों में श्मशान होते हुए भी, लोगों को अपनों की अर्थी पथरीले और दुर्गम रास्ते पर कंधों पर ले जाने को मजबूर होना पड़ता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि श्मशान घाट और मार्ग निर्माण के प्रस्ताव पंचायत और प्रशासन के स्तर पर स्वीकृत हो चुके हैं, बावजूद इसके धरातल पर काम के नाम पर सिर्फ शून्य ही दिखाई देता है। ग्रामीणों के अनुसार, मानसून के समय स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब श्मशान तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह फिसलन भरा हो जाता है। ऐसे में अर्थी को कंधे पर लेकर पहाड़ी दर्रों से गुजरना किसी बड़े खतरे से कम नहीं होता। हद तो तब हो जाती है जब किसी तरह ग्रामीण अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंच भी जाएं, तो खुले आसमान के नीचे शेड न होने के कारण बारिश थमने का घंटों इंतजार करना पड़ता है। यह गंभीर सवाल उठता है कि डिजिटल इंडिया और चौतरफा विकास के दावों के बीच इस पंचायत की फाइलें आखिर कब तक विभागों के चक्कर काटती रहेंगी। ग्रामीणों को कब तक मरने के बाद भी एक सम्मानजनक अंतिम विदाई का अधिकार मिल पाएगा, इस पर प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक है।
डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायत माथुगामडा पाल के वार्ड नंबर 6 'हरियात फला' में ग्रामीण सालों से एक अदद श्मशान घाट और उस तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क की कमी से जूझ रहे हैं। करीब 550 से अधिक की आबादी वाली इस बस्ती की यह दर्दनाक हकीकत प्रशासन की घोर उदासीनता का परिणाम है, जिसके कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। हालात ऐसे हैं कि कागजों में श्मशान होते हुए भी, लोगों को अपनों की अर्थी पथरीले और दुर्गम रास्ते पर कंधों पर ले जाने को मजबूर होना पड़ता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि श्मशान घाट और मार्ग निर्माण के प्रस्ताव पंचायत और प्रशासन के स्तर पर स्वीकृत हो चुके हैं, बावजूद इसके धरातल पर काम के नाम पर सिर्फ शून्य ही दिखाई देता है। ग्रामीणों के अनुसार, मानसून के समय स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब श्मशान तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह फिसलन भरा हो जाता है। ऐसे में अर्थी को कंधे पर लेकर पहाड़ी दर्रों से गुजरना किसी बड़े खतरे से कम नहीं होता। हद तो तब हो जाती है जब किसी तरह ग्रामीण अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंच भी जाएं, तो खुले आसमान के नीचे शेड न होने के कारण बारिश थमने का घंटों इंतजार करना पड़ता है। यह गंभीर सवाल उठता है कि डिजिटल इंडिया और चौतरफा विकास के दावों के बीच इस पंचायत की फाइलें आखिर कब तक विभागों के चक्कर काटती रहेंगी। ग्रामीणों को कब तक मरने के बाद भी एक सम्मानजनक अंतिम विदाई का अधिकार मिल पाएगा, इस पर प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक है।
- डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायत माथुगामडा पाल के वार्ड नंबर 6 'हरियात फला' में ग्रामीण सालों से एक अदद श्मशान घाट और उस तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क की कमी से जूझ रहे हैं। करीब 550 से अधिक की आबादी वाली इस बस्ती की यह दर्दनाक हकीकत प्रशासन की घोर उदासीनता का परिणाम है, जिसके कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। हालात ऐसे हैं कि कागजों में श्मशान होते हुए भी, लोगों को अपनों की अर्थी पथरीले और दुर्गम रास्ते पर कंधों पर ले जाने को मजबूर होना पड़ता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि श्मशान घाट और मार्ग निर्माण के प्रस्ताव पंचायत और प्रशासन के स्तर पर स्वीकृत हो चुके हैं, बावजूद इसके धरातल पर काम के नाम पर सिर्फ शून्य ही दिखाई देता है। ग्रामीणों के अनुसार, मानसून के समय स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब श्मशान तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह फिसलन भरा हो जाता है। ऐसे में अर्थी को कंधे पर लेकर पहाड़ी दर्रों से गुजरना किसी बड़े खतरे से कम नहीं होता। हद तो तब हो जाती है जब किसी तरह ग्रामीण अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंच भी जाएं, तो खुले आसमान के नीचे शेड न होने के कारण बारिश थमने का घंटों इंतजार करना पड़ता है। यह गंभीर सवाल उठता है कि डिजिटल इंडिया और चौतरफा विकास के दावों के बीच इस पंचायत की फाइलें आखिर कब तक विभागों के चक्कर काटती रहेंगी। ग्रामीणों को कब तक मरने के बाद भी एक सम्मानजनक अंतिम विदाई का अधिकार मिल पाएगा, इस पर प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक है।1
- समाजसेवी दिनेश अहारी ने आज अपने क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कई स्थानों पर नोत्रा प्रथा का निर्वहन किया, जिसके बाद वे अपने निवास की ओर रवाना हुए। इस दौरे में उनके साथ युवा साथी प्रीतम ननोमा, समाजसेवी संजय रोत, जीतमल खाट, शिव सती बलराम समेत कई अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।1
- विप्र फाउंडेशन जोन-1G राजस्थान ने संगठन विस्तार और समाजसेवा गतिविधियों को मजबूती देने के उद्देश्य से डूंगरपुर में जिला पेंशन प्रकोष्ठ की नई कार्यकारिणी का गठन किया है। यह नियुक्तियाँ प्रशांत चौबीसा की अनुशंसा पर तथा योगेश जोशी और ललित उपाध्याय के अनुमोदन के बाद की गई हैं। जारी आदेशानुसार, जिला पेंशन प्रकोष्ठ की इस नई कार्यकारिणी का कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2028 तक निर्धारित किया गया है। इस नई कार्यकारिणी में जगदीश वैष्णव को जिलाध्यक्ष और गौरी शंकर जोशी को जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। संगठन पदाधिकारियों ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी। साथ ही, वे समाजहित, वरिष्ठजन कल्याण और संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।1
- भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि मंगलवार को डूंगरपुर स्थित भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए, साथ ही राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम से पूर्व, शहर के नवाडेरा में स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी गुणवंत कलाल ने बताया कि इस समारोह के मुख्य वक्ता वरिष्ठ भाजपा नेता एवं सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रमोद सामर थे, जबकि मुख्य अतिथि पूर्व सांसद कनकमल कटारा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला महामंत्री पंकज जैन ने की। इस दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष गुरुप्रसाद पटेल, जिला उपाध्यक्ष माधवलाल वरहात, एसटी मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष अमृत कलासुआ, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुदर्शन जैन, जिला महामंत्री सुरमाल परमार, ईश्वर लबाना, जिला उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता, जवाहर भाटिया, देवराम रोत, एससी मोर्चा जिला अध्यक्ष ब्रजेश वसीटा, एसटी मोर्चा जिला अध्यक्ष भंवर कटारा, नगर अध्यक्ष नयन सुथार, महेश पाटीदार, परेश गमेती, जयेश लोधावरा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति दर्ज की गई। अपने संबोधन में मुख्य वक्ता प्रमोद सामर ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उन्होंने ‘एक संविधान, एक निशान और एक प्रधान’ के सिद्धांत को स्थापित करने के लिए संघर्ष किया और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी व्यवस्थाओं का विरोध करते हुए बलिदान दिया। सामर ने भाजपा कार्यकर्ताओं से डॉ. मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करने, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि कनकमल कटारा ने डॉ. मुखर्जी को दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता बताया, जिन्होंने शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि आज देश जिस सशक्त और आत्मविश्वासी भारत की ओर बढ़ रहा है, उसमें डॉ. मुखर्जी के विचारों और बलिदान की अहम भूमिका है। अध्यक्षीय उद्बोधन में जिला महामंत्री पंकज जैन ने बताया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्रभक्ति की एक अमिट गाथा है, जिसके विचार आज भी भाजपा कार्यकर्ताओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने घोषणा की कि पार्टी संगठन द्वारा 23 जून से 7 जुलाई तक डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि को बूथ एवं मंडल स्तर तक मनाया जाएगा। जैन ने सभी मंडल अध्यक्षों, मोर्चा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित कर डॉ. मुखर्जी के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाएं। साथ ही, उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने और आगामी कार्यक्रमों को सफल बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर उपस्थित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों पर चलने तथा संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया।2
- धरियावद नगर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले के एक साधारण राजपूत परिवार से आने वाले तनवीर राजपूत के अग्निवीर सेवा प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने पैतृक गांव धरियावद लौटने पर पूरे राजपूत समाज और क्षेत्र में खुशी का माहौल छा गया। उनका अग्निवीर सेवा में चयन हुआ था और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब वे घर पहुंचे, तो नगरवासियों सहित राजपूत समाज और उनके घर परिवार वालों ने पुष्प मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान, नया बस स्टैंड से उनका स्वागत कर एक जुलूस निकाला गया, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए उनके घर तक पहुंचा। उनके मोहल्ले के निवासियों ने भी तनवीर का स्वागत किया, उन्हें शुभकामनाओं के साथ बधाइयां दीं तथा स्वाभिमान के साथ मिठाइयां बांटीं। इस पूरे पल को देखकर आज धरियावद क्षेत्र में खूब चर्चा रही और क्षेत्रवासियों सहित घर परिवार वालों व राजपूत समाज ने बड़ा ही गर्व महसूस किया।2
- समाजसेवी दिनेश चंद्र अहारी के प्रयासों से और अंबालाल आहारी, जो कॉलेज के पूर्व प्रेसिडेंट रह चुके हैं, के सहयोग से एक जरूरतमंद को रक्त दान किया गया। बंसीलाल अहारी (पिता गट्टू लाल अहारी) और मनोज अहारी को इस नेक काम के लिए धन्यवाद दिया गया। इन दोनों युवाओं ने एक गरीब जरूरतमंद परिवार के सदस्य को रक्त दान करके महान कार्य किया है, जिसे पूरा जनजाति क्षेत्र और डूंगरपुर का विराट कारवां युवा संगठन तथा 84 युवा मंडल कभी नहीं भूलेगा और उन्हें सलाम करता है। सोनल, जो महेश डामोर की बेटी और कसारिया गांव की निवासी है, चक्कर आने से जमीन पर गिर गई थी। उसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय सागवाड़ा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टर ने एक बोतल खून चढ़ाने की बात कही। गरीब मजदूर और आदिवासी परिवार होने के कारण आस-पास संपर्क करने पर भी कोई खून देने को तैयार नहीं हुआ। ऐसे में समाजसेवी अंबालाल अहारी ने सभी ग्रुपों में लड़की की मदद के लिए सूचना भेजी और विधानसभा चौरासी क्षेत्र के समाजसेवी दिनेश अहारी से संपर्क किया। दिनेश जी ने तुरंत कार्रवाई की, जिसके बाद सागवाड़ा निवासी बंसीलाल अहारी (पिता गट्टू लाल) और मनोज अहारी तुरंत खून देने के लिए तैयार हो गए और अस्पताल पहुंचे। रक्तदान सफल रहा और बच्ची अब स्वस्थ है। विराट कारवां युवा संगठन डूंगरपुर और पूरे युवा मंडल डूंगरपुर ने मनोज अहारी को धन्यवाद दिया है, जिन्होंने अपनी एक बहन को सिर्फ खून ही नहीं, बल्कि जीवन दान दिया है। ऐसे युवा समाज का नाम रोशन कर सकते हैं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। पूरा आदिवासी समाज इन युवाओं को सलाम करता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रक्तदान ही सबसे बड़ा दान यानी 'महादान' है। एक स्वस्थ व्यक्ति हर 3 महीने (90 दिन) में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है, और आपका दिया गया 1 यूनिट रक्त 3 लोगों की जान बचा सकता है।1
- डूंगरपुर जिले से महज चार किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत माथुगामड़ा पाल में एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है, जहाँ कागजों में तो श्मशान घाट दर्ज है, लेकिन असलियत में वह पहाड़ी और पथरीला रास्ता है। यह स्थिति इतनी दर्दनाक है कि हरियात फला वार्ड नंबर 6 में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिजनों को आज भी अंतिम संस्कार के लिए संघर्ष करते हुए पहाड़ियों के दर्रों से होकर खुले आसमान के नीचे बने एक अस्थायी स्थल तक जाना पड़ता है। लोगों को जीवन के बाद भी इस संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड की 550 से अधिक आबादी पिछले कई वर्षों से एक उचित श्मशान घाट और वहां तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क की मांग उठा रही है। हैरानी की बात यह है कि पंचायत और प्रशासन दोनों स्तरों पर श्मशान घाट और सड़क निर्माण के प्रस्ताव और निर्णय भी लिए जा चुके हैं, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है। बारिश के मौसम में यह रास्ता और भी फिसलन भरा हो जाता है, जिससे अर्थी को कंधों पर ले जाना बेहद खतरनाक हो जाता है। यदि किसी तरह वे अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंच भी जाएं, तो खुले में होने के कारण उन्हें बारिश थमने तक इंतजार करने पर मजबूर होना पड़ता है। इस संबंध में, विकास अधिकारी प्रवीण सिंह राव ने बताया कि संबंधित फाइल राजस्व विभाग को भेज दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आवंटन होते ही सड़क और श्मशान घाट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।2