अलीगंज प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों मुस्लिम गांवों में, गुरुवार को ईद-उल-अज़हा (बकरीद) का त्योहार बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अलीगंज, आढा, चंद्रदीप, कैथा, दिन्नगर, दरखा, सहोड़ा, मरकाम, जखड़ा, बेला, मिर्ज़ागंज, मातबलवा, सेवे जैसे कई गांवों के मुस्लिम समाज के लोगों ने एक साथ ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज़ अदा की। इस दौरान, अल्लाह की इबादत करते हुए मुल्क में अमन-चैन और शांति के लिए दुआएं मांगी गईं। नमाज़ के बाद सभी ने एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और फिर अपने-अपने घरों में बकरे की कुर्बानी दी। अलीगंज ईदगाह के मैदान में बड़ी संख्या में लोग नमाज़ पढ़ने पहुंचे थे, जहां त्योहार को लेकर बाज़ार भी गुलज़ार दिखे। इस्लाम धर्म में बकरीद को बलिदान का प्रतीक माना जाता है, जो इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने ज़िलहिज्ज की दसवीं तारीख को चांद दिखने के दसवें दिन मनाया जाता है। हाफ़िज़ मोहम्मद मोबिन, हाफ़िज़ ऐनुल, हाफ़िज़ सल्लू और हाफ़िज़ इरफ़ान ने इस्लामिक मान्यताओं का हवाला देते हुए बताया कि पैगंबर हज़रत इब्राहिम मोहम्मद ने अपनी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी देने की अल्लाह की परीक्षा में अपने बेटे को कुर्बान करने की कोशिश की थी, जिस पर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी। इसी दिन से ईद-उल-अज़हा पर कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई। मुस्लिम भाई अपने घरों में पाले गए बकरों की कुर्बानी देते हैं और कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें दो हिस्से गरीबों, यतीमों और लाचारों को देना सवाब का काम माना जाता है। कुर्बानी के साथ-साथ लोग अपनी बुराइयों और गुनाहों से तौबा करते हैं, और सच्चे मन से दी गई कुर्बानी को खुदा कबूल करते हैं। त्योहार को लेकर बच्चों में खास उत्साह देखा गया, जिन्होंने रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर बड़ों को मुबारकबाद दी और बड़ों से ईदी भी प्राप्त की। नमाज़ के बाद सभी ने अपने रिश्तेदारों और परिवारजनों के घर जाकर ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर सभी जगहों पर ईद की नमाज़ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। मस्जिद और ईदगाहों के बाहर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चंद्रदीप पुलिस बल को तैनात किया गया था, और संवेदनशील इलाकों में फ़्लैग मार्च भी किए गए। इस दौरान मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी, नौजवान, बुज़ुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
अलीगंज प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों मुस्लिम गांवों में, गुरुवार को ईद-उल-अज़हा (बकरीद) का त्योहार बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अलीगंज, आढा, चंद्रदीप, कैथा, दिन्नगर, दरखा, सहोड़ा, मरकाम, जखड़ा, बेला, मिर्ज़ागंज, मातबलवा, सेवे जैसे कई गांवों के मुस्लिम समाज के लोगों ने एक साथ ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज़ अदा की। इस दौरान, अल्लाह की इबादत करते हुए मुल्क में अमन-चैन और शांति के लिए दुआएं मांगी गईं। नमाज़ के बाद सभी ने एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और फिर अपने-अपने घरों में बकरे की कुर्बानी दी। अलीगंज
ईदगाह के मैदान में बड़ी संख्या में लोग नमाज़ पढ़ने पहुंचे थे, जहां त्योहार को लेकर बाज़ार भी गुलज़ार दिखे। इस्लाम धर्म में बकरीद को बलिदान का प्रतीक माना जाता है, जो इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने ज़िलहिज्ज की दसवीं तारीख को चांद दिखने के दसवें दिन मनाया जाता है। हाफ़िज़ मोहम्मद मोबिन, हाफ़िज़ ऐनुल, हाफ़िज़ सल्लू और हाफ़िज़ इरफ़ान ने इस्लामिक मान्यताओं का हवाला देते हुए बताया कि पैगंबर हज़रत इब्राहिम मोहम्मद ने अपनी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी देने की अल्लाह की परीक्षा में अपने बेटे को कुर्बान करने की कोशिश की
थी, जिस पर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी। इसी दिन से ईद-उल-अज़हा पर कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई। मुस्लिम भाई अपने घरों में पाले गए बकरों की कुर्बानी देते हैं और कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें दो हिस्से गरीबों, यतीमों और लाचारों को देना सवाब का काम माना जाता है। कुर्बानी के साथ-साथ लोग अपनी बुराइयों और गुनाहों से तौबा करते हैं, और सच्चे मन से दी गई कुर्बानी को खुदा कबूल करते हैं। त्योहार को लेकर बच्चों में खास उत्साह
देखा गया, जिन्होंने रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर बड़ों को मुबारकबाद दी और बड़ों से ईदी भी प्राप्त की। नमाज़ के बाद सभी ने अपने रिश्तेदारों और परिवारजनों के घर जाकर ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर सभी जगहों पर ईद की नमाज़ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। मस्जिद और ईदगाहों के बाहर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चंद्रदीप पुलिस बल को तैनात किया गया था, और संवेदनशील इलाकों में फ़्लैग मार्च भी किए गए। इस दौरान मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी, नौजवान, बुज़ुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
- अलीगंज प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों मुस्लिम गांवों में, गुरुवार को ईद-उल-अज़हा (बकरीद) का त्योहार बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अलीगंज, आढा, चंद्रदीप, कैथा, दिन्नगर, दरखा, सहोड़ा, मरकाम, जखड़ा, बेला, मिर्ज़ागंज, मातबलवा, सेवे जैसे कई गांवों के मुस्लिम समाज के लोगों ने एक साथ ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज़ अदा की। इस दौरान, अल्लाह की इबादत करते हुए मुल्क में अमन-चैन और शांति के लिए दुआएं मांगी गईं। नमाज़ के बाद सभी ने एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और फिर अपने-अपने घरों में बकरे की कुर्बानी दी। अलीगंज ईदगाह के मैदान में बड़ी संख्या में लोग नमाज़ पढ़ने पहुंचे थे, जहां त्योहार को लेकर बाज़ार भी गुलज़ार दिखे। इस्लाम धर्म में बकरीद को बलिदान का प्रतीक माना जाता है, जो इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने ज़िलहिज्ज की दसवीं तारीख को चांद दिखने के दसवें दिन मनाया जाता है। हाफ़िज़ मोहम्मद मोबिन, हाफ़िज़ ऐनुल, हाफ़िज़ सल्लू और हाफ़िज़ इरफ़ान ने इस्लामिक मान्यताओं का हवाला देते हुए बताया कि पैगंबर हज़रत इब्राहिम मोहम्मद ने अपनी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी देने की अल्लाह की परीक्षा में अपने बेटे को कुर्बान करने की कोशिश की थी, जिस पर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी। इसी दिन से ईद-उल-अज़हा पर कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई। मुस्लिम भाई अपने घरों में पाले गए बकरों की कुर्बानी देते हैं और कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें दो हिस्से गरीबों, यतीमों और लाचारों को देना सवाब का काम माना जाता है। कुर्बानी के साथ-साथ लोग अपनी बुराइयों और गुनाहों से तौबा करते हैं, और सच्चे मन से दी गई कुर्बानी को खुदा कबूल करते हैं। त्योहार को लेकर बच्चों में खास उत्साह देखा गया, जिन्होंने रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर बड़ों को मुबारकबाद दी और बड़ों से ईदी भी प्राप्त की। नमाज़ के बाद सभी ने अपने रिश्तेदारों और परिवारजनों के घर जाकर ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर सभी जगहों पर ईद की नमाज़ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। मस्जिद और ईदगाहों के बाहर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चंद्रदीप पुलिस बल को तैनात किया गया था, और संवेदनशील इलाकों में फ़्लैग मार्च भी किए गए। इस दौरान मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी, नौजवान, बुज़ुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में मौजूद रहे।4
- शेखोपुरसराय प्रखंड के डोवाडीह गाँव के ग्रामीणों ने उत्पाद विभाग के उदासीन रवैया को लेकर सड़क जाम कर दिया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उत्पाद विभाग की मनमानी अब अपने चरम पर पहुँच चुकी है, जिसके विरोध में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।1
- रामगढ़ चौक प्रखंड में बुधवार को बकरीद का त्योहार शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण ढंग से मनाया गया। प्रखंड के तेतरहाट, गुलनी, नवाडीह, रायडीह, नोनगढ़, रामगढ़ चौक, नंदनामा, सुरारी, इमामनगर, बरतारा, बड़हरा, बिहटा जैसे कई अल्पसंख्यक बहुल स्थानों पर सुबह 7:00 बजे या 7:30 बजे इमाम मुफ्ती अरशद की अगुवाई में नमाज अदा की गई। नमाज के बाद सभी लोगों ने अपने-अपने घरों में पशु, मुख्य रूप से बकरे की कुर्बानी दी। इस त्योहार के सफल आयोजन की जानकारी गुलनी गांव निवासी चेतरहाट पंचायत के सरपंच मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद महफूज आलम, मोहम्मद अफरोज, मोहम्मद हसन, बिहटा गांव निवासी मोहम्मद ताजुद्दीन, नंदनामा के मोहम्मद खुर्शीद आलम और रामगढ़ चौक के मोहम्मद अब्बास आलम सहित दर्जनों अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने दी। बकरीद, जिसे ईद उल जुहा या कुर्बानी की ईद भी कहा जाता है, इस्लाम के प्रमुख त्योहारों में से एक है और इसका इतिहास पैगंबर इब्राहीम अलैहिस्सलाम से जुड़ा है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने पैगंबर इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें सपने में अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया था। इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माइल को सबसे प्यारा मानते हुए अल्लाह के हुक्म का पालन करने का फैसला किया। जब पैगंबर इब्राहीम अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए तैयार हुए और छुरी चलाने लगे, तब अल्लाह ने उनकी निष्ठा को देखकर जिब्राईल फरिश्ते के हाथों जन्नत से एक दुम्बा भेजा, जिसकी इस्माइल की जगह कुर्बानी हुई और इस तरह अल्लाह ने इस्माइल की जान बचा ली। इसी घटना की याद में हर साल जिलहिज्ज महीने की 10 तारीख को बकरीद मनाई जाती है, जो हज यात्रा के पूरा होने के अगले दिन होती है। मुसलमान पैगंबर इब्राहीम की इस सुन्नत को निभाते हुए बकरे की कुर्बानी देते हैं। कुरान में बताया गया है कि कुर्बानी का उद्देश्य केवल जानवर काटना नहीं है, बल्कि अल्लाह तक नियत और तकवा पहुंचता है, खून नहीं। यह अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और आज्ञापालन का प्रतीक है। कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है: एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए, एक हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और एक हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है। भारत में इसे मुख्य रूप से बकरीद कहा जाता है क्योंकि यहां बकरे की कुर्बानी सबसे अधिक दी जाती है, जबकि अरब देशों में इसे ईद उल अजहा के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार की तारीख चांद दिखने पर तय होती है, जिसके कारण यह हर साल अंग्रेजी कैलेंडर में 10-11 दिन पहले आ जाती है। यह त्योहार त्याग, इंसानियत और बराबरी का गहरा संदेश देता है।1
- करंडे थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक एक्सयूवी गाड़ी से 1032 कैन बीयर बरामद की है। पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि यह शराब की खेप अवैध रूप से ले जाई जा रही थी। पुलिस अब पूरे मामले में शराब कारोबारियों और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है। थाना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शराब तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और अवैध कारोबार करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।1
- लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक बाजार में 'महावीर जांच घर' का विधिवत शुभारंभ किया गया है। इसका उद्घाटन रामगढ़ चौक बाजार स्थित विजय राय सेवा सदन में हुआ। जानकारी के अनुसार, इस नए जांच घर के खुलने से पहले रामगढ़ चौक में गंभीर बीमारियों की जांच के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। पूर्व में स्थानीय लोगों को मलेरिया, टाइफाइड, शुगर और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों की जांच कराने के लिए पटना, भागलपुर या अन्य बड़े शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे उन्हें काफी असुविधा होती थी। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए, रामगढ़ चौक के ब्लॉक रोड में 'महावीर जांच घर' खोला गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में कम पैसों में गंभीर बीमारियों की जांच की जा सकेगी।1
- लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक प्रखंड अंतर्गत बरतारा गांव में समस्त ग्रामीणों द्वारा 16 जून से श्री श्री 1008 श्री सीताराम महायज्ञ का शुभारंभ किया जाएगा। यह महायज्ञ 24 जून तक चलेगा। ग्रामीणों ने जानकारी दी है कि बरतारा गांव स्थित सूर्य मंदिर में सूर्य भगवान की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर इस यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। आयोजकों ने बताया कि यज्ञ में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन महाप्रसाद का विशेष आयोजन किया जाएगा, और जितने भी भक्तजन वहाँ आएंगे, उन सभी को महाप्रसाद ग्रहण करके ही जाना होगा।1
- झाझा विधानसभा क्षेत्र के जदयू विधायक दामोदर रावत को बिहार सरकार में परिवहन मंत्री बनाए जाने के उपलक्ष्य में गुरुवार को झाझा रेलवे स्टेशन क्लब में एक नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एनडीए कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लेकर मंत्री का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। समारोह की अध्यक्षता जदयू नगर अध्यक्ष बबलू सिन्हा ने की, जबकि मंच संचालन मुकेश राजहंस ने किया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. रामोतार सिंह, बरनवाल समाज के अध्यक्ष गोपाल बरनवाल, जदयू प्रखंड अध्यक्ष राकेश दास, डॉ. राजेंद्र रावत, भाजपा नेत्री कंचन देवी और प्रफुलचंद्र त्रिवेदी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने दामोदर रावत के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए उन्हें पार्टी का समर्पित और कर्मठ कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में कई विकास कार्य किए हैं और अब मंत्री के रूप में भी वे राज्य स्तर पर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास कर रहे हैं। अपने संबोधन में परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने समारोह आयोजित करने के लिए उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि झाझा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने हमेशा उन पर भरोसा जताया है, जिसे वह एक बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि झाझा क्षेत्र से उनका पुराना लगाव रहा है और यहां के विकास को गति देना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की नई दिशा दी है और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उनके मार्गदर्शन में राज्य को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। पूरे समारोह के दौरान, समर्थकों ने मंत्री का फूल-मालाओं और तालियों के साथ भव्य स्वागत किया, जिससे पूरे कार्यक्रम में उत्साह और जश्न का माहौल बना रहा।1
- शेखपुरा जिले के अरियरी प्रखंड में स्थित करंडे थाना पुलिस ने भारी मात्रा में विदेशी शराब और बीयर केन जब्त किए हैं। इस बड़े पैमाने पर शराब और बीयर केन की बरामदगी के बाद इलाके में हड़कम्प मच गया है। स्थानीय लोग पुलिस की इस कार्रवाई को एक बड़ी सफलता बता रहे हैं।1