एक हादसे के दौरान कुछ टीवी चैनलों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घटनास्थल का दौरा और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई दिखाई गई, लेकिन सोशल मीडिया और जमीनी वीडियो ने एक अलग ही तस्वीर पेश की। इन वीडियो में लोग आग और धुएं से बचने के लिए दूसरी मंजिल से कूदते साफ दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि राहत और बचाव दल समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंचे और मौके पर बुनियादी अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी कमी थी। इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि यदि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में थी, तो लोगों को अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग क्यों लगानी पड़ी? वहीं, स्थानीय लोगों और घटना में बचे हुए पीड़ितों के बयान भी प्रशासनिक दावों से बिल्कुल अलग हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे समय में मीडिया की भूमिका सिर्फ सरकारी दावों को दिखाने की नहीं, बल्कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों और जवाबदेही पर सवाल उठाने की होनी चाहिए। पीड़ितों और उनके परिजनों को इस मामले में स्पष्ट जवाब चाहिए, केवल प्रचार नहीं।
एक हादसे के दौरान कुछ टीवी चैनलों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घटनास्थल का दौरा और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई दिखाई गई, लेकिन सोशल मीडिया और जमीनी वीडियो ने एक अलग ही तस्वीर पेश की। इन वीडियो में लोग आग और धुएं से बचने के लिए दूसरी मंजिल से कूदते साफ दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि राहत और बचाव दल समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंचे और मौके पर बुनियादी अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी कमी थी। इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि यदि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में थी, तो लोगों को अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग क्यों लगानी पड़ी? वहीं, स्थानीय लोगों और घटना में बचे हुए पीड़ितों के बयान भी प्रशासनिक दावों से बिल्कुल अलग हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे समय में मीडिया की भूमिका सिर्फ सरकारी दावों को दिखाने की नहीं, बल्कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों और जवाबदेही पर सवाल उठाने की होनी चाहिए। पीड़ितों और उनके परिजनों को इस मामले में स्पष्ट जवाब चाहिए, केवल प्रचार नहीं।
- एक हादसे के दौरान कुछ टीवी चैनलों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घटनास्थल का दौरा और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई दिखाई गई, लेकिन सोशल मीडिया और जमीनी वीडियो ने एक अलग ही तस्वीर पेश की। इन वीडियो में लोग आग और धुएं से बचने के लिए दूसरी मंजिल से कूदते साफ दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि राहत और बचाव दल समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंचे और मौके पर बुनियादी अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी कमी थी। इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि यदि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में थी, तो लोगों को अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग क्यों लगानी पड़ी? वहीं, स्थानीय लोगों और घटना में बचे हुए पीड़ितों के बयान भी प्रशासनिक दावों से बिल्कुल अलग हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे समय में मीडिया की भूमिका सिर्फ सरकारी दावों को दिखाने की नहीं, बल्कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों और जवाबदेही पर सवाल उठाने की होनी चाहिए। पीड़ितों और उनके परिजनों को इस मामले में स्पष्ट जवाब चाहिए, केवल प्रचार नहीं।1
- यह टिप्पणी अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा (दान) चोरी मामले में चल रही एसआईटी जांच और इससे जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में की गई। पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में एक विवादित बयान देते हुए दावा किया कि लुटेरे राम मंदिर और उनके दरबार से करोड़ों रुपये, सोना और चांदी लूट ले गए। उन्होंने तीखे सवाल उठाए, "करोड़ों-करोड़ रुपया लुटेरे राम के मंदिर से लूट ले गए, चांदी और सोना भी उड़ा ले गए, लेकिन वह भगवान राम उन लुटेरों को सजा नहीं दे पाया तो आपका भला क्या कर सकता है? जो अपने मंदिर की रक्षा नहीं कर सकता, वह आपकी रक्षा क्या करेगा?" मौर्य के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश फैल गया है। अयोध्या के संत महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मौर्य के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने जनता की भावनाओं से खिलवाड़ का बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इसे लेकर यह भी पूछा जा रहा है कि क्या शासन-प्रशासन ऐसे पूर्व मंत्री के खिलाफ कार्यवाही करेगा, जिनके बयान करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत कर रहे हैं, खासकर वे लोग जो स्वयं को भगवान राम को "लेकर आने वाले" बताते हैं।1
- उत्तराखंड के देहरादून में लेबर चौक पर 23 जून 2026 को सुबह 11:00 बजे एक दर्दनाक बस हादसा हुआ। इस भीषण दुर्घटना में कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हो गई। घायलों में से कुछ का इलाज वर्तमान में अस्पताल में जारी है। इस त्रासदी के बाद, किसान मज़दूर महासंग्राम संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोबीन अहमद ने घोषणा की है कि वे आज (घटना के अगले दिन) अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल जानेंगे और साथ ही घटनास्थल का भी दौरा करेंगे। संगठन ने मजदूर भाइयों के पीड़ित परिवारों को सरकार से हर संभव सहायता दिलाने के लिए सभी प्रयास करने का संकल्प लिया है।1
- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नरोली गांव के मजरा मिल्को में एक विधवा महिला को अभी तक मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत घर नहीं मिल पाया है। यह बताया गया है कि महिला के ऊपर कोई पुरुष सदस्य नहीं है और उसे तत्काल आवास की आवश्यकता है। इस गंभीर समस्या पर वर्तमान प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए, मुख्यमंत्री योगी जी से अपील की गई है कि वे इस मामले की सही जांच के लिए एक ईमानदार अधिकारी भेजें। यह भी मांग की गई है कि जिस महिला का आवास बनना चाहिए, उसका आवास मुख्यमंत्री योजना के तहत जल्द से जल्द बनाया जाए, क्योंकि इस पर किसी का कोई लालच या दबाव नहीं है। जानकारी के अनुसार, ग्राम प्रधान जी भी इस कार्य के लिए आते हैं, लेकिन महिला को आवास नहीं मिला है। महिला मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ लेने की इच्छुक है। यह पूरी अपील उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी जी से की गई है।1
- सहारनपुर जिले की बेहट विधानसभा के जसमौर ग्राम पंचायत के पथपुरा गांव में मुख्य रास्ते की हालत बेहद खराब हो गई है। गांव के निवासियों को इस बदहाल सड़क के कारण आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम प्रधान अपने ऐश-ओ-आराम में व्यस्त हैं, जिससे गांव की इस महत्वपूर्ण समस्या और मुख्य रास्ते की अनदेखी की जा रही है।1
- एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ एक व्यक्ति ने अपने मंगेतर को 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। इस जघन्य कृत्य के बाद मंगेतर की मौके पर ही मौत हो गई।1
- देहरादून स्थित उत्तराखंड भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी के 22 प्रकोष्ठों की नई टीम के पदाधिकारियों की एक परिचयात्मक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। मुख्यमंत्री धामी ने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे पार्टी की रीति-नीति को जन-जन तक पहुँचाएँ और सरकार की उपलब्धियों से जनता को अवगत कराएँ। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगठन की मजबूती के लिए सभी कार्यकर्ताओं को धरातल पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इस बैठक के दौरान, आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं को तैयार रहने और पार्टी द्वारा सौंपी जाने वाली जिम्मेदारियों का पूर्ण निष्ठा के साथ निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया गया।1
- मुंबई की चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल ट्रेन में दरवाजे को खुला रखने को लेकर हुआ मामूली विवाद एक जानलेवा घटना में बदल गया। यह वारदात मंगलवार रात अंधेरी और बोरीवली स्टेशन के बीच हुई, जहाँ 22 वर्षीय मयंक लोहार की एक सहयात्री से बहस हो गई। यह बहस जल्द ही हिंसक हो गई और आरोपी सहयात्री ने मयंक के पेट में चाकू घोंप दिया। हमलावर बोरीवली स्टेशन पहुँचने से पहले ही ट्रेन से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल मयंक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रेलवे पुलिस और जीआरपी इस मामले की गहनता से जाँच कर रही हैं। पश्चिम रेलवे ने भी सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य आवश्यक सबूत जाँच एजेंसियों को सौंप दिए हैं।1