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जौनपुर के अंबेडकर चौराहे पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अंबेडकर चौराहे पर जोरदार धरना-प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र में पुलिस पूरी तरह सतर्क है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
Jitendra bahadur Dubey
जौनपुर के अंबेडकर चौराहे पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अंबेडकर चौराहे पर जोरदार धरना-प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र में पुलिस पूरी तरह सतर्क है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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- जौनपुर के अंबेडकर चौराहे पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अंबेडकर चौराहे पर जोरदार धरना-प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र में पुलिस पूरी तरह सतर्क है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।1
- प्रधानमंत्री आवास पर धरने पर बैठे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बातचीत करने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री (PMO) जितेंद्र सिंह पहुंचे हैं। सरकार ने उन्हें अपना दूत बनाकर भेजा है।1
- आंखों में आंसू, दिल में मलाल और लाखों दुआओं का बोझ लिए लियोनेल मेसी का वर्ल्ड कप सफ़र यहीं थम गया है। यह सिर्फ एक हार नहीं थी, बल्कि उनके करोड़ों फ़ैंस के दिलों की उम्मीदों के टूटने का पल था। मंज़िल बस एक कदम दूर रह जाने और उस मुस्कान को एक बार फिर विश्व कप के साथ न देख पाने का मलाल हर प्रशंसक को है। हालांकि, मलाल इस बात का बिल्कुल नहीं है कि वे लड़े नहीं, बल्कि इस बात का है कि सपना पूरा होते-होते रह गया। मेसी एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने फुटबॉल को सिर्फ़ एक खेल नहीं बल्कि एक अहसास बना दिया और अपने हर पास व हर गोल से करोड़ों लोगों को सपने देखना सिखाया। भले ही इस बार ट्रॉफ़ी उनके हाथों में नहीं आई, लेकिन दुनिया के दिलों पर उनका नाम पहले से कहीं ज़्यादा गहरा हो गया है। कुछ खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाते हैं और इतिहास लिखते हैं, लेकिन मेसी अहसास बन जाते हैं। वे मैदान पर हारकर भी करोड़ों दिल जीत गए हैं।1
- पीडब्ल्यूडी की लापरवाही या न्यायालय की आड़ में चौबेपुर–बाबतपुर मार्ग पर ईंट और पत्थर डालकर आवागमन बाधित कर दिया गया है। रास्ते पर ईंट-पत्थर गिरा दिए जाने के कारण इस मार्ग से आवाजाही करने वालों को भारी बाधा का सामना करना पड़ रहा है।1
- जौनपुर के जलालगंज स्टेशन पर पंजाब से धनबाद जाने वाली गंगा सतजल एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 13308) अपने निर्धारित समय से एक घंटा की देरी से पहुंची। यह ट्रेन पंजाब से धनबाद के सफर पर थी और जलालगंज स्टेशन पर एक घंटा विलंब से पहुंचने के बाद अब स्टेशन से आगे के लिए रवाना हो चुकी है।1
- नई दिल्ली में मानसून सत्र के पहले दिन सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक सामने आई है, जहां काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च सोमवार दोपहर को सीधे लोकसभा संसद भवन के पास तक पहुंच गया। हाई प्रोफाइल सुरक्षा जोन में अचानक प्रदर्शनकारियों के घुसने से सुरक्षाबलों में अफरातफरी मच गई और उन्होंने आनन-फानन में संसद के मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज भी करना पड़ा, जिससे वहां दिनभर भारी बवाल मचा रहा। इस घटना को लोकसभा संसद भवन की सुरक्षा में एक बड़ी लापरवाही माना जा रहा है, क्योंकि सोमवार को दिल्ली पुलिस के तमाम सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नाकाम साबित हुए। बीते कई वर्षों से पुलिस सभी प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग थाने के पास रोकने में कामयाब हो जाती थी, लेकिन सीजेपी का यह मार्च वास्तविकता में संसद भवन के बिल्कुल करीब पहुंच गया। इस पूरे हंगामे और जान बचाकर भागते हुए प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। गौरतलब है कि पूरे बीस साल बाद कोई प्रदर्शनकारी मार्च संसद तक इस तरह दखल देने में कामयाब हुआ है। इससे पहले साल 2004-2005 में समाजवादी पार्टी का संसद मार्च पटेल चौक तक पहुंचा था। उस वक्त भी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद के सामने बने रेल भवन और कृषि भवन के गोल चक्कर के पास लाठीचार्ज किया था और गैस के गोले दागे थे।1