नई दिल्ली में मानसून सत्र के पहले दिन सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक सामने आई है, जहां काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च सोमवार दोपहर को सीधे लोकसभा संसद भवन के पास तक पहुंच गया। हाई प्रोफाइल सुरक्षा जोन में अचानक प्रदर्शनकारियों के घुसने से सुरक्षाबलों में अफरातफरी मच गई और उन्होंने आनन-फानन में संसद के मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज भी करना पड़ा, जिससे वहां दिनभर भारी बवाल मचा रहा। इस घटना को लोकसभा संसद भवन की सुरक्षा में एक बड़ी लापरवाही माना जा रहा है, क्योंकि सोमवार को दिल्ली पुलिस के तमाम सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नाकाम साबित हुए। बीते कई वर्षों से पुलिस सभी प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग थाने के पास रोकने में कामयाब हो जाती थी, लेकिन सीजेपी का यह मार्च वास्तविकता में संसद भवन के बिल्कुल करीब पहुंच गया। इस पूरे हंगामे और जान बचाकर भागते हुए प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। गौरतलब है कि पूरे बीस साल बाद कोई प्रदर्शनकारी मार्च संसद तक इस तरह दखल देने में कामयाब हुआ है। इससे पहले साल 2004-2005 में समाजवादी पार्टी का संसद मार्च पटेल चौक तक पहुंचा था। उस वक्त भी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद के सामने बने रेल भवन और कृषि भवन के गोल चक्कर के पास लाठीचार्ज किया था और गैस के गोले दागे थे।
नई दिल्ली में मानसून सत्र के पहले दिन सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक सामने आई है, जहां काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च सोमवार दोपहर को सीधे लोकसभा संसद भवन के पास तक पहुंच गया। हाई प्रोफाइल सुरक्षा जोन में अचानक प्रदर्शनकारियों के घुसने से सुरक्षाबलों में अफरातफरी मच गई और उन्होंने आनन-फानन में संसद के मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज भी करना पड़ा, जिससे वहां दिनभर भारी बवाल मचा रहा। इस घटना को लोकसभा संसद भवन की सुरक्षा में एक बड़ी लापरवाही माना जा रहा है, क्योंकि सोमवार को दिल्ली पुलिस के तमाम सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नाकाम साबित हुए। बीते कई वर्षों से पुलिस सभी प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग थाने के पास रोकने में कामयाब हो जाती थी, लेकिन सीजेपी का यह मार्च वास्तविकता में संसद भवन के बिल्कुल करीब पहुंच गया। इस पूरे हंगामे और जान बचाकर भागते हुए प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। गौरतलब है कि पूरे बीस साल बाद कोई प्रदर्शनकारी मार्च संसद तक इस तरह दखल देने में कामयाब हुआ है। इससे पहले साल 2004-2005 में समाजवादी पार्टी का संसद मार्च पटेल चौक तक पहुंचा था। उस वक्त भी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद के सामने बने रेल भवन और कृषि भवन के गोल चक्कर के पास लाठीचार्ज किया था और गैस के गोले दागे थे।
- जौनपुर जिले के केराकत में जलालगंज स्टेशन पर वालुरघाट से बठिंडा जाने वाली फरक्का एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 15733) 7 घंटे के विलंब से पहुंची है। यह ट्रेन काफी लेट होकर जलालगंज स्टेशन पर पहुंची।1
- वाराणसी के पिंडरा से उठे इस स्वर में पूरे विश्वास और दृढ़ता के साथ यह बात कही गई है कि यह चीख जरूर बदलाव लेकर आएगी।1
- जनता न्यूज़ टीवी के ब्यूरो चीफ राजमणी पाण्डेय के अनुसार, चंदौली में हुई मूसलाधार बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है। इस बारिश के बाद खेतों में धान की रोपाई ने काफी रफ्तार पकड़ ली है। हालांकि, मूसलाधार बारिश की वजह से सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिसके कारण आने-जाने वाले राहगीर बेहद परेशान हैं।1
- वाराणसी में एक नई प्रक्रिया के अंतर्गत दो वरिष्ठ व्यापारी नेताओं के बीच गहन मंत्रणा हुई है। न्यू काशी व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष डॉक्टर सतीश कुमार कसेरा के प्रतिष्ठान पर काशी व्यापार मंडल के संरक्षक तिलक राज कपूर पधारे, जहां दोनों नेताओं के बीच गहन वार्ता हुई। इस अवसर पर राष्ट्रपति पदक प्राप्त संरक्षक तिलक राज कपूर ने वाराणसी के समस्त व्यापारियों से अपील की कि सभी व्यापारियों को एक हो जाना चाहिए और समस्त व्यापार मंडल एक हों।1
- panchayati kuwa ke pass me2
- देशभर में लगातार हो रहे परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में फैली अव्यवस्था के विरोध में सोमवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित बीएचयू (BHU) सिंहद्वार पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। सपा नेताओं के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित युवाओं ने अपने हाथों में 'पेपर लीक बंद करो' और 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' लिखी तख्तियां लेकर उग्र नारेबाजी की। सपा कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर पुलिस बल भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। प्रदर्शन के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। इस ज्ञापन में देशभर में नीट (NEET), नेट (NET) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं का हवाला देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों छात्रों की मेहनत बर्बाद हो रही है, इसलिए देश की शिक्षा व्यवस्था में तुरंत सुधार किया जाए और इस धांधली के दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।1
- जौनपुर के जंघई रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह एक लावारिस ट्रॉली बैग में बम होने की अफवाह से हड़कंप मच गया। सुबह करीब 6:30 बजे एक अज्ञात मोबाइल नंबर से सूचना मिली कि स्टेशन पर रखे एक ट्रॉली बैग से टिक-टिक की आवाज आ रही है। इस खबर के मिलते ही रेलवे स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय पुलिस, जीआरपी, आरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और पूरे स्टेशन परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया गया। एहतियात के तौर पर बम निरोधक दस्ते को भी बुलाया गया, लेकिन गहन जांच के बाद स्टेशन परिसर से कोई भी संदिग्ध ट्रॉली बैग या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। जांच में यह सूचना प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हुई, जिसके बाद राहत की सांस ली गई और रेल परिचालन सामान्य रूप से जारी रहा। पुलिस ने बताया कि सूचना देने वाले व्यक्ति का मोबाइल फोन अब बंद आ रहा है, जिसकी पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।1
- नई दिल्ली में मानसून सत्र के पहले दिन सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक सामने आई है, जहां काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च सोमवार दोपहर को सीधे लोकसभा संसद भवन के पास तक पहुंच गया। हाई प्रोफाइल सुरक्षा जोन में अचानक प्रदर्शनकारियों के घुसने से सुरक्षाबलों में अफरातफरी मच गई और उन्होंने आनन-फानन में संसद के मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज भी करना पड़ा, जिससे वहां दिनभर भारी बवाल मचा रहा। इस घटना को लोकसभा संसद भवन की सुरक्षा में एक बड़ी लापरवाही माना जा रहा है, क्योंकि सोमवार को दिल्ली पुलिस के तमाम सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नाकाम साबित हुए। बीते कई वर्षों से पुलिस सभी प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग थाने के पास रोकने में कामयाब हो जाती थी, लेकिन सीजेपी का यह मार्च वास्तविकता में संसद भवन के बिल्कुल करीब पहुंच गया। इस पूरे हंगामे और जान बचाकर भागते हुए प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। गौरतलब है कि पूरे बीस साल बाद कोई प्रदर्शनकारी मार्च संसद तक इस तरह दखल देने में कामयाब हुआ है। इससे पहले साल 2004-2005 में समाजवादी पार्टी का संसद मार्च पटेल चौक तक पहुंचा था। उस वक्त भी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद के सामने बने रेल भवन और कृषि भवन के गोल चक्कर के पास लाठीचार्ज किया था और गैस के गोले दागे थे।1