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1 hr ago
user_Raju.u.p.44
Raju.u.p.44
सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

  • user_Raju.u.p.44
    Raju.u.p.44
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश
    Ram Ram
    1 hr ago
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
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    Post by Raju.u.p.44
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    Raju.u.p.44
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में रूस भी किसी भूमिका में है? क्या व्लादिमीर पुतिन ईरान को समर्थन दे रहे हैं? अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच डोनल्ड ट्रंप ने रूस को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ईरान की कुछ हद तक मदद कर रहे हो सकते हैं। ट्रंप ने यह बात एक रेडियो इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने फॉक्स न्यूज के होस्ट ब्रायन किल्मीड से बातचीत में यह टिप्पणी की। बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि पुतिन ईरान की मदद कर रहे हैं, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि “मुझे लगता है कि वह शायद थोड़ी मदद कर रहे होंगे।” हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस किस तरह की मदद कर रहा है या इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। लेकिन उनके इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में अमेरिका, रूस और ईरान के संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच रूस की संभावित भूमिका को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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    क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में रूस भी किसी भूमिका में है? क्या व्लादिमीर पुतिन ईरान को समर्थन दे रहे हैं? अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच डोनल्ड ट्रंप ने रूस को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ईरान की कुछ हद तक मदद कर रहे हो सकते हैं।
ट्रंप ने यह बात एक रेडियो इंटरव्यू के दौरान कही। उन्होंने फॉक्स न्यूज के होस्ट ब्रायन किल्मीड से बातचीत में यह टिप्पणी की। बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि पुतिन ईरान की मदद कर रहे हैं, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि “मुझे लगता है कि वह शायद थोड़ी मदद कर रहे होंगे।”
हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस किस तरह की मदद कर रहा है या इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। लेकिन उनके इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में अमेरिका, रूस और ईरान के संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच रूस की संभावित भूमिका को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    user_E RADIO INDIA
    E RADIO INDIA
    Media house सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • इज़राइल-ईरान-अमेरिका तनाव पर डॉ. जिग्नेश जानी का शांति संदेश: “युद्ध नहीं, शांति ही समाधान”
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    इज़राइल-ईरान-अमेरिका तनाव पर डॉ. जिग्नेश जानी का शांति संदेश: “युद्ध नहीं, शांति ही समाधान”
    user_KHABREIN UTTAR PRADESH KI
    KHABREIN UTTAR PRADESH KI
    Newspaper publisher Sultanpur, Uttar Pradesh•
    20 hrs ago
  • सुल्तानपुर जिले के शिवगढ़ थाना क्षेत्र में एक युवक का शव नहर में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। जानकारी के अनुसार अवसानपुर गांव के पास शनिवार सुबह ग्रामीणों ने नहर में शव देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नहर से बाहर निकलवाया। मृतक की पहचान समर बहादुर पुत्र स्वर्गीय लालता प्रसाद मुसहर के रूप में हुई है। शव के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना पर क्षेत्राधिकारी लंभुआ ऋतिक कपूर ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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    सुल्तानपुर जिले के शिवगढ़ थाना क्षेत्र में एक युवक का शव नहर में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। जानकारी के अनुसार अवसानपुर गांव के पास शनिवार सुबह ग्रामीणों ने नहर में शव देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नहर से बाहर निकलवाया। मृतक की पहचान समर बहादुर पुत्र स्वर्गीय लालता प्रसाद मुसहर के रूप में हुई है। शव के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही है।
घटना की सूचना पर क्षेत्राधिकारी लंभुआ ऋतिक कपूर ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
    user_Kamalpresh Kamal tiwari
    Kamalpresh Kamal tiwari
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के Amethi से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पत्नी से फोन पर बातचीत को लेकर दो साढ़ुओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि एक साढ़ू ने दूसरे पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामला मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि सुल्तानपुर जिले के कुड़वार थाना क्षेत्र के सोहगौली गांव का रहने वाला रोहित विश्वकर्मा अपनी पत्नी से उसके बड़े साढ़ू विजय बहादुर विश्वकर्मा की फोन पर बातचीत को लेकर नाराज़ रहता था। रोहित ने कई बार अपनी पत्नी और साढ़ू विजय बहादुर को एक-दूसरे से बात करने से मना किया, लेकिन इसके बावजूद दोनों के बीच बातचीत जारी रही। इसी बात को लेकर रोहित के मन में गुस्सा बढ़ता गया। 13 मार्च को मुसाफिरखाना में विजय बहादुर के घर प्रीतिभोज का कार्यक्रम था। इसी कार्यक्रम में रोहित अपने भाई अनिल के साथ पहुंचा। कार्यक्रम के दौरान ही रोहित और उसका भाई विजय बहादुर को बातचीत के बहाने नहर की पटरी पर ले गए। बताया जा रहा है कि वहां तीनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। पहले से तैयारी करके आए रोहित और अनिल ने विजय बहादुर पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में विजय बहादुर बुरी तरह घायल हो गया। शोर-शराबा सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों आरोपी बाइक से फरार हो चुके थे। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। पुलिस ने घायल को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद घायल के भाई धर्मेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने रोहित और अनिल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। अगले ही दिन मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनकी निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
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    उत्तर प्रदेश के Amethi से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पत्नी से फोन पर बातचीत को लेकर दो साढ़ुओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि एक साढ़ू ने दूसरे पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मामला मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि सुल्तानपुर जिले के कुड़वार थाना क्षेत्र के सोहगौली गांव का रहने वाला रोहित विश्वकर्मा अपनी पत्नी से उसके बड़े साढ़ू विजय बहादुर विश्वकर्मा की फोन पर बातचीत को लेकर नाराज़ रहता था।
रोहित ने कई बार अपनी पत्नी और साढ़ू विजय बहादुर को एक-दूसरे से बात करने से मना किया, लेकिन इसके बावजूद दोनों के बीच बातचीत जारी रही। इसी बात को लेकर रोहित के मन में गुस्सा बढ़ता गया।
13 मार्च को मुसाफिरखाना में विजय बहादुर के घर प्रीतिभोज का कार्यक्रम था। इसी कार्यक्रम में रोहित अपने भाई अनिल के साथ पहुंचा। कार्यक्रम के दौरान ही रोहित और उसका भाई विजय बहादुर को बातचीत के बहाने नहर की पटरी पर ले गए।
बताया जा रहा है कि वहां तीनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। पहले से तैयारी करके आए रोहित और अनिल ने विजय बहादुर पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
अचानक हुए हमले में विजय बहादुर बुरी तरह घायल हो गया। शोर-शराबा सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों आरोपी बाइक से फरार हो चुके थे।
ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। पुलिस ने घायल को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है।
घटना के बाद घायल के भाई धर्मेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने रोहित और अनिल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। अगले ही दिन मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनकी निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
    user_Distt Coresspondent NATION ONE tv
    Distt Coresspondent NATION ONE tv
    Corresspondant Amethi, Uttar Pradesh•
    1 hr ago
  • चांदा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत शुकुल उमरी में बिटिया रात्रि हुई महिला के हत्या मामले में महिला के मायके पक्ष वालो ने आरोप लगाया है की मेरे बेटी को उसके ही पति ने ही हत्या कर दी है उसके बाद उसे फंदे पर लटका कर आत्म हत्या का रूप देने का प्रयास किया जा रहा था लड़की के मायके के परिजनों ने पुलिस जबरियों लाश को जलवा फुर्सत लिया
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    चांदा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत शुकुल उमरी में बिटिया रात्रि हुई महिला के हत्या मामले में महिला के मायके पक्ष वालो ने आरोप लगाया है की मेरे बेटी को उसके ही पति ने ही हत्या कर दी है उसके बाद उसे फंदे पर लटका कर आत्म हत्या का रूप  देने का प्रयास किया जा रहा था लड़की के मायके के परिजनों ने पुलिस जबरियों लाश को जलवा फुर्सत लिया
    user_जितेन्द्र श्रीवास्तव
    जितेन्द्र श्रीवास्तव
    Local News Reporter लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • रोजाना पढ़ें हिन्दी उर्दू दैनिक सहारा जीवन डीएवीपी से विज्ञापन हेतु मान्यता प्राप्त
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    रोजाना पढ़ें हिन्दी उर्दू दैनिक सहारा जीवन डीएवीपी से विज्ञापन हेतु मान्यता प्राप्त
    user_SAHARA JEEVAN
    SAHARA JEEVAN
    अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • क्या चीन का नया कानून देश में एकता लाएगा या अल्पसंख्यकों की पहचान पर असर डालेगा? चीन की संसद द्वारा पारित किए गए “जातीय एकता कानून” को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने गुरुवार को “एथनिक यूनिटी लॉ” यानी जातीय एकता कानून को मंजूरी दे दी है। चीनी सरकार का कहना है कि यह कानून देश में जातीय एकता और आधुनिक विकास को मजबूत बनाने के लिए लाया गया है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि इस कानून के जरिए चीन सरकार जातीय अल्पसंख्यकों की पहचान और संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश कर सकती है। इस मुद्दे को लेकर चीन के अंदर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कानून से चीन में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकार और अवसर प्रभावित हो सकते हैं। चीन में कुल 55 जातीय अल्पसंख्यक समुदायों को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है, जिनकी अपनी भाषाएं और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। मंगोलियन ह्यूमन राइट्स इंफॉर्मेशन सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार यदि मंदारिन भाषा को अनिवार्य बनाया जाता है तो मंगोलियन भाषा बोलने वाले लोगों के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से पिछड़ सकते हैं। इसी तरह अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी अवसरों में कमी आने की आशंका जताई जा रही है। नए कानून के तहत जातीय एकता को केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी बताया गया है। इसमें प्रशासनिक संस्थानों, अभिभावकों और व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। चीन में अल्पसंख्यकों की स्थिति पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय रही है। उइगर मुस्लिमों के साथ कथित अत्याचार, तिब्बत में धार्मिक संस्थानों पर कड़ा नियंत्रण और मंगोलियाई भाषा की पढ़ाई पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों को लेकर समय-समय पर विरोध सामने आता रहा है। ऐसे में चीन के इस नए कानून के बाद अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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    क्या चीन का नया कानून देश में एकता लाएगा या अल्पसंख्यकों की पहचान पर असर डालेगा? चीन की संसद द्वारा पारित किए गए “जातीय एकता कानून” को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।
चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने गुरुवार को “एथनिक यूनिटी लॉ” यानी जातीय एकता कानून को मंजूरी दे दी है। चीनी सरकार का कहना है कि यह कानून देश में जातीय एकता और आधुनिक विकास को मजबूत बनाने के लिए लाया गया है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि इस कानून के जरिए चीन सरकार जातीय अल्पसंख्यकों की पहचान और संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश कर सकती है। इस मुद्दे को लेकर चीन के अंदर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कानून से चीन में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकार और अवसर प्रभावित हो सकते हैं। चीन में कुल 55 जातीय अल्पसंख्यक समुदायों को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है, जिनकी अपनी भाषाएं और सांस्कृतिक परंपराएं हैं।
मंगोलियन ह्यूमन राइट्स इंफॉर्मेशन सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार यदि मंदारिन भाषा को अनिवार्य बनाया जाता है तो मंगोलियन भाषा बोलने वाले लोगों के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से पिछड़ सकते हैं। इसी तरह अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी अवसरों में कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
नए कानून के तहत जातीय एकता को केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी बताया गया है। इसमें प्रशासनिक संस्थानों, अभिभावकों और व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।
चीन में अल्पसंख्यकों की स्थिति पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय रही है। उइगर मुस्लिमों के साथ कथित अत्याचार, तिब्बत में धार्मिक संस्थानों पर कड़ा नियंत्रण और मंगोलियाई भाषा की पढ़ाई पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों को लेकर समय-समय पर विरोध सामने आता रहा है।
ऐसे में चीन के इस नए कानून के बाद अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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