कटनी में राजस्व व्यवस्था पर 'ब्रेक', पटवारियों की बेमियादी हड़ताल से थमे हजारों काम बस्ते जमा, विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुप छोड़े; नामांतरण, सीमांकन, खसरा-नक्शा, गिरदावरी और प्रमाण-पत्र सत्यापन पर असर कटनी। कटनी जिले में मंगलवार से शुरू हुई पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर पहले ही दिन साफ दिखाई देने लगा। मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर जिले के पटवारियों ने अपने शासकीय बस्ते जमा कर दिए, विभागीय व्हाट्सऐप समूह छोड़ दिए और नियमित शासकीय कार्यों का बहिष्कार कर दिया। इससे राजस्व विभाग की व्यवस्था पर सीधा असर पड़ने लगा है। पटवारी संघ का कहना है कि वेतन विसंगति, पदोन्नति और अन्य लंबित मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन, सांकेतिक विरोध और सामूहिक अवकाश के माध्यम से शासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद प्रदेशभर में बेमियादी हड़ताल का फैसला लिया गया। हड़ताल के चलते नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, नक्शा-खसरा, फसल गिरदावरी, आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्रों के सत्यापन सहित राजस्व विभाग के अधिकांश काम प्रभावित हो रहे हैं। यदि हड़ताल लंबी चली तो हजारों आवेदनों का निपटारा अटक सकता है और आम लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। अगस्त से प्रस्तावित जन विश्वास अभियान पर भी इस आंदोलन की छाया पड़ने की संभावना है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक लंबित मांगों पर शासन की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कटनी में राजस्व व्यवस्था पर 'ब्रेक', पटवारियों की बेमियादी हड़ताल से थमे हजारों काम बस्ते जमा, विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुप छोड़े; नामांतरण, सीमांकन, खसरा-नक्शा, गिरदावरी और प्रमाण-पत्र सत्यापन पर असर कटनी। कटनी जिले में मंगलवार से शुरू हुई पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर पहले ही दिन साफ दिखाई देने लगा। मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर जिले के पटवारियों ने अपने शासकीय बस्ते जमा कर दिए, विभागीय व्हाट्सऐप समूह छोड़ दिए और नियमित शासकीय कार्यों का बहिष्कार कर दिया। इससे राजस्व विभाग की व्यवस्था पर सीधा असर पड़ने लगा है। पटवारी संघ का कहना है कि वेतन विसंगति, पदोन्नति और अन्य लंबित मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन, सांकेतिक विरोध और सामूहिक अवकाश के माध्यम से शासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद प्रदेशभर में बेमियादी हड़ताल का फैसला लिया गया। हड़ताल के चलते नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, नक्शा-खसरा, फसल गिरदावरी, आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्रों के सत्यापन सहित राजस्व विभाग के अधिकांश काम प्रभावित हो रहे हैं। यदि हड़ताल लंबी चली तो हजारों आवेदनों का निपटारा अटक सकता है और आम लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। अगस्त से प्रस्तावित जन विश्वास अभियान पर भी इस आंदोलन की छाया पड़ने की संभावना है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक लंबित मांगों पर शासन की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
- कटनी में राजस्व व्यवस्था पर 'ब्रेक', पटवारियों की बेमियादी हड़ताल से थमे हजारों काम बस्ते जमा, विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुप छोड़े; नामांतरण, सीमांकन, खसरा-नक्शा, गिरदावरी और प्रमाण-पत्र सत्यापन पर असर कटनी। कटनी जिले में मंगलवार से शुरू हुई पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर पहले ही दिन साफ दिखाई देने लगा। मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर जिले के पटवारियों ने अपने शासकीय बस्ते जमा कर दिए, विभागीय व्हाट्सऐप समूह छोड़ दिए और नियमित शासकीय कार्यों का बहिष्कार कर दिया। इससे राजस्व विभाग की व्यवस्था पर सीधा असर पड़ने लगा है। पटवारी संघ का कहना है कि वेतन विसंगति, पदोन्नति और अन्य लंबित मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन, सांकेतिक विरोध और सामूहिक अवकाश के माध्यम से शासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद प्रदेशभर में बेमियादी हड़ताल का फैसला लिया गया। हड़ताल के चलते नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, नक्शा-खसरा, फसल गिरदावरी, आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्रों के सत्यापन सहित राजस्व विभाग के अधिकांश काम प्रभावित हो रहे हैं। यदि हड़ताल लंबी चली तो हजारों आवेदनों का निपटारा अटक सकता है और आम लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। अगस्त से प्रस्तावित जन विश्वास अभियान पर भी इस आंदोलन की छाया पड़ने की संभावना है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक लंबित मांगों पर शासन की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।1
- बागेश्वर धाम सरकार आए जिला कटनी और जंतर मंतर पर विद्यार्थियों को दी चेतावनी बागेश्वर धाम महाराज श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी का धर्म है कि वह अपने अधिकारियों अधिकारों के लिए लड़े लेकिन किसी को अनुचित भाषा का प्रयोग अमर यदि शब्दों का चयन न करें1
- *झारखंड की लड़की मीडिया के सामने चीख चीख कर राहुल गांधी से पूछ रही है जब Neet पेपर लीक का मामला आता है तब तुम दिल्ली जाते हो,* *और अब जब झारखंड में अब राहुल गांधी तुम्हारी सरकार है वहां भी पेपर लीक हुआ है तो तुम अब कहां चले गए .....* *झारखंड के स्टूडेंट्स राहुल गांधी से पूछ रहे है तुम इतने सच्चे हो तुमको तुम्हारे राज्य का दर्द नहीं दिखाई देता , तुम झारखंड क्यूँ नहीं आते...तुम झारखंड नहीं संभाल सकते तो राहुल गांधी तुमको देश की सत्ता कैसे दे दे ।* *फिर ये कांग्रेस के चमचे यही कहगे मोदी की अंध भक्ति है* 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳1
- प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी | प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |1
- नमस्कार दोस्तों आप देख रहे है शुरू पवई विधानसभा की ग्राम पड़रिया कला में रोड बना तालाब जिस पर शासन और प्रशासन कोई भी ध्यान नहीं दे रहा आने जाने वाले राहगीरों को दिक्कत के सामने करना पड़ रहा है एक दिन में कम से कम 6 से 7 लोग पानी में गिर जाते हैं क्योंकि वहां पर दो से तीन फीट पानी भरा रहता है जिसकी वजह से राहगीरों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है जिस पर ग्राम पड़रिया सरपंच को पानी के लिए निकाश बनवाना जरूरी है या फिर रोड ठेकेदार को नाली बनवाना बहुत जरूरी उसे पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही आप देख रहे हैं शुरू बट लाइक और कमेंट कर के के बताएं सही या गलत1
- सड़क पर ही आतिशबाजी फटने से शिव चौक पर मची अफरा-तफरी, एक पुलिसकर्मी ने हिम्मत दिखाकर आतिशबाजी को पैर से दबाया। मुजफ्फरनगर में शिव चौक पर रात्रि करीब साढ़े दस बजे हरिद्वार की ओर से आए कांवड़ियों द्वारा आतिशबाजी करते हुए आसमान में जाकर रोशनी और धमाका करने वाले 30 शॉट्स आतिशबाजी हाथ में लेकर छुड़ाई, तो उसका साथी भी हाथ में लेकर दूसरी आतिशबाजी करने लगा। हाथों पर चिंगारी लगने पर उस कांवड़िये ने आतिशबाजी को सड़क पर ही पटक दिया, जिससे जहां-तहां आतिशबाजी फटने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शिव चौक पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने साहस दिखाते हुए आतिशबाजी का पैकेट अपने पैरों में जमीन की ओर करके दबा दिया, जिससे स्थिति नियंत्रित हुई, अन्यथा भगदड़ भी मच सकती थी।1
- मौत के मुहाने पर बैठा बाकल बस स्टैंड, आखिर किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहा विद्युत विभाग रहवासी मोहल्ले में मौत का सामान रखकर चैन की नींद सो रहा विद्युत विभाग बाकल। विद्युत विभाग की घोर लापरवाही ने बाकल बस स्टैंड के हजारों लोगों की जान जोखिम में डाल दी है। भीड़भाड़ वाले बस स्टैंड और रहवासी मोहल्ले के बीच सड़क किनारे लगा 200 केव्ही का ट्रांसफार्मर किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकता है, लेकिन विभाग मानो सब कुछ देखकर भी आंखें मूंदे बैठा है। स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रांसफार्मर में कई बार चिंगारी, शॉर्ट सर्किट और आग लगने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद न तो इसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। खुले जंपर, कटी-फटी और छिली हुई केबलें हर पल दुर्घटना को न्योता दे रही हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर समस्या की शिकायत कई बार विभागीय अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं। सवाल यह है कि क्या विभाग किसी मासूम की जान जाने के बाद ही जागेगा। बस स्टैंड पर प्रतिदिन सैकड़ों यात्री, स्कूली बच्चे, महिलाएं और व्यापारी आवाजाही करते हैं। ऐसे में यदि ट्रांसफार्मर में विस्फोट होता है या करंट फैलता है, तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि समय रहते इस ट्रांसफार्मर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया और कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी विद्युत विभाग की होगी। अब सवाल यही है क्या विभाग हादसे रोकने के लिए काम करेगा, या फिर हादसे के बाद केवल जांच और मुआवजे की औपचारिकता निभाई जाएगी।1