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प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी | प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |

1 hr ago
user_मानवाधिकार  भारतीय
मानवाधिकार भारतीय
Lawyer Bahoriband, Katni•
1 hr ago

प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी | प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |

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  • सड़क पर ही आतिशबाजी फटने से शिव चौक पर मची अफरा-तफरी, एक पुलिसकर्मी ने हिम्मत दिखाकर आतिशबाजी को पैर से दबाया। मुजफ्फरनगर में शिव चौक पर रात्रि करीब साढ़े दस बजे हरिद्वार की ओर से आए कांवड़ियों द्वारा आतिशबाजी करते हुए आसमान में जाकर रोशनी और धमाका करने वाले 30 शॉट्स आतिशबाजी हाथ में लेकर छुड़ाई, तो उसका साथी भी हाथ में लेकर दूसरी आतिशबाजी करने लगा। हाथों पर चिंगारी लगने पर उस कांवड़िये ने आतिशबाजी को सड़क पर ही पटक दिया, जिससे जहां-तहां आतिशबाजी फटने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। शिव चौक पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने साहस दिखाते हुए आतिशबाजी का पैकेट अपने पैरों में जमीन की ओर करके दबा दिया, जिससे स्थिति नियंत्रित हुई, अन्यथा भगदड़ भी मच सकती थी।
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    user_Naresh Bajaj
    Naresh Bajaj
    पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • बीजाडोगरी हाईस्कूल का ट्रांसफार्मर खराब, उमस भरी गर्मी में छात्र बेहाल स्मार्ट क्लास ठप, 111 छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित जबेरा (दमोह)। तहसील जबेरा अंतर्गत ग्राम बीजाडोगरी स्थित शासकीय हाईस्कूल में पिछले दो माह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। स्कूल का ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद अब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, जिससे विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बिजली नहीं होने से कक्षाओं के पंखे बंद पड़े हैं। उमस भरी गर्मी के बीच करीब 111 छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में संचालित स्मार्ट क्लास भी पूरी तरह बंद है, जिससे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग तीन वर्ष पहले बिजली विभाग जला हुआ ट्रांसफार्मर उठाकर ले गया था, लेकिन उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर आज तक नहीं लगाया गया। किसी तरह गांव के ट्रांसफार्मर से अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन पिछले लगभग एक माह से वह व्यवस्था भी बंद हो गई है। इससे विद्यालय के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों, अभिभावकों एवं विद्यालय प्रबंधन ने विद्युत विभाग से मांग की है कि शीघ्र नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके और स्मार्ट क्लास दोबारा शुरू हो सके।
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    बीजाडोगरी हाईस्कूल का ट्रांसफार्मर खराब, उमस भरी गर्मी में छात्र बेहाल

स्मार्ट क्लास ठप, 111 छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित

जबेरा (दमोह)। तहसील जबेरा अंतर्गत ग्राम बीजाडोगरी स्थित शासकीय हाईस्कूल में पिछले दो माह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। स्कूल का ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद अब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, जिससे विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

बिजली नहीं होने से कक्षाओं के पंखे बंद पड़े हैं। उमस भरी गर्मी के बीच करीब 111 छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में संचालित स्मार्ट क्लास भी पूरी तरह बंद है, जिससे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग तीन वर्ष पहले बिजली विभाग जला हुआ ट्रांसफार्मर उठाकर ले गया था, लेकिन उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर आज तक नहीं लगाया गया। किसी तरह गांव के ट्रांसफार्मर से अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन पिछले लगभग एक माह से वह व्यवस्था भी बंद हो गई है। इससे विद्यालय के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

ग्रामीणों, अभिभावकों एवं विद्यालय प्रबंधन ने विद्युत विभाग से मांग की है कि शीघ्र नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके और स्मार्ट क्लास दोबारा शुरू हो सके।
    user_भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    Photographer जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बटियागढ़ मंडी में मूंग खरीदी पर अव्यवस्था का आरोप, समिति ने उपार्जन रोकने की जताई असमर्थता बटियागढ़ मंडी में मूंग खरीदी पर अव्यवस्था का आरोप, समिति ने उपार्जन रोकने की जताई असमर्थता दमोह। बटियागढ़ मंडी में ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के दौरान अव्यवस्था का मामला सामने आया है। सेवा सहकारी समिति केरवना के प्रबंधक ने कृषि उपसंचालक दमोह को पत्र लिखकर खरीदी कार्य जारी रखने में असमर्थता जताई है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि सोमवार को पूर्व विधायक श्रीमती रामबाई द्वारा कतार में बाहर खड़े करीब 200 ट्रैक्टरों को एक साथ मंडी परिसर के अंदर प्रवेश करा दिया गया, जिससे खरीदी की पूरी व्यवस्था बिगड़ गई। समिति का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के प्रवेश से चारों ओर अव्यवस्था फैल गई और नियमानुसार उपार्जन कार्य संचालित करना संभव नहीं रहा। समिति प्रबंधक ने कृषि उपसंचालक से मामले में आवश्यक हस्तक्षेप कर व्यवस्था बहाल कराने की मांग की है, ताकि किसानों की उपज का उपार्जन सुचारु रूप से कराया जा सके।
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    बटियागढ़ मंडी में मूंग खरीदी पर अव्यवस्था का आरोप, समिति ने उपार्जन रोकने की जताई असमर्थता
बटियागढ़ मंडी में मूंग खरीदी पर अव्यवस्था का आरोप, समिति ने उपार्जन रोकने की जताई असमर्थता
दमोह। बटियागढ़ मंडी में ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के दौरान अव्यवस्था का मामला सामने आया है। सेवा सहकारी समिति केरवना के प्रबंधक ने कृषि उपसंचालक दमोह को पत्र लिखकर खरीदी कार्य जारी रखने में असमर्थता जताई है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि सोमवार को पूर्व विधायक श्रीमती रामबाई द्वारा कतार में बाहर खड़े करीब 200 ट्रैक्टरों को एक साथ मंडी परिसर के अंदर प्रवेश करा दिया गया, जिससे खरीदी की पूरी व्यवस्था बिगड़ गई। समिति का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के प्रवेश से चारों ओर अव्यवस्था फैल गई और नियमानुसार उपार्जन कार्य संचालित करना संभव नहीं रहा।
समिति प्रबंधक ने कृषि उपसंचालक से मामले में आवश्यक हस्तक्षेप कर व्यवस्था बहाल कराने की मांग की है, ताकि किसानों की उपज का उपार्जन सुचारु रूप से कराया जा सके।
    user_Reeport 100
    Reeport 100
    Artist पटेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    54 min ago
  • मूलभूत समस्याओं को लेकर पूर्व विधानसभा में कांग्रेस ने किया घेराव , जबलपुर के सिद्ध बाबा क्षेत्र में मूलभूत समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने पूर्व विधानसभा के नगर निगम का घेराव कियासि बताया गया कि सिद्ध बाबा वार्ड के अंतर्गत बिछेल चौराहे से झामनदास चौक तक सड़क मार्ग में गड्डे होने के कारण उस पर पानी का भराव निरंतर बना रहता है जो कि कीचड़ का ले लेता है इसी मार्ग से कुछ दूरी पर लगभग आधा दर्जन स्कूलें है, इसी मार्ग से होकर विद्यार्थी क्षेत्रीयजन का आवागमन होता है जिससे आमजन मानस को बहुत असुविधा होती है। सिद्धबाबा वार्ड में पानी की टंकी होने के उपरांत भी टंकी को पूर्ण क्षमता के अनुसार नहीं जाता है जिससे नल चालू होने के उपरांत 5 से 10 मिनिट ही चल पाता है जिससे क्षेत्र में पेयजल समस्या बनी रहती है। महोदय जी बरसात के समय क्षेत्र की नाला-नालियों की सफाई न होने के कारण नाला नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों में घुस रहा है जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। महोदय अनुसूचित जाति की सबसे ज्यादा बसाहट होने के कारण नगर निगम एवं जिम् अधिकारियों द्वारा इस वार्ड में किसी भी प्रकार का ध्यान नहीं दिया जाता है। अतः महोदय जी इन सभी मांगों को जल्द से जल्द निराकरण किया जावे जिससे क्षेत्रीयज किसी प्रकार असुविधा न हो। महोदय जी इन सभी जनसमस्याओं का निराकरण जल्द-जल्द होता है तो कांग्रसे पार्टी अनुसूचित जाति विभाग एवं क्षेत्रीयजनों द्वारा उग्र आंदोलन किया ज जिसकी संपूर्ण जवाबदारी निगम प्रशासन की होगी।
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    मूलभूत समस्याओं को लेकर पूर्व विधानसभा में कांग्रेस ने किया घेराव ,
जबलपुर के सिद्ध बाबा क्षेत्र में मूलभूत समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने  पूर्व विधानसभा के नगर निगम का घेराव कियासि बताया गया कि सिद्ध बाबा वार्ड के अंतर्गत बिछेल चौराहे से झामनदास चौक तक सड़क मार्ग  में गड्डे होने के कारण उस पर पानी का भराव निरंतर बना रहता है जो कि कीचड़ का ले लेता है इसी मार्ग से कुछ दूरी पर लगभग आधा दर्जन स्कूलें है, इसी मार्ग से होकर विद्यार्थी क्षेत्रीयजन का आवागमन होता है जिससे आमजन मानस को बहुत असुविधा होती है। सिद्धबाबा वार्ड में पानी की टंकी होने के उपरांत भी टंकी को पूर्ण क्षमता के अनुसार नहीं जाता है जिससे नल चालू होने के उपरांत 5 से 10 मिनिट ही चल पाता है जिससे क्षेत्र में पेयजल समस्या बनी रहती है। महोदय जी बरसात के समय क्षेत्र की नाला-नालियों की सफाई न होने के कारण नाला नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों में घुस रहा है जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। महोदय अनुसूचित जाति की सबसे ज्यादा बसाहट होने के कारण नगर निगम एवं जिम् अधिकारियों द्वारा इस वार्ड में किसी भी प्रकार का ध्यान नहीं दिया जाता है। अतः महोदय जी इन सभी मांगों को जल्द से जल्द निराकरण किया जावे जिससे क्षेत्रीयज किसी प्रकार असुविधा न हो। महोदय जी इन सभी जनसमस्याओं का निराकरण जल्द-जल्द होता है तो कांग्रसे पार्टी अनुसूचित जाति विभाग एवं क्षेत्रीयजनों द्वारा उग्र आंदोलन किया ज जिसकी संपूर्ण जवाबदारी निगम प्रशासन की होगी।
    user_Sarvesh Tiwari
    Sarvesh Tiwari
    Psychologist जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी | प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |
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• वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को  10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल  | 
• वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | 
• ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक  रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | 
• जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे  दिन वहस  में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है  | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14%  ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया  की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | 
• वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |
प्रेस नोट
• वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को  10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल  | 
• वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | 
• ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक  रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | 
• जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे  दिन वहस  में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है  | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14%  ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया  की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | 
• वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |
    user_मानवाधिकार  भारतीय
    मानवाधिकार भारतीय
    Lawyer Bahoriband, Katni•
    2 hrs ago
  • 💥 *बड़ी खबर*💥 *दुबई: मनी लॉन्ड्रिंग जांच में भगोड़े सट्टेबाज सतीश सनपाल और उसकी पत्नी की UAE में कई संपत्तियां फ्रीज, सतना से भी जुड़े है तार* संयुक्त अरब अमीरात की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत भारतीय मूल के भगोड़े सतीश सनपाल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी, उनकी पत्नी ताबिंदा और उनसे जुड़ी ANAX होल्डिंग सहित चार कंपनियों की संपत्तियां अस्थायी रूप से फ्रीज कर दी हैं। नेटफ्लिक्स की 'Desi Bling' सीरीज में दिख चुके सनपाल के बैंक खातों, निवेश और डिजिटल वॉलेट को इस एहतियाती कानूनी कदम के तहत रोका गया है। जांच एजेंसियां सनपाल के वित्तीय लेनदेन और धन के स्रोतों की गहन पड़ताल कर रही हैं। यह कार्रवाई UAE द्वारा अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख का हिस्सा है। सतीश सनपाल पर क्रिकेट सट्टेबाजी से अरबों का सम्राज्य खड़ा करने का आरोप है, इसके सतना, शहडोल, कटनी जबलपुर सहित देश के कोने कोने में सफेदपोश लोग इसके पार्टनर बताए जाते है। जांच के बाद जल्द ही कई सफेदपोश सट्टेबाज बेनकाब होंगे। इनमें से कई सफेदपोश लोग लगातार इसके संपर्क में रहकर रियल स्टेट का कारोबार भी कर रहे है। भारत में भी सनपाल के खिलाफ सट्टेबाजी (IPL बेटिंग), हवाला नेटवर्क और धोखाधड़ी से जुड़े लगभग 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके खिलाफ एक सक्रिय 'लुक-आउट सर्कुलर' भी जारी है । शहडोल में एक मामूली चाय के टपरे की दुकान से शुरुआत कर दुबई के बुर्ज खलीफा में आलीशान महल और अरबों का रियल एस्टेट साम्राज्य खड़ा करने वाले सतीश सनपाल की कहानी जितनी हैरान करने वाली है, उतनी ही अब विवादों से घिर चुकी है।
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    💥 *बड़ी खबर*💥
*दुबई: मनी लॉन्ड्रिंग जांच में भगोड़े सट्टेबाज सतीश सनपाल और उसकी पत्नी की UAE में कई संपत्तियां फ्रीज, सतना से भी जुड़े है तार*
संयुक्त अरब अमीरात की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत भारतीय मूल के भगोड़े सतीश सनपाल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी, उनकी पत्नी ताबिंदा और उनसे जुड़ी ANAX होल्डिंग सहित चार कंपनियों की संपत्तियां अस्थायी रूप से फ्रीज कर दी हैं। नेटफ्लिक्स की 'Desi Bling' सीरीज में दिख चुके सनपाल के बैंक खातों, निवेश और डिजिटल वॉलेट को इस एहतियाती कानूनी कदम के तहत रोका गया है। जांच एजेंसियां सनपाल के वित्तीय लेनदेन और धन के स्रोतों की गहन पड़ताल कर रही हैं। यह कार्रवाई UAE द्वारा अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख का हिस्सा है। सतीश सनपाल पर क्रिकेट सट्टेबाजी से अरबों का सम्राज्य खड़ा करने का आरोप है, इसके सतना, शहडोल, कटनी जबलपुर सहित देश के कोने कोने में सफेदपोश लोग इसके पार्टनर बताए जाते है। जांच के बाद जल्द ही कई सफेदपोश सट्टेबाज बेनकाब होंगे। इनमें से कई सफेदपोश लोग लगातार इसके संपर्क में रहकर रियल स्टेट का कारोबार भी कर रहे है।  भारत में भी सनपाल के खिलाफ सट्टेबाजी (IPL बेटिंग), हवाला नेटवर्क और धोखाधड़ी से जुड़े लगभग 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके खिलाफ एक सक्रिय 'लुक-आउट सर्कुलर' भी जारी है । शहडोल में एक मामूली चाय के टपरे की दुकान से शुरुआत कर दुबई के बुर्ज खलीफा में आलीशान महल और अरबों का रियल एस्टेट साम्राज्य खड़ा करने वाले सतीश सनपाल की कहानी जितनी हैरान करने वाली है, उतनी ही अब विवादों से घिर चुकी है।
    user_Naresh Bajaj
    Naresh Bajaj
    पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • दतिया चुनाव पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रतिक्रिया...
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    दतिया चुनाव पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रतिक्रिया...
    user_भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    Photographer जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • दमोह यातायात नियमों के पालन हेतु पुलिस कर्मियों पर भी की गई चालानी कार्यवाही
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    दमोह 
यातायात नियमों के पालन हेतु पुलिस कर्मियों पर भी की गई चालानी कार्यवाही
    user_सचिन सिंह राजपूत  प्रदेश समय
    सचिन सिंह राजपूत प्रदेश समय
    Court reporter पटेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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