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बीजाडोगरी हाईस्कूल का ट्रांसफार्मर खराब, उमस भरी गर्मी में छात्र बेहाल स्मार्ट क्लास ठप, 111 छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित जबेरा (दमोह)। तहसील जबेरा अंतर्गत ग्राम बीजाडोगरी स्थित शासकीय हाईस्कूल में पिछले दो माह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। स्कूल का ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद अब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, जिससे विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बिजली नहीं होने से कक्षाओं के पंखे बंद पड़े हैं। उमस भरी गर्मी के बीच करीब 111 छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में संचालित स्मार्ट क्लास भी पूरी तरह बंद है, जिससे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग तीन वर्ष पहले बिजली विभाग जला हुआ ट्रांसफार्मर उठाकर ले गया था, लेकिन उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर आज तक नहीं लगाया गया। किसी तरह गांव के ट्रांसफार्मर से अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन पिछले लगभग एक माह से वह व्यवस्था भी बंद हो गई है। इससे विद्यालय के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों, अभिभावकों एवं विद्यालय प्रबंधन ने विद्युत विभाग से मांग की है कि शीघ्र नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके और स्मार्ट क्लास दोबारा शुरू हो सके।

3 hrs ago
user_भगवत सिंह लोधी पत्रकार
भगवत सिंह लोधी पत्रकार
Photographer जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

बीजाडोगरी हाईस्कूल का ट्रांसफार्मर खराब, उमस भरी गर्मी में छात्र बेहाल स्मार्ट क्लास ठप, 111 छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित जबेरा (दमोह)। तहसील जबेरा अंतर्गत ग्राम बीजाडोगरी स्थित शासकीय हाईस्कूल में पिछले दो माह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। स्कूल का ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद अब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, जिससे विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बिजली नहीं होने से कक्षाओं के पंखे बंद पड़े हैं। उमस भरी गर्मी के बीच करीब 111 छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में संचालित स्मार्ट क्लास भी पूरी तरह बंद है, जिससे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग तीन वर्ष पहले बिजली विभाग जला हुआ ट्रांसफार्मर उठाकर ले गया था, लेकिन उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर आज तक नहीं लगाया गया। किसी तरह गांव के ट्रांसफार्मर से अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन पिछले लगभग एक माह से वह व्यवस्था भी बंद हो गई है। इससे विद्यालय के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों, अभिभावकों एवं विद्यालय प्रबंधन ने विद्युत विभाग से मांग की है कि शीघ्र नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके और स्मार्ट क्लास दोबारा शुरू हो सके।

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  • बीजाडोगरी हाईस्कूल का ट्रांसफार्मर खराब, उमस भरी गर्मी में छात्र बेहाल स्मार्ट क्लास ठप, 111 छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित जबेरा (दमोह)। तहसील जबेरा अंतर्गत ग्राम बीजाडोगरी स्थित शासकीय हाईस्कूल में पिछले दो माह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। स्कूल का ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद अब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, जिससे विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बिजली नहीं होने से कक्षाओं के पंखे बंद पड़े हैं। उमस भरी गर्मी के बीच करीब 111 छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में संचालित स्मार्ट क्लास भी पूरी तरह बंद है, जिससे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग तीन वर्ष पहले बिजली विभाग जला हुआ ट्रांसफार्मर उठाकर ले गया था, लेकिन उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर आज तक नहीं लगाया गया। किसी तरह गांव के ट्रांसफार्मर से अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन पिछले लगभग एक माह से वह व्यवस्था भी बंद हो गई है। इससे विद्यालय के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों, अभिभावकों एवं विद्यालय प्रबंधन ने विद्युत विभाग से मांग की है कि शीघ्र नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके और स्मार्ट क्लास दोबारा शुरू हो सके।
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    बीजाडोगरी हाईस्कूल का ट्रांसफार्मर खराब, उमस भरी गर्मी में छात्र बेहाल

स्मार्ट क्लास ठप, 111 छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित

जबेरा (दमोह)। तहसील जबेरा अंतर्गत ग्राम बीजाडोगरी स्थित शासकीय हाईस्कूल में पिछले दो माह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। स्कूल का ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद अब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, जिससे विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

बिजली नहीं होने से कक्षाओं के पंखे बंद पड़े हैं। उमस भरी गर्मी के बीच करीब 111 छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में संचालित स्मार्ट क्लास भी पूरी तरह बंद है, जिससे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग तीन वर्ष पहले बिजली विभाग जला हुआ ट्रांसफार्मर उठाकर ले गया था, लेकिन उसके स्थान पर नया ट्रांसफार्मर आज तक नहीं लगाया गया। किसी तरह गांव के ट्रांसफार्मर से अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन पिछले लगभग एक माह से वह व्यवस्था भी बंद हो गई है। इससे विद्यालय के साथ-साथ पूरे गांव के लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

ग्रामीणों, अभिभावकों एवं विद्यालय प्रबंधन ने विद्युत विभाग से मांग की है कि शीघ्र नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके और स्मार्ट क्लास दोबारा शुरू हो सके।
    user_भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    Photographer जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • 🔥 "सार्थक App पर आर-पार! सचिव बोले— अब पीछे नहीं हटेंगे" आज राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी की साप्ताहिक जनसुनवाई में दमोह और सागर जिले के बड़ी संख्या में पंचायत सचिव एवं सहायक सचिव पहुंचे। उनका कहना है कि वे गांव-गांव जाकर फील्ड में काम करते हैं, इसलिए 'सार्थक App' के माध्यम से अनिवार्य उपस्थिति दर्ज करना उनके काम की प्रकृति के अनुरूप नहीं है। सचिव संघ ने मांग रखी कि यदि ऐसा नियम लागू किया जाए तो पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे कानूनी रास्ता अपनाने पर भी विचार करेंगे। वहीं, राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने संबंधित मंत्री और अधिकारियों से इस विषय पर चर्चा करने का आश्वासन दिया। आपकी राय क्या है? क्या फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए App आधारित अटेंडेंस उचित है? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। 📍 पूरी ग्राउंड रिपोर्ट देखें और अपनी प्रतिक्रिया साझा करें।
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    🔥 "सार्थक App पर आर-पार! सचिव बोले— अब पीछे नहीं हटेंगे"
आज राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी की साप्ताहिक जनसुनवाई में दमोह और सागर जिले के बड़ी संख्या में पंचायत सचिव एवं सहायक सचिव पहुंचे। उनका कहना है कि वे गांव-गांव जाकर फील्ड में काम करते हैं, इसलिए 'सार्थक App' के माध्यम से अनिवार्य उपस्थिति दर्ज करना उनके काम की प्रकृति के अनुरूप नहीं है।
सचिव संघ ने मांग रखी कि यदि ऐसा नियम लागू किया जाए तो पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे कानूनी रास्ता अपनाने पर भी विचार करेंगे। वहीं, राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने संबंधित मंत्री और अधिकारियों से इस विषय पर चर्चा करने का आश्वासन दिया।
आपकी राय क्या है?
क्या फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए App आधारित अटेंडेंस उचित है? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
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    user_Pushpendra Lodhi
    Pushpendra Lodhi
    जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • कलेक्ट्रेट शादी कराने की मांग को लेकर पहुंचा दिव्यांग, कलेक्टर से लगाई शादी कराए जाने की गुहार दमोह। कलेक्ट्रेट में आज मंगलवार दोपहर 1 बजे आयोजित जनसुनवाई में एक अनोखा आवेदन सामने आया। तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र के बमोरी गांव निवासी 50 वर्षीय दिव्यांग नरेंद्र सिंह ठाकुर ने कलेक्टर प्रताप नारायण यादव से अपनी शादी कराने और राशन उपलब्ध कराने की मांग की। नरेंद्र ने बताया कि वह अनाथ है, कानों से कम सुनता है और चलने-फिरने में भी असमर्थ है। उसकी पहली पत्नी का वर्ष 2014 में निधन हो गया था, जिसके बाद से वह अकेले जीवन बिता रहा है। जब अधिकारियों ने पूछा कि वह काम करने में सक्षम नहीं है तो विवाह कैसे होगा, इस पर नरेंद्र ने कहा, "जिस प्रकार अजगर और पक्षियों के भोजन की व्यवस्था भगवान करते हैं, उसी तरह मेरे लिए भी जीवनसाथी की व्यवस्था भगवान करेंगे।" कलेक्टर ने उसकी पूरी बात गंभीरता से सुनी और जिला अस्पताल के प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह को बुलाकर उसका स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार कराने के निर्देश दिए। साथ ही राशन संबंधी समस्या का भी परीक्षण कराने कहा।
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    कलेक्ट्रेट शादी कराने की मांग को लेकर पहुंचा दिव्यांग, कलेक्टर से लगाई शादी कराए जाने की गुहार
दमोह। कलेक्ट्रेट में आज मंगलवार दोपहर 1 बजे आयोजित जनसुनवाई में एक अनोखा आवेदन सामने आया। तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र के बमोरी गांव निवासी 50 वर्षीय दिव्यांग नरेंद्र सिंह ठाकुर ने कलेक्टर प्रताप नारायण यादव से अपनी शादी कराने और राशन उपलब्ध कराने की मांग की। नरेंद्र ने बताया कि वह अनाथ है, कानों से कम सुनता है और चलने-फिरने में भी असमर्थ है। उसकी पहली पत्नी का वर्ष 2014 में निधन हो गया था, जिसके बाद से वह अकेले जीवन बिता रहा है।
जब अधिकारियों ने पूछा कि वह काम करने में सक्षम नहीं है तो विवाह कैसे होगा, इस पर नरेंद्र ने कहा, "जिस प्रकार अजगर और पक्षियों के भोजन की व्यवस्था भगवान करते हैं, उसी तरह मेरे लिए भी जीवनसाथी की व्यवस्था भगवान करेंगे।"
कलेक्टर ने उसकी पूरी बात गंभीरता से सुनी और जिला अस्पताल के प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह को बुलाकर उसका स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार कराने के निर्देश दिए। साथ ही राशन संबंधी समस्या का भी परीक्षण कराने कहा।
    user_Narendra Ahirwar
    Narendra Ahirwar
    संपर्क करें. 8839675073 दन्यांतिनगर, दमोह, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी | प्रेस नोट • वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को 10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल | • वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | • ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | • जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे दिन वहस में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14% ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | • वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |
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    प्रेस नोट
• वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को  10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल  | 
• वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | 
• ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक  रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | 
• जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे  दिन वहस  में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है  | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14%  ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया  की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | 
• वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |
प्रेस नोट
• वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में सामान्य वर्ग की 12.7% अवादी जिसमे EWS 1.5% अवादी को  10% आरक्षण 51% अवादी को मात्र 14-27% सरकार की दौहरी नीती पर उठाया गंभीर सबाल  | 
• वरिस्थ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में तथा सामान्य वर्ग का 8 लाख कमाने वाला गरीब की परिभाषा में | 
• ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में अलग-अलग याचिकाओ में स शाशंक  रंत्नू एवं पी विलशन की वहस समाप्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की वहस आरंभ उन्होंने मध्य प्रदेश में ओ.बी.सी. की पहचान के फार्मूले से हाईकोर्ट को कराया अवगत | 
• जबलपुर 03/8/2026 : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशन डिविजन के समक्ष आज तेरहवे  दिन वहस  में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रतनू तथा तमिलनाडू राज्य से राज्य सभा संसद तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पी.विल्शन ने ओ.बी.सी. वर्ग के आरक्षण के समर्थन में पक्ष रखा तत्पश्यत खंड पीठ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर से वहस करने का निर्देश दिया गया | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की समस्त अधिवक्ताओ ने सर्वोच्च न्यायालय के समस्त फैसलो से माननीय हाईकोर्ट को अवगत करा दिया गया है मै सिर्फ उन मुद्दों से कोर्ट को बताउगा जिनसे कोर्ट अभी तक अवेयर नही हुई है | वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर ने कोर्ट को सर्वप्रथम बताया की मध्य प्रदेश सरकार की और से पक्ष रखने सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता के.एम नटराज को हायर किया गया जिन्होंने अपनी वहस में बतया की ओ.बी.सी की पहचान का सरकार के पास कोई उपक्रम नही है , उन्होंने कोर्ट को नही बताया की आरक्षण का प्रतिशत का निर्धारण सरकार ने कैसे किया है  | वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने उक्त दोनों तर्कों का खंडन करते हुई कोर्ट को बतया की सरकार की और से समुचित पक्ष नही रखा गया है जैसे ओ.बी.सी. को सरकार से उम्मीद थी | उन्होंने सर्वप्रथम कोर्ट को बताया की प्रदेश में जुलाई 2019 के पूर्व कुल अरक्ष्ण 50% था 2 जुलाई 2019 को मध्य प्रदेश सरकार ने १०% ews को वर्टिकल रूप से लागू करके 50% की सीमा तोड़ दी गई है 14 अगस्त 2019 को ओ.बी.सी. के लिए 13% अतिरिक्त अरक्ष्ण देकर कुल आरक्षण 27% लागू किया गया | उन्होंने कोर्ट को बताया की जिस सरकार ने ओ.बी.सी. को 13% आरक्षण दिया गया था उसी सरकार ने अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में 555 पेज का जबाब दाखिल करके इसे जस्टिफाई किया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तुत जनसंख्या के आकडे के मुताविक प्रदेश में एस.सी. 15.6% एस.टी. 21.14%  ओ.बी.सी. 51% इस प्रकार कुल आवादी 87.7% आरक्षित वर्ग की शेष आवादी 12.3% सामान्य वर्ग की आवादी है | उन्होंने कोर्ट को बताया की संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में ews के लिए अधिकतम १०% आरक्षण की व्यवस्था की गई है जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने बिना किसी डेटा कलेक्ट किए १०% लागू कर दिया तथा एस.सी. एस.ती. एवं ओ.बी.सी. को ews से प्रथक कर दिया गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया  की 8 लाख कमाने बाला ओ.बी.सी. मलाईदार परत में माना जाता है जिसे ओ.बी.सी. का लाभ नहीं मिलता वही दूसरी ओर 8 लाख कमाने वाला सामान्य वर्ग का गरीब माना जाता है | उन्होंने कोर्ट को बताया की 12.3% अवादी में से अधिकतम 1.5% आवादी है जो ews की परिधि में आता है जिसे सरकार ने १०% अरक्ष लागू कर दिया गया है | उन्होंने कोर्ट को बताया की ews आरक्षण लागू करने के संवंध में इसी हाईकोर्ट का फैसला है जिसमे स्पष्ट किया गया है की अनारक्षित पदों में से १०% पद ews को दिए जाना चाहिए लेकिन सरकार कुल पदों में से ews को १०% पद आरक्षित कर रही है जिसके कारण प्रत्येक वर्ग को १०% पदों की क्षति हो रही है | उन्होंने कोर्ट को बताया की अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) रीड करने से स्पष्ट है की ews का लाभ सभी वर्गों को मिलना चाहिए लेकिन सरकार इसका त्रुटिपूर्ण रूप से लागू कर रही है | 
• वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया की प्रदेश में जितनी भी ओ.बी.सी. की जातिया अधोसूचित है वो सभी जातिया हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में शूद्र वर्ण में समाहित की गई है उन्होंने मनु सहिता , भरगु सहिता, व्यास स्मृति, पंतांजलि, महाभारत, रामायण आदि का हवाला दिया उन्होंने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया की महाजन आयोग ने समस्त दर्मिक ग्रंथो का अबलोकन करके प्रदेश में 92 जातियों को ओ.बी.सी. की लिस्ट में जोड़ा गया है उन्होंने बताया की शूद्र में भी दो प्रकार है एक छूने योग्य अर्थात जिनके वर्तन से द्विज पानी पी सकता है दूसरा अछूत वर्ग जिसे छूने की भी स्पष्ट मनाही थी | उन्होंने कोर्ट को बताया की कृषक, शिल्पकार, नाइ, धोबी, तेली आदि कई व्योसाय करने बाली जातीय है जिन्हें हिन्दू धर्म ग्रंथो में शूद्र बताया गया है तथा उन्हें केवल तीन वर्णों की सेवा करने तथा दास बनाने का ग्रंथो में लेख किया गया है | इस वर्ग को हजारो वर्षो तक शिक्षा, संपत्ति तथा वैदिक धामिक अनुष्ठानो से बंचित रखा गया है | वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया की ओ.बी.सी. वर्ग में होमोजीनियास को क्रमीलेयर के रूप में आरक्षण के लाभ से प्रथक कर दिया गया है | आज समय समाप्त होते ही कोर्ट ने उक्त समस्त मामलो की अगली सुनवाई कल दिनांक 4/8/26 को 2:30 से नियमित सुनवाई करेगी |
    user_मानवाधिकार  भारतीय
    मानवाधिकार भारतीय
    Lawyer Bahoriband, Katni•
    26 min ago
  • सतरिया में शराबी युवक पर दहशत फैलाने का आरोप,वातावरण के बीच कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शराब के नशे में उत्पात मचाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंजू पांडे उर्फ अनुज पांडे आए दिन सतरिया में शराबी युवक पर दहशत फैलाने का आरोप दमोह जिले की ग्राम पंचायत सतरिया में नशामुक्त वातावरण के बीच कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शराब के नशे में उत्पात मचाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंजू पांडे उर्फ अनुज पांडे आए दिन शराब पीकर लोगों के साथ गाली-गलौज करता है और नाम लेकर जान से मारने की खुलेआम धमकी देता है। इससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई करने और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
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    सतरिया में शराबी युवक पर दहशत फैलाने का आरोप,वातावरण के बीच कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शराब के नशे में उत्पात मचाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंजू पांडे उर्फ अनुज पांडे आए दिन
सतरिया में शराबी युवक पर दहशत फैलाने का आरोप
दमोह जिले की ग्राम पंचायत सतरिया में नशामुक्त वातावरण के बीच कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शराब के नशे में उत्पात मचाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंजू पांडे उर्फ अनुज पांडे आए दिन शराब पीकर लोगों के साथ गाली-गलौज करता है और नाम लेकर जान से मारने की खुलेआम धमकी देता है। इससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई करने और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
    user_Reeport 100
    Reeport 100
    Artist पटेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • दतिया चुनाव पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रतिक्रिया...
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    दतिया चुनाव पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रतिक्रिया...
    user_भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    Photographer जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • दमोह यातायात नियमों के पालन हेतु पुलिस कर्मियों पर भी की गई चालानी कार्यवाही
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    दमोह 
यातायात नियमों के पालन हेतु पुलिस कर्मियों पर भी की गई चालानी कार्यवाही
    user_सचिन सिंह राजपूत  प्रदेश समय
    सचिन सिंह राजपूत प्रदेश समय
    Court reporter पटेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
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