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होली के अवसर पर कटनी जिले की समुचित सुदृढ़ पुलिस व्यवस्था पूरा मामला कटनी के अति व्यस्ततम चौक सुभाष चौक की है जहां पर मदमस्त मतवाली मानव के द्वारा शराब पीते हुए गाने की धुन पर नाचता गाता थिरक्त जहां पर ड्यूटी पर मुझे पुलिस के जवान नादारत दिखाई पड़े न जाने कहां जाकर ड्यूटी कर रहे थे
प्रधान संपादक Rudradatt Pande
होली के अवसर पर कटनी जिले की समुचित सुदृढ़ पुलिस व्यवस्था पूरा मामला कटनी के अति व्यस्ततम चौक सुभाष चौक की है जहां पर मदमस्त मतवाली मानव के द्वारा शराब पीते हुए गाने की धुन पर नाचता गाता थिरक्त जहां पर ड्यूटी पर मुझे पुलिस के जवान नादारत दिखाई पड़े न जाने कहां जाकर ड्यूटी कर रहे थे
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- रंगों से रोशन हुए चेहरे: ‘दृष्टि ए विजन’ ने बस्ती में बिखेरी मुस्कान, देवदूतों संग मनाई अनोखी होली कटनी। होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि खुशियों को बांटने का नाम है — और इसी भावना को साकार किया दृष्टि ए विजन एनजीओ ने। प्रतिवर्ष की परंपरा को निभाते हुए इस वर्ष भी संस्था की चेयरपर्सन सुश्री रजनी वर्मा के नेतृत्व में टीम ने बस्ती में पहुंचकर बच्चों के साथ रंगों का उत्सव मनाया। बस्ती में जैसे ही रंग, गुलाल और पिचकारियों की बरसात हुई, बच्चों के चेहरे खिल उठे। एनजीओ द्वारा बच्चों को रंग, गुलाल, पिचकारी, टोपी, मास्क, चॉकलेट, चिप्स और अन्य खाद्य सामग्री वितरित की गई। छोटे-छोटे हाथों में पिचकारी और चेहरों पर रंगों की चमक ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया। बच्चों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। कुछ बच्चों ने पहली बार इस तरह सामूहिक रूप से होली मनाई, जिससे उनकी खुशी दोगुनी हो गई। 🎯 सेवा और संस्कार का संगम एनजीओ के सचिव मनोज वर्मा ने बताया कि संस्था द्वारा हर प्रमुख त्योहार पर अलग-अलग बस्तियों में पहुंचकर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि जरूरतमंद बच्चों और परिवारों को भी त्योहार की असली खुशी मिल सके। चेयरपर्सन रजनी वर्मा ने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य बेजुबान जीवों की सेवा के साथ-साथ उन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से शिक्षा और बचपन की खुशियों से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने बताया कि संस्था महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। 🤝 समाज से अपील कार्यक्रम में संस्था के सदस्य — सुमन रजक, मंजू रजक, आदिता वर्मा, संजय ग्रोवर, दिग्विजय सिंह, संजय गुप्ता, अभिषेक शिवहरे, मंगल सिंह, उदय सिंह, अभय खरे, दीपक चौधरी, शशांक वर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने समाज के सक्षम लोगों से अपील की कि वे आगे आकर ऐसे नेक कार्यों में सहभागिता करें और संस्था से जुड़कर जरूरतमंदों की मदद में भागीदार बनें। ✨ इस होली, रंग सिर्फ चेहरों पर नहीं, बल्कि दिलों में भी लगे — और यही बनी ‘दृष्टि ए विजन’ की सबसे बड़ी जीत।2
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- सतना जिला चित्रकूट पद्मश्री डॉ बीके जैन पंचतत्व में हुए विलीन राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई सलामी एवं गार्ड ऑफ आनर के साथ दी गई अंतिम विदाई जिस तपोभूमि पर अपनी सेवा का पूरा जीवन अर्पित किया उसी तपोभूमि की धरा पर हुए विलीन चित्रकूट, परम पूज्य संत रणछोड़ दास जी के कर कमलों द्वारा स्थापित श्री सदगुरू सेवा संघ के ट्रस्टी एवं सदगुरू नेत्र चिकित्सालय के निदेशक पद्मश्री से अलंकृत लाखों लोगों के जीवन में उजला प्रदान करने वाले डॉ बी के जैन आज उसी चित्रकूट की तपोभूमि धरा पर पंचतत्व में विलीन हो गए जिस तपोभूमि को उन्होंने अपना पूरा जीवन अर्पित किया था।अंधकार में डूबी असंख्य आंखों को रोशनी देने वाला एक तपस्वी नेत्र चिकित्सक अब स्वयं अनंत ज्योति में विलीन हो गया। डॉ जैन की अंतिम यात्रा चिकित्सालय परिसर रघुवीर मंदिर होते हुए एसपीएस ग्राउंड में पहुंची जहां उनको तिरंगे के साथ गार्ड ऑफ सलामी दी गई।इस मौके पर जिलाधिकारी सतना पुलिस अधीक्षक सतना, पुलिस अधीक्षक चित्रकूट, विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार सहित तमाम जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक धर्म नगरी के सभी साधु संत, आम जनमानस सहित सदगुरु परिवार के लगभग सभी ट्रस्टीगण, गुरु भाई बहन, डॉ जैन के सभी परिवारिक जन ,रिश्तेदार सहित सदगुरु परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे।उनके दोनों पुत्र जिनेश जैन एवं डॉ इलेश जैन ने उन्हें मुखाग्नि दी। आपको बता दे कि 27 फरवरी 2026 को डॉ जैन का गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया था पिछले कई महीनों से अस्वस्थ्य थे और मुंबई में उनका इलाज चल रहा था।उनके मार्गदर्शन में चित्रकूट तपोभूमि पर तारा नेत्र दान यज्ञ के रूप में सेवा का जो बीज जो बोया गया था वह आज विशाल वटवृक्ष बन चुका है।उनके निधन से चित्रकूट सहित समूचे विंध्य अंचल में शोक की लहर दौड़ गई, संत समाज, समाज सेवी सेवी,जनप्रतिनिधि ,आम जनमानस सहित समस्त सदगुरू परिवार ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि के साथ अंतिम विदाई दी उनकी अंतिम विदाई में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सतना जिले में जन्मे डॉ जैन ने प्रारंभिक शिक्षा शासकीय व्यंकट क्रमांक -1 विद्यालय से प्राप्त की थी, वर्ष 1973 में श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय ,रीवा से चिकित्सा स्नातक तथा 1979 में लोकमान्य तिलक चिकित्सा महाविद्यालय , सायन से नेत्र रोग में स्नाकोत्तर उपाधि प्राप्त की थी। स्नाकोत्तर के बाद उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग खुला था मगर उन्होंने सुविधा नहीं बल्कि सेवा का मार्ग चुना और 1970 में चित्रकूट पहुंचे जहां स्वास्थ्य सुविधाएं अत्यंत सीमित थी।परम पूज्य रणछोड़ दास जी महाराज के आशीर्वाद से शुरू तारा नेत्रदान यज्ञ ने चित्रकूट क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में नेत्र चिकित्सा की एक नई क्रांति ला दी थी।टेंट और टीन शेड के नीचे प्रारंभ हुए शिविर आज सुव्यवस्थित स्थापित किए गए लाखों नेत्र रोगियों के उपचार के माध्यम से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के तमाम जिलों को मोतियाबिंद मुक्त घोषित कराने में डॉ जैन ने महत्व महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।चिकित्सा और अंधत्व निवारण के क्षेत्र में उनके अद्वतीय योगदान देने के लिए उनको देश विदेश में कई अवार्डों से सम्मानित किया गया और इसी अद्वतीय योगदान के लिए उन्हें 27 मई 2025 को देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु ने उन्हें पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित किया था। उनकी अंतिम विदाई में बिलख उठे परिजन पत्नी ऊषा जैन, पुत्र जिनेश जैन,इलेश जैन, बहू श्रुति जैन, मौसम जैन, पौत्र पौत्री प्रियांश जैन, निर्वाण जैन, अर्णव जैन और अरिहा जैन समेत पूरा परिवार। वहां मौजूद हजारों लोग इस दृश्य को देखकर स्वयं को संभाल नहीं सके।उनकी अंतिम विदाई गार्ड ऑफ ऑनर में पुलिस ने शस्त्र झुकाएं।1
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