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नगर पालिक निगम सिंगरौली की परिषद की बैठक में हंगामेदार बहस करते सत्ता और विपक्ष के सम्माननीय पार्षदगण।
Arvind Kumar Mishra
नगर पालिक निगम सिंगरौली की परिषद की बैठक में हंगामेदार बहस करते सत्ता और विपक्ष के सम्माननीय पार्षदगण।
- JITENDRA KUMAR BIYARसिंगरौली, सिंगरौली, मध्य प्रदेशहमारी प्यारी ननद की शादी में हम लोग बहुत इंजॉय और बहुत मजा आया कमेंट कीजिए लाइक कीजिए सपोर्ट कीजिए12 hrs ago
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- Post by Arvind Kumar Mishra1
- बेजुबान जानवर गांवों की ओर भागे, बेशकीमती वन संपदा खाक; क्या सिर्फ बारिश के भरोसे है प्रशासन? सी न्यूज़ संवाददाता विशेष | सिंगरौली (देवसर) सिंगरौली जिले के देवसर परिक्षेत्र में आग का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। छीवा और अकोरी गांवों से सटे पहाड़ों में लगी भीषण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। धुआं और लपटें इतनी तेज हैं कि दूर से ही तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं। गांवों की ओर पलायन कर रहे वन्यजीव। जंगलों में लगी इस बेकाबू आग के कारण प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। जान बचाने के लिए बेजुबान जानवर अब रिहाइशी इलाकों और गांवों की ओर भागने को मजबूर हैं। इससे न केवल वन्यजीवों की जान खतरे में है, बल्कि ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल बना हुआ है। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। करोड़ों की वन संपदा हो रही राख। देवसर का यह पहाड़ी इलाका जैव विविधता से समृद्ध है। आग की चपेट में आने से बेशकीमती पेड़-पौधे और जड़ी-बूटियां जलकर खाक हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने की सूचना के घंटों बाद भी वन अमला मौके पर नहीं पहुँचा। ऐसा लग रहा है मानो साहब को जंगल की फिक्र नहीं है और वे केवल मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि आग अपने आप बुझ जाए। मुख्य बिंदु: प्रशासन से उठते सवाल? १. निगरानी तंत्र फेल: जब जंगल धधक रहे थे, तब फायर वॉचर्स और मैदानी अमला कहाँ था? २. संसाधनों का अभाव: क्या विभाग के पास आग बुझाने के आधुनिक उपकरण नहीं हैं या इच्छाशक्ति की कमी है? कलेक्टर से गुहार: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिंगरौली कलेक्टर से मांग की है कि मामले में तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और आग पर काबू पाया जाए। "जंगल की आग ने विकराल रूप ले लिया है। हम डरे हुए हैं कि कहीं आग बस्तियों तक न पहुँच जाए। अधिकारी फोन नहीं उठा रहे, हम किसके भरोसे रहें?" — एक स्थानीय ग्रामीण — प्रशासनिक अपडेट का इंतजार: इस पूरे मामले में अब सबकी नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या देवसर के जंगलों को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या इसी तरह सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ती रहेगी हमारी प्रकृति?8
- राजस्थान रिंगस में आप लोग जाइए और अपना हाजिरी लगाइए खाटू श्याम आप लोगों की इच्छा सब पूरा करेंगे ओम श्री श्याम देवाय नमः हर के सहारे की जय हो जय श्री श्याम1
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