10 साल से मौ.t के साए में जी रहे ग्रामीण, सिस्टम फेल देखिए कैसे चलता है घूसखोरी का खेल? गांव के ग्रामीण पिछले 10 साल से मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। खेतों के बीच बिजली का तार बेहद खतरनाक तरीके से नीचे लटक रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बार-बार शिकायतों के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए भी उन्हें घूस देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आखिर क्यों सोया हुआ है प्रशासन? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा सिस्टम? इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए कैसे लापरवाही और भ्रष्टाचार के बीच फंसे हैं गांव के किसान और आम लोग। 10 साल से मौ.t के साए में जी रहे ग्रामीण, सिस्टम फेल देखिए कैसे चलता है घूसखोरी का खेल? गांव के ग्रामीण पिछले 10 साल से मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। खेतों के बीच बिजली का तार बेहद खतरनाक तरीके से नीचे लटक रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बार-बार शिकायतों के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए भी उन्हें घूस देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आखिर क्यों सोया हुआ है प्रशासन? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा सिस्टम? इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए कैसे लापरवाही और भ्रष्टाचार के बीच फंसे हैं गांव के किसान और आम लोग।#
10 साल से मौ.t के साए में जी रहे ग्रामीण, सिस्टम फेल देखिए कैसे चलता है घूसखोरी का खेल? गांव के ग्रामीण पिछले 10 साल से मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। खेतों के बीच बिजली का तार बेहद खतरनाक तरीके से नीचे लटक रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बार-बार शिकायतों के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए भी उन्हें घूस देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आखिर क्यों सोया हुआ है प्रशासन? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा सिस्टम? इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए कैसे लापरवाही और भ्रष्टाचार के बीच फंसे हैं गांव के किसान और आम लोग। 10 साल से मौ.t के साए में जी रहे ग्रामीण, सिस्टम फेल देखिए कैसे चलता है घूसखोरी का खेल? गांव के ग्रामीण पिछले 10 साल से मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। खेतों के बीच बिजली का तार बेहद खतरनाक तरीके से नीचे लटक रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बार-बार शिकायतों के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए भी उन्हें घूस देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आखिर क्यों सोया हुआ है प्रशासन? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा सिस्टम? इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए कैसे लापरवाही और भ्रष्टाचार के बीच फंसे हैं गांव के किसान और आम लोग।#
- 10 साल से मौ.t के साए में जी रहे ग्रामीण, सिस्टम फेल देखिए कैसे चलता है घूसखोरी का खेल? गांव के ग्रामीण पिछले 10 साल से मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। खेतों के बीच बिजली का तार बेहद खतरनाक तरीके से नीचे लटक रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बार-बार शिकायतों के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए भी उन्हें घूस देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आखिर क्यों सोया हुआ है प्रशासन? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा सिस्टम? इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए कैसे लापरवाही और भ्रष्टाचार के बीच फंसे हैं गांव के किसान और आम लोग।#1
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- Post by Rameshwar sahu1
- 9.90 लाख रुपए के साइबर फ्रॉड मामले में महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने मैहर के रामनगर में कार्रवाई की है। पुलिस टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों—आशू खरे और अमित पटेल—को गिरफ्तार कर महाराष्ट्र ले गई है। जांच में सामने आया कि फ्रॉड की रकम का हिस्सा दोनों के खातों में ट्रांसफर हुआ था। फिलहाल पुलिस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।1
- द बिरनपुर फाइल्स एक छत्तीसगढ़ी फिल्म है, जो 2023 में बेमेतरा जिले के बिरनपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर आधारित है। इस हिंसा में विधायक ईश्वर साहू के बेटे भुनेश्वर साहू की मौत हो गई थी। फिल्म का उद्देश्य इस घटना के पीछे की सच्चाई को उजागर करना और समाज में संदेश देना है कि सत्य की जीत होती है । फिल्म के निर्माता हेमलाल चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने इस फिल्म को बनाने के लिए विधायक ईश्वर साहू और उनके परिवार से अनुमति ली थी। फिल्म में मुख्य भूमिका बालोद जिले के प्रतिभाशाली अभिनेता पवन गांधी ने निभाई है, जो विधायक ईश्वर साहू का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म की रिलीज से पहले ही विवाद हो गया था, और फिल्म के कलाकारों और निर्देशक को धमकियां मिली थीं। लेकिन फिल्म 3 अप्रैल 2026 को रिलीज हो गई है, और इसे 16 वर्ष से अधिक आयु के दर्शकों के लिए ही प्रदर्शित किया जा रहा है ।1
- श्यामपुर,लक्ष्मणपुर में सीईओ का निरीक्षण, आवास निर्माण में तेजी के निर्देश, 4 अप्रैल शनिवार को सुबह साढ़े 11 बजे मिली जानकारी अनुसार जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल ने छुईखदान के श्यामपुर व लक्ष्मणपुर में पीएम आवास व मनरेगा कार्यों का निरीक्षण किया गया। अधूरे आवासों को जल्द पूरा करने और अप्रारंभ कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए। लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। गरीब हितग्राहियों को सहायता, लंबित दस्तावेज, ई केवाईसी व भुगतान प्रक्रिया एक सप्ताह में पूर्ण करने को कहा गया।1
- Post by CG RIGHT TIMES NEWS1
- *🌹मैहर पुलिस का अमानवीय चेहरा: लापता महिला की तलाश के बदले मांगे 6000 रुपये, SI पर अभद्रता का आरोप।💥* मैहर - नवनियुक्त जिले मैहर में खाकी एक बार फिर दागदार हुई है। एक ओर जहां प्रदेश सरकार पुलिस को मित्रवत व्यवहार की सीख दे रही है, वहीं मैहर थाने में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे एक पीड़ित परिवार को अपमान और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा। थाने में तैनात उपनिरीक्षक (SI) आर.एन. साकेत पर परिजनों के साथ अभद्रता करने और महिला की तलाश के एवज में रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला मैहर थाना क्षेत्र के हरनामपुर (वार्ड नंबर 14) का है। 31 मार्च 2026 की रात हरनामपुर निवासी टीमन दाहिया उर्फ पवन ने अपनी पत्नी सुधा दाहिया के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस घटना के बाद से ही सुधा दाहिया संदिग्ध परिस्थितियों में घर से गायब हैं। जब सुधा के मायके पक्ष के लोग सतना से उसकी तलाश में मैहर पहुंचे और पुलिस से मदद मांगी, तो उन्हें व्यवस्था की कड़वाहट का अहसास हुआ। परिजनों का आरोप है कि 2 अप्रैल को जब वे शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो SI आर.एन. साकेत ने सहानुभूति दिखाने के बजाय उनके साथ बेहद अभद्र भाषा का प्रयोग किया। काफी जद्दोजहद और थाना प्रभारी के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज किया जा सका। हैरान कर देने वाला मोड़ तब आया जब 3 अप्रैल को पीड़ित परिवार के पास मैहर थाने से जुड़े एक मोबाइल नंबर (8962555074) से कॉल आया। आरोप है कि फोन करने वाले व्यक्ति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "6000 रुपये दोगे, तभी आगे की कार्यवाही होगी और महिला की तलाश की जाएगी।" इस घटना ने मैहर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अब लापता व्यक्तियों को ढूंढने के लिए भी पुलिस को 'फीस' देनी होगी? पीड़ित परिवार के साथ अभद्रता करने वाले अधिकारी पर क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी? वह मोबाइल नंबर किसका है जिससे रिश्वत की मांग की गई? परिजनों ने उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस भ्रष्टाचार के खेल की निष्पक्ष जांच की जाए, दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो और जल्द से जल्द लापता सुधा दाहिया का पता लगाया जाए।1