शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने दिया ज्ञापन बारा से शाहाबाद तक वाहन रैली निकालकर राष्ट्रपति के नाम एडीएम को सोपा ज्ञापन शाहाबाद। शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के प्रशान्त पाटनी एडवोकेट सहित अन्य लोगों ने महामहिम राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मू जी के नाम का ज्ञापन शाहाबाद अतिरिक्त जिला कलेक्टर को सौंपा जिसमें शाहबाद, जिला बारां के कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट के घने जंगल में ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित बिजली परियोजना (पंप्ड स्टोरेज प्लांट) के लिए लाखों पेड़ों की कटाई रोकने एवं बिजली परियोजना को अन्यत्र स्थापित करने की मांग कीगई। ज्ञापन के अनुसार शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, देशभर के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और क्षेत्र के निवासी राजस्थान के बारां जिले में स्थित 'शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट' के अस्तित्व पर मंडरा रहे गंभीर संकट की ओर ध्यान आकृष्ट कर। इस जंगल में 'ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा एक पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो इस पूरे वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नष्ट कर देगा। इस विनाशकारी परियोजना से होने वाले नुकसान और इसके विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: 1. लाखों पेड़ों की कटाई और जैव विविधता का विनाशः इस परियोजना के लिए 408 हेक्टेयर वन भूमि तथा अतिरिक्त 200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसके निर्माण में लगभग 5 लाख हरे पेड़ों की कटाई होगी। इसके कारण होने वाली औद्योगिक गतिविधियों से लगभग 1000 वर्ग किलोमीटर का जंगल क्षेत्र सीधे तौर पर खतरे में आ जाएगा। देश में पाए जाने वाले 450 औषधीय पौधों में से 332 प्रजातियों, दुर्लभ सिलेजिनेला पौधे, और IUCN की रेड लिस्ट में शामिल अनेक पादप एवं जीव जन्तुओं की कई संकटग्रस्त प्रजातियों केवल इसी जंगल में पाई जाती हैं। यहाँ गिद्ध जैसे लुप्तप्राय पक्षी आज भी नेस्टिंग करते हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट के जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभाव अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन हैं। वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत आरक्षित वन क्षेत्र का उपयोग गैर-वन प्रयोजनों के लिए अवैध है। शाहबाद जंगल केवल राजस्थान की ही नहीं बल्कि पूरे देश की पर्यावरणीय धरोहर है। बिजली परियोजनाएं किसी वैकल्पिक स्थान पर लगाई जा सकती हैं, लेकिन सदियों में विकसित हुए प्राकृतिक जंगल का कोई विकल्प नहीं है ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि राष्ट्रीय हित, जैव विविधता, वन्यजीव (विशेषकर चीता प्रोजेक्ट), भूमिगत वर्षा जल संरक्षण और सहरिया जनजाति के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इसके अलावा भी महत्वपूर्ण यह है कि राजस्थान में देश में सर्वाधिक कम 9.6 प्रतिशत भूभाग पर ही जंगल हैं इन्हें अब और अधिक क्षति नहीं पहुंचाई जा सकती। ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की इस प्रस्तावित परियोजना को तुरंत निरस्त करने या इसे किसी अन्य गैर-वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के निर्देश प्रदान करने की कृपा करें, ताकि देश को ग्लोबल वार्मिंग एवं क्लाइमेट चेंज के खतरों से बचाया जा सके। ज्ञापन देने वाले बालों में रोबिन सिंह, प्रशांत पाटनी, गब्बर सहित, शशांक, धनराज मीणा, परमानंद सहित दर्जनों पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने दिया ज्ञापन बारा से शाहाबाद तक वाहन रैली निकालकर राष्ट्रपति के नाम एडीएम को सोपा ज्ञापन शाहाबाद। शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के प्रशान्त पाटनी एडवोकेट सहित अन्य लोगों ने महामहिम राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मू जी के नाम का ज्ञापन शाहाबाद अतिरिक्त जिला कलेक्टर को सौंपा जिसमें शाहबाद, जिला बारां के कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट के घने जंगल में ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित बिजली परियोजना (पंप्ड स्टोरेज प्लांट) के लिए लाखों पेड़ों की कटाई रोकने एवं बिजली परियोजना को अन्यत्र स्थापित करने की मांग कीगई। ज्ञापन के अनुसार शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, देशभर के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और क्षेत्र के निवासी राजस्थान के बारां जिले में स्थित 'शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट' के
अस्तित्व पर मंडरा रहे गंभीर संकट की ओर ध्यान आकृष्ट कर। इस जंगल में 'ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा एक पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो इस पूरे वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नष्ट कर देगा। इस विनाशकारी परियोजना से होने वाले नुकसान और इसके विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: 1. लाखों पेड़ों की कटाई और जैव विविधता का विनाशः इस परियोजना के लिए 408 हेक्टेयर वन भूमि तथा अतिरिक्त 200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसके निर्माण में लगभग 5 लाख हरे पेड़ों की कटाई होगी। इसके कारण होने वाली औद्योगिक गतिविधियों से लगभग 1000 वर्ग किलोमीटर का जंगल क्षेत्र सीधे तौर पर खतरे में आ जाएगा। देश में पाए जाने वाले 450 औषधीय पौधों में
से 332 प्रजातियों, दुर्लभ सिलेजिनेला पौधे, और IUCN की रेड लिस्ट में शामिल अनेक पादप एवं जीव जन्तुओं की कई संकटग्रस्त प्रजातियों केवल इसी जंगल में पाई जाती हैं। यहाँ गिद्ध जैसे लुप्तप्राय पक्षी आज भी नेस्टिंग करते हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट के जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभाव अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन हैं। वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत आरक्षित वन क्षेत्र का उपयोग गैर-वन प्रयोजनों के लिए अवैध है। शाहबाद जंगल केवल राजस्थान की ही नहीं बल्कि पूरे देश की पर्यावरणीय धरोहर है। बिजली परियोजनाएं किसी वैकल्पिक स्थान पर लगाई जा सकती हैं, लेकिन सदियों में विकसित हुए प्राकृतिक जंगल का कोई विकल्प नहीं है ज्ञापन के माध्यम से
मांग की है कि राष्ट्रीय हित, जैव विविधता, वन्यजीव (विशेषकर चीता प्रोजेक्ट), भूमिगत वर्षा जल संरक्षण और सहरिया जनजाति के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इसके अलावा भी महत्वपूर्ण यह है कि राजस्थान में देश में सर्वाधिक कम 9.6 प्रतिशत भूभाग पर ही जंगल हैं इन्हें अब और अधिक क्षति नहीं पहुंचाई जा सकती। ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की इस प्रस्तावित परियोजना को तुरंत निरस्त करने या इसे किसी अन्य गैर-वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के निर्देश प्रदान करने की कृपा करें, ताकि देश को ग्लोबल वार्मिंग एवं क्लाइमेट चेंज के खतरों से बचाया जा सके। ज्ञापन देने वाले बालों में रोबिन सिंह, प्रशांत पाटनी, गब्बर सहित, शशांक, धनराज मीणा, परमानंद सहित दर्जनों पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।
- शाहाबाद। शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के प्रशान्त पाटनी एडवोकेट सहित अन्य लोगों ने महामहिम राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मू जी के नाम का ज्ञापन शाहाबाद अतिरिक्त जिला कलेक्टर को सौंपा जिसमें शाहबाद, जिला बारां के कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट के घने जंगल में ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित बिजली परियोजना (पंप्ड स्टोरेज प्लांट) के लिए लाखों पेड़ों की कटाई रोकने एवं बिजली परियोजना को अन्यत्र स्थापित करने की मांग कीगई। ज्ञापन के अनुसार शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, देशभर के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और क्षेत्र के निवासी राजस्थान के बारां जिले में स्थित 'शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट' के अस्तित्व पर मंडरा रहे गंभीर संकट की ओर ध्यान आकृष्ट कर। इस जंगल में 'ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा एक पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो इस पूरे वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नष्ट कर देगा। इस विनाशकारी परियोजना से होने वाले नुकसान और इसके विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: 1. लाखों पेड़ों की कटाई और जैव विविधता का विनाशः इस परियोजना के लिए 408 हेक्टेयर वन भूमि तथा अतिरिक्त 200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसके निर्माण में लगभग 5 लाख हरे पेड़ों की कटाई होगी। इसके कारण होने वाली औद्योगिक गतिविधियों से लगभग 1000 वर्ग किलोमीटर का जंगल क्षेत्र सीधे तौर पर खतरे में आ जाएगा। देश में पाए जाने वाले 450 औषधीय पौधों में से 332 प्रजातियों, दुर्लभ सिलेजिनेला पौधे, और IUCN की रेड लिस्ट में शामिल अनेक पादप एवं जीव जन्तुओं की कई संकटग्रस्त प्रजातियों केवल इसी जंगल में पाई जाती हैं। यहाँ गिद्ध जैसे लुप्तप्राय पक्षी आज भी नेस्टिंग करते हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट के जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभाव अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन हैं। वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत आरक्षित वन क्षेत्र का उपयोग गैर-वन प्रयोजनों के लिए अवैध है। शाहबाद जंगल केवल राजस्थान की ही नहीं बल्कि पूरे देश की पर्यावरणीय धरोहर है। बिजली परियोजनाएं किसी वैकल्पिक स्थान पर लगाई जा सकती हैं, लेकिन सदियों में विकसित हुए प्राकृतिक जंगल का कोई विकल्प नहीं है ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि राष्ट्रीय हित, जैव विविधता, वन्यजीव (विशेषकर चीता प्रोजेक्ट), भूमिगत वर्षा जल संरक्षण और सहरिया जनजाति के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इसके अलावा भी महत्वपूर्ण यह है कि राजस्थान में देश में सर्वाधिक कम 9.6 प्रतिशत भूभाग पर ही जंगल हैं इन्हें अब और अधिक क्षति नहीं पहुंचाई जा सकती। ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की इस प्रस्तावित परियोजना को तुरंत निरस्त करने या इसे किसी अन्य गैर-वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के निर्देश प्रदान करने की कृपा करें, ताकि देश को ग्लोबल वार्मिंग एवं क्लाइमेट चेंज के खतरों से बचाया जा सके। ज्ञापन देने वाले बालों में रोबिन सिंह, प्रशांत पाटनी, गब्बर सहित, शशांक, धनराज मीणा, परमानंद सहित दर्जनों पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।4
- लव जिहाद के खिलाफ हिंदू संगठनों ने उपखंड अधिकारी को सोपा ज्ञापन छीपाबड़ौद - बारां छीपाबड़ौद कस्बे में कथित तौर पर लव जिहाद रैकेट का मामला सामने आया है जिसको लेकर छीपाबड़ौद सर्व हिंदू समाज ने छीपाबड़ौद उप जिला कलेक्टर अभिमन्यु सिंह कुंतल को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि एक युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने की घटना सामने आई, जिसे बाद में पुलिस की मदद से बरामद कर लिया गया। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि मामले से जुड़े कुछ तथ्यों को लेकर समाज में असंतोष है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही कस्बे में संचालित एक संस्था की गतिविधियों पर भी सवाल उठाते हुए उसकी जांच कराने की मांग रखी गई है। समाज के लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। इस दौरान विभिन्न हिन्दू संगठनो के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।4
- हरनावदाशाहजी. कस्बे में पहली बार दूधिया रोशनी में होने जा रहे नाईट क्रिकेट टूर्नामेंट को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। आयोजक समिति मैदान समतलीकरण के साथ पिच तैयार करवाने में जुटी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार छीपाबड़ौद मार्ग स्थित खेल मैदान में 23 मार्च से खेल प्रतियोगिता की शुरुआत होगी। टेनिस बॉल से आयोजित प्रतियोगिता में सभी मैच रात्रिकालीन होंगे। आयोजक समिति ने बताया कि प्रतियोगिता में विजेता टीम के लिए 71 हजार रुपए एवं उपविजेता के लिए 31 हजार रुपए की राशि निर्धारित की है जबकि भाग लेने वाली टीमों के लिए एंट्री फीस 2500 रुपए रखे हैं। प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले एक खिलाड़ी को मेन ऑफ दी सीरीज एवं बेस्ट बॉलर का चयन कर ट्रॉफी दी जाएगी। कस्बे में पहली बार हो रही नाईट क्रिकेट प्रतियोगिता को लेकर पिछले एक सप्ताह से तैयारियां की जा रही है। उबड खाबड मैदान को जेसीबी से समतल करवा कर सीमेंटेड पिच बनवाई है।3
- Post by Noshad ahmad qureshi1
- Post by अप्सरा अंसारी जिलाप्रभारी कोटा उत्तर महिला कांग्रेस सेवादल Ansari2
- Post by बंटी कुमार सहरिया1
- कोटा शहर में एक बार फिर शिक्षा की रौनक लौटती नजर आ रही है। मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं का रुझान दोबारा कोटा की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट: कोटा शहर में इन दिनों कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए देशभर से छात्र-छात्राएं फिर से कोटा का रुख कर रहे हैं। कोचिंग हब के रूप में पहचान रखने वाले कोटा में लंबे समय बाद फिर से रौनक लौटती नजर आ रही है। विभिन्न कोचिंग संस्थानों में छात्रों की भीड़ बढ़ने लगी है, जिससे शहर की आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। छात्रों का कहना है कि कोटा में बेहतर शिक्षण व्यवस्था, अनुभवी फैकल्टी और प्रतियोगी माहौल उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित करता है। वहीं अभिभावक भी कोटा को अभी भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक भरोसेमंद केंद्र मानते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कोटा में छात्रों की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे एक बार फिर शहर अपनी पुरानी पहचान के साथ पूरी तरह सक्रिय होता नजर आए गा कोटा शैक्षणिक नगरी3
- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 95वीं शहादत वर्षगांठ पर निकाली प्रभात फेरी -माकपा, सीटू, किसान सभा और नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि -विचार गोष्ठी का किया आयोजन इटावा/ कोटा। कोटा जिले के इटावा में सोमवार को शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के 95 वें शहादत दिवस (23 मार्च) पर जोरदार प्रभात फेरी निकाली गई। मजदूर बस्तियों से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से गुजरती यह फेरी शहीद भगत सिंह स्मारक पर समाप्त हुई, जहां प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यकर्ताओं ने शहीदों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष को मजबूत करने का संकल्प लिया। प्रभात फेरी का नेतृत्व नौजवान सभा के भूतपूर्व सचिव कमल बागड़ी ने किया। यह फेरी मजदूर किसान भवन (नेता रोड, वार्ड नंबर 6) से शुरू होकर अशोकनगर (वार्ड नंबर 5), कोटा रोड, पुराना बाजार, सरोवर नगर, चंद्रा मार्केट, पुलिस थाना इटावा के सामने से होती हुई अंबेडकर सर्किल होते हुए सरकारी स्कूल प्रांगण (पीपल्दा रोड) स्थित शहीद भगत सिंह स्मारक पर पहुंची।इसमें माकपा तहसील सचिव मुकुट बिहारी जंगम, सीटू निर्माण मजदूर यूनियन अध्यक्ष गोपाल लाल, किसान सभा के संयुक्त सचिव कमल बागड़ी सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल हुए। शहीद स्मारक पर पहुंचकर शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद विचार गोष्ठी हुई, जिसमें वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा की गई। मुख्य वक्ताओं ने 1857 की क्रांति से भगत सिंह के दौर तक के क्रांतिकारी आंदोलनों का विस्तार से जिक्र किया। मुकुट बिहारी जंगम, गोपाल लाल महावर, कमल बागड़ी, मुरारी लाल बैरवा (सीटू महामंत्री) और प्रेम पेंटर ने संबोधन दिया। उन्होंने बताया कि भगत सिंह और साथियों का लक्ष्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि वर्गविहीन, जातिविहीन और भेदभाव मुक्त समाज की स्थापना था। रूसी क्रांति और विश्व युद्धों के संदर्भ में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अंतरराष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डाला गया। वर्तमान चुनौतियों पर जताई चिंता सीटू महामंत्री मुरारी लाल बैरवा ने वर्तमान चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि द्विध्रुवीय व्यवस्था खत्म होने के बाद अमेरिकी साम्राज्यवाद फिर से उभर रहा है। विकासशील देशों के संसाधनों पर कब्जे की होड़, युद्धों और पर्यावरण विनाश से मानवता व प्रकृति खतरे में है। वैश्विक तापमान वृद्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा है। कार्यक्रम में छीतर लाल बैरवा, चेतन प्रकाश मीणा, बद्रीलाल ऐरवाल, बालमुकुंद बैरवा, सूरजमल बेरवा, अमोलकचंद महावर सहित अन्य मौजूद रहे। सभी ने "शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव अमर रहे", "साम्राज्यवाद मुर्दाबाद", "साम्यवाद जिंदाबाद" के नारे लगाए। भगतसिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प कमल बागड़ी ने कार्यक्रम समाप्त करते हुए कहा कि शहीदों के 95 वें शहादत दिवस पर शपथ ली जाती है कि उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। 24 मार्च 2026 को माकपा की जन आक्रोश रैली में भाग लेने के लिए इटावा-पीपल्दा क्षेत्र सहित कोटा जिले के सैकड़ों कार्यकर्ता, मजदूर, किसान, महिलाएं, छात्र और नौजवान दिल्ली रवाना होंगे। इसकी अगुवाई कोटा जिला सचिव हबीब खान और सीटू महामंत्री मुरारी लाल बैरवा करेंगे।4