“मानक पर सवाल! तमोलिनपुरवा में नाली निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग” 🎤 मिहींपुरवा से बड़ी खबर सामने आ रही है। मिहींपुरवा नगर पंचायत के तमोलिनपुरवा गांव में नाली निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नाली निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री और मिश्रण का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही सामग्री की जांच और गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने ठेकेदार और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। अब सवाल यह है कि क्या नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की जांच करेंगे? ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराकर यदि मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। आप इस मामले में क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
“मानक पर सवाल! तमोलिनपुरवा में नाली निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग” 🎤 मिहींपुरवा से बड़ी खबर सामने आ रही है। मिहींपुरवा नगर पंचायत के तमोलिनपुरवा गांव में नाली निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नाली निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री और मिश्रण का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही सामग्री की जांच और गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने ठेकेदार और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। अब सवाल यह है कि क्या नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की जांच करेंगे? ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराकर यदि मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। आप इस मामले में क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
- डीएम ने नानपारा के कालीकुण्डा मन्दिर का किया निरीक्षण, सम्बंधितों को दिया आवश्यक दिशा निर्देश बहराइच । जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने विधायक नानपारा राम निवास वर्मा के साथ तहसील नानपारा अन्तर्गत पर्यटन विभाग की ओर से कराये जा रहे पौराणिक कालीकुण्डा मन्दिर तालाब का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने उपजिलाधिकारी नानपारा व अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद, नानपारा को निर्देशित किया गया कि उक्त निर्माण की सीमा अवधि निर्धारित कर प्रति सप्ताह कार्य का निरीक्षण करें तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता का भी देखें। इसके अतिरिक्त विगत माह जल भराव की समस्या के सम्बन्ध में जिलाधिकारी महोदय द्वारा निर्देशित किया गया कि नवनिर्मित नाले से पुराने नाले को जोड़ने हेतु आवश्यक एन.ओ.सी. प्राप्त करने की कार्यवाही तत्त्काल की जाये। साथ ही निर्माण कार्य की समय-समय पर समीक्षा करते रहे। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी प्रकाश सिंह सहित अन्य सम्बन्धित मौजूद रहे।1
- किसान यूनियन ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर बीडीओ को सौंपा ज्ञापन *गांवों की समस्याओं के समाधान की उठाई आवाज* बहराइच। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने ग्रामीण क्षेत्रों की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर खंड विकास अधिकारी शिवपुर आलोक वर्मा को 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। संगठन के जिला उपाध्यक्ष रति भूषण मिश्रा ने 24 सितंबर 2026 को दिए ज्ञापन में ग्रामीणों की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण कराने की मांग की है। ज्ञापन में ग्राम पंचायतों में सड़क, जल निकासी, पेयजल और अन्य जनसुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है। किसान यूनियन ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से समस्याओं का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई कराने की मांग की। *ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें* किसान यूनियन ने गांवों में जलभराव एवं जल निकासी की समस्या का समाधान कराने, ग्रामीण मार्गों की स्थिति सुधारने और आवश्यकतानुसार विकास कार्य कराने की मांग की है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। ज्ञापन में ग्राम बेलामकन के निकट सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराने तथा ग्राम सभा बेलामकन गंगहर (पुरानी सरयू नदी) पर पुलिया का निर्माण कराने की मांग भी शामिल है। संगठन ने ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से प्रभावी कदम उठाने की अपील की। किसान यूनियन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण किया जाना आवश्यक है। संगठन ने सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।4
- बिना डिग्री इलाज का आरोप, घर पर मरीज का उपचार करते वीडियो वायरल ईसानगर के तेलियनपुरवा का मामला, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल बिना डिग्री इलाज का आरोप, घर पर मरीज का उपचार करते वीडियो वायरल ईसानगर के तेलियनपुरवा का मामला, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ईसानगर खीरी। ईसानगर कस्बे के तेलियनपुरवा इलाके में एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से मरीजों का इलाज किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति घर के बाहर एक मरीज का उपचार करता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं,स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से मरीजों का उपचार कर रहा है और इलाज के एवज में मरीजों से रकम भी ली जाती है। लोगों का यह भी दावा है कि उसके पास चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित वैध डिग्री अथवा पंजीकरण होने की जानकारी सार्वजनिक नहीं है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है,वायरल वीडियो में उपचार किए जाने का दृश्य सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित व्यक्ति के पास मरीजों का उपचार करने के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता और वैध पंजीकरण है? यदि नहीं, तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक क्या कार्रवाई की गई,ग्रामीणों का कहना है कि बिना योग्य चिकित्सकीय प्रशिक्षण के इलाज किए जाने से मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उनका आरोप है कि कई बार ऐसे मामलों की शिकायतें सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।वीडियो वायरल होने के बाद अब लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित व्यक्ति की शैक्षिक योग्यता, मेडिकल पंजीकरण, क्लीनिक/उपचार स्थल की वैधता और मरीजों से लिए जा रहे शुल्क की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है,अब देखना यह है कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर स्वास्थ्य विभाग मौके पर जांच करता है या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों तक सीमित रह जाता है।2
- नानपारा फल-सब्जी मंडी में आधी रात आग का तांडव, लाखों का माल राख 650 बोरी आलू और करीब 12 लाख के फल जले, 45 दिन पहले खरीदा नया आईसर ट्रैक्टर भी खाक बिजली के तारों से चिंगारी निकलने की आशंका, दमकल की टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू नानपारा, बहराइच। नानपारा अंतर्गत नवीन स्थल फल-सब्जी मंडी में बुधवार देर रात अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। मंडी की दुकानों में रखा भारी मात्रा में आलू, फल और अन्य सामान धू-धूकर जलने लगा। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के दुकानदार और मौजूद लोग दहशत में आ गए। सूचना पर पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक लाखों रुपये का माल जलकर राख हो चुका था। 650 बोरी आलू जलने का दावा अग्निकांड में जुनैद एंड कंपनी के करीब 650 कट्टे आलू जलकर बर्बाद होने की बात सामने आई है। बताया गया कि दो वाहनों से मंडी में आलू की खेप उतारी गई थी। रात करीब एक बजे ड्राइवरों और किसानों को आग की जानकारी हुई। जब तक लोग मौके पर पहुंचे, आग ने आलू की बोरियों को अपनी चपेट में ले लिया था। कंपनी की ओर से लाखों रुपये के नुकसान का दावा किया गया है। 12 लाख के फल और जरूरी सामान खाक फल कारोबारी मोहम्मद रईस व मोहम्मद मोबीन एंड कंपनी की दुकान में रखा करीब 12 लाख रुपये का फल भी आग में जलकर नष्ट हो गया। आग की चपेट में सेब, संतरा, अनार, अनानास, मौसमी, कीवी, केला और स्ट्रॉबेरी समेत विभिन्न फल आ गए। दुकान में रखे जरूरी दस्तावेज, एलसीडी टीवी, सीसीटीवी कैमरे और अन्य सामान भी जलकर राख हो गए। 45 दिन पहले आया था नया ट्रैक्टर आग की लपटों ने पास खड़े नए आईसर ट्रैक्टर को भी अपनी चपेट में ले लिया। ट्रैक्टर मालिक ने बताया कि करीब 45 दिन पहले ही ट्रैक्टर खरीदा गया था। अभी उसकी पहली किस्त ही जमा की गई थी। आग में नया ट्रैक्टर पूरी तरह जल जाने से परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। तारों से निकली चिंगारी से आग फैलने की आशंका मंडी में मौजूद एक ड्राइवर के मुताबिक, वह रात में तख्त पर लेटा था। इसी दौरान ऊपर बिजली के तारों के गुच्छे से अचानक चिंगारी निकलती दिखाई दी। चिंगारी नीचे रखे प्लास्टिक कैरेट पर गिरने के बाद आग तेजी से फैल गई। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने तत्काल डायल-112 तथा दमकल विभाग को सूचना दी। समय रहते पहुंची दमकल, टला बड़ा हादसा पुलिस और दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग को आसपास की दुकानों तक फैलने से रोकने का प्रयास किया। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इससे मंडी के अन्य हिस्सों में आग फैलने से बड़ा नुकसान टल गया। जांच के बाद सामने आएगा वास्तविक कारण: प्रारंभिक तौर पर व्यापारी और स्थानीय लोग आग की वजह शॉर्ट सर्किट बता रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने भी बिजली के तारों से चिंगारी निकलने की बात कही है। हालांकि आग लगने का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन कराया जा रहा है।4
- इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पीली बालू के इस्तेमाल का आरोप जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में सुबह शुरू हुआ निर्माण, कुछ ही घंटों में आधी सड़क तैयार होने का दावा — स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई नानपारा, बहराइच। नगर नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज, वार्ड नंबर 3 में नगर पालिका की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। सड़क निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, सड़क की तैयारी और काम की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में पीली बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है और इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे पर्याप्त बेस तैयार करने तथा कुटाई की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य आज सुबह से शुरू हुआ और देखते ही देखते सड़क के एक बड़े हिस्से में इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछा दिए गए। लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गति काफी तेज है। उनका सवाल है कि इतनी तेजी से काम होने के दौरान क्या सड़क की प्रत्येक परत, उसकी मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी साथ-साथ की जा रही है? सड़क निर्माण में पीली बालू के इस्तेमाल को लेकर सवाल मौके पर निर्माण कार्य में पीली बालू दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की बालू का इस्तेमाल संबंधित सड़क के स्वीकृत BOQ और तकनीकी specification के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि केवल देखकर किसी सामग्री को मानक के विपरीत घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा BOQ, DPR, estimate तथा तकनीकी specification से मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री का मिलान और आवश्यकता होने पर सामग्री की जांच कराना जरूरी होगा। क्या सड़क के नीचे पर्याप्त बेस और कुटाई हुई? स्थानीय लोगों का दूसरा बड़ा सवाल सड़क की नींव को लेकर है। लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे किस प्रकार का बेस तैयार किया गया और उसकी कितनी मोटाई रखी गई, यह स्पष्ट नहीं है। इंटरलॉकिंग सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखाई देने वाले ब्लॉक पर निर्भर नहीं करती। सड़क के नीचे जमीन की तैयारी, बेस सामग्री, उसकी मोटाई, लेवलिंग और उचित compaction जैसे तकनीकी पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य के दौरान नगर पालिका के संबंधित अवर अभियंता अथवा सहायक अभियंता मौके पर पहुंचकर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करें। काम की रफ्तार भी बनी चर्चा का विषय स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ ही घंटों में सड़क के लगभग आधे हिस्से में इंटरलॉकिंग बिछाने का काम पूरा कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इतनी तेजी के बीच निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क की लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ इंटरलॉकिंग ब्लॉक की मोटाई, नीचे की परतों की मोटाई और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध है? दो साल पहले बनी सड़क भी बैठने का स्थानीय लोगों का दावा इसी बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पहले कराए गए सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूसरी तरफ करीब दो वर्ष पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में वह सड़क कई स्थानों पर बैठ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि पहले बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोगों का कहना है कि अब उसी क्षेत्र में नया निर्माण कराया जा रहा है, इसलिए पुराने और नए दोनों कार्यों की गुणवत्ता की जांच होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उठाया बड़ा सवाल—पुरानी सड़क क्यों बैठी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले बनी सड़क निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई थी तो उसके बैठने के कारणों की जांच होनी चाहिए। क्या सड़क के नीचे बेस पर्याप्त था? क्या जमीन की उचित कुटाई हुई थी? क्या जल निकासी की व्यवस्था सही थी? या फिर सड़क पर निर्धारित भार के अनुसार निर्माण किया गया था? इन सवालों का जवाब केवल तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आ सकता है। नगर पालिका से स्थानीय लोगों की कई मांगें स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और मौके पर यह स्पष्ट करे कि— • सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई कितनी है? • इंटरलॉकिंग ब्लॉक की निर्धारित मोटाई कितनी है? • मौके पर लगाए जा रहे ब्लॉक की वास्तविक मोटाई कितनी है? • सड़क के नीचे बेस की निर्धारित मोटाई कितनी है? • बेस में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की जानी है? • पीली बालू का इस्तेमाल स्वीकृत specification के अनुसार है या नहीं? • ब्लॉक के नीचे bedding layer की निर्धारित मोटाई कितनी है? • सड़क की जमीन और बेस की उचित कुटाई/compaction हुई है या नहीं? • सड़क के किनारों पर पर्याप्त सपोर्ट/कर्ब की व्यवस्था है या नहीं? • पानी की निकासी के लिए उचित ढलान या नाली की व्यवस्था है या नहीं? • निर्माण कार्य की निगरानी नगर पालिका के किस तकनीकी अधिकारी द्वारा की जा रही है? वर्क ऑर्डर और BOQ सामने आने से साफ होगी तस्वीर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन संबंधित सड़क का वर्क ऑर्डर, स्वीकृत estimate और BOQ उपलब्ध करा दे तो मौके पर हो रहे निर्माण कार्य का वास्तविक मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क के निर्माण में कौन-कौन सी सामग्री, किस मात्रा में और किस निर्धारित specification के अनुसार इस्तेमाल की जानी है। क्या होगी कार्रवाई या होगी केवल खानापूर्ति? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की तकनीकी जांच करेंगे? क्या निर्माण सामग्री और सड़क की परतों की गुणवत्ता जांची जाएगी? क्या पहले बनी सड़क के बैठने के कारणों की भी जांच होगी? फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सड़क का काम पूरा होने से पहले ही उसकी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि बाद में सड़क खराब होने के बाद जांच कराने की स्थिति न आए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण कार्य में वास्तव में कोई कमी है या नहीं, यह संबंधित विभाग के स्वीकृत दस्तावेजों, मौके की तकनीकी जांच और आवश्यकता पड़ने पर सामग्री की लैब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में बन रही इस इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। खबर के समन्ध eo नगर पालिका से बात करने की कोशिश की गई जिस में साहब का फ़ोन नहीं उठा खास रिपोर्ट रामेश्वर सिंह भदोरिया इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पीली बालू के इस्तेमाल का आरोप जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में सुबह शुरू हुआ निर्माण, कुछ ही घंटों में आधी सड़क तैयार होने का दावा — स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच की मांग उठाई नानपारा, बहराइच। नगर नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज, वार्ड नंबर 3 में नगर पालिका की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। सड़क निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, सड़क की तैयारी और काम की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में पीली बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है और इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे पर्याप्त बेस तैयार करने तथा कुटाई की प्रक्रिया मौके पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य आज सुबह से शुरू हुआ और देखते ही देखते सड़क के एक बड़े हिस्से में इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछा दिए गए। लोगों के अनुसार निर्माण कार्य की गति काफी तेज है। उनका सवाल है कि इतनी तेजी से काम होने के दौरान क्या सड़क की प्रत्येक परत, उसकी मोटाई और सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी साथ-साथ की जा रही है? सड़क निर्माण में पीली बालू के इस्तेमाल को लेकर सवाल मौके पर निर्माण कार्य में पीली बालू दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की बालू का इस्तेमाल संबंधित सड़क के स्वीकृत BOQ और तकनीकी specification के अनुसार किया जा रहा है। हालांकि केवल देखकर किसी सामग्री को मानक के विपरीत घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा BOQ, DPR, estimate तथा तकनीकी specification से मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री का मिलान और आवश्यकता होने पर सामग्री की जांच कराना जरूरी होगा। क्या सड़क के नीचे पर्याप्त बेस और कुटाई हुई? स्थानीय लोगों का दूसरा बड़ा सवाल सड़क की नींव को लेकर है। लोगों का कहना है कि इंटरलॉकिंग ब्लॉक बिछाने से पहले सड़क के नीचे किस प्रकार का बेस तैयार किया गया और उसकी कितनी मोटाई रखी गई, यह स्पष्ट नहीं है। इंटरलॉकिंग सड़क की मजबूती केवल ऊपर दिखाई देने वाले ब्लॉक पर निर्भर नहीं करती। सड़क के नीचे जमीन की तैयारी, बेस सामग्री, उसकी मोटाई, लेवलिंग और उचित compaction जैसे तकनीकी पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसीलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य के दौरान नगर पालिका के संबंधित अवर अभियंता अथवा सहायक अभियंता मौके पर पहुंचकर सड़क की परतों और निर्माण सामग्री की जांच करें। काम की रफ्तार भी बनी चर्चा का विषय स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ ही घंटों में सड़क के लगभग आधे हिस्से में इंटरलॉकिंग बिछाने का काम पूरा कर दिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य तेजी से होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इतनी तेजी के बीच निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। लोगों का सवाल है कि क्या सड़क की लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ इंटरलॉकिंग ब्लॉक की मोटाई, नीचे की परतों की मोटाई और इस्तेमाल होने वाली सामग्री का रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध है? दो साल पहले बनी सड़क भी बैठने का स्थानीय लोगों का दावा इसी बीच स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पहले कराए गए सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दूसरी तरफ करीब दो वर्ष पहले सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में वह सड़क कई स्थानों पर बैठ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि पहले बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की भी जांच की जाए तो स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोगों का कहना है कि अब उसी क्षेत्र में नया निर्माण कराया जा रहा है, इसलिए पुराने और नए दोनों कार्यों की गुणवत्ता की जांच होना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उठाया बड़ा सवाल—पुरानी सड़क क्यों बैठी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले बनी सड़क निर्धारित मानकों के अनुसार बनाई गई थी तो उसके बैठने के कारणों की जांच होनी चाहिए। क्या सड़क के नीचे बेस पर्याप्त था? क्या जमीन की उचित कुटाई हुई थी? क्या जल निकासी की व्यवस्था सही थी? या फिर सड़क पर निर्धारित भार के अनुसार निर्माण किया गया था? इन सवालों का जवाब केवल तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आ सकता है। नगर पालिका से स्थानीय लोगों की कई मांगें स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराए और मौके पर यह स्पष्ट करे कि— • सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई कितनी है? • इंटरलॉकिंग ब्लॉक की निर्धारित मोटाई कितनी है? • मौके पर लगाए जा रहे ब्लॉक की वास्तविक मोटाई कितनी है? • सड़क के नीचे बेस की निर्धारित मोटाई कितनी है? • बेस में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की जानी है? • पीली बालू का इस्तेमाल स्वीकृत specification के अनुसार है या नहीं? • ब्लॉक के नीचे bedding layer की निर्धारित मोटाई कितनी है? • सड़क की जमीन और बेस की उचित कुटाई/compaction हुई है या नहीं? • सड़क के किनारों पर पर्याप्त सपोर्ट/कर्ब की व्यवस्था है या नहीं? • पानी की निकासी के लिए उचित ढलान या नाली की व्यवस्था है या नहीं? • निर्माण कार्य की निगरानी नगर पालिका के किस तकनीकी अधिकारी द्वारा की जा रही है? वर्क ऑर्डर और BOQ सामने आने से साफ होगी तस्वीर स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका प्रशासन संबंधित सड़क का वर्क ऑर्डर, स्वीकृत estimate और BOQ उपलब्ध करा दे तो मौके पर हो रहे निर्माण कार्य का वास्तविक मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क के निर्माण में कौन-कौन सी सामग्री, किस मात्रा में और किस निर्धारित specification के अनुसार इस्तेमाल की जानी है। क्या होगी कार्रवाई या होगी केवल खानापूर्ति? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की तकनीकी जांच करेंगे? क्या निर्माण सामग्री और सड़क की परतों की गुणवत्ता जांची जाएगी? क्या पहले बनी सड़क के बैठने के कारणों की भी जांच होगी? फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सड़क का काम पूरा होने से पहले ही उसकी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि बाद में सड़क खराब होने के बाद जांच कराने की स्थिति न आए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण कार्य में वास्तव में कोई कमी है या नहीं, यह संबंधित विभाग के स्वीकृत दस्तावेजों, मौके की तकनीकी जांच और आवश्यकता पड़ने पर सामग्री की लैब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जुबलीगंज वार्ड नंबर 3 में बन रही इस इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाती है। खबर के समन्ध eo नगर पालिका से बात करने की कोशिश की गई जिस में साहब का फ़ोन नहीं उठा खास रिपोर्ट रामेश्वर सिंह भदोरिया2
- बहराइच -: जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय गुरुवार को नानपारा पहुंचे। उन्होंने नानपारा के काली कुंडा सौंदर्यीकरण का निरीक्षण किया। अब तक पास बजट और कराए गए विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा अन्य स्थानों का भी निरीक्षण किया। मौके पर विधायक राम निवास वर्मा, एसडीएम श्रीप्रकाश सिंह, तहसीलदार समेत अन्य लोग मौजूद रहे। बहराइच -: जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय गुरुवार को नानपारा पहुंचे। उन्होंने नानपारा के काली कुंडा सौंदर्यीकरण का निरीक्षण किया। अब तक पास बजट और कराए गए विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा अन्य स्थानों का भी निरीक्षण किया। मौके पर विधायक राम निवास वर्मा, एसडीएम श्रीप्रकाश सिंह, तहसीलदार समेत अन्य लोग मौजूद रहे।1
- सैय्यद नगर गांव और शिवपुर ब्लॉक मुख्यालय का सीडीओ ने किया औचक निरीक्षण, अव्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी *अन्नपूर्णा भवन बंद मिलने और पंचायत सहायक के अनुपस्थित रहने पर दिए सख्त निर्देश* बहराइच। मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता ने गुरुवार को शिवपुर विकासखंड क्षेत्र के सैय्यद नगर गांव का औचक निरीक्षण किया। दोपहर करीब तीन बजे पहुंचे सीडीओ ने मनरेगा योजना के तहत कराए गए विभिन्न विकास कार्यों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अन्नपूर्णा भवन बंद मिलने, पंचायत भवन में अव्यवस्थाओं और पंचायत सहायक के अनुपस्थित रहने पर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी ने शिवपुर ब्लॉक मुख्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान सभागार कक्ष, खंड विकास अधिकारी कार्यालय और लेखागार कक्ष का जायजा लिया,सभागार कक्ष में ए सी लगवाने तथा उखड़े टाइलों की रिपेयरिंग करवाने के निर्देश दिये।उन्होंने कार्यालयीय व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान खंड विकास अधिकारी आलोक वर्मा, अवर अभियंता लघु सिंचाई, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी अंकित सिंह यादव समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।3
- बारिश से गिरे बिजली के दो खंभे, हुजूरपुर क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित बारिश से गिरे बिजली के दो खंभे, हुजूरपुर क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित हुजूरपुर। लगातार हो रही बारिश के चलते विकासखंड हुजूरपुर क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो गई है। सिंगपुर चौराहे के पास नहर पटरी के किनारे लगे बिजली के दो खंभे जमीन में अत्यधिक नमी और दलदल होने के कारण गिर गए। खंभे गिरने से आसपास के गांवों और घरों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में पिछले 24 घंटे से अधिक समय से लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण जमीन काफी नरम और दलदली हो गई, जिसके चलते बिजली के खंभे अपना संतुलन खो बैठे और धराशायी हो गए। बिजली के खंभे गिरने के बाद घरों तक विद्युत सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण शोभित वर्मा, लोकस यादव, सुजीत रावत और अंकित मौर्य ने बताया कि बिजली बाधित होने से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से जल्द मौके पर टीम भेजकर गिरे हुए खंभों को दुरुस्त कराने और विद्युत आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है। लगातार बारिश के बीच खंभों के गिरने से ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द विद्युत व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो परेशानी और बढ़ सकती है।3
- गणेश शोभा विसर्जन यात्रा गांव से निकलकर कस्बों तक गई डीजे के साथ अभबीर ग़ुलाल उड़ाते हुए हजारों लोग शोभायात्रा में शामिल हुए धूमधाम से निकली गणेश विसर्जन यात्रा आबिद गुलाल उड़ाते हुए जयकारों के साथ काशन में गई शोभायात्रा1