बूंद-बूंद को तरसता सखरेज, व्यवस्था की प्यास' बुझाने में नाकाम अफसर रिपोर्टर प्रभाकर अवस्थी शिवराजपुर विकासखंड शिवराजपुर के ग्राम सखरेज में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ की जनता पिछले डेढ़ साल से न केवल सरकारी उपेक्षा का शिकार है, बल्कि बुनियादी अधिकार स्वच्छ पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि ग्रामीणों ने अब आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का बिगुल फूंक दिया है। खराब टंकी और 'खारा' नसीब ग्रामीणों का आरोप है कि गाँव की जल निगम की टंकी पिछले 18 महीनों से खराब पड़ी है। रखरखाव के अभाव में पूरी पाइपलाइन ठप है। जो हैंडपंप चल रहे हैं, उनसे इतना खारा पानी आ रहा है कि वह पीने योग्य तो दूर, पशुओं के नहलाने लायक भी नहीं है। विवश होकर ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। शिक्षा पर पानी का पहरा पानी के इस संकट ने बच्चों के बचपन और शिक्षा को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सुबह से शाम तक मशक्कत: बच्चे स्कूल जाने के बजाय साइकिलों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और सिर पर बर्तन रखकर पानी ढोते नजर आते हैं। बुजुर्गों का संघर्ष: उम्र के इस पड़ाव पर जहाँ आराम मिलना चाहिए, वहाँ बुजुर्ग भी पानी के भारी डिब्बे खींचने को मजबूर हैं। पोर्टल से लेकर जनप्रतिनिधियों तक... सब मौन! ग्रामीणों ने अपनी व्यथा सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। स्थानीय स्तर से लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायतें दर्ज हुईं। जल मंत्री तक पत्र भेजे गए।क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटे गए। बावजूद इसके, अधिकारियों की निरंकुशता ऐसी है कि अब तक धरातल पर कोई सुधार नहीं दिखा। शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। जब तक पानी नहीं, तब तक वोट नहीं। हमने हर दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन जब शासन और प्रशासन को हमारी प्यास नहीं दिखती, तो हमें भी लोकतंत्र के इस उत्सव में शामिल होने की कोई जरूरत नहीं है। आक्रोशित ग्रामीण, सखरेज बहिष्कार की चेतावनी गाँव की चौपालों पर अब केवल एक ही चर्चा है— मतदान का बहिष्कार। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चुनाव से पहले जल निगम की टंकी को ठीक नहीं किया गया और खारे पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो पूरा गाँव वोट डालने नहीं जाएगा।
बूंद-बूंद को तरसता सखरेज, व्यवस्था की प्यास' बुझाने में नाकाम अफसर रिपोर्टर प्रभाकर अवस्थी शिवराजपुर विकासखंड शिवराजपुर के ग्राम सखरेज में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ की जनता पिछले डेढ़ साल से न केवल सरकारी उपेक्षा का शिकार है, बल्कि बुनियादी अधिकार स्वच्छ पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि ग्रामीणों ने अब आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का बिगुल फूंक दिया है। खराब टंकी और 'खारा' नसीब ग्रामीणों का आरोप है कि गाँव की जल निगम की टंकी पिछले 18
महीनों से खराब पड़ी है। रखरखाव के अभाव में पूरी पाइपलाइन ठप है। जो हैंडपंप चल रहे हैं, उनसे इतना खारा पानी आ रहा है कि वह पीने योग्य तो दूर, पशुओं के नहलाने लायक भी नहीं है। विवश होकर ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। शिक्षा पर पानी का पहरा पानी के इस संकट ने बच्चों के बचपन और शिक्षा को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सुबह से शाम तक मशक्कत: बच्चे स्कूल जाने के बजाय साइकिलों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और सिर पर बर्तन रखकर पानी ढोते
नजर आते हैं। बुजुर्गों का संघर्ष: उम्र के इस पड़ाव पर जहाँ आराम मिलना चाहिए, वहाँ बुजुर्ग भी पानी के भारी डिब्बे खींचने को मजबूर हैं। पोर्टल से लेकर जनप्रतिनिधियों तक... सब मौन! ग्रामीणों ने अपनी व्यथा सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। स्थानीय स्तर से लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायतें दर्ज हुईं। जल मंत्री तक पत्र भेजे गए।क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटे गए। बावजूद इसके, अधिकारियों की निरंकुशता ऐसी है कि अब तक धरातल पर कोई सुधार नहीं दिखा। शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। जब तक पानी
नहीं, तब तक वोट नहीं। हमने हर दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन जब शासन और प्रशासन को हमारी प्यास नहीं दिखती, तो हमें भी लोकतंत्र के इस उत्सव में शामिल होने की कोई जरूरत नहीं है। आक्रोशित ग्रामीण, सखरेज बहिष्कार की चेतावनी गाँव की चौपालों पर अब केवल एक ही चर्चा है— मतदान का बहिष्कार। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चुनाव से पहले जल निगम की टंकी को ठीक नहीं किया गया और खारे पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो पूरा गाँव वोट डालने नहीं जाएगा।
- Post by Aman Jatav Mistri1
- रिपोर्टर प्रभाकर अवस्थी शिवराजपुर विकासखंड शिवराजपुर के ग्राम सखरेज में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। यहाँ की जनता पिछले डेढ़ साल से न केवल सरकारी उपेक्षा का शिकार है, बल्कि बुनियादी अधिकार स्वच्छ पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि ग्रामीणों ने अब आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का बिगुल फूंक दिया है। खराब टंकी और 'खारा' नसीब ग्रामीणों का आरोप है कि गाँव की जल निगम की टंकी पिछले 18 महीनों से खराब पड़ी है। रखरखाव के अभाव में पूरी पाइपलाइन ठप है। जो हैंडपंप चल रहे हैं, उनसे इतना खारा पानी आ रहा है कि वह पीने योग्य तो दूर, पशुओं के नहलाने लायक भी नहीं है। विवश होकर ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। शिक्षा पर पानी का पहरा पानी के इस संकट ने बच्चों के बचपन और शिक्षा को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सुबह से शाम तक मशक्कत: बच्चे स्कूल जाने के बजाय साइकिलों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और सिर पर बर्तन रखकर पानी ढोते नजर आते हैं। बुजुर्गों का संघर्ष: उम्र के इस पड़ाव पर जहाँ आराम मिलना चाहिए, वहाँ बुजुर्ग भी पानी के भारी डिब्बे खींचने को मजबूर हैं। पोर्टल से लेकर जनप्रतिनिधियों तक... सब मौन! ग्रामीणों ने अपनी व्यथा सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। स्थानीय स्तर से लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायतें दर्ज हुईं। जल मंत्री तक पत्र भेजे गए।क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटे गए। बावजूद इसके, अधिकारियों की निरंकुशता ऐसी है कि अब तक धरातल पर कोई सुधार नहीं दिखा। शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। जब तक पानी नहीं, तब तक वोट नहीं। हमने हर दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन जब शासन और प्रशासन को हमारी प्यास नहीं दिखती, तो हमें भी लोकतंत्र के इस उत्सव में शामिल होने की कोई जरूरत नहीं है। आक्रोशित ग्रामीण, सखरेज बहिष्कार की चेतावनी गाँव की चौपालों पर अब केवल एक ही चर्चा है— मतदान का बहिष्कार। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चुनाव से पहले जल निगम की टंकी को ठीक नहीं किया गया और खारे पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो पूरा गाँव वोट डालने नहीं जाएगा।4
- उन्नाव के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र में लखनऊ मार्ग पर सुरसेनी गांव के पास एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो और बाइक की टक्कर हो गई। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्ची सहित सात लोग घायल हो गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कॉर्पियो पलटकर खंती में गिर गई। हादसे में सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के पीखी गांव निवासी बाइक चालक मारूफ की मौके पर ही मौत हो गई। मारूफ अपनी पत्नी जरीना और 6 साल की बेटी ज़िक्रा के साथ अपने साले के घर जैदीपुर गांव जा रहा था। जरीना और ज़िक्रा गंभीर रूप से घायल हो गईं। इसी दौरान, दूसरी बाइक पर सवार बांगरमऊ कस्बा के स्टेशन रोड निवासी 59 वर्षीय वीरेंद्र पुत्र जीतबहादुर की भी हादसे में मौत हो गई। उनके साथी उमेश भी स्कॉर्पियो की चपेट में आकर घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल सीएचसी बांगरमऊ ले जाया गया, जहां से उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। हादसे के बाद स्कॉर्पियो में सवार लोग मौके से फरार हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर आगे की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। स्थानीय निवासी मोइन खा और सलीम के अनुसार, स्कॉर्पियो काफी तेज रफ्तार में थी। उसने एक के बाद एक दो बाइकों को टक्कर मारी और अनियंत्रित होकर खंती में पलट गई। स्कॉर्पियो में सवार चार लोग भी घायल हुए थे, जिन्हें मौके से लखनऊ ले जाया गया।1
- उन्नाव के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र में लखनऊ मार्ग पर सुरसेनी गांव के पास एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो और बाइक की टक्कर हो गई। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्ची सहित सात लोग घायल हो गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कॉर्पियो पलटकर खंती में गिर गई। हादसे में सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के पीखी गांव निवासी बाइक चालक मारूफ की मौके पर ही मौत हो गई। मारूफ अपनी पत्नी जरीना और 6 साल की बेटी ज़िक्रा के साथ अपने साले के घर जैदीपुर गांव जा रहा था। जरीना और ज़िक्रा गंभीर रूप से घायल हो गईं। इसी दौरान, दूसरी बाइक पर सवार बांगरमऊ कस्बा के स्टेशन रोड निवासी 59 वर्षीय वीरेंद्र पुत्र जीतबहादुर की भी हादसे में मौत हो गई। उनके साथी उमेश भी स्कॉर्पियो की चपेट में आकर घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल सीएचसी बांगरमऊ ले जाया गया, जहां से उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। हादसे के बाद स्कॉर्पियो में सवार लोग मौके से फरार हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर आगे की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। स्थानीय निवासी मोइन खा और सलीम के अनुसार, स्कॉर्पियो काफी तेज रफ्तार में थी। उसने एक के बाद एक दो बाइकों को टक्कर मारी और अनियंत्रित होकर खंती में पलट गई। स्कॉर्पियो में सवार चार लोग भी घायल हुए थे, जिन्हें मौके से लखनऊ ले जाया गया।4
- कन्नौज। सौ शैय्या अस्पताल छिबरामऊ के निरीक्षण के दौरान अव्यवस्था पर भड़के डीएम,अव्यवस्था मिलने पर डीएम ने सीएमएस को लगाई जोरदार फटकार,निरीक्षण की जानकारी होने के बावजूद सीएमएस में नहीं कर रखी थी कोई तैयारी,DM ने कहा बीते कुछ समय से सौ शैय्या अस्पताल में अव्यवस्थाओं की सूचनाए आ रही थी सामने,अस्पताल में आईसीयू रूम में मिला स्टोर रूम,निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के जाने हाल-चाल,विशेषज्ञ चिकित्साको की कमी को लेकर गंभीर दिखे डीएम कन्नौज,15 दिन के अंदर व्यवस्था सुधारने के निर्देश-15 दिन बाद डीएम फिर करेंगे निरीक्षण,Dm ने SDM छिबरामऊ को अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर निरीक्षण करने के लिए दिए निर्देश।1
- मिलने का पता हर रविवार डॉ नन्हे लाल क्लीनिक लाला बाजार मल्लावां हरदोई डॉ प्रतिमा वर्मा M.D स्त्री विशेषज्ञ बलरामपुर हॉस्पिटल लखनऊ पंचकर्म.. बिल्कुल फ्री नस्य. शिरोधारा. वमन. विरेचन. सभी बस्ती. निरुहबस्ती. जालौका थेरेपी. Cupping थेरेपी. जानुबस्ती. कटिबस्ती. स्नेहन. स्वेदन।।।। सुबह 8Am- 9Pm Cont- 83819 15952. . 99181 95064 63867 96252 आंखों से हटेगा चश्मा आयुर्वेद व पंचकर्म इलाज किया जाता है चेहरे पीपल्स व दाग का पड़ जाना पुरानी सोरायसिस or सफेद दाग मूंछ का बाल गिर जाना।सिर का बाल गिर जाना (चर्म रोग से) कमर मर्द से कमर सीधा न होकर चल न पाना शुगर बवासीर आंतों मै सूजन गुर्दे में पथरी कोलाइटिस हाथ पैरों का टेढ़ा होना आंखों से हटेगा चश्मा स्वप्नदोष लिकोरिया जोड़ों में दर्द गठिया घुटने में दर्द. चलने में परेशानी. हड्डी जोड़ नस मांसपेशियों का दर्द. गर्दन का दर्द . सर्वाइकल . फ्रैक्चर व ऑपरेशन के बाद जकड़न । लकवा . कंधे के जकड़न . एडी का दर्द . मांसपेशियों में खिंचाव हाथ पैर में झनझनाहट नसों में ब्लॉकेज पैरों में सुन्नपन । मंदबुद्धि बच्चों की विकास की समस्या #हरदोई #लखनऊ1
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