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आलमपुर में कामांक्षा देवी मंदिर में चोरी की घटना सामने आई थी, जिसके बाद पूर्व विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने इस मामले पर अल्टीमेटम दिया था। इसी बीच, आलमपुर स्थित मां गेथरी माता मंदिर के पास से बिजली के तार भी चोरी हो गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 1.80 लाख रुपए बताई जा रही है।
विजय झा
आलमपुर में कामांक्षा देवी मंदिर में चोरी की घटना सामने आई थी, जिसके बाद पूर्व विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने इस मामले पर अल्टीमेटम दिया था। इसी बीच, आलमपुर स्थित मां गेथरी माता मंदिर के पास से बिजली के तार भी चोरी हो गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 1.80 लाख रुपए बताई जा रही है।
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- आलमपुर में कामांक्षा देवी मंदिर में चोरी की घटना सामने आई थी, जिसके बाद पूर्व विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने इस मामले पर अल्टीमेटम दिया था। इसी बीच, आलमपुर स्थित मां गेथरी माता मंदिर के पास से बिजली के तार भी चोरी हो गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 1.80 लाख रुपए बताई जा रही है।1
- महाराष्ट्र के अंतर्गत एक गोल्ड माइनिंग कंपनी के मालिक श्री रोहित पिसल जी ने शहर में अपना प्रथम आगमन किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस बहुजन भाईचारा महापंचायत का आयोजन राष्ट्र माता सावित्री भाई फुले शिक्षा प्रसार समिति के अध्यक्ष श्री कुंवर सिंह चौधरी ने किया था।1
- सामने आए एक बयान के अनुसार, लोगों का कहना है कि वे स्वयं झाड़ू लगाकर कचरा वहीं खत्म करवा देंगे। इस बात से यह संदेश दिया गया है कि लोग अपनी सुविधा के अनुसार कचरा निस्तारण का काम वहीं निपटा देंगे।1
- जालौन में जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही की कार्यशैली से प्रभावित होकर 14 वर्षीय इंटरमीडिएट की छात्रा काव्या विश्वकर्मा ने अपने छोटे भाई के साथ लगभग 35 किलोमीटर की दूरी तय की और उनसे मिलने तहसील पहुंची। काव्या विशेष रूप से जॉइंट मजिस्ट्रेट को अपने हाथों से बनाया गया उनका स्केच भेंट करने आई थी। वह गोहन क्षेत्र के विजदुआ गांव की निवासी है। काव्या ने बताया कि वह जॉइंट मजिस्ट्रेट की कार्यशैली और आम लोगों की समस्याओं के समाधान के प्रति उनके समर्पण से अत्यधिक प्रभावित है। इसी प्रेरणा से उसने उनका स्केच तैयार किया और व्यक्तिगत रूप से उन्हें भेंट करने का निर्णय लिया। काव्या को चित्रकला का विशेष शौक है और वह भविष्य में एक सफल कलाकार बनने की आकांक्षा रखती है। तहसील पहुंचने पर काव्या ने जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही को अपना बनाया हुआ स्केच भेंट किया। रिंकू सिंह राही ने छात्रा की कलात्मक प्रतिभा की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उसे अपनी कला को और अधिक निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। सोमवार को तहसील परिसर में बड़ी संख्या में फरियादी भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे थे, जिन्होंने जॉइंट मजिस्ट्रेट द्वारा शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण की सराहना की, जिससे आमजन का प्रशासन पर विश्वास बढ़ा है। यह घटना, जिसमें एक किशोरी ने अपने पसंदीदा अधिकारी से मिलने के लिए लंबी दूरी तय की और अपनी कला के माध्यम से सम्मान व्यक्त किया, पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। लोगों ने इसे बच्चों में प्रशासन के प्रति बढ़ते विश्वास और सकारात्मक सोच के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा।1
- जालौन जनपद में जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही की कार्यशैली एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर एक 14 वर्षीय बच्ची अपने छोटे भाई के साथ लगभग 35 किलोमीटर दूर से तहसील जालौन पहुंची और उन्हें अपने हाथों से बनाया गया उनका स्केच भेंट किया। यह भावुक और प्रेरणादायक दृश्य तहसील जालौन में देखने को मिला, जिसकी जनपद में खूब सराहना हो रही है। बच्ची ने बताया कि वह जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही के कार्यों और जनता के प्रति उनके व्यवहार से बहुत प्रभावित है, जिसके चलते ही वह अपने भाई के साथ उनसे मिलने आई थी। बातचीत के दौरान बच्ची ने यह भी बताया कि उसका सपना आगे चलकर एक सफल आर्टिस्ट बनने का है। उसने स्पष्ट किया कि वह ऐसे अधिकारियों से प्रेरणा लेती है जो समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हैं। तहसील परिसर में बड़ी संख्या में अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे फरियादियों की उपस्थिति भी इस बात का प्रमाण थी कि जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही जनता की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से निस्तारण कर रहे हैं। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली की सराहना केवल बुजुर्ग और आमजन ही नहीं, बल्कि बच्चे भी कर रहे हैं।1
- इंसानियत ग्रुप ने एक अविश्वसनीय कार्य को संभव कर दिखाया है, जो चार महीनों से नहीं हो पाया था उसे मात्र 10 घंटे में पूरा कर दिखाया है। रात्रि 1 बजे अपनी नींद और काम छोड़कर समूह के सदस्य एक ऐसे दिव्यांग व्यक्ति की मदद में जुट गए हैं, जिसके लिए उसकी 80 वर्षीय माँ बेसब्री से राह देख रही थी। यह भावनात्मक और सराहनीय कार्य कई लोगों को रुला गया है। चार महीने से, नीलू नामक यह दिव्यांग व्यक्ति, जिसका एक पैर और एक हाथ नहीं है, जिला जालौन स्थित अपने घर वापस लौटना चाहता था, पर कोई मददगार न होने के कारण ऐसा नहीं कर पा रहा था। कल शाम 5 बजे, उसकी माँ और आटा संधी गाँव के ओम जी ने इंसानियत ग्रुप से मदद माँगी। ग्रुप ने 24 घंटे भी पूरे होने से पहले ही यह मदद पूरी कर दी है। बालकृष्ण दीक्षित जी अपने परिवार सहित पूरी रात्रि डटे रहे, और डॉ. पुष्पेंद्र गुर्जर जी तथा रजत भाई का भी विशेष सहयोग रहा, जिसके कारण नीलू उधर से झाँसी आ पा रहे हैं। नीलू आज दोपहर 12 बजे झाँसी में विश्वकर्मा जी के साथ पहुँचेंगे। झाँसी के मददगार भाइयों से निवेदन किया गया है कि वे समय पर पहुँचकर नीलू को ट्रेन से उतारें और उरई तक पहुँचाने का कार्य करें, क्योंकि वह अकेले न तो ट्रेन से उतर सकते हैं और न ही बैठ सकते हैं। यह कार्य हम सभी को मिलकर पूरा करना है।1
- सीधी जिले के बहरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गजरही में रविवार शाम करीब 4 बजे रेलवे विभाग ने अतिक्रमण हटाने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान रेलवे अधिकारियों और ठेकेदार की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर रेलवे भूमि पर बने कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों ने इसका विरोध भी जताया, लेकिन प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की उपस्थिति में अभियान जारी रहा, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मकान टूटने से कई परिवार बेघर हो गए हैं। प्रभावित परिवारों ने बताया कि बरसात का मौसम शुरू होने से ठीक पहले उनके सिर से छत छिन गई है, जिससे उनके सामने रहने और अपने परिवार के पालन-पोषण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों को अपने सामान को बचाने की कोशिश करते देखा गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इन बेघर हुए परिवारों के लिए पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से यहां निवास कर रहे परिवारों को उचित व्यवस्था दिए बिना हटाए जाने से बड़ी परेशानी उत्पन्न हो गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई रेलवे भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए की गई है और इसे संबंधित प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया है। बरसात से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन और रेलवे विभाग की आगामी व्यवस्था पर टिकी हुई है।1