सीधी जिले के बहरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गजरही में रविवार शाम करीब 4 बजे रेलवे विभाग ने अतिक्रमण हटाने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान रेलवे अधिकारियों और ठेकेदार की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर रेलवे भूमि पर बने कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों ने इसका विरोध भी जताया, लेकिन प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की उपस्थिति में अभियान जारी रहा, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मकान टूटने से कई परिवार बेघर हो गए हैं। प्रभावित परिवारों ने बताया कि बरसात का मौसम शुरू होने से ठीक पहले उनके सिर से छत छिन गई है, जिससे उनके सामने रहने और अपने परिवार के पालन-पोषण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों को अपने सामान को बचाने की कोशिश करते देखा गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इन बेघर हुए परिवारों के लिए पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से यहां निवास कर रहे परिवारों को उचित व्यवस्था दिए बिना हटाए जाने से बड़ी परेशानी उत्पन्न हो गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई रेलवे भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए की गई है और इसे संबंधित प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया है। बरसात से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन और रेलवे विभाग की आगामी व्यवस्था पर टिकी हुई है।
सीधी जिले के बहरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गजरही में रविवार शाम करीब 4 बजे रेलवे विभाग ने अतिक्रमण हटाने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान रेलवे अधिकारियों और ठेकेदार की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर रेलवे भूमि पर बने कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों ने इसका विरोध भी जताया, लेकिन प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की उपस्थिति में अभियान जारी रहा, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मकान टूटने से कई परिवार बेघर हो गए हैं। प्रभावित परिवारों ने बताया कि बरसात का मौसम शुरू होने से ठीक पहले उनके सिर से छत छिन गई है, जिससे उनके सामने रहने और अपने परिवार के पालन-पोषण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों को अपने सामान को बचाने की कोशिश करते देखा गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इन बेघर हुए परिवारों के लिए पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से यहां निवास कर रहे परिवारों को उचित व्यवस्था दिए बिना हटाए जाने से बड़ी परेशानी उत्पन्न हो गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई रेलवे भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए की गई है और इसे संबंधित प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया है। बरसात से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन और रेलवे विभाग की आगामी व्यवस्था पर टिकी हुई है।
- आलमपुर में कामांक्षा देवी मंदिर में चोरी की घटना सामने आई थी, जिसके बाद पूर्व विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने इस मामले पर अल्टीमेटम दिया था। इसी बीच, आलमपुर स्थित मां गेथरी माता मंदिर के पास से बिजली के तार भी चोरी हो गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 1.80 लाख रुपए बताई जा रही है।1
- सामने आए एक बयान के अनुसार, लोगों का कहना है कि वे स्वयं झाड़ू लगाकर कचरा वहीं खत्म करवा देंगे। इस बात से यह संदेश दिया गया है कि लोग अपनी सुविधा के अनुसार कचरा निस्तारण का काम वहीं निपटा देंगे।1
- महाराष्ट्र के अंतर्गत एक गोल्ड माइनिंग कंपनी के मालिक श्री रोहित पिसल जी ने शहर में अपना प्रथम आगमन किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस बहुजन भाईचारा महापंचायत का आयोजन राष्ट्र माता सावित्री भाई फुले शिक्षा प्रसार समिति के अध्यक्ष श्री कुंवर सिंह चौधरी ने किया था।1
- इंदरगढ़ के जे के पैलेस में आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भांडेर विधायक फूल सिंह बरैया जी ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक लोग संविधान की पढ़ाई करके उसकी ताकत को नहीं समझेंगे, तब तक उनका शोषण होता रहेगा। उन्होंने ज़ोर दिया कि इसी वजह से हर घर में संविधान की किताब रखी जानी चाहिए और बच्चों को उससे पढ़ाया जाना चाहिए। विधायक बरैया ने लोगों से 'संविधान पढ़ो, जागरूक बनो, संविधान हमारी ताकत है और संविधान हमारी पहचान' के संदेश के साथ जागरूक होने का आह्वान किया।1
- दतिया में लोकमाता अहिल्याबाई और माता रमाबाई जयंती समारोह में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर डॉ. अमित यादव और डॉ. कौशल यादव ने लोगों को सामाजिक एकता का संदेश दिया।1
- दतिया के इंदरगढ़ स्थित सेवढ़ा सनकुआ सिंध घाट पर सोमवती अमावस्या के अवसर पर आस्था का विराट जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का हुजूम घाट पर जुटने लगा, जिसमें हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे स्नान करने पहुंचे। अनुमान है कि देर शाम तक यह संख्या लगभग दो लाख तक पहुंच सकती है। इस विशाल भीड़ के बावजूद, सेवढ़ा प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मौके पर केवल 10 से 15 पुलिसकर्मी ही तैनात दिखाई दे रहे हैं, जिससे भीड़ बढ़ने के कारण जाम की स्थिति बन रही है। श्रद्धालु बिना किसी रोक-टोक के सिंध नदी के बीच जाकर स्नान कर रहे हैं, और उन्हें रोकने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है। वीडियो में बच्चे भी नदी पार करते दिख रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले एक महीने में सनकुआं घाट पर डूबने से चार लोगों की मौतें हो चुकी हैं। आपदा प्रबंधन समिति का भी कुछ ही पुलिस बल मौके पर मौजूद है, जिससे भीड़ और उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों के बीच एक बड़ा अंतर साफ नजर आ रहा है। प्रशासन की इस ढीली व्यवस्था से गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। यदि कोई अप्रिय दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा। आमजन और श्रद्धालु जाम से जूझते हुए भी सनकुआं घाट पर पहुंच रहे हैं, जबकि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने से खतरा लगातार मंडरा रहा है।2
- सीधी जिले के बहरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गजरही में रविवार शाम करीब 4 बजे रेलवे विभाग ने अतिक्रमण हटाने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान रेलवे अधिकारियों और ठेकेदार की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर रेलवे भूमि पर बने कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों ने इसका विरोध भी जताया, लेकिन प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की उपस्थिति में अभियान जारी रहा, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मकान टूटने से कई परिवार बेघर हो गए हैं। प्रभावित परिवारों ने बताया कि बरसात का मौसम शुरू होने से ठीक पहले उनके सिर से छत छिन गई है, जिससे उनके सामने रहने और अपने परिवार के पालन-पोषण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों को अपने सामान को बचाने की कोशिश करते देखा गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इन बेघर हुए परिवारों के लिए पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से यहां निवास कर रहे परिवारों को उचित व्यवस्था दिए बिना हटाए जाने से बड़ी परेशानी उत्पन्न हो गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई रेलवे भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए की गई है और इसे संबंधित प्रक्रिया के तहत अंजाम दिया गया है। बरसात से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन और रेलवे विभाग की आगामी व्यवस्था पर टिकी हुई है।1