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एक पोस्ट के माध्यम से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में AIIMS की स्थापना के लिए आगामी तीन महीने बाद एक 'क्रांति' देखने की बात कही गई है। इस आह्वान के तहत, 'एक पोस्ट एक आवाज' के माध्यम से जनता से पूछा गया है कि क्या वे इस क्रांति के लिए तैयार हैं। यह 'जनता की आवाज' और 'पहाड़ के अधिकार' की मांग को दर्शाते हुए, 'गैरसैंण में AIIMS' की स्थापना को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। इसमें '2027 परिवर्तन' के लक्ष्य का भी जिक्र है, साथ ही 'कॉकराच जनता पार्टी' का भी उल्लेख किया गया है।

11 hrs ago
user_पवन नेगी
पवन नेगी
Social worker गैरसैंण, चमोली, उत्तराखंड•
11 hrs ago

एक पोस्ट के माध्यम से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में AIIMS की स्थापना के लिए आगामी तीन महीने बाद एक 'क्रांति' देखने की बात कही गई है। इस आह्वान के तहत, 'एक पोस्ट एक आवाज' के माध्यम से जनता से पूछा गया है कि क्या वे इस क्रांति के लिए तैयार हैं। यह 'जनता की आवाज' और 'पहाड़ के अधिकार' की मांग को दर्शाते हुए, 'गैरसैंण में AIIMS' की स्थापना को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। इसमें '2027 परिवर्तन' के लक्ष्य का भी जिक्र है, साथ ही 'कॉकराच जनता पार्टी' का भी उल्लेख किया गया है।

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  • एक पोस्ट के माध्यम से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में AIIMS की स्थापना के लिए आगामी तीन महीने बाद एक 'क्रांति' देखने की बात कही गई है। इस आह्वान के तहत, 'एक पोस्ट एक आवाज' के माध्यम से जनता से पूछा गया है कि क्या वे इस क्रांति के लिए तैयार हैं। यह 'जनता की आवाज' और 'पहाड़ के अधिकार' की मांग को दर्शाते हुए, 'गैरसैंण में AIIMS' की स्थापना को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। इसमें '2027 परिवर्तन' के लक्ष्य का भी जिक्र है, साथ ही 'कॉकराच जनता पार्टी' का भी उल्लेख किया गया है।
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    एक पोस्ट के माध्यम से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में AIIMS की स्थापना के लिए आगामी तीन महीने बाद एक 'क्रांति' देखने की बात कही गई है। इस आह्वान के तहत, 'एक पोस्ट एक आवाज' के माध्यम से जनता से पूछा गया है कि क्या वे इस क्रांति के लिए तैयार हैं। यह 'जनता की आवाज' और 'पहाड़ के अधिकार' की मांग को दर्शाते हुए, 'गैरसैंण में AIIMS' की स्थापना को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। इसमें '2027 परिवर्तन' के लक्ष्य का भी जिक्र है, साथ ही 'कॉकराच जनता पार्टी' का भी उल्लेख किया गया है।
    user_पवन नेगी
    पवन नेगी
    Social worker गैरसैंण, चमोली, उत्तराखंड•
    11 hrs ago
  • उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के कपकोट ब्लॉक स्थित विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर में ट्रैकिंग के दौरान नोएडा निवासी 28 वर्षीय अभिषेक चौहान के लापता हुए एक हफ़्ते से अधिक का समय बीत चुका है। उनकी खोज के लिए पुलिस और प्रशासन ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है, जिसके तहत खाती गाँव से आगे पिंडारी घाटी के दुर्गम इलाकों में बड़े पैमाने पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी बागेश्वर के निर्देशन में, गुमशुदा अभिषेक की तलाश के लिए कपकोट पुलिस, स्थानीय ग्रामीणों, SDRF, NDRF, फायर ब्रिगेड और वन विभाग की टीमें संयुक्त रूप से एक व्यापक अभियान चला रही हैं। क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए, गहरी घाटियों, जंगलों और अत्यंत कठिन रास्तों में सुराग लगाने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों और डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है। टीमें घटना स्थल के आसपास के प्रत्येक हिस्से की बारीकी से छानबीन कर रही हैं। इसके साथ ही, पुलिस टीम अभिषेक के परिवार के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है और उनके दोस्तों, करीबियों तथा रिश्तेदारों से संपर्क कर हर संभावित इनपुट जुटाया जा रहा है। बागेश्वर पुलिस ने गुमशुदा के सुरक्षित बरामदगी के हर संभव प्रयास के तहत आसपास के सभी जनपदों और थानों को उनके पंपलेट भेजकर सूचित किया है। लापता युवक अभिषेक चौहान की पहचान 28 वर्षीय अभिषेक चौहान के रूप में हुई है, जिनके पिता का नाम रघुराज चौहान है। वह वर्तमान में नोएडा (दिल्ली एनसीआर) के निवासी हैं और मूल रूप से ग्राम शेखूपूरा, पोस्ट कन्डेला, तहसील कैराना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। बागेश्वर पुलिस गुमशुदा की सुरक्षित बरामदगी के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
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    उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के कपकोट ब्लॉक स्थित विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर में ट्रैकिंग के दौरान नोएडा निवासी 28 वर्षीय अभिषेक चौहान के लापता हुए एक हफ़्ते से अधिक का समय बीत चुका है। उनकी खोज के लिए पुलिस और प्रशासन ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है, जिसके तहत खाती गाँव से आगे पिंडारी घाटी के दुर्गम इलाकों में बड़े पैमाने पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

जिलाधिकारी बागेश्वर के निर्देशन में, गुमशुदा अभिषेक की तलाश के लिए कपकोट पुलिस, स्थानीय ग्रामीणों, SDRF, NDRF, फायर ब्रिगेड और वन विभाग की टीमें संयुक्त रूप से एक व्यापक अभियान चला रही हैं। क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए, गहरी घाटियों, जंगलों और अत्यंत कठिन रास्तों में सुराग लगाने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों और डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है। टीमें घटना स्थल के आसपास के प्रत्येक हिस्से की बारीकी से छानबीन कर रही हैं। इसके साथ ही, पुलिस टीम अभिषेक के परिवार के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है और उनके दोस्तों, करीबियों तथा रिश्तेदारों से संपर्क कर हर संभावित इनपुट जुटाया जा रहा है। बागेश्वर पुलिस ने गुमशुदा के सुरक्षित बरामदगी के हर संभव प्रयास के तहत आसपास के सभी जनपदों और थानों को उनके पंपलेट भेजकर सूचित किया है।

लापता युवक अभिषेक चौहान की पहचान 28 वर्षीय अभिषेक चौहान के रूप में हुई है, जिनके पिता का नाम रघुराज चौहान है। वह वर्तमान में नोएडा (दिल्ली एनसीआर) के निवासी हैं और मूल रूप से ग्राम शेखूपूरा, पोस्ट कन्डेला, तहसील कैराना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। बागेश्वर पुलिस गुमशुदा की सुरक्षित बरामदगी के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
    user_Jc pandey
    Jc pandey
    गरुड़, बागेश्वर, उत्तराखंड•
    11 hrs ago
  • बागेश्वर पुलिस ने बिना इंश्योरेंस, बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र और बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने वालों के खिलाफ एक सख्त अभियान चलाया है। इस व्यापक कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने कुल 22 वाहनों पर आवश्यक नियमों का पालन न करने के लिए कार्रवाई की।
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    बागेश्वर पुलिस ने बिना इंश्योरेंस, बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र और बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने वालों के खिलाफ एक सख्त अभियान चलाया है। इस व्यापक कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने कुल 22 वाहनों पर आवश्यक नियमों का पालन न करने के लिए कार्रवाई की।
    user_मेरा हक न्यूज
    मेरा हक न्यूज
    Local News Reporter बागेश्वर, बागेश्वर, उत्तराखंड•
    46 min ago
  • अल्मोड़ा के हवालबाग में आयोजित राज्य स्तरीय "खेत बचाओ अभियान" कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसानों से कृषि भूमि, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने अल्मोड़ा जनपद में लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से तारबाड़ योजना के तहत कार्य कराए जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने इस अभियान को अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनआंदोलन बताया। मुख्यमंत्री धामी ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और पारंपरिक फसलों के संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश की शक्ति हैं और उनसे नियमित मिट्टी परीक्षण, जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य बजट में ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार बागवानी, पॉलीहाउस, फलोत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, मेगा फूड पार्क और सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों का उत्पादन प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही मोटे अनाजों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक-दूसरे का पूरक बताया। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कृषि संरक्षण तथा जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में विधायक रानीखेत डॉ. प्रमोद नैनवाल, विधायक जागेश्वर मोहन सिंह मेहरा, विधायक सल्ट महेश जीना, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा, गंगा बिष्ट, गोविंद पिलख्वाल, मेयर अजय वर्मा, कृषि सचिव सुरेंद्र नारायण पांडे, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और जनता उपस्थित रहे।
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    अल्मोड़ा के हवालबाग में आयोजित राज्य स्तरीय "खेत बचाओ अभियान" कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसानों से कृषि भूमि, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने अल्मोड़ा जनपद में लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से तारबाड़ योजना के तहत कार्य कराए जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने इस अभियान को अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनआंदोलन बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और पारंपरिक फसलों के संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश की शक्ति हैं और उनसे नियमित मिट्टी परीक्षण, जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य बजट में ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकार बागवानी, पॉलीहाउस, फलोत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, मेगा फूड पार्क और सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। प्रदेश में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों का उत्पादन प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही मोटे अनाजों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक-दूसरे का पूरक बताया।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कृषि संरक्षण तथा जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में विधायक रानीखेत डॉ. प्रमोद नैनवाल, विधायक जागेश्वर मोहन सिंह मेहरा, विधायक सल्ट महेश जीना, जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा, गंगा बिष्ट, गोविंद पिलख्वाल, मेयर अजय वर्मा, कृषि सचिव सुरेंद्र नारायण पांडे, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और जनता उपस्थित रहे।
    user_Vinod Joshi
    Vinod Joshi
    Local News Reporter Almora, Uttarakhand•
    10 hrs ago
  • नैनीताल में झील के किनारे अपने अद्भुत जादुई हुनर से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले एक छोटे बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अपनी कम उम्र के बावजूद, यह बच्चा जिस निपुणता से जादू दिखाता है, उससे दर्शक दंग रह जाते हैं और हर ट्रिक के साथ तालियाँ अपने आप बजने लगती हैं। इस मासूम बच्चे के हुनर ने न सिर्फ इंटरनेट यूजर्स को भावुक कर दिया है, बल्कि देश के जाने-माने उद्योगपति और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी उसके टैलेंट के मुरीद हो गए हैं। आनंद महिंद्रा ने अपने एक्स (X) अकाउंट पर इस बच्चे का लगभग 1 मिनट 39 सेकंड का वीडियो साझा करते हुए उसकी मदद करने की इच्छा व्यक्त की है। वीडियो में, बच्चा अत्यंत आत्मविश्वास और मासूमियत के साथ जादू प्रदर्शित करता दिखाई देता है, और उसकी कला, प्रस्तुति तथा चेहरे के हावभाव ने हर किसी को गहराई से प्रभावित किया है। वीडियो के साथ आनंद महिंद्रा ने लिखा है कि यह बच्चा बेहद प्रतिभाशाली है और वे न केवल उसकी पढ़ाई में मदद करना चाहते हैं, बल्कि जादू के प्रति उसकी रुचि को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जादूगरों में से एक बन सके। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या वह अक्सर नैनीताल की सड़कों पर प्रदर्शन करता है। आनंद महिंद्रा की इस संवेदनशील पहल की सोशल मीडिया पर भारी सराहना हो रही है। अब तक हजारों लोगों ने इस वीडियो को पसंद किया है, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने टिप्पणी और साझा कर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। नैनीताल की सड़कों पर अपने छोटे-छोटे हाथों से जादू दिखाने वाला यह बच्चा अब उम्मीद, प्रतिभा और सपनों की एक नई मिसाल बन गया है, जो सोशल मीडिया की उस खूबसूरती को उजागर करता है जहाँ गुमनाम प्रतिभाओं को पहचान मिलती है और किसी का भविष्य बदलने के लिए मदद के हाथ आगे बढ़ते हैं।
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    नैनीताल में झील के किनारे अपने अद्भुत जादुई हुनर से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले एक छोटे बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अपनी कम उम्र के बावजूद, यह बच्चा जिस निपुणता से जादू दिखाता है, उससे दर्शक दंग रह जाते हैं और हर ट्रिक के साथ तालियाँ अपने आप बजने लगती हैं। इस मासूम बच्चे के हुनर ने न सिर्फ इंटरनेट यूजर्स को भावुक कर दिया है, बल्कि देश के जाने-माने उद्योगपति और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी उसके टैलेंट के मुरीद हो गए हैं।

आनंद महिंद्रा ने अपने एक्स (X) अकाउंट पर इस बच्चे का लगभग 1 मिनट 39 सेकंड का वीडियो साझा करते हुए उसकी मदद करने की इच्छा व्यक्त की है। वीडियो में, बच्चा अत्यंत आत्मविश्वास और मासूमियत के साथ जादू प्रदर्शित करता दिखाई देता है, और उसकी कला, प्रस्तुति तथा चेहरे के हावभाव ने हर किसी को गहराई से प्रभावित किया है। वीडियो के साथ आनंद महिंद्रा ने लिखा है कि यह बच्चा बेहद प्रतिभाशाली है और वे न केवल उसकी पढ़ाई में मदद करना चाहते हैं, बल्कि जादू के प्रति उसकी रुचि को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जादूगरों में से एक बन सके। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या वह अक्सर नैनीताल की सड़कों पर प्रदर्शन करता है।

आनंद महिंद्रा की इस संवेदनशील पहल की सोशल मीडिया पर भारी सराहना हो रही है। अब तक हजारों लोगों ने इस वीडियो को पसंद किया है, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने टिप्पणी और साझा कर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। नैनीताल की सड़कों पर अपने छोटे-छोटे हाथों से जादू दिखाने वाला यह बच्चा अब उम्मीद, प्रतिभा और सपनों की एक नई मिसाल बन गया है, जो सोशल मीडिया की उस खूबसूरती को उजागर करता है जहाँ गुमनाम प्रतिभाओं को पहचान मिलती है और किसी का भविष्य बदलने के लिए मदद के हाथ आगे बढ़ते हैं।
    user_धनन्जय मीना
    धनन्जय मीना
    Nainital, Uttarakhand•
    21 hrs ago
  • उत्तराखण्ड के टिहरी जनपद के भिलंगना ब्लॉक के घनसाली क्षेत्र में स्थित बूढ़ा केदार मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थल है। बाल गंगा और धर्म गंगा नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर पंच केदार (केदारनाथ) के प्रारंभिक या पाँचवें धाम के रूप में प्रतिष्ठित है, जो अपनी शांत और सुरम्य भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है। बूढ़ा केदार मंदिर समिति के सदस्य मनमोहन रावत के अनुसार, स्कन्द पुराण के छठवें अध्याय में वर्णित है कि बूढ़ा केदार का इतिहास क्षेत्र के कई अन्य प्रसिद्ध केदारनाथ तीर्थों से भी पुराना है। यहाँ तक कि चारों धाम की यात्रा को इस मंदिर के दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। महाभारत युद्ध के पश्चात् ब्रह्म और गोत्र हत्या के पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने अपने गुरु वेदव्यास से मार्गदर्शन माँगा था। गुरु वेदव्यास ने उन्हें उत्तर हिमालय की दिशा में भगवान शिव के दर्शन से इन पापों से मुक्ति का मार्ग सुझाया। जब पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद खोजते हुए हिमालय पहुँचे, तो शिव ने उन्हें दर्शन देने से बचने के लिए एक वृद्ध व्यक्ति का रूप धारण कर लिया। पांडवों के इस स्थान पर पहुँचने पर, वह वृद्ध व्यक्ति ध्यान में लीन हो गया और अचानक एक विशाल शिवलिंग प्रकट हुआ। इसी स्थान पर पांडवों ने शिवलिंग के रूप में भगवान शिव के दर्शन किए, जिसके कारण यह स्थान बूढ़ा केदार कहलाया। बूढ़ाकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इस मंदिर में स्थापित प्राकृतिक शिवलिंग उत्तर भारत का सबसे विशाल माना जाता है। इस शिवलिंग पर वृद्ध शिव, गणेश, नंदी के साथ-साथ पाँचों पांडवों और द्रौपदी की छवियाँ अंकित हैं। मंदिर पारंपरिक गढ़वाली वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपने जटिल शिल्प कौशल और नक्काशीदार लकड़ी व पत्थर के संयोजन के लिए विख्यात है। मंदिर के प्रांगण में नाथ संप्रदाय के आध्यात्मिक गुरुओं की समाधियाँ भी स्थित हैं, और मान्यता है कि स्वयं ऋषि गोरखनाथ ने एक बार इस स्थान पर ध्यान किया था। इस मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह भी है कि यहाँ के पुजारी ब्राह्मण न होकर, नाथ संप्रदाय से शिक्षा प्राप्त राजपूत जाति के पंडित होते हैं। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी मौजूद हैं। यह मंदिर नई टिहरी मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर घनसाली क्षेत्र में स्थित है और समुद्र तल से 1,535 मीटर की ऊँचाई पर है। घने देवदार के जंगल और सीढ़ीदार खेत इसे घेरे हुए हैं, जो यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसमें हजारों भक्त प्रार्थनाओं और उत्सवों में भाग लेते हैं। इसके अतिरिक्त, जुलाई माह की पूर्णिमा से शुरू होने वाला तीन दिवसीय मेला भी हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 180 गाँवों के इष्ट देवता गुरु कैलापीर का भव्य मेला सामान्य दीपावली के एक माह बाद बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर तक पहुँचने के लिए ऋषिकेश और नई टिहरी से घनसाली के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं, जिसके बाद निजी टैक्सी या अन्य वाहन से मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मुख्य बूढ़ा केदार सड़क पर स्थित लोहे के पुल से 1 किलोमीटर की आसान और मनोरम ट्रेकिंग के बाद मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय मंदिर भ्रमण के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और गढ़वाल हिमालय के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। बूढ़ा केदार महासर ताल, सहस्त्र ताल, जरार ताल और मंझार ताल जैसे कई सुंदर और ऊँचे तालों की ट्रेकिंग के लिए भी एक मुख्य मार्ग है। हमारी यात्रा के दौरान हमें रावल अमरनाथ योगी से साक्षात्कार का सौभाग्य मिला, जिन्होंने बूढ़ा केदार मंदिर के इतिहास, पौराणिक महत्व और परंपराओं के विषय में अत्यंत सरल एवं गहन जानकारी साझा की थी। उनके शब्दों में इस पावन धाम की आस्था और अध्यात्म की जीवंत झलक स्पष्ट रूप से अनुभव की जा सकती थी, और यह भेंट इस दिव्य स्थल की सांस्कृतिक आत्मा को समझने का एक सशक्त माध्यम बनी। दुर्भाग्यवश, हाल ही में उनके स्वर्गवास का समाचार प्राप्त हुआ, जिससे यह स्मृति और भी अधिक भावुक एवं अविस्मरणीय हो गई है, और बूढ़ा केदार की यह यात्रा आज भी उनकी स्मृतियों और मार्गदर्शन के प्रकाश में जीवंत प्रतीत होती है। अंततः, बूढ़ा केदार केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि गढ़वाल की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है, जो श्रद्धा, इतिहास और प्रकृति का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
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    उत्तराखण्ड के टिहरी जनपद के भिलंगना ब्लॉक के घनसाली क्षेत्र में स्थित बूढ़ा केदार मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थल है। बाल गंगा और धर्म गंगा नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर पंच केदार (केदारनाथ) के प्रारंभिक या पाँचवें धाम के रूप में प्रतिष्ठित है, जो अपनी शांत और सुरम्य भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है।

बूढ़ा केदार मंदिर समिति के सदस्य मनमोहन रावत के अनुसार, स्कन्द पुराण के छठवें अध्याय में वर्णित है कि बूढ़ा केदार का इतिहास क्षेत्र के कई अन्य प्रसिद्ध केदारनाथ तीर्थों से भी पुराना है। यहाँ तक कि चारों धाम की यात्रा को इस मंदिर के दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। महाभारत युद्ध के पश्चात् ब्रह्म और गोत्र हत्या के पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने अपने गुरु वेदव्यास से मार्गदर्शन माँगा था। गुरु वेदव्यास ने उन्हें उत्तर हिमालय की दिशा में भगवान शिव के दर्शन से इन पापों से मुक्ति का मार्ग सुझाया। जब पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद खोजते हुए हिमालय पहुँचे, तो शिव ने उन्हें दर्शन देने से बचने के लिए एक वृद्ध व्यक्ति का रूप धारण कर लिया। पांडवों के इस स्थान पर पहुँचने पर, वह वृद्ध व्यक्ति ध्यान में लीन हो गया और अचानक एक विशाल शिवलिंग प्रकट हुआ। इसी स्थान पर पांडवों ने शिवलिंग के रूप में भगवान शिव के दर्शन किए, जिसके कारण यह स्थान बूढ़ा केदार कहलाया।

बूढ़ाकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इस मंदिर में स्थापित प्राकृतिक शिवलिंग उत्तर भारत का सबसे विशाल माना जाता है। इस शिवलिंग पर वृद्ध शिव, गणेश, नंदी के साथ-साथ पाँचों पांडवों और द्रौपदी की छवियाँ अंकित हैं। मंदिर पारंपरिक गढ़वाली वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपने जटिल शिल्प कौशल और नक्काशीदार लकड़ी व पत्थर के संयोजन के लिए विख्यात है। मंदिर के प्रांगण में नाथ संप्रदाय के आध्यात्मिक गुरुओं की समाधियाँ भी स्थित हैं, और मान्यता है कि स्वयं ऋषि गोरखनाथ ने एक बार इस स्थान पर ध्यान किया था। इस मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह भी है कि यहाँ के पुजारी ब्राह्मण न होकर, नाथ संप्रदाय से शिक्षा प्राप्त राजपूत जाति के पंडित होते हैं। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी मौजूद हैं।

यह मंदिर नई टिहरी मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर घनसाली क्षेत्र में स्थित है और समुद्र तल से 1,535 मीटर की ऊँचाई पर है। घने देवदार के जंगल और सीढ़ीदार खेत इसे घेरे हुए हैं, जो यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसमें हजारों भक्त प्रार्थनाओं और उत्सवों में भाग लेते हैं। इसके अतिरिक्त, जुलाई माह की पूर्णिमा से शुरू होने वाला तीन दिवसीय मेला भी हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 180 गाँवों के इष्ट देवता गुरु कैलापीर का भव्य मेला सामान्य दीपावली के एक माह बाद बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर तक पहुँचने के लिए ऋषिकेश और नई टिहरी से घनसाली के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं, जिसके बाद निजी टैक्सी या अन्य वाहन से मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मुख्य बूढ़ा केदार सड़क पर स्थित लोहे के पुल से 1 किलोमीटर की आसान और मनोरम ट्रेकिंग के बाद मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय मंदिर भ्रमण के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और गढ़वाल हिमालय के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। बूढ़ा केदार महासर ताल, सहस्त्र ताल, जरार ताल और मंझार ताल जैसे कई सुंदर और ऊँचे तालों की ट्रेकिंग के लिए भी एक मुख्य मार्ग है।

हमारी यात्रा के दौरान हमें रावल अमरनाथ योगी से साक्षात्कार का सौभाग्य मिला, जिन्होंने बूढ़ा केदार मंदिर के इतिहास, पौराणिक महत्व और परंपराओं के विषय में अत्यंत सरल एवं गहन जानकारी साझा की थी। उनके शब्दों में इस पावन धाम की आस्था और अध्यात्म की जीवंत झलक स्पष्ट रूप से अनुभव की जा सकती थी, और यह भेंट इस दिव्य स्थल की सांस्कृतिक आत्मा को समझने का एक सशक्त माध्यम बनी। दुर्भाग्यवश, हाल ही में उनके स्वर्गवास का समाचार प्राप्त हुआ, जिससे यह स्मृति और भी अधिक भावुक एवं अविस्मरणीय हो गई है, और बूढ़ा केदार की यह यात्रा आज भी उनकी स्मृतियों और मार्गदर्शन के प्रकाश में जीवंत प्रतीत होती है। अंततः, बूढ़ा केदार केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि गढ़वाल की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है, जो श्रद्धा, इतिहास और प्रकृति का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
    user_Uklive Uttrakhand
    Uklive Uttrakhand
    टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
    15 hrs ago
  • अल्मोड़ा के दौरे पर देवतुल्य जनता से मिले असीम स्नेह, आत्मीयता और अभूतपूर्व समर्थन से हृदय अभिभूत हो गया है। यह विश्वास और आशीर्वाद, प्रदेश के विकास एवं जनसेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और अधिक दृढ़ करता है।
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    अल्मोड़ा के दौरे पर देवतुल्य जनता से मिले असीम स्नेह, आत्मीयता और अभूतपूर्व समर्थन से हृदय अभिभूत हो गया है। यह विश्वास और आशीर्वाद, प्रदेश के विकास एवं जनसेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और अधिक दृढ़ करता है।
    user_Jagdish Ballabh Sharma
    Jagdish Ballabh Sharma
    Teacher हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड•
    9 hrs ago
  • बिजनौर किरतपुर रोड पर स्थित पैदा गांव के पास एक सड़क दुर्घटना हुई है। इस हादसे में एक कार राष्ट्रीय राजमार्ग पर नीलगाय से टकरा गई।
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    बिजनौर किरतपुर रोड पर स्थित पैदा गांव के पास एक सड़क दुर्घटना हुई है। इस हादसे में एक कार राष्ट्रीय राजमार्ग पर नीलगाय से टकरा गई।
    user_HNNK News Sabir
    HNNK News Sabir
    नजीबाबाद, बिजनौर, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
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