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आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों को लेकर नंदन नीलेकणि जी के नेतृत्व में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (High-Powered Task Force) के गठन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह टास्क फोर्स न केवल वर्तमान चुनौतियों के समाधान तक सीमित रहेगी, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारतीय परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, विश्वसनीय और लीक-प्रूफ बनाने हेतु एक सुदृढ़ ढांचा तैयार करेगी। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के इस निर्णय को समय की आवश्यकता के अनुरूप, दूरदर्शी, ऐतिहासिक और अत्यंत सराहनीय पहल बताया गया है।
प्रदीप कुमार डागा
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों को लेकर नंदन नीलेकणि जी के नेतृत्व में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (High-Powered Task Force) के गठन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह टास्क फोर्स न केवल वर्तमान चुनौतियों के समाधान तक सीमित रहेगी, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारतीय परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, विश्वसनीय और लीक-प्रूफ बनाने हेतु एक सुदृढ़ ढांचा तैयार करेगी। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के इस निर्णय को समय की आवश्यकता के अनुरूप, दूरदर्शी, ऐतिहासिक और अत्यंत सराहनीय पहल बताया गया है।
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- आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों को लेकर नंदन नीलेकणि जी के नेतृत्व में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (High-Powered Task Force) के गठन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह टास्क फोर्स न केवल वर्तमान चुनौतियों के समाधान तक सीमित रहेगी, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारतीय परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, विश्वसनीय और लीक-प्रूफ बनाने हेतु एक सुदृढ़ ढांचा तैयार करेगी। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के इस निर्णय को समय की आवश्यकता के अनुरूप, दूरदर्शी, ऐतिहासिक और अत्यंत सराहनीय पहल बताया गया है।1
- राजस्थान में रियां बड़ी पंचायत समिति के ग्राम सुरियास में एक सामाजिक परंपरा को नई दिशा देते हुए मिसाल पेश की गई है। सुरियास निवासी कानसिंह राठौड़ के निधन के बाद रविवार को बारहवें की रस्म पर उनकी दस वर्षीय इकलौती पुत्री भाविका कंवर उर्फ बिट्टू का पाग दस्तुर संपन्न कराया गया। आमतौर पर पिता के वैकुण्ठवास के बाद पुत्र या पुत्र न होने की स्थिति में दत्तक पुत्र लेकर उत्तराधिकारी के रूप में पाग दस्तुर की रस्म निभाई जाती है, लेकिन सुरियास में पहली बार बेटी को यह अधिकार देकर पगड़ी पहनाई गई। कानसिंह राठौड़ का 15 जुलाई को गंभीर बीमारी के कारण अल्पायु में निधन हो गया था। रविवार को बारहवें की रस्म के दौरान जब परिवार के पुरुष सदस्य परम्परानुसार किसी निकट संबंधी को दत्तक लेने पर विचार कर रहे थे, तब कानसिंह के मामा शंकरसिंह राजावत और भाविका के मामा महावीरसिंह सिंगोद ने परिवार की महिलाओं से चर्चा की। इस पर मृतक की माता और पत्नी ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता, इसलिए पाग दस्तुर उनकी बेटी का ही किया जाए। परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए पीहर और ससुराल पक्ष सहित सभी परिजनों ने सर्वसम्मति से भाविका के पाग दस्तुर का निर्णय लिया। रस्म के दौरान सामाजिक परंपरा के अनुसार सबसे पहले दादी के पीहर पक्ष से शंकरसिंह राजावत ने पगड़ी बंधवाई, इसके बाद ननिहाल पक्ष से महावीरसिंह सिंगोद ने दूसरी पगड़ी पहनाकर रस्म पूरी कराई। समाज में बेटी को बेटे के समान अधिकार और सम्मान देने की इस पहल की ग्रामीणों ने मुक्तकंठ से सराहना की है। इस परिवार में पिछले चार पीढ़ियों से प्रत्येक पीढ़ी में केवल एक ही पुरुष सदस्य रहा है—पड़दादा भीमसिंह, उनके पुत्र उदयसिंह, फिर भगवानसिंह और उनके बाद कानसिंह। कानसिंह के निधन के बाद अब परिवार की विरासत और उम्मीदों का केंद्र उनकी इकलौती पुत्री भाविका ही हैं। इस अवसर पर कुन्दनसिंह, छोटूसिंह, हड़मानसिंह, गिरवरसिंह, किशोरसिंह, महावीरसिंह, रुघनाथसिंह, गोपालसिंह, रतनसिंह, भंवरसिंह, रविन्द्रसिंह, दशरथसिंह, विक्रमसिंह और श्यामसिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- नागौर जिले के थांवला पुलिस थाना परिसर में डेगाना पुलिस उपाधीक्षक अजीत पाल की अध्यक्षता में सीएलजी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कानून-व्यवस्था, यातायात सुरक्षा, नशा मुक्ति और साइबर अपराध की रोकथाम समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान पुलिस उपाधीक्षक ने सीएलजी और शांति समिति के सदस्यों को राजकॉप (RajCop) ऐप डाउनलोड करवाकर इसके इस्तेमाल की जानकारी दी। साथ ही दोपहिया वाहन चालकों से हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन चालकों से सीट बेल्ट लगाने और नशे की हालत में वाहन न चलाने की अपील की गई। बैठक में अभिभावकों से अपने बच्चों को नशे तथा सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से दूर रखने, साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना देने का आह्वान किया गया। इसके अलावा क्षेत्र में चोरी की घटनाओं पर लगाम कसने, किसानों के जमीनी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने और गांवों व सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने पर चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने सीएलजी, शांति समिति के सदस्यों और युवाओं से अपराध नियंत्रण व सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सहयोग मांगा।3
- नागौर जिले के रियां बड़ी उपखंड क्षेत्र स्थित आलनियावास गांव में मालियों के बेरा से गांव तक जाने वाली सड़क बारिश और बजरी से भरे भारी ट्रैक्टरों की आवाजाही से पूरी तरह बदहाल हो गई है। लगातार बारिश के बाद गड्ढों में पानी भरने और भारी वाहनों की वजह से ग्रेवल सड़क कई स्थानों पर टूट चुकी है, जिससे पूरा रास्ता दलदल और कीचड़ में तब्दील हो गया है। इस वजह से दुपहिया वाहन और स्कूली बच्चों के वाहन अक्सर रास्ते में फंस जाते हैं और बच्चों को रोजाना जोखिम उठाकर पैदल ही कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी ओमप्रकाश माली, गोपीराम माली और ताराचंद माली का कहना है कि इस मार्ग से हर दिन बड़ी संख्या में बच्चे आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर हालत के कारण उनके समय पर स्कूल पहुंचने में बाधा आ रही है। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग से मांग की है कि मानसून के दौरान बजरी से भरे ट्रैक्टरों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाई जाए, अवैध बजरी परिवहन पर सख्ती से कार्रवाई हो और सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन सहित अन्य लोकतांत्रिक कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।1
- नागौर जिले में सरकारी विभाग की कार्यशैली एक बार फिर शर्मसार हुई है। यहाँ बिजली विभाग के एक कर्मचारी ने शराब पीकर फोन पर आम नागरिकों से अभद्रता से बात की और जमकर गाली-गलौच की। सरकारी महकमे के कर्मचारी द्वारा आम जनता के साथ की गई इस तरह की बदसलूकी से विभाग पर सवाल उठ रहे हैं।1