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दिल्ली के शालीमार गाँव में चल रही विस्थापन और बुलडोजर कार्रवाई ने एक गहरा राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। इससे प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों के एक वर्ग में भारी नाराजगी है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि पूर्व विधायक वंदना कुमारी के कार्यकाल में लिए गए कुछ फैसलों और नीतियों के कारण सैकड़ों परिवार आज बेघर होने की कगार पर पहुँच गए हैं। इन परिवारों ने इन फैसलों की गहन जांच करने, जिम्मेदारी तय करने और वंदना कुमारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने घरों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उनकी चिंताओं पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। कई परिवारों का यह भी आरोप है कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हुई चूकों का सीधा खामियाजा अब आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन ने शालीमार बाग क्षेत्र में जारी इस कार्रवाई को सड़क चौड़ीकरण और माननीय न्यायालय के निर्देशों से जुड़ा बताया है। हाल के दिनों में, प्रभावित लोगों द्वारा "घर बचाओ" अभियान सहित कई विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किए गए हैं। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है। उनकी यह भी मांग है कि यदि जांच में किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, शालीमार गाँव का यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है, और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्व विधायक वंदना कुमारी इन गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं। प्रभावित परिवार लगातार न्याय और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

5 hrs ago
user_Gaurav verma
Gaurav verma
Graphic designer करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
5 hrs ago

दिल्ली के शालीमार गाँव में चल रही विस्थापन और बुलडोजर कार्रवाई ने एक गहरा राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। इससे प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों के एक वर्ग में भारी नाराजगी है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि पूर्व विधायक वंदना कुमारी के कार्यकाल में लिए गए कुछ फैसलों और नीतियों के कारण सैकड़ों परिवार आज बेघर होने की कगार पर पहुँच गए हैं। इन परिवारों ने इन फैसलों की गहन जांच करने, जिम्मेदारी तय करने और वंदना कुमारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने घरों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उनकी चिंताओं पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। कई परिवारों का यह भी आरोप है कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हुई चूकों का सीधा खामियाजा अब आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन ने शालीमार बाग क्षेत्र में जारी इस कार्रवाई को सड़क चौड़ीकरण और माननीय न्यायालय के निर्देशों से जुड़ा बताया है। हाल के दिनों में, प्रभावित लोगों द्वारा "घर बचाओ" अभियान सहित कई विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किए गए हैं। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है। उनकी यह भी मांग है कि यदि जांच में किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, शालीमार गाँव का यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है, और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्व विधायक वंदना कुमारी इन गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं। प्रभावित परिवार लगातार न्याय और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

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  • दिल्ली की हर्ष विहार मंडोली जेल में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। मृतक के परिवार वालों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके प्रियजन को जहर देकर मारा गया है।
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    दिल्ली की हर्ष विहार मंडोली जेल में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। मृतक के परिवार वालों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके प्रियजन को जहर देकर मारा गया है।
    user_भारत हिंदी खबर
    भारत हिंदी खबर
    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • केंद्र सरकार ने उन मेधावी छात्रों की सहायता के लिए पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना शुरू की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपनी पढ़ाई जारी रखने में मुश्किलों का सामना करते हैं। यह योजना बढ़ते पढ़ाई के खर्चों के बीच छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है, जिससे वे बिना किसी चिंता के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित यह छात्रवृत्ति योजना मुख्य रूप से ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC) और डीएनटी (DNT) वर्ग के छात्रों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य ऐसे छात्रों को फीस, किताबें, स्टेशनरी और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि हजारों परिवारों पर शिक्षा का बोझ कम हो और बच्चे अपने सपनों को पूरा कर सकें। योजना के तहत, 9वीं और 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल अधिकतम ₹75,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। वहीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों को पढ़ाई का बढ़ता खर्च देखते हुए हर साल ₹1.25 लाख तक की सहायता मिलती है, जिससे वे अपनी उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश के हर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर मिलेंगे।
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    केंद्र सरकार ने उन मेधावी छात्रों की सहायता के लिए पीएम यशस्वी स्कॉलरशिप योजना शुरू की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपनी पढ़ाई जारी रखने में मुश्किलों का सामना करते हैं। यह योजना बढ़ते पढ़ाई के खर्चों के बीच छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है, जिससे वे बिना किसी चिंता के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित यह छात्रवृत्ति योजना मुख्य रूप से ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC) और डीएनटी (DNT) वर्ग के छात्रों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य ऐसे छात्रों को फीस, किताबें, स्टेशनरी और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि हजारों परिवारों पर शिक्षा का बोझ कम हो और बच्चे अपने सपनों को पूरा कर सकें।

योजना के तहत, 9वीं और 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को हर साल अधिकतम ₹75,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। वहीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों को पढ़ाई का बढ़ता खर्च देखते हुए हर साल ₹1.25 लाख तक की सहायता मिलती है, जिससे वे अपनी उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश के हर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर मिलेंगे।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Civil Lines, Central Delhi•
    3 hrs ago
  • देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है। मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।
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    देशभर में 5G नेटवर्क के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां नए मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जगह तलाश रही हैं। ऐसे में, यदि आपके पास कोई खाली छत या इमारत है, तो उसे किराए पर देकर आप हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं।

यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जियो या एयरटेल जैसी कंपनियां सीधे टावर लगाती हैं, जबकि असल में यह कार्य इंडस टावर्स और अमेरिकन टावर कॉर्पोरेशन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों का होता है। मोबाइल टावर लगाने के लिए जगह की आवश्यकता भिन्न होती है: छत के लिए कम से कम 500 वर्ग फुट खाली जगह और एक मजबूत बिल्डिंग की जरूरत होती है, वहीं प्लॉट पर टावर के लिए 2,000 वर्ग फुट खाली जमीन की सबसे अधिक आवश्यकता पड़ती है।

मोबाइल टावर से होने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हर महीने 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का किराया आसानी से मिल सकता है। इसके विपरीत, छोटे शहरों में यह राशि 20,000 रुपये से 40,000 रुपये तक होती है, और ग्रामीण इलाकों में हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक का किराया मिलता है। कुल मिलाकर, खाली छत या जमीन से हर महीने मोटी कमाई की जा सकती है, जिसके लिए मोबाइल टावर लगवाने की पूरी प्रक्रिया को समझना लाभप्रद हो सकता है।
    user_Vipin Singh
    Vipin Singh
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    5 hrs ago
  • दिल्ली के करावल नगर स्थित प्रकाश विहार में एक चार मंजिला मकान ढहने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रभावित परिवारों का स्पष्ट आरोप है कि यह हादसा नाले के निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान हुआ, जब उनके मकान में दरारें आ गईं और बाद में पूरी इमारत ढह गई। इस घटना के कारण मकान मालिक और कई किरायेदार बेघर हो गए हैं, जिससे यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इस नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि जांच में ठेकेदार की लापरवाही सामने आए या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। मामले की जांच अभी जारी है। रोज़ाना टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों की पूरी बात सामने आई है।
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    दिल्ली के करावल नगर स्थित प्रकाश विहार में एक चार मंजिला मकान ढहने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रभावित परिवारों का स्पष्ट आरोप है कि यह हादसा नाले के निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान हुआ, जब उनके मकान में दरारें आ गईं और बाद में पूरी इमारत ढह गई।

इस घटना के कारण मकान मालिक और कई किरायेदार बेघर हो गए हैं, जिससे यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इस नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि जांच में ठेकेदार की लापरवाही सामने आए या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। मामले की जांच अभी जारी है। रोज़ाना टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों की पूरी बात सामने आई है।
    user_Rtn.1 News
    Rtn.1 News
    Local News Reporter यमुना विहार, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • एक मित्र ने जानकारी दी है कि उनके गांव में भारी बारिश के साथ भीषण आंधी और तूफान आया था। इस भयंकर आंधी-तूफान ने गांव में घरों को पूरी तरह से उड़ा दिया है, जिससे भारी नुकसान हुआ है।
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    एक मित्र ने जानकारी दी है कि उनके गांव में भारी बारिश के साथ भीषण आंधी और तूफान आया था। इस भयंकर आंधी-तूफान ने गांव में घरों को पूरी तरह से उड़ा दिया है, जिससे भारी नुकसान हुआ है।
    user_Suphal
    Suphal
    Farmer सरस्वती विहार, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • दिल्ली के न्यू अशोक नगर थाने में 4 जून 2026 की दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर एक महिला की PCR कॉल आई, जिसने अपनी बहन की हत्या की सूचना दी। कॉल करने वाली महिला ने बताया कि उसकी बहन का शव दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट के एक फ्लैट में पड़ा है। मौके पर पहुँची पुलिस को देवरती पॉल (49 वर्ष) नाम की महिला ने बताया कि उसकी बहन, देवोस्मिता पॉल, जो शिवाजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं, उस फ्लैट में अकेली रहती थीं। शिकायतकर्ता के अनुसार, सुबह से ही फ्लैट बाहर से बंद था और कई बार फोन करने पर भी मृतका की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। किसी अनहोनी की आशंका होने पर, देवरती पॉल ने फ्लैट का ताला तोड़ा और अपनी बहन देवोस्मिता पॉल को मृत पाया। पुलिस ने तुरंत क्राइम टीम को मौके पर बुलाया, जिसने घटनास्थल की गहनता से जाँच की। क्राइम सीन की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने के बाद, आवश्यक वस्तुएँ और फोरेंसिक सैंपल एकत्र किए गए। शव को संरक्षण और पोस्टमॉर्टम जाँच के लिए LBS अस्पताल भेज दिया गया है। न्यू अशोक नगर थाने में सेक्शन 103(1) BNS के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। अपराधी की पहचान कर उसे जल्द से जल्द पकड़ने के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। मामले की आगे की जाँच जारी है।
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    दिल्ली के न्यू अशोक नगर थाने में 4 जून 2026 की दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर एक महिला की PCR कॉल आई, जिसने अपनी बहन की हत्या की सूचना दी। कॉल करने वाली महिला ने बताया कि उसकी बहन का शव दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट के एक फ्लैट में पड़ा है। मौके पर पहुँची पुलिस को देवरती पॉल (49 वर्ष) नाम की महिला ने बताया कि उसकी बहन, देवोस्मिता पॉल, जो शिवाजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं, उस फ्लैट में अकेली रहती थीं।

शिकायतकर्ता के अनुसार, सुबह से ही फ्लैट बाहर से बंद था और कई बार फोन करने पर भी मृतका की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। किसी अनहोनी की आशंका होने पर, देवरती पॉल ने फ्लैट का ताला तोड़ा और अपनी बहन देवोस्मिता पॉल को मृत पाया।

पुलिस ने तुरंत क्राइम टीम को मौके पर बुलाया, जिसने घटनास्थल की गहनता से जाँच की। क्राइम सीन की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने के बाद, आवश्यक वस्तुएँ और फोरेंसिक सैंपल एकत्र किए गए। शव को संरक्षण और पोस्टमॉर्टम जाँच के लिए LBS अस्पताल भेज दिया गया है। न्यू अशोक नगर थाने में सेक्शन 103(1) BNS के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। अपराधी की पहचान कर उसे जल्द से जल्द पकड़ने के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। मामले की आगे की जाँच जारी है।
    user_Noor jahan
    Noor jahan
    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत गाजीपुर गांव में एक नवविवाहिता की कथित तौर पर हत्या कर दी गई है। इस मामले में नवविवाहिता के देवर पर हत्या का आरोप लगा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद, मौके पर क्राइम टीम और अन्य आधिकारिक टीम पहुंच गई है। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है, और यह हत्या है या कुछ और, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल पाएगा।
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    पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत गाजीपुर गांव में एक नवविवाहिता की कथित तौर पर हत्या कर दी गई है। इस मामले में नवविवाहिता के देवर पर हत्या का आरोप लगा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद, मौके पर क्राइम टीम और अन्य आधिकारिक टीम पहुंच गई है। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है, और यह हत्या है या कुछ और, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल पाएगा।
    user_Sanjay Khan
    Sanjay Khan
    शाहदरा, शाहदरा, दिल्ली•
    7 hrs ago
  • नेहरू कॉलोनी में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान कॉलोनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके मकानों और दुकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे थे, और उन्हें अचानक नोटिस देकर बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई में कई मकान और दुकानें जमींदोज हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने अब आजीविका और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लोगों ने विधायक धनेश अदलखा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय विधायक ने कॉलोनीवासियों को आश्वासन दिया था कि किसी भी कीमत पर उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे। हालाँकि, अब बुलडोजर चलने के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है और अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। नेहरू कॉलोनी के प्रभावित परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध थे, तो इतने वर्षों तक उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि लोग वैध रूप से निवास कर रहे थे, तो उन्हें पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान क्यों नहीं किया गया।
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    नेहरू कॉलोनी में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान कॉलोनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके मकानों और दुकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे थे, और उन्हें अचानक नोटिस देकर बेघर कर दिया गया। इस कार्रवाई में कई मकान और दुकानें जमींदोज हो गईं, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने अब आजीविका और आवास का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

लोगों ने विधायक धनेश अदलखा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय विधायक ने कॉलोनीवासियों को आश्वासन दिया था कि किसी भी कीमत पर उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे। हालाँकि, अब बुलडोजर चलने के बाद लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल पुनर्वास और मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है और अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान जारी रहेगा। नेहरू कॉलोनी के प्रभावित परिवार अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण वास्तव में अवैध थे, तो इतने वर्षों तक उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि लोग वैध रूप से निवास कर रहे थे, तो उन्हें पर्याप्त राहत और पुनर्वास प्रदान क्यों नहीं किया गया।
    user_Gaurav verma
    Gaurav verma
    Graphic designer करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
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