जलमीनार बंद, कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर जरडा के ग्रामीण – बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा जलमीनार बंद, कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर जरडा के ग्रामीण – बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा जारी प्रखंड अंतर्गत जरडा गांव में सोलर संचालित जलमीनार पिछले दो-तीन वर्षों से खराब पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलमीनार बंद रहने के कारण गांव के लोग मजबूरी में कुएं का गंदा और दूषित पानी पीने को विवश हैं। जानकारी देते हुए ग्रामीणों ने शनिवार की सुबह आठ बजे बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जलमीनार खराब रहने से हर दिन दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाई होती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र मरम्मत नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार खराब होने के बाद से वे कुएं पर निर्भर हैं, लेकिन कुएं की स्थिति भी अत्यंत खराब है। आए दिन कुएं में जानवर गिरकर मर जाते हैं, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो जाता है। इसके बावजूद पीने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण ग्रामीण उसी पानी का उपयोग कर रहे हैं। दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। खासकर आयरन की अधिकता और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से लोगों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने जल विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द सोलर संचालित जलमीनार एवं खराब पड़े चापानल की मरम्मत कराई जाए, ताकि गांव में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और लोगों को गंदा पानी पीने से राहत मिल सके।
जलमीनार बंद, कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर जरडा के ग्रामीण – बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा जलमीनार बंद, कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर जरडा के ग्रामीण – बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा जारी प्रखंड अंतर्गत जरडा गांव में सोलर संचालित जलमीनार पिछले दो-तीन वर्षों से खराब पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलमीनार बंद रहने के कारण गांव के लोग मजबूरी में कुएं का गंदा और दूषित पानी पीने को विवश हैं। जानकारी देते हुए ग्रामीणों ने शनिवार की सुबह आठ बजे बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जलमीनार खराब रहने से हर दिन दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाई होती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र मरम्मत नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार खराब होने के बाद से वे कुएं पर निर्भर हैं, लेकिन कुएं की स्थिति भी अत्यंत खराब है। आए दिन कुएं में जानवर गिरकर मर जाते हैं, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो जाता है। इसके बावजूद पीने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण ग्रामीण उसी पानी का उपयोग कर रहे हैं। दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। खासकर आयरन की अधिकता और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से लोगों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने जल विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द सोलर संचालित जलमीनार एवं खराब पड़े चापानल की मरम्मत कराई जाए, ताकि गांव में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और लोगों को गंदा पानी पीने से राहत मिल सके।
- जलमीनार बंद, कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर जरडा के ग्रामीण – बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा जारी प्रखंड अंतर्गत जरडा गांव में सोलर संचालित जलमीनार पिछले दो-तीन वर्षों से खराब पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलमीनार बंद रहने के कारण गांव के लोग मजबूरी में कुएं का गंदा और दूषित पानी पीने को विवश हैं। जानकारी देते हुए ग्रामीणों ने शनिवार की सुबह आठ बजे बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जलमीनार खराब रहने से हर दिन दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाई होती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र मरम्मत नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार खराब होने के बाद से वे कुएं पर निर्भर हैं, लेकिन कुएं की स्थिति भी अत्यंत खराब है। आए दिन कुएं में जानवर गिरकर मर जाते हैं, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो जाता है। इसके बावजूद पीने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण ग्रामीण उसी पानी का उपयोग कर रहे हैं। दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। खासकर आयरन की अधिकता और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से लोगों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने जल विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द सोलर संचालित जलमीनार एवं खराब पड़े चापानल की मरम्मत कराई जाए, ताकि गांव में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और लोगों को गंदा पानी पीने से राहत मिल सके।1
- चैनपुर में शंख नदी और लावा नदी के संगम स्थल के आसपास वन विभाग द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कॉटेज प्लस टू विकसित किया जा रहा है। प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगल, नदी किनारा और अनूठे पहाड़ी परिदृश्य के कारण यह क्षेत्र विशेष रूप से नवंबर से मार्च के बीच पिकनिक और पर्यटन के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा है।1
- हीराडाह की कहानी1
- पत्रकार के साथ मारपीट करने वालों को सजा जरुर मिलनी चाहिए क्योंकि उन्होंने अपने ही पर पर कुल्हाड़ी मारना है अभी वीडियो जमकर हो रहा है वायरल आप बोलो कार्रवाई होने से कोई नहीं रोक सकता1
- गुमला नगर परिषद चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार शकुंतला उरांव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी झारखंड मुक्ति मोर्चा की हर्षिता टोप्पो को 3168 वोट से, किया पराजित, शकुंतला उरांव ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शहर में निकाला विजय जुलूस जगह-जगह लोगों ने मुंह मीठा कराकर किया स्वागत। शकुंतला उरांव ने कहा कि यह मेरे नहीं बल्कि जनता की जीत है बिना किसी भेदभाव के लोगों का विकास ही मेरी पहली प्राथमिकता होगी2
- Post by Kuldeep kumar3
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- औरापाट मॉडल गांव में मशरूम से आय की नई शुरुआत पहली तुड़ाई में ही लाभुक परिवारों को मिला प्रत्यक्ष मुनाफा आकांक्षी प्रखंड डुमरी अंतर्गत औरापाट मॉडल गांव में संचालित मशरूम आजीविका परियोजना अब जमीन पर परिणाम देने लगी है। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के मार्गदर्शन में चल रही इस पहल के तहत ऑयस्टर मशरूम की पहली तुड़ाई और विपणन कार्य सफलतापूर्वक शुरू हो गया है। जानकारी देते हुए शुक्रवार की सुबह आठ बजे बताया गया कि पहली खेप की बिक्री से ही लाभुक परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। प्रथम चरण में विभिन्न गांवों के लाभुकों को उल्लेखनीय मुनाफा हुआ है। औरापाट के किसानों को चालीस हजार रुपये, चांदीपाठ को पंद्रह हजार रुपये, कंदापाठ को दस हजार रुपये, चंदावल को चौदह हजार रुपये, राहावाल को पांच हजार रुपये तथा असुरटोली (लाटापानी) को दो हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है। पहली तुड़ाई में ही हुई इस आमदनी से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। लाभुक परिवारों ने बताया कि कम लागत और सीमित स्थान में शुरू की गई मशरूम खेती से इतनी शीघ्र आय होना उनके लिए आशा की नई किरण है। इससे पारंपरिक आजीविका के साथ एक अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हुआ है। परियोजना के अंतर्गत डुमरी प्रखंड के पांच सौ पीवीटीजी एवं जनजातीय परिवारों को चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जा रहा है। प्रथम चरण में औरापाट के पैंतालीस परिवारों को मशरूम किट और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया। जिला योजना शाखा द्वारा APP Aggregate के सहयोग से संचालित इस योजना के तहत लाभुकों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण तथा टूल किट प्रदान की गई है। साथ ही एजेंसी द्वारा उत्पादित मशरूम का बाय-बैक सुनिश्चित किए जाने से किसानों को बाजार की चिंता से राहत मिली है और उन्हें उपज का सुनिश्चित मूल्य प्राप्त हो रहा है। आगामी चरण में मशरूम प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना, स्वयं सहायता समूहों को सुदृढ़ करना, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग की व्यवस्था विकसित करना तथा मूल्य संवर्धित उत्पाद जैसे मशरूम पाउडर, चिप्स, बड़ी और पापड़ तैयार करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। यह पहल क्षेत्र में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।1