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ट्रेन के बाथरूम के बारे में जानकारी आपको मिल रहा है इसमें ले लीजिए मुजफ्फरपुर बाथरूम में क्या हुआ इसके बारे में जरूर ध्यान दें ट्रेन के बाथरूम में
PUBLIC NEWS OF CHAMPARAN BIHAR
ट्रेन के बाथरूम के बारे में जानकारी आपको मिल रहा है इसमें ले लीजिए मुजफ्फरपुर बाथरूम में क्या हुआ इसके बारे में जरूर ध्यान दें ट्रेन के बाथरूम में
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- मुजफ्फरपुर बाथरूम में क्या हुआ इसके बारे में जरूर ध्यान दें ट्रेन के बाथरूम में1
- --विशेष वार्ड और 24×7 एम्बुलेंस सुविधा से मजबूत की गई स्वास्थ्य व्यवस्था (रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) सीतामढ़ी 07 अप्रैल 2026-तापमान में लगातार वृद्धि को देखते हुए जिला भी बी डी कंट्रोल ऑफिस ने एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम एवं जापानी इंसेफेलाइटिस से निपटने हेतु व्यापक तैयारी कर ली है। इस निमित्त मेडिकल ऑफिसर्स को जिला भी बी डी कंट्रोल ऑफिसर डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव द्वारा 30 मार्च को जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में व्यापक ट्रेनिंग दी जा चुकी है।ब्लॉक लेवल पर ट्रेनिंग और अवेयरनेस:ट्रेन्ड डॉक्टर्स द्वारा अब ब्लॉक लेवल पर ए एन एम , सी एच ओ तथा आशा वर्कर्स को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके साथ ही कम्युनिटी में अवेयरनेस कैंपेन चलाकर इस बीमारी से बचाव की जानकारी दी जा रही है ताकि ग्रामीण स्तर पर लोग सतर्क रह सकें।हॉस्पिटल्स में स्पेशल अरेंजमेंट और बेड की व्यवस्था:अस्पतालों में पुख्ता प्रबंध करते हुए सभी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स पर 2 बेड का विशेष एयर कंडीशन्ड जेई/एईएस वार्ड बनाया गया है। इन वार्ड्स में सभी आवश्यक मेडिसिन्स और इक्विपमेंट्स उपलब्ध कराए गए हैं। सदर अस्पताल में 30 + 7 बेड का पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट पूरी तरह कार्यरत है। व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए डॉक्टर्स तथा नर्सिंग स्टाफ की 24×7 रोस्टर ड्यूटी लगाई गई है और 24×7 एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। सरकार की योजना के अनुसार यदि कोई प्राइवेट वाहन से ए ई एस मरीज को अस्पताल लेकर आते हैं, तो उन्हें तत्काल 400 ₹ नगद भुगतान किया जाएगा। अधिकारियों द्वारा इंस्पेक्शन और रिव्यू:तैयारियों का जायजा लेने के लिए कल जिला भी बी डी कंट्रोल ऑफिसर ने एडिशनल कलेक्टर (डिजास्टर मैनेजमेंट) के साथ कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, बैरगनिया का इंस्पेक्शन भी किया। आज सिविल सर्जन ने जिला भी बी डी कंट्रोल में जेई/एईएस की तैयारी की रिव्यू की और सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं डिप्टी सुपरिटेंडेंट (सदर अस्पताल) को अलर्ट मोड में रहने को कहा है। विभाग द्वारा विशेषकर नाइट ड्यूटी पर कड़ी नजर रखी जा रही है। राहत की बात यह है कि अब तक सीतामढ़ी में कोई पेशेंट रिपोर्टेड नहीं है, जबकि राज्य में अब तक 19 पेशेंट्स रिपोर्टेड हुए हैं।लक्षणों की पहचान और बचाव के उपाय:मस्तिष्क ज्वर या चमकी बुखार के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार आना जो पांच से सात दिनों से ज्यादा का हो, शरीर में चमकी होना अथवा हाथ पैर में थरथराहट होना, मानसिक संतुलन का ठीक न होना और शरीर के किसी खास अंग में लकवा मार जाना शामिल है। ऐसी स्थिति दिखने पर तत्काल गांव की आशा या एएनएम दीदी से संपर्क करना चाहिए और अविलंब निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सा परामर्श लेना चाहिए। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चों को तेज धूप से बचाएं, उन्हें दिन में दो बार स्नान कराएं और रात में भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं। इसके अलावा बच्चों को ओआरएस अथवा नमक-चीनी और नींबू पानी का शरबत पिलाते रहना चाहिए।आपातकालीन स्थिति में तुरंत लें डॉक्टरी सहायता:आपातकालीन स्थिति में मरीज को किसी भी प्रकार की देरी किए बिना अस्पताल पहुँचाना चाहिए क्योंकि चिकित्सकीय परामर्श में देरी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने सूचित किया है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में निःशुल्क एम्बुलेंस हेतु टोल फ्री नंबर एक सौ दो पर डायल किया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी तत्काल सेवा एवं शिकायत हेतु टोल फ्री नंबर एक सौ चार भी जारी किया गया है। अभिभावकों को विशेष रूप से सचेत किया गया है कि वे अंधविश्वास या ओझा-गुनी के चक्कर में समय नष्ट न करें और बच्चे की स्थिति बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।3
- पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से बड़ी खबर सामने आई है, जहां चकिया अनुमंडल कार्यालय स्थित सभागार में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कल्याणपुर उपप्रमुख का चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस चुनाव की निगरानी जिला से आए पर्यवेक्षक एडीएम जांच मो. शिबूग तूल्लाह तथा निर्वाची पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी शिवानी शुभम के नेतृत्व में की गई। उपप्रमुख पद के लिए भाजपा प्रदेश नेता राकेश रौशन की पत्नी पूजा रौशन और शंभू दास के बीच सीधा मुकाबला था। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद कुल मतों की गिनती में पूजा रौशन को 25 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी शंभू दास को मात्र 7 वोट प्राप्त हुए। इस तरह पूजा रौशन ने 18 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल करते हुए लगातार दूसरी बार उपप्रमुख पद पर कब्जा जमाया। चुनाव के बाद निर्वाची पदाधिकारी द्वारा पूजा रौशन को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया और पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। वहीं, विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए चकिया डीएसपी संतोष कुमार के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। अनुमंडल कार्यालय परिसर के बाहर समर्थकों ने पूजा रौशन का अबीर-गुलाल और फूल मालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष पवन राज, विधायक सचिंद्र प्रसाद सिंह, मुखिया हेमंत सिंह, संजय चौधरी समेत कई जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें जीत की बधाई दी। तो कुल मिलाकर, कड़े मुकाबले के बीच पूजा रौशन ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की है।1
- कटिहार और नवादा में पांच लोगों की गई जान। लोगों में हाहाकार।1
- Post by Talk On Chair1
- Post by RAJA KUMAR1
- पाबंदी के बावजूद हर गली में उपलब्ध शराब, पुलिस कार्रवाई पर विरोध—नैतिकता, व्यवस्था और सामाजिक विडंबना पर बड़ा सवाल लोकल पब्लिक न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट बिहार में साल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून का उद्देश्य था—समाज को नशामुक्त बनाना, परिवारों को टूटने से बचाना और अपराध दर में कमी लाना। लेकिन लगभग एक दशक बाद भी जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। कानून सख्त है, दंड कठोर है, लेकिन शराब की उपलब्धता आज भी गांव से लेकर शहर तक बनी हुई है। यह विरोधाभास न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि समाज के दोहरे चरित्र को भी उजागर करता है। शराबबंदी लागू होने के बावजूद अधिकांश इलाकों में शराब आसानी से मिल जाती है। यह स्थिति बताती है कि अवैध कारोबार का जाल अब भी मजबूत है। स्थानीय स्तर पर नेटवर्क इतने सक्रिय हैं कि कानून की पकड़ से बच निकलते है। आम तौर पर समाज में नशे को बुरा माना जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में लोग इसके आदी हैं। अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च करने में उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होती। यह प्रवृत्ति न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि परिवारों को भी बर्बादी की कगार पर ला देती है। जब पुलिस अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो कई बार उसे स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ता है। कहीं पथराव होता है, तो कहीं लाठी-डंडे चलाए जाते हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है—जहां कानून लागू करने वाली एजेंसी को ही दुश्मन समझ लिया जाता है। शराब की लत का सबसे बड़ा असर परिवारों पर पड़ता है। घर के सदस्य, खासकर महिलाएं और बच्चे, आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव झेलते हैं। कई मामलों में घरेलू हिंसा, झगड़े और सामाजिक कलंक भी सामने आते हैं, लेकिन इसके बावजूद लत से छुटकारा पाने की गंभीर कोशिश कम ही दिखती है। शराबबंदी: कानून से ज्यादा सामाजिक बदलाव की जरूरत विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होती। जब तक समाज में जागरूकता, आत्मनियंत्रण और वैकल्पिक जीवनशैली को बढ़ावा नहीं मिलेगा, तब तक शराबबंदी का उद्देश्य अधूरा ही रहेगा। बिहार में शराबबंदी आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां कानून और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर दिखता है। यह केवल प्रशासन की चुनौती नहीं, बल्कि पूरे समाज के आत्ममंथन का विषय है— क्या हम सच में नशामुक्त समाज चाहते हैं, या सिर्फ कागजों में?1
- व्यवसाय गरीब के बच्चे ने बना अनुमंडल टॉपर बिहार के पूर्वी चंपारण जिले केपकड़ी दयाल शहर में इस वीडियो में लास्ट तक देखें बच्चों ने क्या बोल डाला पकड़ी दयाल शिक्षक की असलियत कैसे पढ़ाया जाता है कैसे सेल्फ स्टडी कराया जाता है और कहां से अच्छा टॉपर ला सकता है इसके बारे में अच्छा से जानकारी बच्चों ने दिया है इस खबर को आप ज्यादा से ज्यादा देखें और शेयर करें1