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इस वक्त की सबसे बड़ी खबर रक्षा मंत्रालय में बैठक चल रही थी सेना को अलर्ट रहने के निर्देश
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इस वक्त की सबसे बड़ी खबर रक्षा मंत्रालय में बैठक चल रही थी सेना को अलर्ट रहने के निर्देश
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- रूपनाथ धाम में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, शिव-शारदा कांवड़ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के शुभ संयोग पर तिगवां से शुरू हुई कांवड़ यात्रा, युवाओं और महिलाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह..... कटनी/बहोरीबंद। सावन माह के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के शुभ संयोग पर बहोरीबंद क्षेत्र में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व रखने वाले ग्राम तिगवां स्थित मां शारदा मंदिर से प्राचीन रूपनाथ धाम तक पहली बार भव्य शिव-शारदा कांवड़ यात्रा निकाली गई। यात्रा में हजारों की संख्या में कांवड़िए एवं श्रद्धालु शामिल हुए। कांवड़ियों ने रूपनाथ धाम पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। सुबह से ही तिगवां स्थित मां शारदा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कांवड़ यात्रा का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालु कांवड़ लेकर भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। यात्रा बहोरीबंद होते हुए मरही माता मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने माता मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद कांवड़ यात्रा रूपनाथ धाम के लिए रवाना हुई। हजारों कांवड़ियों ने किया भगवान शिव का जलाभिषेक रूपनाथ धाम पहुंचने के बाद कांवड़ियों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान पूरा परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान रूपनाथ धाम में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा, जिसे देखकर हर कोई अभिभूत नजर आया। आयोजकों के अनुसार सावन माह में रूपनाथ धाम के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। युवाओं और महिलाओं में दिखा खास उत्साह कांवड़ यात्रा में युवाओं के साथ बड़ी संख्या में माता-बहनें भी शामिल हुईं। श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह देखते ही बन रहा था। कांवड़िए पूरे रास्ते भगवान शिव और मां शारदा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। धार्मिक वातावरण के बीच यात्रा में शामिल लोगों ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। ऐतिहासिक धरोहरों को देश-दुनिया तक पहुंचाने का उद्देश्य आयोजकों ने बताया कि बहोरीबंद क्षेत्र ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। ग्राम तिगवां स्थित मां शारदा का पवित्र धाम और रूपनाथ धाम क्षेत्र की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। क्षेत्र की ऐतिहासिक मान्यताओं में आल्हा-ऊदल से जुड़े प्रसंग भी बताए जाते हैं। शिव-शारदा कांवड़ यात्रा के आयोजन का उद्देश्य इन दोनों धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की पहचान प्रदेश और देशभर में स्थापित करना, क्षेत्र में पर्यटन एवं धार्मिक विकास को बढ़ावा देना तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। आयोजकों ने कहा कि क्षेत्र के युवा और किसान खुशहाल रहें तथा सभी पर भगवान की कृपा बनी रहे, यही इस यात्रा के पीछे प्रमुख भावना है। अब हर वर्ष निकलेगी कांवड़ यात्रा यात्रा के सफल आयोजन के बाद आयोजकों एवं सदस्यों ने निर्णय लिया कि अब हर वर्ष सावन माह में मां शारदा माता तिगवां के दरबार से भगवान भोलेनाथ की नगरी रूपनाथ धाम तक शिव-शारदा कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। इससे क्षेत्र की धार्मिक परंपरा को और मजबूती मिलने के साथ दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों की आस्था और जुड़ाव बढ़ने की उम्मीद है। आयोजन समिति के सदस्यों ने कांवड़ यात्रा में शामिल हुए सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही यात्रा के दौरान व्यवस्था एवं सुरक्षा में सहयोग करने के लिए पुलिस प्रशासन का भी धन्यवाद ज्ञापित किया। यात्रा के सफल आयोजन से बहोरीबंद क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और धार्मिक एकता का अनूठा संदेश देखने को मिला।3
- मोदी के खिलाफ सड़क पर उतरे सेना के के जवान बीजेपी में बीजेपी हद हड़कंप1
- कलेक्ट्रेट जनसुनवाई (जिला प्रशासन) प्रत्येक मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जनसुनवाई का आयोजन किया जाता है, विवरण: यहाँ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए लोग जमीन, पेंशन, राशन, और अन्य शासकीय विभागों से जुड़ी अपनी शिकायतें कलेक्टर या वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखते हैं।1
- । मोबाइल चोरी से बैंक खातों तक पहुंचा कथित फ्रॉड नेटवर्क मोबाइल नहीं, पूरा फ्रॉड मॉडल था निशाने परपुलिस के अनुसार गिरोह ऐसे मोबाइलों को निशाना बनाता था जिनमें स्क्रीन लॉक नहीं होता था या जिन्हें आसानी से खोला जा सकता था। मोबाइल हाथ लगते ही अगला निशाना फोन नहीं, बल्कि उससे जुड़े बैंक खाते होते थे। आरोपियों के अनुसार ऐसे मोबाइलों में यूपीआई पिन सेट कर खातों से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद मोबाइल आगे भेज दिए जाते थे और प्राप्त रकम गिरोह के सदस्यों में बांटी जाती थी। अर्थात अपराध का मॉडल कथित रूप से तीन चरणों में काम करता था। मोबाइल चोरी, डिजिटल एक्सेस, बैंक खाते से रकम ट्रांसफर। यही वजह है कि इस मामले में बरामदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण अब डिजिटल मनी ट्रेल है।14 मोबाइल चोरी कितने खातों का पैसा गया, आरोपियों ने कुल 14 मोबाइल चोरी करने की बात स्वीकार की है। अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह होगा कि,इन 14 मोबाइलों में कितने फोन से डिजिटल ठगी की गई,कितने बैंक खाते या यूपीआई आईडी प्रभावित हुए,रकम किन-किन खातों में पहुंची,उन खातों के वास्तविक संचालक कौन हैं, क्या वे स्वयं गिरोह का हिस्सा हैं या केवल मनी ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किए गए, चोरी के मोबाइलों का अंतिम खरीदार कौन थाक्या मालदा से लेकर जबलपुर तक मोबाइलों की कोई नियमित सप्लाई चेन चल रही थी,इन सवालों के जवाब सामने आने पर ही पता चलेगा कि 2.10 लाख रुपये की ठगी इस नेटवर्क का पूरा कारोबार है या केवल एक मामला। जबलपुर में बाहरी अपराधियों की एंट्री पर भी हो जांचयह मामला एक और संवेदनशील पहलू सामने लाता है,अंतरराज्यीय अपराधियों का शहर में प्रवेश और लंबे समय तक ठिकाना बनाना। झारखंड के आरोपी यदि एक वर्ष से जबलपुर में रह रहे थे और पश्चिम बंगाल के व्यक्ति का नाम भी गिरोह में सामने आया है, तो पुलिस को केवल वर्तमान घटना नहीं, बल्कि इन लोगों के जबलपुर पहुंचने से लेकर उनके स्थानीय संपर्कों तक की पूरी कड़ी खंगालनी होगी। किसने उन्हें मकान दिलाया,किसके संपर्क में वे आए,उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां क्या थींक्या किसी स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें चोरी के मोबाइल बेचने, ठिकाना उपलब्ध कराने या बैंक खातों की व्यवस्था में मदद की,यही जांच इस कथित गिरोह के स्थानीय नेटवर्क को उजागर कर सकती है। बाकल पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू बाकल पुलिस की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ी जोड़कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण सफलता है। लेकिन इस कार्रवाई से खुलने वाले सवालों के जवाब भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। करीम शेख उर्फ साजन की तलाश और उसकी भूमिका की पुष्टि, आरोपियों के जबलपुर प्रवास का सत्यापन, किरायेदार सत्यापन की जांच, 14 मोबाइलों की बरामदगी एवं उनके डिजिटल डेटा का विश्लेषण और बैंक खातों की पूरी मनी ट्रेल—अब जांच के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं। क्योंकि यह सिर्फ एक मोबाइल चोरी का मामला नहीं है। यह उस डिजिटल अपराध मॉडल की कहानी है, जिसमें जेब से चुराया गया मोबाइल कुछ ही घंटों में किसी व्यक्ति के बैंक खाते तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है।और अगर आरोपियों का एक साल तक जबलपुर में रहना जांच में प्रमाणित होता है, तो सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा अपराधी बाहर से आए थे, लेकिन इतने लंबे समय तक शहर में रहे तो उन्हें पहचानने और रोकने वाली व्यवस्था कहां थी। अब बाकल पुलिस की इस कार्रवाई के बाद निगाहें इस बात पर हैं कि करीम शेख उर्फ साजन तक जांच कब पहुंचती है और इस कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क में जबलपुर के कितने स्थानीय चेहरे सामने आते हैं। शॉर्ट न्यूज बनाओ 1:30 मिनिट का1
- देवरी से 21 वर्षीय मूक-बधिर युवक लापता, परिजन परेशान — पहचान होने पर तत्काल दें सूचना रीठी। कटनी जिले के रीठी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम देवरी से 21 वर्षीय मूक-बधिर युवक के घर से बिना बताए लापता होने का मामला सामने आया है। युवक के अचानक गायब होने से परिजन परेशान हैं और लगातार उसकी तलाश कर रहे हैं। परिजनों ने आमजन से अपील की है कि यदि दिए गए फोटो के आधार पर युवक कहीं दिखाई देता है या उसके संबंध में कोई जानकारी मिलती है, तो तत्काल परिजनों को सूचना दें। 📞 सूचना देने के लिए मोबाइल नंबर: 7869206062 परिजनों की अपील—युवक की तलाश में सहयोग करें और जानकारी मिलते ही तुरंत सूचना दें।1
- झाड़ियों से घिरा ढीमरखेड़ा-सिलौड़ी मार्ग, अंधे मोड़ों पर हादसे का खतरा; पिंडरई में जलभराव से ग्रामीण परेशान ढीमरखेड़ा। लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित ढीमरखेड़ा-बिरासन पाली-सिलौड़ी मार्ग इन दिनों बदहाली का शिकार है। सड़क किनारे झाड़ियों और पेड़-पौधों की सफाई लंबे समय से नहीं होने से कई जगह सड़क संकरी हो गई है। अंधे मोड़ों पर सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देने के कारण हादसे का खतरा बना हुआ है। वहीं पिंडरई गांव में नाली निर्माण नहीं होने से बारिश और घरों का पानी सड़क पर जमा हो रहा है। इससे स्कूली बच्चों सहित राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने जल्द सड़क किनारे सफाई और पिंडरई में नाली निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।1
- रातभर की बारिश से सड़कें तालाब में तब्दील, कई इलाकों में दो से तीन फीट तक पानी बारिश ने खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल, सिहोरा-खितौला में घरों-दुकानों में घुसा पानी सिहोरा. सिहोरा तहसील क्षेत्र में शनिवार रात से हो रही लगातार बारिश ने रविवार को सिहोरा और खितौला की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गई। घरों और दुकानों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह दो से तीन फीट तक पानी भरा रहा। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की। नाले का पानी घर में घुसा, कई मोहल्ले प्रभावित वार्ड क्रमांक 7 में मझौली बायपास स्थित रुक्मिणी पैलेस के सामने गंगा पटेल के घर में नाले का करीब दो फीट पानी घुस गया। कुरें रोड पर दीनदयाल विश्वकर्मा सहित नया मोहल्ला के कई घर भी जलभराव की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में हुई अवैध प्लॉटिंग के कारण पानी की प्राकृतिक निकासी प्रभावित हुई है, जिससे बारिश का पानी बस्तियों की ओर पहुंच रहा है। भदौहा तालाब ओवरफ्लो वार्ड क्रमांक 6 और 8 के बीच मझौली बायपास-मिस्या रोड पर भदौहा तालाब ओवरफ्लो होने से पानी सड़क पर आ गया। यहां करीब तीन फीट तक पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ। खितौला मंडी रोड, झंडा बाजार और महाकाली मंदिर के सामने भी सड़क पर पानी भरा रहा। खितौला बस स्टैंड में दो फीट तक पानी भरा था। खम्परिया तिराहे के पास दुकानों के बाहर भी दो फीट पानी भरा रहा। जलभराव के कारण दुकानदारों-राहगीरों को परेशानी हुई। पिछले साल के मुकाबले 3.89 इंच कम बारिश आंकड़ों के मुताबिक 16 अगस्त की सुबह 8 बजे तक सिहोरा में 587.7 मिलीमीटर (23.5) इंच बारिश दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी तारीख तक 684.9 मिलीमीटर (27.39) इंच बारिश दर्ज हुई थी। इस तरह इस वर्ष अब तक पिछले साल की तुलना में करीब 3.89 इंच कम बारिश हुई है। बारिश की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में कम होने के बावजूद जलभराव की स्थिति ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। हर साल मस्या स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज बारिश होने पर हर साल ऐसी स्थिति बनती है। नालों और पानी की निकासी के रास्तों की सफाई और स्थायी व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी घरों और दुकानों तक पहुंच जाता है4
- स्कूल पहुंच मार्ग पर धान रोपकर जताया विरोध, ग्रामीणों ने कहा,सड़क नहीं तो स्कूल नहीं, दस साल से दलदल बना विद्यालय पहुंच मार्ग, छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक और ग्रामीण परेशान,पक्की सड़क की मांग कटनी/बाकल। विकासखंड बहोरीबंद अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिहुंडी(बाकल) के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने विद्यालय पहुंच मार्ग की बदहाली के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। बारिश के बाद कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुके स्कूल मार्ग पर ग्रामीणों ने धान की रोपाई कर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने पक्की सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द सड़क नहीं बनाई गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय का निर्माण हुए दस वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक स्कूल तक पहुंचने के लिए उचित सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। बारिश के दिनों में स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि मार्ग पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। ऐसे में विद्यालय पहुंचना विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। जूते उतारकर स्कूल पहुंचने को मजबूर बच्चे कीचड़ भरे मार्ग के कारण छात्र-छात्राओं को अपने जूते उतारकर रास्ता पार करना पड़ता है।विद्यार्थियों को रास्ते में फिसलने और गिरने का डर बना रहता है। कई बार शिक्षक एवं विद्यालय स्टाफ के वाहन भी कीचड़ में फिसल चुके हैं, जिससे दुर्घटना की स्थिति निर्मित होती रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा के लिए विद्यालय गांव में ही उपलब्ध कराया गया, लेकिन विद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता ही बदहाल होने से विद्यार्थियों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। बारिश के मौसम में विशेष रूप से छात्राओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने जमीन दान देकर कराया था स्कूल का निर्माण ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ही बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके और उन्हें पढ़ाई के लिए दूर दूसरे गांवों में न जाना पड़े, इस उद्देश्य से ग्रामीणों ने विद्यालय निर्माण के लिए भूमि तक दान में दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के निर्माण के पीछे गांववासियों की मंशा बच्चों को शिक्षा की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की थी, लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क की व्यवस्था नहीं होने से उनकी मूल समस्या आज भी बनी हुई है। तीन-चार गांवों के लोगों का भी आवागमन ग्रामीणों के मुताबिक यह मार्ग केवल विद्यालय तक पहुंचने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे आसपास के तीन-चार गांवों के ग्रामीणों का भी आवागमन होता है। इसके अलावा किसान इसी रास्ते से अपने खेतों तक कृषि कार्य के लिए रोजाना आते-जाते हैं। बरसात के मौसम में मार्ग की हालत खराब होने के कारण किसानों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार समस्या की ओर ध्यान दिलाए जाने के बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। इसी कारण ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने इस बार सड़क पर धान रोपकर अपना विरोध दर्ज कराया। पक्की सड़क नहीं तो स्कूल नहीं आने की चेतावनी प्रदर्शन के दौरान बच्चों और अभिभावकों ने पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि विद्यालय पहुंच मार्ग का शीघ्र निर्माण नहीं कराया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। वहीं प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों और अभिभावकों ने यहां तक कहा कि यदि सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे स्कूल नहीं आने का निर्णय लेने को मजबूर होंगे। इनका कहना है... विद्यालय तक पहुंचने वाला मार्ग लंबे समय से खराब है। बारिश के दौरान कीचड़ और दलदल के कारण छात्र-छात्राओं के साथ विद्यालय के स्टाफ को भी विद्यालय पहुंचने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय पहुंच मार्ग का जल्द से जल्द पक्की सड़क के रूप में निर्माण कराया जाना आवश्यक है, ताकि बारिश के समय बच्चों एवं स्टाफ को परेशानी का सामना न करना पड़े। अनिल चक्रवर्ती, प्राचार्य4