रातभर की बारिश से सड़कें तालाब में तब्दील, कई इलाकों में दो से तीन फीट तक पानी बारिश ने खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल, सिहोरा-खितौला में घरों-दुकानों में घुसा पानी सिहोरा. सिहोरा तहसील क्षेत्र में शनिवार रात से हो रही लगातार बारिश ने रविवार को सिहोरा और खितौला की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गई। घरों और दुकानों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह दो से तीन फीट तक पानी भरा रहा। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की। नाले का पानी घर में घुसा, कई मोहल्ले प्रभावित वार्ड क्रमांक 7 में मझौली बायपास स्थित रुक्मिणी पैलेस के सामने गंगा पटेल के घर में नाले का करीब दो फीट पानी घुस गया। कुरें रोड पर दीनदयाल विश्वकर्मा सहित नया मोहल्ला के कई घर भी जलभराव की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में हुई अवैध प्लॉटिंग के कारण पानी की प्राकृतिक निकासी प्रभावित हुई है, जिससे बारिश का पानी बस्तियों की ओर पहुंच रहा है। भदौहा तालाब ओवरफ्लो वार्ड क्रमांक 6 और 8 के बीच मझौली बायपास-मिस्या रोड पर भदौहा तालाब ओवरफ्लो होने से पानी सड़क पर आ गया। यहां करीब तीन फीट तक पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ। खितौला मंडी रोड, झंडा बाजार और महाकाली मंदिर के सामने भी सड़क पर पानी भरा रहा। खितौला बस स्टैंड में दो फीट तक पानी भरा था। खम्परिया तिराहे के पास दुकानों के बाहर भी दो फीट पानी भरा रहा। जलभराव के कारण दुकानदारों-राहगीरों को परेशानी हुई। पिछले साल के मुकाबले 3.89 इंच कम बारिश आंकड़ों के मुताबिक 16 अगस्त की सुबह 8 बजे तक सिहोरा में 587.7 मिलीमीटर (23.5) इंच बारिश दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी तारीख तक 684.9 मिलीमीटर (27.39) इंच बारिश दर्ज हुई थी। इस तरह इस वर्ष अब तक पिछले साल की तुलना में करीब 3.89 इंच कम बारिश हुई है। बारिश की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में कम होने के बावजूद जलभराव की स्थिति ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। हर साल मस्या स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज बारिश होने पर हर साल ऐसी स्थिति बनती है। नालों और पानी की निकासी के रास्तों की सफाई और स्थायी व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी घरों और दुकानों तक पहुंच जाता है
रातभर की बारिश से सड़कें तालाब में तब्दील, कई इलाकों में दो से तीन फीट तक पानी बारिश ने खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल, सिहोरा-खितौला में घरों-दुकानों में घुसा पानी सिहोरा. सिहोरा तहसील क्षेत्र में शनिवार रात से हो रही लगातार बारिश ने रविवार को सिहोरा और खितौला की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गई। घरों और दुकानों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह दो से तीन फीट तक पानी भरा रहा। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था पर
सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की। नाले का पानी घर में घुसा, कई मोहल्ले प्रभावित वार्ड क्रमांक 7 में मझौली बायपास स्थित रुक्मिणी पैलेस के सामने गंगा पटेल के घर में नाले का करीब दो फीट पानी घुस गया। कुरें रोड पर दीनदयाल विश्वकर्मा सहित नया मोहल्ला के कई घर भी जलभराव की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में हुई अवैध प्लॉटिंग के कारण पानी की प्राकृतिक निकासी प्रभावित हुई है, जिससे बारिश का पानी बस्तियों की ओर पहुंच रहा है। भदौहा तालाब ओवरफ्लो वार्ड क्रमांक 6 और 8 के बीच मझौली बायपास-मिस्या रोड पर भदौहा तालाब
ओवरफ्लो होने से पानी सड़क पर आ गया। यहां करीब तीन फीट तक पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ। खितौला मंडी रोड, झंडा बाजार और महाकाली मंदिर के सामने भी सड़क पर पानी भरा रहा। खितौला बस स्टैंड में दो फीट तक पानी भरा था। खम्परिया तिराहे के पास दुकानों के बाहर भी दो फीट पानी भरा रहा। जलभराव के कारण दुकानदारों-राहगीरों को परेशानी हुई। पिछले साल के मुकाबले 3.89 इंच कम बारिश आंकड़ों के मुताबिक 16 अगस्त की सुबह 8 बजे तक सिहोरा में 587.7 मिलीमीटर (23.5) इंच बारिश दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी तारीख तक
684.9 मिलीमीटर (27.39) इंच बारिश दर्ज हुई थी। इस तरह इस वर्ष अब तक पिछले साल की तुलना में करीब 3.89 इंच कम बारिश हुई है। बारिश की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में कम होने के बावजूद जलभराव की स्थिति ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। हर साल मस्या स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज बारिश होने पर हर साल ऐसी स्थिति बनती है। नालों और पानी की निकासी के रास्तों की सफाई और स्थायी व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी घरों और दुकानों तक पहुंच जाता है
- रातभर की बारिश से सड़कें तालाब में तब्दील, कई इलाकों में दो से तीन फीट तक पानी बारिश ने खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल, सिहोरा-खितौला में घरों-दुकानों में घुसा पानी सिहोरा. सिहोरा तहसील क्षेत्र में शनिवार रात से हो रही लगातार बारिश ने रविवार को सिहोरा और खितौला की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गई। घरों और दुकानों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह दो से तीन फीट तक पानी भरा रहा। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की। नाले का पानी घर में घुसा, कई मोहल्ले प्रभावित वार्ड क्रमांक 7 में मझौली बायपास स्थित रुक्मिणी पैलेस के सामने गंगा पटेल के घर में नाले का करीब दो फीट पानी घुस गया। कुरें रोड पर दीनदयाल विश्वकर्मा सहित नया मोहल्ला के कई घर भी जलभराव की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में हुई अवैध प्लॉटिंग के कारण पानी की प्राकृतिक निकासी प्रभावित हुई है, जिससे बारिश का पानी बस्तियों की ओर पहुंच रहा है। भदौहा तालाब ओवरफ्लो वार्ड क्रमांक 6 और 8 के बीच मझौली बायपास-मिस्या रोड पर भदौहा तालाब ओवरफ्लो होने से पानी सड़क पर आ गया। यहां करीब तीन फीट तक पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ। खितौला मंडी रोड, झंडा बाजार और महाकाली मंदिर के सामने भी सड़क पर पानी भरा रहा। खितौला बस स्टैंड में दो फीट तक पानी भरा था। खम्परिया तिराहे के पास दुकानों के बाहर भी दो फीट पानी भरा रहा। जलभराव के कारण दुकानदारों-राहगीरों को परेशानी हुई। पिछले साल के मुकाबले 3.89 इंच कम बारिश आंकड़ों के मुताबिक 16 अगस्त की सुबह 8 बजे तक सिहोरा में 587.7 मिलीमीटर (23.5) इंच बारिश दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी तारीख तक 684.9 मिलीमीटर (27.39) इंच बारिश दर्ज हुई थी। इस तरह इस वर्ष अब तक पिछले साल की तुलना में करीब 3.89 इंच कम बारिश हुई है। बारिश की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में कम होने के बावजूद जलभराव की स्थिति ने शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। हर साल मस्या स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज बारिश होने पर हर साल ऐसी स्थिति बनती है। नालों और पानी की निकासी के रास्तों की सफाई और स्थायी व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी घरों और दुकानों तक पहुंच जाता है4
- रूपनाथ धाम में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, शिव-शारदा कांवड़ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के शुभ संयोग पर तिगवां से शुरू हुई कांवड़ यात्रा, युवाओं और महिलाओं में दिखा जबरदस्त उत्साह..... कटनी/बहोरीबंद। सावन माह के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के शुभ संयोग पर बहोरीबंद क्षेत्र में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व रखने वाले ग्राम तिगवां स्थित मां शारदा मंदिर से प्राचीन रूपनाथ धाम तक पहली बार भव्य शिव-शारदा कांवड़ यात्रा निकाली गई। यात्रा में हजारों की संख्या में कांवड़िए एवं श्रद्धालु शामिल हुए। कांवड़ियों ने रूपनाथ धाम पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। सुबह से ही तिगवां स्थित मां शारदा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कांवड़ यात्रा का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालु कांवड़ लेकर भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। यात्रा बहोरीबंद होते हुए मरही माता मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने माता मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद कांवड़ यात्रा रूपनाथ धाम के लिए रवाना हुई। हजारों कांवड़ियों ने किया भगवान शिव का जलाभिषेक रूपनाथ धाम पहुंचने के बाद कांवड़ियों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान पूरा परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान रूपनाथ धाम में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा, जिसे देखकर हर कोई अभिभूत नजर आया। आयोजकों के अनुसार सावन माह में रूपनाथ धाम के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। युवाओं और महिलाओं में दिखा खास उत्साह कांवड़ यात्रा में युवाओं के साथ बड़ी संख्या में माता-बहनें भी शामिल हुईं। श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह देखते ही बन रहा था। कांवड़िए पूरे रास्ते भगवान शिव और मां शारदा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। धार्मिक वातावरण के बीच यात्रा में शामिल लोगों ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। ऐतिहासिक धरोहरों को देश-दुनिया तक पहुंचाने का उद्देश्य आयोजकों ने बताया कि बहोरीबंद क्षेत्र ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। ग्राम तिगवां स्थित मां शारदा का पवित्र धाम और रूपनाथ धाम क्षेत्र की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। क्षेत्र की ऐतिहासिक मान्यताओं में आल्हा-ऊदल से जुड़े प्रसंग भी बताए जाते हैं। शिव-शारदा कांवड़ यात्रा के आयोजन का उद्देश्य इन दोनों धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की पहचान प्रदेश और देशभर में स्थापित करना, क्षेत्र में पर्यटन एवं धार्मिक विकास को बढ़ावा देना तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। आयोजकों ने कहा कि क्षेत्र के युवा और किसान खुशहाल रहें तथा सभी पर भगवान की कृपा बनी रहे, यही इस यात्रा के पीछे प्रमुख भावना है। अब हर वर्ष निकलेगी कांवड़ यात्रा यात्रा के सफल आयोजन के बाद आयोजकों एवं सदस्यों ने निर्णय लिया कि अब हर वर्ष सावन माह में मां शारदा माता तिगवां के दरबार से भगवान भोलेनाथ की नगरी रूपनाथ धाम तक शिव-शारदा कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। इससे क्षेत्र की धार्मिक परंपरा को और मजबूती मिलने के साथ दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों की आस्था और जुड़ाव बढ़ने की उम्मीद है। आयोजन समिति के सदस्यों ने कांवड़ यात्रा में शामिल हुए सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही यात्रा के दौरान व्यवस्था एवं सुरक्षा में सहयोग करने के लिए पुलिस प्रशासन का भी धन्यवाद ज्ञापित किया। यात्रा के सफल आयोजन से बहोरीबंद क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और धार्मिक एकता का अनूठा संदेश देखने को मिला।3
- मोदी के खिलाफ सड़क पर उतरे सेना के के जवान बीजेपी में बीजेपी हद हड़कंप1
- कलेक्ट्रेट जनसुनवाई (जिला प्रशासन) प्रत्येक मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जनसुनवाई का आयोजन किया जाता है, विवरण: यहाँ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आए लोग जमीन, पेंशन, राशन, और अन्य शासकीय विभागों से जुड़ी अपनी शिकायतें कलेक्टर या वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखते हैं।1
- बिजली कनेक्शन के लिए 12,000 रिश्वत लेते पकड़े गए जूनियर इंजीनियर-लाइनमैन, जबलपुर लोकायुक्त ने की कार्रवाई जबलपुर में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। ताजा मामला जबलपुर जिले के कटंगी से सामने आया है, जहां स्थाई बिजली कनेक्शन देने के एवज में रिश्वत लेने वाले बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर और लाइनमैन को लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। कटंगी स्थित मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के सहायक अभियंता कार्यालय में पदस्थ जूनियर इंजीनियर मनोज कुमार दुबे और लाइनमैन धनेश कुमार शुक्ला को लोकायुक्त टीम ने 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया है। जानकारी के मुताबिक कटंगी के जमुनिया गांव निवासी मुकेश कुमार यादव कृषि भूमि पर मोटर चलाने के लिए 3 हॉर्सपावर का स्थाई बिजली कनेक्शन लेना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बिजली विभाग में आवेदन किया था। आरोप है कि स्थाई कनेक्शन देने के एवज में JE मनोज कुमार दुबे और लाइनमैन धनेश कुमार शुक्ला द्वारा आवेदक से 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। इसकी शिकायत आवेदक ने जबलपुर लोकायुक्त कार्यालय में की। शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोपी 12 हजार रुपये लेने के लिए तैयार हुए। इसके बाद लोकायुक्त की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की और दोनों आरोपियों को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। टीम ने रिश्वत की राशि भी जब्त कर ली है। लोकायुक्त एसपी अंजुलता पटले के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक नीतू त्रिपाठी, ट्रैप लीडिंग ऑफिसर निरीक्षक शशि कला मुस्कुले, निरीक्षक जितेंद्र यादव सहित लोकायुक्त टीम के अन्य सदस्य मौजूद रहे। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस द्वारा दोनों आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। पत्रकार -- मदन रैकवार1
- नाग पंचमी पर वन विभाग की छापेमारी, 12 सपेरे पकड़े; 14 से अधिक सांप रेस्क्यू जबलपुर। नाग पंचमी के अवसर पर वन विभाग ने सांपों के अवैध प्रदर्शन और उनके साथ हो रही क्रूरता के खिलाफ शहर में विशेष अभियान चलाया। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मदन महल और गौरीघाट समेत कई सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई करते हुए टीम ने 14 से अधिक सांपों को रेस्क्यू किया और 12 सपेरों को पकड़ा।वन विभाग की टीम ने कार्रवाई के दौरान कोबरा और धामन प्रजाति के सांप बरामद किए। जांच में सामने आया कि कुछ सपेरों ने सांपों के मुंह धागे से सिल रखे थे। पकड़े गए सपेरे तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए थे।रेस्क्यू किए गए सांपों को पशु चिकित्सा महाविद्यालय ले जाकर उनके मुंह पर लगे टांके खोले जाएंगे। इसके बाद प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य जांच की जाएगी। डॉक्टरों से स्वास्थ्य प्रमाणपत्र मिलने के बाद सांपों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ा जाएगा। वन विभाग के मुताबिक, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सांपों को पकड़ना, उन्हें प्रताड़ित करना और उनका व्यावसायिक प्रदर्शन करना अपराध है। विभाग की टीमें शहर के अन्य हिस्सों में भी लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं। आम लोगों से भी सपेरों द्वारा सांपों का प्रदर्शन किए जाने की सूचना तत्काल वन विभाग को देने की अपील की गई है2
- शिव शक्ति धाम में 15 वर्षों से रुद्राभिषेक, सात दिवसीय अखंड रामधुन से गूंजा शिव शक्ति धाम में 15 वर्षों से रुद्राभिषेक, सात दिवसीय अखंड रामधुन से गूंजा जगदम्बा कॉलोनी जबलपुर। पुरानी जगदम्बा कॉलोनी स्थित शिव शक्ति मंदिर में सावन मास के पावन अवसर पर पिछले 15 वर्षों से भगवान पारदेश्वर शिवलिंग का निरंतर रुद्राभिषेक किया जा रहा है। पंडित श्री रामभजन तिवारी के मार्गदर्शन में प्रतिदिन दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर भगवान महादेव का अभिषेक और पूजन-अर्चन कर रहे हैं। इस वर्ष तीसरे सोमवार और नागपंचमी के विशेष संयोग के बीच 11 से 18 अगस्त तक सात दिवसीय अखंड रामधुन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दिन-रात श्रद्धालु भगवान श्रीराम का नाम जप कर विश्व शांति, सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। श्रीमती दुर्गेश पटेल ने बताया कि इस धार्मिक आयोजन में पाटन, शहपुरा सहित आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिव शक्ति धाम में आस्था और भक्ति का वातावरण बना हुआ है तथा श्रद्धालुओं को बिना किसी निर्धारित दक्षिणा के रुद्राभिषेक में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। आयोजन को लेकर भक्तों में खासा उत्साह है और पूरा क्षेत्र ‘हर हर महादेव’ तथा ‘श्रीराम’ के जयघोष से गूंज रहा है।2
- स्कूल पहुंच मार्ग पर धान रोपकर जताया विरोध, ग्रामीणों ने कहा,सड़क नहीं तो स्कूल नहीं, दस साल से दलदल बना विद्यालय पहुंच मार्ग, छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक और ग्रामीण परेशान,पक्की सड़क की मांग कटनी/बाकल। विकासखंड बहोरीबंद अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिहुंडी(बाकल) के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने विद्यालय पहुंच मार्ग की बदहाली के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। बारिश के बाद कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुके स्कूल मार्ग पर ग्रामीणों ने धान की रोपाई कर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने पक्की सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द सड़क नहीं बनाई गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय का निर्माण हुए दस वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक स्कूल तक पहुंचने के लिए उचित सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। बारिश के दिनों में स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि मार्ग पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। ऐसे में विद्यालय पहुंचना विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। जूते उतारकर स्कूल पहुंचने को मजबूर बच्चे कीचड़ भरे मार्ग के कारण छात्र-छात्राओं को अपने जूते उतारकर रास्ता पार करना पड़ता है।विद्यार्थियों को रास्ते में फिसलने और गिरने का डर बना रहता है। कई बार शिक्षक एवं विद्यालय स्टाफ के वाहन भी कीचड़ में फिसल चुके हैं, जिससे दुर्घटना की स्थिति निर्मित होती रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा के लिए विद्यालय गांव में ही उपलब्ध कराया गया, लेकिन विद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता ही बदहाल होने से विद्यार्थियों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। बारिश के मौसम में विशेष रूप से छात्राओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने जमीन दान देकर कराया था स्कूल का निर्माण ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ही बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके और उन्हें पढ़ाई के लिए दूर दूसरे गांवों में न जाना पड़े, इस उद्देश्य से ग्रामीणों ने विद्यालय निर्माण के लिए भूमि तक दान में दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के निर्माण के पीछे गांववासियों की मंशा बच्चों को शिक्षा की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की थी, लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क की व्यवस्था नहीं होने से उनकी मूल समस्या आज भी बनी हुई है। तीन-चार गांवों के लोगों का भी आवागमन ग्रामीणों के मुताबिक यह मार्ग केवल विद्यालय तक पहुंचने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे आसपास के तीन-चार गांवों के ग्रामीणों का भी आवागमन होता है। इसके अलावा किसान इसी रास्ते से अपने खेतों तक कृषि कार्य के लिए रोजाना आते-जाते हैं। बरसात के मौसम में मार्ग की हालत खराब होने के कारण किसानों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार समस्या की ओर ध्यान दिलाए जाने के बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। इसी कारण ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने इस बार सड़क पर धान रोपकर अपना विरोध दर्ज कराया। पक्की सड़क नहीं तो स्कूल नहीं आने की चेतावनी प्रदर्शन के दौरान बच्चों और अभिभावकों ने पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि विद्यालय पहुंच मार्ग का शीघ्र निर्माण नहीं कराया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। वहीं प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों और अभिभावकों ने यहां तक कहा कि यदि सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे स्कूल नहीं आने का निर्णय लेने को मजबूर होंगे। इनका कहना है... विद्यालय तक पहुंचने वाला मार्ग लंबे समय से खराब है। बारिश के दौरान कीचड़ और दलदल के कारण छात्र-छात्राओं के साथ विद्यालय के स्टाफ को भी विद्यालय पहुंचने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय पहुंच मार्ग का जल्द से जल्द पक्की सड़क के रूप में निर्माण कराया जाना आवश्यक है, ताकि बारिश के समय बच्चों एवं स्टाफ को परेशानी का सामना न करना पड़े। अनिल चक्रवर्ती, प्राचार्य4