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अल्मोड़ा -जागेश्वर धाम के पास विनायक पुल के समीप स्कूटी बनी आग का गोला। अल्मोड़ा जनपद में स्थित जागेश्वर धाम के पास विनायक पुल के समीप स्कूटी आग का गोला बन गई। स्कूटी स्वास्थ्य विभाग की एक महिला कर्मी की थी जो स्कूटी खड़ी कर पास के एएनएम सेंटर गई थी। इस दौरान स्कूटी में आग लग गई और जलकर खाक हो गई।
Vinod Joshi
अल्मोड़ा -जागेश्वर धाम के पास विनायक पुल के समीप स्कूटी बनी आग का गोला। अल्मोड़ा जनपद में स्थित जागेश्वर धाम के पास विनायक पुल के समीप स्कूटी आग का गोला बन गई। स्कूटी स्वास्थ्य विभाग की एक महिला कर्मी की थी जो स्कूटी खड़ी कर पास के एएनएम सेंटर गई थी। इस दौरान स्कूटी में आग लग गई और जलकर खाक हो गई।
- दीवानराम, नैनीताल उत्तराखंडओखलकांडा, नैनीताल, उत्तराखंड👏3 hrs ago
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- अल्मोड़ा जनपद में स्थित जागेश्वर धाम के पास विनायक पुल के समीप स्कूटी आग का गोला बन गई। स्कूटी स्वास्थ्य विभाग की एक महिला कर्मी की थी जो स्कूटी खड़ी कर पास के एएनएम सेंटर गई थी। इस दौरान स्कूटी में आग लग गई और जलकर खाक हो गई।1
- चम्पावत: निर्माणाधीन महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का कैबिनेट मंत्री ने निरीक्षण किया #thepublicmatter #viralnewsupdate #latestnews1
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- उत्तराखंड क्रांति दल जिंदाबाद — उत्तराखंड बचाओ, पहाड़ बसाओ का संकल्प देहरादून/रामनगर | उत्तराखंड की अस्मिता, पहचान और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई को एक बार फिर तेज करने का आह्वान करते हुए उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने प्रदेशवासियों से एकजुट होने की अपील की है। यूकेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की मूल भावनाओं और जनहित की सच्ची रक्षा केवल प्रदेश की एकमात्र प्रांतीय पार्टी यूकेडी ही कर सकती है। पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य निर्माण का सपना जिन उद्देश्यों के साथ देखा गया था, वे आज हाशिये पर चले गए हैं। पहाड़ से लगातार हो रहा पलायन, बढ़ती बेरोजगारी, प्राकृतिक संसाधनों की लूट, कमजोर भू-कानून और स्थानीय लोगों की उपेक्षा ने उत्तराखंड की जड़ों को कमजोर कर दिया है। ऐसे में एक बार फिर उसी संघर्षशील सोच को आगे बढ़ाने की जरूरत है, जिसने अलग राज्य की लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाया था। यूकेडी नेताओं ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय दलों की नीतियाँ उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। प्रदेश की समस्याओं का समाधान तभी संभव है, जब सत्ता में ऐसी पार्टी हो जो केवल उत्तराखंड के हित को सर्वोपरि रखे। यूकेडी शुरू से ही मजबूत भू-कानून, मूल निवास, स्थानीय रोजगार, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और पहाड़ों के समग्र विकास की पक्षधर रही है। पार्टी ने “उत्तराखंड बचाओ, पहाड़ बसाओ” के नारे के साथ जनआंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया। नेताओं ने कहा कि गांवों को खाली होने से बचाना, युवाओं को रोजगार से जोड़ना, पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा की मजबूत व्यवस्था करना यूकेडी की प्राथमिकता है। साथ ही नदियों, जंगलों और खनिज संसाधनों पर बाहरी कब्जे को रोकना भी पार्टी के एजेंडे में प्रमुख है। यूकेडी कार्यकर्ताओं ने जनता से अपील की कि वे क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए आगे आएँ और उत्तराखंड की एकमात्र प्रांतीय पार्टी को मजबूत करें। उनका कहना है कि यदि आज भी उत्तराखंड की आवाज को मजबूती देनी है, तो यूकेडी के साथ चलना होगा। इस अवसर पर वक्ताओं ने एक स्वर में कहा— “यूकेडी को लाना है, उत्तराखंड बचाना है, पुनः पहाड़ बसाना है।” कार्यक्रम का समापन “उत्तराखंड क्रांति दल जिंदाबाद” के गगनभेदी नारों के साथ किया गया।1
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- चंपावत: सीमांत गांव नीड़ में आधी रात पहुंचे जिलाधिकारी, संवेदनशील प्रशासन की लगातार मिसाल बनते जा रहे मनीष कुमार। दिव्यांग बुजुर्ग की आंखें नम, गांव में भजन-भोजन के साथ बांटी खुशियां। चंपावत। मॉडल जिले के दूरस्थ सीमांत गांव नीड़ में लोगों के जीवन में पहली बार ऐसा ऐतिहासिक और भावुक क्षण देखने को मिला, जब स्वयं जिलाधिकारी मनीष कुमार रात्रि में गांव पहुंचकर ग्रामीणों का हाल-चाल जानने निकले। मुख्यमंत्री के सीमांत क्षेत्र भ्रमण के बाद भी जिलाधिकारी ने समय का पूरा सदुपयोग करते हुए देर रात कई गांवों का दौरा किया और सीधे जनता से संवाद स्थापित किया। गांव की दिव्यांग एवं वृद्ध परू आमा की आंखें उस समय भर आईं, जब जिलाधिकारी मनीष कुमार ने स्वयं उनके कान में सुनने की मशीन लगाई और हाल-चाल पूछा। यह क्षण न केवल परू आमा के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए भावनात्मक बन गया। आमा ने जिलाधिकारी को ढेरों आशीर्वाद देते हुए ईश्वर से उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। ग्रामीणों के बीच बैठकर भजन गाते हुए जिलाधिकारी ने कहा, “मैं भी आप ही की तरह एक किसान का बेटा हूं, जीवन के हर संघर्ष से गुजरा हूं। आपकी तकलीफें दूर करना ही हमारा कर्तव्य है।” यह सुनते ही गांव में मानो ऊर्जा की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने कहा कि “जिलाधिकारी हों तो ऐसे, जो जनता के बीच जाकर उनके दर्द को महसूस करें।” दौरे के दौरान जिलाधिकारी ने दोनों अन्य स्थानों पर सुनने की मशीन, व्हीलचेयर और कंबल वितरित किए। उन्होंने कहा कि जिन घरों में वृद्ध माता-पिता, सास-ससुर हैं वे वास्तव में भाग्यशाली हैं, उनकी सेवा ही सच्ची सेवा है। साथ ही उन्होंने बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए किसी भी प्रकार की लापरवाही न करने की अपील की। ग्रामीणों के साथ भोजन करते हुए डीएम ने कहा कि “आज आप सबके हाथों का भोजन-प्रसाद ग्रहण कर जो आनंद मिला है, वह अलौकिक है।” इस दौरान युवाओं ने गांव में लाइब्रेरी, सोलर स्ट्रीट लाइट, ओपन जिम और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी, जिस पर जिलाधिकारी ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि अब समस्याओं के लिए ग्रामीणों को जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ेगा, बल्कि प्रशासन स्वयं गांवों तक पहुंचेगा। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का भावपूर्ण स्वागत किया। गरीबों के हमदर्द और संवेदनशील अधिकारी के रूप में पहचान बना चुके मनीष कुमार को देखने और उनसे मिलने की हर ग्रामीण की इच्छा साफ दिखाई दे रही थी।1
- Post by रैबार news1
- चंपावत: फिट उत्तराखण्ड अभियान के अंतर्गत पुलिस लाइन चम्पावत में साप्ताहिक परेड का आयोज1