15 जून को गुमला के सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी ने जिले के नागरिकों को डेंगू से सुरक्षित रहने और इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए 'सजगता और स्वच्छता' पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। डॉ. चौधरी ने बताया कि डेंगू फैलाने वाला 'एडीज' मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है, और यह ज्यादातर दिन के समय काटता है। उन्होंने गुमला वासियों से अपील की कि वे मच्छरों के पनपने वाली जगहों को नष्ट करें, हर रविवार कूलर साफ करें, गमलों, पुराने टायरों, टूटे-फूटे बर्तनों और छतों पर कबाड़ में पानी जमा न होने दें। साथ ही, पानी के बर्तनों को ढककर रखने, गड्ढों और नालियों की सफाई करने तथा खुद को मच्छरों के काटने से बचाने के उपाय अपनाएं। डॉ. चौधरी ने यह भी बताया कि डेंगू के मच्छर दिन के उजाले, खासकर सुबह और शाम को, ज्यादा सक्रिय होते हैं, इसलिए शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले हल्के रंग के कपड़े (फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट) पहनें। दिन में सोते समय भी मच्छरदानी का उपयोग करने और घर से बाहर निकलते समय या घर के अंदर भी मच्छर भगाने वाली क्रीम, स्प्रे या लिक्विड (जैसे ओडोमॉस) का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। डॉ. चौधरी ने डेंगू के लक्षणों को पहचानने का आग्रह करते हुए बताया कि यदि किसी को अचानक तेज बुखार (103°F - 104°F), सिर में तेज दर्द और आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द, जी मिचलाना या उल्टी होना, या त्वचा पर लाल चकत्ते उभर आएं तो इसे हल्के में न लें। उन्होंने एक विशेष चेतावनी भी दी कि बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दर्दनिवारक दवाएं (जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन या कॉम्बिफ्लेम) बिल्कुल न लें, क्योंकि ये दवाएं शरीर में प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल लेने और तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल गुमला में संपर्क करने की सलाह दी गई है। उन्होंने गंभीर डेंगू के संकेतों के बारे में भी बताया, जिसमें लगातार उल्टी होना या पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या सांस लेने में तकलीफ होना और मल का रंग काला होना शामिल है। डॉ. चौधरी ने आम लोगों से कहा कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। सदर अस्पताल और स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच (NS1/IgM) और इलाज की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने अंत में कहा कि 'सजगता और स्वच्छता' से ही डेंगू का बचाव संभव है।
15 जून को गुमला के सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी ने जिले के नागरिकों को डेंगू से सुरक्षित रहने और इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए 'सजगता और स्वच्छता' पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। डॉ. चौधरी ने बताया कि डेंगू फैलाने वाला 'एडीज' मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है, और यह ज्यादातर दिन के समय काटता है। उन्होंने गुमला वासियों से अपील की कि वे मच्छरों के पनपने वाली जगहों को नष्ट करें, हर रविवार कूलर साफ करें, गमलों, पुराने टायरों, टूटे-फूटे बर्तनों और छतों पर कबाड़ में पानी जमा न होने दें। साथ ही, पानी के बर्तनों को ढककर रखने, गड्ढों और नालियों की सफाई करने तथा खुद को मच्छरों के काटने से बचाने के उपाय अपनाएं। डॉ. चौधरी ने यह भी बताया कि डेंगू के मच्छर दिन के उजाले, खासकर सुबह और शाम को, ज्यादा सक्रिय होते हैं, इसलिए शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले हल्के रंग के कपड़े (फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट) पहनें। दिन में सोते समय भी मच्छरदानी का उपयोग करने और घर से बाहर निकलते समय या घर के अंदर भी मच्छर भगाने वाली क्रीम, स्प्रे या लिक्विड (जैसे ओडोमॉस) का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। डॉ. चौधरी ने डेंगू के लक्षणों को पहचानने का आग्रह करते हुए बताया कि यदि किसी को अचानक तेज बुखार (103°F - 104°F), सिर में तेज दर्द और आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द, जी मिचलाना या उल्टी होना, या त्वचा पर लाल चकत्ते उभर आएं तो इसे हल्के में न लें। उन्होंने एक विशेष चेतावनी भी दी कि बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दर्दनिवारक दवाएं (जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन या कॉम्बिफ्लेम) बिल्कुल न लें, क्योंकि ये दवाएं शरीर में प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल लेने और तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल गुमला में संपर्क करने की सलाह दी गई है। उन्होंने गंभीर डेंगू के संकेतों के बारे में भी बताया, जिसमें लगातार उल्टी होना या पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या सांस लेने में तकलीफ होना और मल का रंग काला होना शामिल है। डॉ. चौधरी ने आम लोगों से कहा कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। सदर अस्पताल और स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच (NS1/IgM) और इलाज की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने अंत में कहा कि 'सजगता और स्वच्छता' से ही डेंगू का बचाव संभव है।
- गुमला जिले में नालसा और झालसा के निर्देशानुसार, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला, श्री अजीत कुमार सिंह के मार्गदर्शन में विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर एक गहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 90 दिवसीय जागरूकता अभियान के तहत, जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला ने ओल्ड एज होम गुमला में विशेष तौर पर कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें पीएलवी (पैरा लीगल वालंटियर) भी शामिल रहे। इस अवसर पर एक मेडिकल कैंप लगाया गया जहाँ बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाएँ वितरित की गईं। प्रधान जिला जज और डालसा टीम ने बुजुर्गों के बीच मिठाइयाँ और बिस्किट भी बांटे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अजीत कुमार सिंह ने बताया कि विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम है, जो प्रतिवर्ष 15 जून को मनाया जाता है। उन्होंने आज के परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चे बड़े होने पर माता-पिता से दूरी बनाने लगते हैं, जिससे परिवारों में बिखराव आता है। श्री सिंह ने परिवार में बुजुर्ग माता-पिता की छाया के महत्व पर जोर दिया, क्योंकि भारतीय दादा-दादी छोटे बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे माता-पिता अपने करियर और व्यक्तिगत लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और परिवार का विकास होता है। उन्होंने वृद्ध व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम की शुरुआत का उल्लेख किया, जो वृद्धों को आर्थिक और भावनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। साथ ही, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी बुजुर्गों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए प्रावधानों की जानकारी दी और आश्वस्त किया कि विधिक सेवा प्राधिकार गुमला हमेशा उनकी सेवा में उपस्थित रहता है, और आवश्यकता पड़ने पर सहायता ली जा सकती है। इस अवसर पर, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार, श्री राम कुमार लाल गुप्ता ने ओल्ड एज होम में बुजुर्गों के लिए सरकार द्वारा की गई अच्छी व्यवस्थाओं की सराहना की और उनसे आराम से रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की कठिनाई होने पर बुजुर्ग जिला विधिक सेवा प्राधिकार को सूचित कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। श्री गुप्ता ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि वे जिला जज के निर्देश पर हमेशा वृद्ध आश्रम आते रहते हैं, बुजुर्गों के दुख-दर्द सुनते हैं और उन्हें दूर करने का प्रयास करते हैं, और भविष्य में भी वृद्धजनों की सेवा के लिए तत्पर रहेंगे। एलएडीसी के प्रमुख डीएन ओहदार ने भी वृद्धजनों को संबोधित करते हुए कानूनी संबंधी महत्वपूर्ण बातें बताईं। सभा का संचालन स्थाई लोक अदालत के सदस्य श्री शंभू सिंह ने किया। इस कार्यक्रम में एलएडीसी श्री जितेंद्र सिंह, डीएलएसए के प्रकाश पांडे, पीएलबी प्रेम कुमार शाह, कुंदन तिवारी, एनोस बाखला, विनय कुमार तथा संस्था के सचिव रिजोईस एरिक, वार्डन ज्योति प्रमिला केरकेटा आदि सहित अन्य कई लोग शामिल थे।1
- 15 जून को गुमला के सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी ने जिले के नागरिकों को डेंगू से सुरक्षित रहने और इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए 'सजगता और स्वच्छता' पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। डॉ. चौधरी ने बताया कि डेंगू फैलाने वाला 'एडीज' मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है, और यह ज्यादातर दिन के समय काटता है। उन्होंने गुमला वासियों से अपील की कि वे मच्छरों के पनपने वाली जगहों को नष्ट करें, हर रविवार कूलर साफ करें, गमलों, पुराने टायरों, टूटे-फूटे बर्तनों और छतों पर कबाड़ में पानी जमा न होने दें। साथ ही, पानी के बर्तनों को ढककर रखने, गड्ढों और नालियों की सफाई करने तथा खुद को मच्छरों के काटने से बचाने के उपाय अपनाएं। डॉ. चौधरी ने यह भी बताया कि डेंगू के मच्छर दिन के उजाले, खासकर सुबह और शाम को, ज्यादा सक्रिय होते हैं, इसलिए शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले हल्के रंग के कपड़े (फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट) पहनें। दिन में सोते समय भी मच्छरदानी का उपयोग करने और घर से बाहर निकलते समय या घर के अंदर भी मच्छर भगाने वाली क्रीम, स्प्रे या लिक्विड (जैसे ओडोमॉस) का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। डॉ. चौधरी ने डेंगू के लक्षणों को पहचानने का आग्रह करते हुए बताया कि यदि किसी को अचानक तेज बुखार (103°F - 104°F), सिर में तेज दर्द और आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द, जी मिचलाना या उल्टी होना, या त्वचा पर लाल चकत्ते उभर आएं तो इसे हल्के में न लें। उन्होंने एक विशेष चेतावनी भी दी कि बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दर्दनिवारक दवाएं (जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन या कॉम्बिफ्लेम) बिल्कुल न लें, क्योंकि ये दवाएं शरीर में प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल लेने और तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल गुमला में संपर्क करने की सलाह दी गई है। उन्होंने गंभीर डेंगू के संकेतों के बारे में भी बताया, जिसमें लगातार उल्टी होना या पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या सांस लेने में तकलीफ होना और मल का रंग काला होना शामिल है। डॉ. चौधरी ने आम लोगों से कहा कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। सदर अस्पताल और स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच (NS1/IgM) और इलाज की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने अंत में कहा कि 'सजगता और स्वच्छता' से ही डेंगू का बचाव संभव है।1
- झारखंड के गुमला जिले के सिसई में अत्यधिक बस किराया बढ़ाए जाने को लेकर आदिवासी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। जनजाति सुरक्षा मंच के प्रखंड अध्यक्ष सोमेश्वर उरांव ने बसों के किराए में मनमानी बढ़ोतरी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल ₹5 से ₹6 तक की वृद्धि हुई है, जबकि बसों का किराया सीधे तौर पर ₹30, ₹40 और ₹50 बढ़ा दिया गया है, जिससे ग्रामीण जनता पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। उरांव ने इस स्थिति को झारखंड सरकार और प्रशासन की उदासीनता का परिचायक बताया, क्योंकि ग्रामीण जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और किराया बढ़ने से उन्हें और अधिक आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और किसान निजी वाहनों का खर्च वहन नहीं कर सकते, उनके लिए बसें ही यात्रा का एकमात्र विकल्प हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर से खेतों की जुताई का चार्ज भी ₹1000 प्रति घंटा से बढ़ाकर ₹1200 प्रति घंटा कर दिया गया है, यानी सीधे ₹200 की वृद्धि हुई है, जिसे उन्होंने अन्नदाताओं के साथ अन्याय बताया। आदिवासी नेता सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार की अनदेखी के कारण यहां के किसानों और गरीबों की जीडीपी लगातार गिर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के '25 साल की युवा झारखंड, समृद्ध व विकसित बन रहा है' के बयान को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा' बताया। सोमेश्वर उरांव ने झारखंड सरकार, प्रशासन और झारखंड बस ऑनर एसोसिएशन से मांग की है कि सभी जगहों के लिए नई और उचित किराया दरें निर्धारित की जाएं, ताकि आम जनमानस को राहत मिल सके और बस व ट्रैक्टर मालिक मनमानी तरीके से किराया वसूली न कर सकें।2
- गुमला जिले में डेंगू के प्रसार को रोकने और नागरिकों को इस बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी ने जिले वासियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है, जिसमें उन्होंने "सजगता और स्वच्छता" को ही डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बताया है। डॉ. चौधरी के अनुसार, डेंगू फैलाने वाला 'एडीज' मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है और यह मच्छर दिन के समय अधिक काटता है। उन्होंने गुमला वासियों से अपील की है कि वे अपने घरों के आसपास मच्छरों के पनपने वाले सभी स्थानों को खत्म करें। स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से कूलर, गमले, पुराने टायर, टूटे-फूटे बर्तनों और छतों पर पड़े कबाड़ में पानी जमा न होने देने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त, पीने और घरेलू उपयोग के पानी के बर्तनों को हमेशा ढक कर रखने और घर के आसपास के गड्ढों व नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। चूंकि डेंगू के मच्छर दिन के उजाले में ज्यादा सक्रिय होते हैं, डॉ. चौधरी ने स्वयं को मच्छरों के काटने से बचाने के लिए कुछ तरीके सुझाए हैं। इनमें शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले हल्के रंग के कपड़े पहनना, दिन में सोते समय अनिवार्य रूप से मच्छरदानी का प्रयोग करना और घर के अंदर व बाहर निकलते समय ओडोमॉस या अन्य मच्छर भगाने वाली क्रीम, स्प्रे या लिक्विड का इस्तेमाल करना शामिल है। डेंगू के मुख्य लक्षणों को नजरअंदाज न करने की हिदायत देते हुए सिविल सर्जन ने बताया कि अचानक तेज बुखार (103°F-104°F), सिर में तेज दर्द, आँखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द (जिसे 'हड्डी तोड़ दर्द' भी कहा जाता है), जी मिचलाना या लगातार उल्टी होना और त्वचा पर लाल चकत्ते (रैशेज) उभर आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। डॉ. शंभू नाथ चौधरी ने सख्त हिदायत दी है कि बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन, इबुप्रोफेन या कॉम्बिफ्लेम जैसी दर्दनिवारक दवाएं बिल्कुल न लें, क्योंकि ये प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं। बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल लेने और तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल, गुमला से संपर्क करने की सलाह दी गई है। डॉ. चौधरी के अनुसार, यदि मरीज में लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती, सांस लेने में तकलीफ या मल का रंग काला होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो ये गंभीर डेंगू के संकेत हैं। ऐसे मामलों में बिना किसी देरी के तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है। अंत में, उन्होंने आम जनता से अपील की है कि डेंगू से घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। सदर अस्पताल गुमला और सभी चार नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच और इलाज की पूरी व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध है।1
- गुमला जिले में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित 10 जून 2026 से 25 जून 2026 तक चलने वाले राज्यव्यापी निषिद्ध मादक पदार्थों के विरुद्ध जागरूकता अभियान के सफल संचालन हेतु आज जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, गुमला ने एक जागरूकता रथ निकाली। उपायुक्त (गुमला), दिलेश्वर महत्तो ने समाहरणालय परिसर से हरी झंडी दिखाकर इस जागरूकता रथ को रवाना किया। यह रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों, सुदूरवर्ती क्षेत्रों और पंचायतों में भ्रमण कर लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगी। इस अवसर पर, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कलाकारों ने समाहरणालय परिसर में एक नुक्कड़ नाटक का भी मंचन किया, जिसमें नशे से बर्बाद होते परिवारों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके घातक प्रभावों को सरल अंदाज में दर्शाया गया। उपायुक्त ने मौके पर उपस्थित पदाधिकारियों और सहकर्मियों को नशा मुक्ति की शपथ भी दिलाई। उन्होंने गुमला वासियों से अपील करते हुए कहा कि नशा सिर्फ व्यक्ति के शरीर को ही नहीं, बल्कि उसके भविष्य, परिवार और पूरे समाज को खोखला कर देता है। उपायुक्त ने सरकार के इस 15 दिवसीय विशेष अभियान में सभी जिलेवासियों से सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया, इसे गुमला को नशामुक्त और खुशहाल बनाने की सामूहिक जिम्मेदारी बताया। नशा से छुटकारे के लिए टोल फ्री नंबर 112 (24x7) पर संपर्क किया जा सकता है, साथ ही परामर्श केंद्रों में रिनपास (रांची), केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP, रांची), और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स, देवघर) शामिल हैं। इस कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त गुमला अनिमेश रंजन, सिविल सर्जन गुमला शंभूनाथ चौधरी, अनुमंडल पदाधिकारी गुमला अखिलेश कुमार, जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी ललन कुमार रजक सहित जिला प्रशासन के अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी भी उपस्थित रहे।2
- राज्य सरकार के निर्देशानुसार गुमला के चैनपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में सोमवार को निषिद्ध मादक पदार्थों के विरुद्ध एक विशेष नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों, कर्मियों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहाँ उपस्थित लोगों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। सभी ने नशे के दुष्प्रभावों से दूर रहने और समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा 10 जून 2026 से 25 जून 2026 तक राज्यव्यापी नशामुक्ति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का जागरूकता रथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रहा है। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज पर भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों की ओर बढ़ने का आग्रह किया। इस अवसर पर उप प्रमुख प्रमोद खलखो, कृषि पदाधिकारी विश्वराम केवट, कल्याण पदाधिकारी शंकर भगत, पंचायती राज पदाधिकारी राममोहन साहू सहित अन्य पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय सहयोग की अपील की गई, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी नशा विरोधी संदेश पहुंचाने का आह्वान किया गया। नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 112 पर संपर्क करने की जानकारी भी दी गई। नशा मुक्त समाज के निर्माण में सभी की भागीदारी को बेहद जरूरी बताया गया।1
- एक पोस्ट के माध्यम से हैरानी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि आखिर क्यों किसी स्थिति को 'मौत का कुआं' बनाकर छोड़ दिया जाता है।1
- गुमला के डुमरी प्रखंड अंतर्गत नवाडीह चर्च परिसर में रविवार दोपहर दो बजे सैकड़ों ईसाई धर्मावलंबियों द्वारा क्षेत्र में अच्छी बारिश, बेहतर फसल और खुशहाली की कामना को लेकर एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना और भक्ति गीतों के साथ पूरे क्षेत्र में शांति, समृद्धि और अच्छी वर्षा के लिए ईश्वर से कामना की। यह शोभायात्रा नवाडीह चर्च पारिश से शुरू होकर नवाडीह चौक, रवींद्रनगर, टांगरडीह गांव होते हुए बघमरिया गोरटो तक पहुंची, जहां यात्रा में शामिल लोग पूरे रास्ते धार्मिक गीत गाते और सामूहिक प्रार्थना करते हुए आगे बढ़े। इस दौरान पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना रहा। बघमरिया गोरटो पहुंचने के बाद मुख्य अनुष्ठाता फादर संजय के नेतृत्व में एक विशेष मिस्सा पूजा का आयोजन किया गया। इस पूजा के दौरान अच्छी बारिश, किसानों की समृद्धि, सुख-शांति और समाज के कल्याण के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं। इस अवसर पर फादर संजय पिंगल, फादर देवनिस, फादर समीर, सिस्टर बेरना, प्रचारक लिबिन, रंजीत, सचिन, मनोज, प्रवीण सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।1